03/07/2017
DPS Muktapur
Like branches of a tree,
Our lives may grow in different directions,
Yet our roots remain as one !
03/07/2017
23/01/2017
Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.
तेजी से कम हो रहे हैं जंगली जीव जंतु
बढ़ती इंसानी गतिविधियों के कारण 1970 के बाद से अब तक दुनिया भर में जंगली जानवरों की संख्या में 58 फीसदी की कमी आई है. यह रिपोर्ट पर्यावरण समूह डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ और लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी (ज़ेएसएल) ने मिलकर जारी की है. ज़ेएसएल की नई रिपोर्ट 'लिविंग प्लैनेट' रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि ये सिलसिला यूं ही जारी रहा तो वो जैव विविधता खत्म हो जाएगी जिसपर सबका जीवन टिका हुआ है. शोध विज्ञानियों ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपनी शोध में पक्षी, मछली, स्तनधारी, उभयचर और सरीसृप की अलग अलग करीब चार हजार प्रजातियों को शामिल किया. रिपोर्ट में पाया गया है कि इंसानों की आबादी पिछले पचास सालों में दोगुनी हुई है. इसका असर पृथ्वी के अन्य जंतुओं पर पड़ रहा है. यह रिपोर्ट हर दो साल पर जारी होती है. रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीकी हाथी जैसी प्रजातियों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है और इस प्रजाति के हाथियों की संख्या में पिछले दस साल में एक तिहाई गिरावट आई है.
{शर्फे आलम}
29/10/2016
By DAINIK BHASKAR NEWS PAPER.
{Fact of the Day}
New Zealand is the fastest country in the world to start a business: just one day.
16/09/2016
VISHWAKARMA, Day also known as Vishwakarma Jayanti or Vishwakarma Puja is a day of celebration for Vishwakarma, a Hindu god, the divine architect. He is considered as swayambhu and Creator of the world. He constructed the holy city of Dwarka where Krishna ruled, the Maya Sabha of the Pandavas, and was the creator of many fabulous weapons for the gods. He is also called the divine carpenter, is mentioned in the Rig Veda, and is credited with Sthapatya Veda, the science of mechanics and architecture.
It is generally celebrated in the months of September or October in Indian states such as Uttar Pradesh, Karnataka, Assam, West Bengal, Bihar, Jharkhand, Odisha, and Tripura. The festival is observed primarily in factories and industrial areas, often on the shop floor. As a mark of reverence the day of worship is marked not only by the engineering and architectural community but by artisans, craftsmen, mechanics, smiths, welders, industrial workers, factory workers and others. They pray for a better future, safe working conditions and, above all, success in their respective fields. Workers also pray for the smooth functioning of various machines. It is customary for craftsmen to worship their tools in his name, refraining from using the tools while doing so. Modern electronic servers are also worshipped for their smooth functioning.
{SHARFE ALAM}
हिन्दी दिवस
प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषाहोगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।
वर्ष 1918 में महात्मा गांधी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।
वर्ष 1949 में
स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में इस प्रकार वर्णित है: संघ की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा। चूंकि यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था। इस कारण हिन्दी दिवस के लिए इस दिन को श्रेष्ठ माना गया था। लेकिन जब राजभाषा के रूप में इसे चुना गया और लागू किया गया तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोग इसका विरोध करने लगे और अंग्रेज़ी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा। इस कारण हिन्दी में भी अंग्रेज़ी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा।
1991 के बाद
वर्ष 1991 में इस देश में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियाँ लागू की गई। इन नीतियों के तेजी से लागू हो पाने के पीछे जितने बड़े कारक थे सोवियत संघ में समाजवाद का पतन एवं इस देश के बड़े पूंजीपति घरानों की बढ़ती इजारादारी शायद उससे कहीं बड़ा, एवं सोवियत संघ के पतन के पीछे का भी, एक कारक था नई प्रौद्योगिकी का अभ्युदय। यह नई प्रौद्योगिकी एवं इससे उपजते हुये सेवा एवं उद्योग देश की अर्थनीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव लाये। सेवा क्षेत्र जिसका देश के सकल घरेलु उत्पाद में अंशदान 25% से भी कम था 50% से अधिक हो गया जबकि कृषि का अंशदान, भारत आज भी
