24/04/2024
असहनीय भेदभाव
भाग-१
लोकतंत्र के किस्से पहले किताबों में और अब अखबारों में पढ़ता हूं। सोचता हूं, किससे पूछूं कि हमने कौन सा ऐसा अपराध किया है जो हमसे उम्मीदवारी का हक भी छीन लिया गया है। पहले सिंघिया-३ पंचायत में थे, फिर इसे नगर पंचायत बना दिया गया। पहले सिंघिया विधानसभा में थे जिसे रोसरा विधानसभा कर दिया गया। रोसरा लोकसभा में थे, उसे समस्तीपुर संसदीय क्षेत्र बना दिया गया।
इस दर्द भरी दास्तां की कहानी कुछ इस तरह की है। कि जब रोसरा लोकसभा हुआ करता था तब सुरक्षित सीट के रूप में रामचंद्र पासवान जी सांसद हुआ करते थे, बाद में हमें समस्तीपुर सुरक्षित सीट का क्षेत्रवासी घोषित किया गया और महेश्वर हजारी तथा प्रिंस राज हमारे सांसद हो गए।
विधानसभा में जब तक सिंघिया सुरक्षित सीट रहा, डा.अशोक राम विधायक बनते रहे। जब सिंघिया से हम लोगों को रोसरा विधानसभा में जोड़ा गया तो रोसरा को सुरक्षित सीट बना दिया गया। फिर मंजू हजारी और वीरेंद्र कुमार हमारे विधायक बन गए।
हम सिंघिया पंचायत के अंतर्गत आते थे जो महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित था। फिर सिंघिया को नगर पंचायत बनाया गया लेकिन इसमें भी मेयर का पद आरक्षित ही रखा गया।
और सबसे बाद में वार्ड का पद।जब तक सिंघिया-३ पंचायत में थे, तब वार्ड- १ सुरक्षित सीट था और अभी जब नगर पंचायत सिंघिया में हैं, तब भी वार्ड-९ वार्ड पद सुरक्षित हीं है।
जारी.......