10/07/2025
*👉 गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं..*
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भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है, जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान से प्रकाशित करने वाले 'गुरु' को सनातन संस्कृति में देवतुल्य माना गया है, *जो हमें ज्ञान देते हैं, प्रेरणा देते हैं, सच बताते हैं, रास्ता दिखाते हैं, धर्म-अधर्म, सही-गलत का भेद समझाते हैं, वही गुरु होते हैं।*
सनातन संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं, गुरु शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - 'गु' का अर्थ है अंधकार और 'रु' का अर्थ है उसे दूर करने वाला। इस प्रकार, गुरु वह है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
> *गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वरः*
> *गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः*
अर्थ- गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महादेव हैं, गुरु ही साक्षात् भगवान हैं, ऐसे श्री गुरु को मेरा प्रणाम है।
* अर्थात – गुरु निर्माता है, गुरु पालनहार है, गुरु ही संघटक है। गुरु ही परमात्मा हैं, ऐसे महान गुरु को नमन है।
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> *गुरु शिष्य परम्परा भारतीय सनातन संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, एक गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान रूपी अमृत का सिंचन कर उसे ज्ञानवान, चरित्रवान व समर्थ बनाता है, राष्ट्र की एकता और राष्ट्रनिर्माण में योगदान दे रहे सभी गुरुजनों के चरणों में शत-शत नमन, गुरु की महत्ता को समर्पित श्री गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।*
गुरू की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार होता है गुरू की कृपा के बिना कुछ भी सम्भव नहीं है, आदिगुरु परमेश्वर शिव दक्षिणामूर्ति रूप में समस्त ऋषि मुनि को शिष्य के रूप शिवज्ञान प्रदान किया था उनके स्मरण रखते हुए गुरु पूर्णिमा मानाया याता है।
> *गुरु पूर्णिमा उन सभी आध्यात्मिक और अकादमिक गुरुजनों को समर्पित परम्परा है जिन्होंने कर्म योग आधारित व्यक्तित्व विकास और प्रबुद्ध करने, बहुत कम अथवा बिना किसी मौद्रिक खर्चे के अपनी बुद्धिमता को साझा करने के लिए तैयार हों।*
इस गुरु पूर्णिमा पर हमको उन व्यक्तियों को शत-शत नमन करना चाहिए, जिनके हंसमुख स्वभाव, सकारात्मक दृष्टिकोण और अनगिनत सीखों ने हमारे जीवन को समृद्ध बनाया, आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
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