कृषि प्रधान देश होते हुये भी 20% से कम रह गया। इसका जबर्दस्त असर पड़ा भाषा की पढ़ाई पर। अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई समय की बर्बादी समझा जाने लगा। जब हिन्दीभाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को थोड़ा थोड़ा एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से भाषा के उजड़ने, मातृभाषा उजड़ने लगी है।
कार्यक्रम
हिन्दी दिवस के दौरान कई कार्यक्रम होते हैं। इस दिन छात्र-छात्राओं को हिन्दी के प्रति सम्मान और दैनिक व्यवहार में हिन्दी के उपयोग करने आदि की शिक्षा दी जाती है।[4] जिसमें हिन्दी निबंध लेखन, वाद-विवाद हिन्दी टंकण प्रतियोगिता आदि होता है।[5] हिन्दी दिवस पर हिन्दी के प्रति लोगों को प्रेरित करने हेतु भाषा सम्मान की शुरुआत की गई है। यह सम्मान प्रतिवर्ष देश के ऐसे व्यक्तित्व को दिया जाएगा जिसने जन-जन में हिन्दी भाषा के प्रयोग एवं उत्थान के लिए विशेष योगदान दिया है। इसके लिए सम्मान स्वरूप एक लाख एक हजार रुपये दिये जाते हैं।[6][7] हिन्दी में निबंध लेखन प्रतियोगिता के द्वारा कई जगह पर हिन्दी भाषा के विकास और विस्तार हेतु कई सुझाव भी प्राप्त किए जाते हैं। लेकिन अगले दिन सभी हिन्दी भाषा को भूल जाते हैं।[8] हिन्दी भाषा को कुछ और दिन याद रखें इस कारण राजभाषा सप्ताह का भी आयोजन होता है। जिससे यह कम से कम वर्ष में एक सप्ताह के लिए तो रहती ही है।
• हिन्दी निबंध लेखन
• वाद-विवाद
• विचार गोष्ठी
• काव्य गोष्ठी
• श्रुति लेखन
• हिन्दी टंकण प्रतियोगिता
• कवि सम्मेलन
• पुरस्कार समारोह
• राजभाषा सप्ताह
कारण
सम्पूर्ण विश्व में भाषा बोलने में हिन्दी का चौथा स्थान है।
हिन्दी भाषा बोलने के अनुसार अंग्रेज़ी और चीनी भाषा के बाद पूरे दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी भाषा है। लेकिन उसे अच्छी तरह से समझने, पढ़ने और लिखने वालों में यह संख्या बहुत ही कम है। यह और भी कम होती जा रही। इसके साथ ही हिन्दी भाषा पर अंग्रेजी के शब्दों का भी बहुत अधिक प्रभाव हुआ है और कई शब्द प्रचलन से हट गए और अंग्रेज़ी के शब्द ने उसकी जगह ले ली है। जिससे भविष्य में भाषा के विलुप्त होने की भी संभावना अधिक बढ़ गई है
इस कारण ऐसे लोग जो हिन्दी का ज्ञान रखते हैं या हिन्दी भाषा जानते हैं, उन्हें हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य का बोध करवाने के लिए इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिससे वे सभी अपने कर्तव्य का पालन कर हिन्दी भाषा को भविष्य में विलुप्त होने से बचा सकें। लेकिन लोग और सरकार दोनों ही इसके लिए उदासीन दिखती है। हिन्दी तो अपने घर में ही दासी के रूप में रहती है।[13] हिन्दी को आज तक संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बनाया जा सका है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि योग को 177 देशों का समर्थन मिला, लेकिन हिन्दी के लिए 129 देशों का समर्थन क्या नहीं जुटाया जा सकता? इसके ऐसे हालात आ गए हैं कि हिन्दी दिवस के दिन भी कई लोगों को ट्विटर पर हिन्दी में बोलो जैसे शब्दों का उपयोग करना पड़ रहा है अमर उजाला ने भी लोगों से विनती किया कि कम से कम हिन्दी दिवस के दिन हिन्दी में ट्वीट करें।
उद्देश्य
इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष में एक दिन इस बात से लोगों को रूबरू कराना है कि जब तक वे हिन्दी का उपयोग पूरी तरह से नहीं करेंगे तब तक हिन्दी भाषा का विकास नहीं हो सकता है। इस एक दिन सभी सरकारी कार्यालयों में अंग्रेज़ी के स्थान पर हिन्दी का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा जो वर्ष भर हिन्दी में अच्छे विकास कार्य करता है और अपने कार्य में हिन्दी का अच्छी तरह से उपयोग करता है, उसे पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया जाता है।
कई लोग अपने सामान्य बोलचाल में भी अंग्रेज़ी भाषा के शब्दों का या अंग्रेज़ी का उपयोग करते हैं, जिससे धीरे धीरे हिन्दी के अस्तित्व को खतरा पहुँच रहा है।यहाँ तक कि वाराणसी में स्थित दुनिया में सबसे बड़ी हिन्दी संस्था आज बहुत ही खस्ता हाल में है।इस कारण इस दिन उन सभी से निवेदन किया जाता है कि वे अपने बोलचाल की भाषा में भी हिन्दी का ही उपयोग करें। इसके अलावा लोगों को अपने विचार आदि को हिन्दी में लिखने भी कहा जाता है। चूंकि हिन्दी भाषा में लिखने हेतु बहुत कम उपकरण के बारे में ही लोगों को पता है, इस कारण इस दिन हिन्दी भाषा में लिखने, जाँच करने और शब्दकोश के बारे में जानकारी दी जाती है। हिन्दी भाषा के विकास के लिए कुछ लोगों के द्वारा कार्य करने से कोई खास लाभ नहीं होगा। इसके लिए सभी को एक जुट होकर हिन्दी के विकास को नए आयाम तक पहुँचाना होगा। हिन्दी भाषा के विकास और विलुप्त होने से बचाने के लिए यह अनिवार्य है।
