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27/07/2023

एक दारू पिय्यकर B.A. पास/ Alcohol Addict/ The Story Of Santosh Mishra || New Messages For Youngsters, 21 Jun 2021
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दिल की जुबानी
एक जीवन की कहानी... एक दारू पिय्यकर B.A. पास
संतोष मिश्रा दरभंगा जिला बिहार से जो नवजवानों को एक नई संदेश दे रहे हैं...
■दारू बर्बाद करती है; आबाद नहीं करती है

■अगर आप चाहो तो जिंदगी दे दो, नहीं तो बिगाड़ दो।

■दारु पियोगे तो देश नहीं बनेगा।

■शहर में शैतान पलते हैं, इंसान नहीं पलते हैं।

■चाहे डाका डालूं या कुछ करूँ, मैं तो आगे बढूंगा ही बनूंगा।

■मुझे नहीं लगता है कि मेरे साथ कोई आएगा, क्योंकि इन लोगों को शराब ने बर्बाद कर दिया है।

■दारु पी करके डंडा खाया हूं कि आप डंडे मत खाना।

■मेरा दोस्तों शराबी है और मैं भी उनके साथ रहकर शराबी बन गया।
■मैं भी पढ़ा लिखा इंसान हूं दारु पी करके मैं गलत हूं।

■अगर अपने घर को चलाना चाहते हो, तो दारु को खत्म करो।

■सुबह उठता हूं तो इतना चढ़ जाती है दारू बहुत कमीनी चीज है।

■औरतें में घुमा देगी और दारू तुम्हें बर्बाद कर देंगे।

■एक औरत होती है घर की लक्ष्मी और एक होती है घर के सत्यानाशनी।

■दोस्तों दो चीज से डर एक औरत से और दूसरा दारू से।

■औरतें कभी छोड़ेगी नहीं और दारू तुम सत्यानाश कर देंगे।

■अपने देश को बनाओ; अपने देश को बिगाड़ो मत।

■यहां कोई साथ नहीं देता है, यहां खुद अपना साथ पकड़ना पड़ता है

■इतिहास आपको बनाना है यहां इतिहास पुराना हो जाता है यहां एक नया इतिहास होता है।

■आज मैं B.A. पास हूं लेकिन जूते खा रहा हूं दारू की वजह से।

एक सेठ-जी के पास एक ग्राहक कुछ समान लेने के लिए आया। उसने जितने का समान लिया उसमें 10 रूपये कम पड़ गए तो सेठ-जी ने कहा क...
23/07/2023

एक सेठ-जी के पास एक ग्राहक कुछ समान लेने के लिए आया। उसने जितने का समान लिया उसमें 10 रूपये कम पड़ गए तो सेठ-जी ने कहा कुछ समान कम कर देता हूँ, हम उधार नहीं देते।

ग्राहक को सेठ-जी की बात बहुत ही बुरी लगी,

बोला कि मेरे घर में तीन-दिन से खाना नहीं बना

मेरा पूरा परिवार भूखा है और आपको रूपयों की पड़ी है।

सेठ-जी ने कहा 5 मिनट रूको, घर से सेठानी को बोलकर भोजन की एक शानदार थाली लगवाकर ले आए और बोले,

पहले भोजन करो तथा जाते समय कुछ भोजन बच्चों के लिए भी ले जाना।

उस व्यक्ति के जाने के बाद जब सेठ-जी के बच्चों ने पूछा पिता जी ये कैसा व्यवहार, 10 रूपये कम पड़ने पर तो

आपने उनका समान कम कर दिया और बाद में भरपेट भोजन तो करवाया ही साथ में और भोजन भी बांध दिया।

आखिर ऐसा क्यों....???

सेठ भी ख़ानदानी था बोला …… बच्चों हमेशा ये सीख याद रखना....

व्यापार करते समय, दया मत करो और

सेवा करते समय, व्यापार मत करो ||

👉🔱एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया। संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई। सेठ ने उससे पूछा- भाई! यह क्या ह...
23/07/2023

👉🔱एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया। संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई। सेठ ने उससे पूछा- भाई! यह क्या है

उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है। इसमें अपार बल है। कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो, यह एक पल में निपटा देता है। यह कई वर्षों का काम मिनटों में कर सकता है।

सेठ भूत की प्रशंसा सुनकर ललचा गया और उसकी कीमत पूछी। उस आदमी ने कहा- कीमत बस पाँच सौ रुपए है। कीमत सुनकर सेठ ने हैरानी से पूछा- बस पाँच सौ रुपए?

