Bhajan bishnoi

Bhajan bishnoi दो अक्षर की मौत
और तीन अक्षर के जीवन में
ढाई अक्षर के दोस्त
बाज़ी मार जाते है ��

सुखराम बिश्नोई
16/09/2023

सुखराम बिश्नोई

मां नहीं रही।

मेरी पूज्य माताजी जियां देवी आज 92 साल की उम्र में यह संसार और हमें छोड़ कर चली गईं। वे स्वस्थ थीं। अफ़सोस कि हमें ज्यादा सेवा का मौक़ा ही नहीं दिया। आज सुबह जयपुर में भागदौड़ के बीच भतीज प्रकाश का फोन आया कि माताजी को सांस में दिक्कत है। थोड़ी देर में दुःखद सूचना मिली, ‘मां’ नहीं रहीं।

वे जिंदगीभर हमारे पैतृक गांव केरिया में सेवा की प्रतिमूर्ति के रूप में निवास करती रही। ताउम्र मेहनत, सादगी, सरलता के साथ जीवन जिया। हम जो भी बन सके ‘मां’ का सबसे बड़ा योगदान था। मैं जब भी थका-परेशान होता, गांव जाता, मां का एक आशीर्वाद एक ऊर्जा दे देता।

माँ आपने एक शानदार, भरपूर जीवन जिया। उनका जीवन हमें बहुत कुछ सीखा कर गया है। हमारे मूल्य, संस्कार मां आपकी वजह से है। ‘मां’ आपके बारे में कहाँ से लिखना शुरू करूं, कहां खत्म करूं, यह फिलहाल मेरी समझ से परे है। आप हमेशा जनसेवा की प्रेरणा देती रहेंगी।

मां

ओम शांति।😥

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