राजभाषा सप्ताह
मुख्य लेख : राजभाषा सप्ताह
राजभाषा सप्ताह या हिन्दी सप्ताह 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस से एक सप्ताह के लिए मनाया जाता है। इस पूरे सप्ताह अलग अलग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन विद्यालय और कार्यालय दोनों में किया जाता है। इसका मूल उद्देश्य हिन्दी भाषा के लिए विकास की भावना को लोगों में केवल हिन्दी दिवस तक ही सीमित न कर उसे और अधिक बढ़ाना है। इन सात दिनों में लोगों को निबंध लेखन, आदि के द्वारा हिन्दी भाषा के विकास और उसके उपयोग के लाभ और न उपयोग करने पर हानि के बारे में समझाया जाता है।
पुरस्कार
हिन्दी दिवस पर हिन्दी के प्रति लोगों को उत्साहित करने हेतु पुरस्कार समारोह भी आयोजित किया जाता है। जिसमें कार्य के दौरान अच्छी हिन्दी का उपयोग करने वाले को यह पुरस्कार दिया जाता है। यह पहले राजनेताओं के नाम पर था, जिसे बाद में बदल कर राजभाषा कीर्ति पुरस्कार और राजभाषा गौरव पुरस्कार कर दिया गया। राजभाषा गौरव पुरस्कार लोगों को दिया जाता है जबकि राजभाषा कीर्ति पुरस्कार किसी विभाग, समिति आदि को दिया जाता है
राजभाषा गौरव पुरस्कार
मुख्य लेख : राजभाषा गौरव पुरस्कार
यह पुरस्कार तकनीकी या विज्ञान के विषय पर लिखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को दिया जाता है। इसमें दस हजार से लेकर दो लाख रुपये के 13 पुरस्कार होते हैं। इसमें प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले को ₹2,00,000 व द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले को ₹1,50,000 और तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले को ₹75,000 रुपये मिलता है। साथ ही 10 लोगों को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में ₹10,000 रुपये मिलता है। पुरस्कार प्राप्त सभी लोगों को स्मृति चिन्ह भी दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में हिन्दी भाषा को आगे बढ़ाना है।
राजभाषा कीर्ति पुरस्कार
मुख्य लेख : राजभाषा कीर्ति पुरस्कार
इस पुरस्कार योजना के तहत कुल 39 पुरस्कार दिये जाते हैं। यह पुरस्कार किसी समिति, विभाग, मण्डल आदि को उसके द्वारा हिन्दी में किए गए श्रेष्ठ कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य सरकारी कार्यों में हिन्दी भाषा का उपयोग करने से है।
विरोध
कई हिन्दी लेखकों और हिन्दी भाषा जानने वालों का कहना है कि हिन्दी दिवस केवल सरकारी कार्य की तरह है, जिसे केवल एक दिन के लिए मना दिया जाता है। इससे हिन्दी भाषा का कोई भी विकास नहीं होता है, बल्कि इससे हिन्दी भाषा को हानि होती है। कई लोग हिन्दी दिवस समारोह में भी अंग्रेज़ी भाषा में लिख कर लोगों का स्वागत करते हैं। सरकार इसे केवल यह दिखाने के लिए चलाती है कि वह हिन्दी भाषा के विकास हेतु कार्य कर रही है। स्वयं सरकारी कर्मचारी भी हिन्दी के स्थान पर अंग्रेज़ी में कार्य करते नज़र आते हैं।
हिन्दी दिवस पर क़फ़ील अहमद फारूक़ी का कहना है कि असल में हिन्दी भाषी ही हिन्दी का गला घोंट रहे हैं। हिन्दी दिवस पर औपचारिकता के स्थान पर कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे लगे कि वाक़ई में हिन्दी के लिए कुछ हुआ है।उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा ज़िले के बाड़ेछीना में सन् १९३१ में जन्मे साहित्यकार शैलेष मटियानी हिन्दी के प्रति सरकारों और नौकरशाहों के रवैये से बेहद दुखी थे। लेकिन कुछ लोगों की सोच यह भी है कि विविध कारण बताकर हिन्दी दिवस मनाने का विरोध करने और मजाक उड़ाने वाले यह चाहते हैं कि हिन्दी के प्रति रही-सही अपनत्व की भावना भी समाप्त की जाय।
{SHARFE ALAM}
12/09/2016
May Allah shower countless blessing upon you and your family, Keep me in your prayers. Happy Eid al-Adha {BAKRID}
