Adarsh Vidya Mandir Sapotra

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मधुवन में गैया चराते गोपाल
19/08/2014

मधुवन में गैया चराते गोपाल

मीरा के मोहन
19/08/2014

मीरा के मोहन

तेरी बंसी पे जाऊ बलिहार रसिया।श्रीकृष्णइ की बंसी पर विराजित राधा रानी
19/08/2014

तेरी बंसी पे जाऊ बलिहार रसिया।
श्रीकृष्णइ की बंसी पर विराजित राधा रानी

कालिया मर्दन
19/08/2014

कालिया मर्दन

सूरदास के श्रीकृष्ण
19/08/2014

सूरदास के श्रीकृष्ण

रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।
19/08/2014

रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।

झूलन चलो हिंडोलना वृषभान नन्दिनी।राधा संग श्री श्याम झूला झूलते हुए
19/08/2014

झूलन चलो हिंडोलना वृषभान नन्दिनी।
राधा संग श्री श्याम झूला झूलते हुए

19/08/2014

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार विद्यालय में धूमधाम से मनायी गई । इस अवसर पर भगवान की सजीव मनमोहक झाँकियाँ लगाई गई।।

New building of AVM Sapotra..
12/08/2014

New building of AVM Sapotra..

06/07/2014

एक राजा वन भ्रमण के लिए गया। रास्ता भूल जाने पर भूख प्यास से पीड़ित वह एक वनवासी की झोपड़ी पर जा पहुँचा। वहाँ से आतिथ्य मिला जो जान बची।

चलते समय राजा ने उस वनवासी से कहा- हम इस राज्य के शासक हैं। तुम्हारी सज्जनता से प्रभावित होकर अमुख नगर का चन्दन बाग तुम्हें प्रदान करते हैं। उसके द्वारा जीवन आनन्दनमय बीतेगा।

वनवासी उस परवाने को लेकर नगर के अधिकारी के पास गया और बहुमूल्य चन्दन का उपवन उसे प्राप्त हो गया। चन्दन का क्या महत्व है और उससे किस प्रकार लाभ उठाया जा सकता है, उसकी जानकारी न होने से वनवासी चन्दन के वृक्ष काटकर उनका कोयला बनाकर शहर में बेचने लगा। इस प्रकार किसी तरह उसके गुजारे की व्यवस्था चलने लगी।

धीरे-धीरे सभी वृक्ष समाप्त हो गये। एक अन्तिम पेड़ बचा। वर्षा के कारण कोयला न बन सका तो उसने लकड़ी बेचने का निश्चय किया। लकड़ी का गठ्ठा जब बाजार में पहुँचा तो सुगन्ध से प्रभावित लोगों ने उसका भारी मूल्य चुकाया। आश्चर्यचकित वनवासी ने इसका कारण पूछा तो लोगों ने कहा- यह चन्दन काष्ठ है। बहुत मूल्यवान् है। यदि तुम्हारे पास ऐसी ही और लकड़ी हो तो उसका प्रचुर मूल्य प्राप्त कर सकते हो। वनवासी अपनी नासमझी पर पश्चाताप करने लगा कि उसे इतना बड़ा बहुमूल्य चन्दन वन कौड़ी मोल कोयले बनाकर बेच दिया। पछताते हुए नासमझ को सान्त्वना देते हुए एक विचारशील व्यक्ति ने कहा-मित्र, पछताओ मत, यह सारी दुनिया, तुम्हारी ही तरह नासमझ है। जीवन का एक-एक क्षण बहुमूल्य है पर लोग उसे वासना और तृष्णाओं के बदलें कौड़ी मोल में गँवाते रहते हैं। तुम्हारे पास जो एक वृक्ष बचा है उसी का सदुपयोग कर लो तो कम नहीं। बहुत गँवाकर भी कोई मनुष्य अन्त में सँभल जाता है तो वह भी बुद्धिमान ही माना जाता है।

29/01/2014

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