Eid al-Adha (Arabic: عيد الأضحى ʿīd al-aḍḥā, Festival of the Sacrifice"), also called the "Sacrifice Feast" or "Bakr-Eid" is the second of two Muslim holidays celebrated worldwide each year, and considered the holier of the two. It honors the willingness of Ibrahim (Abraham) to sacrifice his son, as an act of submission to God's command, before God then intervened sending his angel Jibra'il (Gabriel) and informs him that his sacrifice has already been accepted. The meat from the sacrificed animal is preferred to be divided into three parts. The family retains one third of the share; another third is given to relatives, friends and neighbors; and the remaining third is given to the poor and needy.
In the Islamic lunar calendar, Eid al-Adha falls on the 10th day of Dhu al-Hijjah and lasts for four days until the 13th day.[4] In the international (Gregorian) calendar, the dates vary from year to year drifting approximately 11 days earlier each year.
{SHARFE ALAM}
The celebrations of teacher's day are full of positive energy and anticipation on the part of the students. Students act as teachers and in this way they actually get to understand the role and responsibilities of a teacher. Song and dance programs are an integral part of teacher's day celebrations in various schools. The teacher's day celebrations are a small gesture form the side of the students to thank their teachers for supporting and guiding them throughout. Through these celebrations students and their teachers remember the great educationist and philosopher, Dr. Sarvepalli Radhakrishnan who is the symbol of hope and inspiration.
‘’MD RASHID’’
Teacher's day is celebrated on 5th of September. The birthday of the second President of India Dr. Sarvepalli Radhakrishnan is observed as teacher's day in India. Dr, Sarvepalli Radhakrishnan was a renowned educationist, a scholar and a teacher. It is his birth anniversary that is celebrated as teacher's day throughout the country. This day is considered as the day for the teachers. Teacher's day is actually a day for paying a tribute to all our teachers and their immense hard work. So, it can be said that 5th of September also called as teacher's appreciation day is the day dedicated to all the teachers. The immense role, support and guidance of the teachers can not be expressed in words; they are the ones who help us in giving a shape to our lives.
‘’MD ISHTEYAQUE ANWAR’’
History of Teacher's Day
Students from each and every part of the country eagerly wait for this occasion. The occasion of teacher's day is actually a way through which the students can express their genuine appreciation and gratefulness to their teachers.
Apart from that, this day is also utilized by the students to pay respect and tribute to Dr. Sarvepalli Radhakrishnan for his philosophies. Dr. Radhakrishnan contributed a lot of useful articles and journals in various subjects like educational, theological, cultural, social, philosophical and ethical. This day that is his birthday is indeed a great way of remembering the huge contributions and honoring this legend, who have helped us in making our lives more knowledgeable.
The history behind teacher's day is actually quite interesting. One day, Dr. Sarvepalli Radhakrishnan was approached by some of his students as well as friends and they requested him to let them celebrate his birthday.
This incident took place during his presidential tenure. To their request, Dr. Radhakrishnan said them that instead of celebrating his birthday separately they should celebrate this day as teacher's day. He said that if they do so, it would be a great privilege for him. Since then onwards, September 5th, Dr. Sarvepalli Radhakrishnan's birthday is celebrated as the day for appreciating the teachers throughout the country.
Teacher's day is not a holiday; it is one such occasion where the students make their teachers feel special. It is a very significant day in the history of India. This day is not only the birth anniversary of the second Indian President but also is the day for admiring the sincere efforts and contributions of the teachers for building the basic foundation of India.
''SHARFE ALAM''
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