उस आदमी ने कहा- सेठ जी! जहाँ इसके असंख्य गुण हैं वहाँ एक दोष भी है। अगर इसे काम न मिले तो मालिक को खाने दौड़ता है।

सेठ ने विचार किया कि मेरे तो सैकड़ों व्यवसाय हैं, विलायत तक कारोबार है। यह भूत मर जाएगा पर काम खत्म न होगा। यह सोचकर उसने भूत खरीद लिया।

भूत तो भूत ही था। उसने अपना चेहरा फैलाया बोला- काम! काम! काम! काम!

सेठ भी तैयार ही था। तुरंत दस काम बता दिए। पर भूत उसकी सोच से कहीं अधिक तेज था। इधर मुंह से काम निकलता, उधर पूरा होता। अब सेठ घबरा गया।

संयोग से एक संत वहाँ आए। सेठ ने विनयपूर्वक उन्हें भूत की पूरी कहानी बताई। संत ने हँस कर कहा- अब जरा भी चिंता मत करो। एक काम करो। उस भूत से कहो कि एक लम्बा बाँस लाकर, आपके आँगन में गाड़ दे। बस, जब काम हो तो काम करवा लो, और कोई काम न हो, तो उसे कहें कि वह बाँस पर चढ़ा और उतरा करे।

तब आपके काम भी हो जाएँगे और आपको कोई परेशानी भी न रहेगी। सेठ ने ऐसा ही किया और सुख से रहने लगा।

यह मन ही वह भूत है। यह सदा कुछ न कुछ करता रहता है। एक पल भी खाली बिठाना चाहो तो खाने को दौड़ता है। श्वास ही बाँस है। श्वास पर नामजप का अभ्यास ही, बाँस पर चढ़ना उतरना है।

हम भी ऐसा ही करें। जब आवश्यकता हो, मन से काम ले लें। जब काम न रहे तो श्वास में नाम जपने लगो। तब आप भी सुख से रहने लगेंगे।

जय श्री राम

14/07/2023

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14/07/2023

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13/07/2023

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Editing Time- 27 Feb 2019
-anokha

👉क्या आपको पता है?❓❓हमारी नाभि (NABHI) हमारे निर्माता द्वारा हमें दिया गया एक अद्भुत उपहार है। 62 साल के एक व्यक्ति की ब...
11/07/2023

👉क्या आपको पता है?❓❓

हमारी नाभि (NABHI) हमारे निर्माता द्वारा हमें दिया गया एक अद्भुत उपहार है। 62 साल के एक व्यक्ति की बायीं आंख की रोशनी कम थी।

वह विशेष रूप से रात में मुश्किल से देख पाता था और नेत्र विशेषज्ञों ने उसे बताया था कि उसकी आँखें अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन एकमात्र समस्या यह थी कि उसकी आँखों को रक्त की आपूर्ति करने वाली नसें सूख गई थीं और वह फिर कभी नहीं देख पाएगा।

विज्ञान के अनुसार गर्भाधान होने के बाद सबसे पहला भाग नाभि का निर्माण होता है। बनने के बाद, यह गर्भनाल के माध्यम से माँ की नाल से जुड़ जाता है।

हमारी नाभि निश्चित रूप से एक अद्भुत चीज़ है! विज्ञान के अनुसार, किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी नाभि 3 घंटे तक गर्म रहती है, इसका कारण यह है कि जब एक महिला बच्चे को गर्भ धारण करती है, तो उसकी नाभि बच्चे की नाभि के माध्यम से बच्चे को पोषण प्रदान करती है। और एक पूर्ण विकसित बच्चा 270 दिन = 9 महीने में बनता है।

यही कारण है कि हमारी सभी नसें हमारी नाभि से जुड़ी होती हैं जो इसे हमारे शरीर का केंद्र बिंदु बनाती है। नाभि ही जीवन है!

"पेचोटी" नाभि के पीछे स्थित होती है जिसके ऊपर 72,000 से अधिक नसें होती हैं। हमारे शरीर में रक्त वाहिकाओं की कुल मात्रा पृथ्वी की परिधि के दोगुने के बराबर है।

नाभि पर तेल लगाने से आंखों का सूखापन, खराब दृष्टि, अग्न्याशय अधिक या कम काम करना, फटी एड़ियां और होंठ ठीक हो जाते हैं, चेहरे पर चमक बनी रहती है, बाल चमकदार होते हैं, घुटनों का दर्द, कंपकंपी, सुस्ती, जोड़ों का दर्द, शुष्क त्वचा ठीक होती है।

*आंखों का सूखापन, खराब दृष्टि, नाखूनों में फंगस, चमकती त्वचा, चमकदार बालों का उपाय*

रात को सोने से पहले अपनी नाभि में शुद्ध घी या नारियल तेल की 3 बूंदें डालें और इसे अपनी नाभि के चारों ओर डेढ़ इंच तक फैलाएं।

*घुटने के दर्द के लिए*
रात को सोने से पहले अपनी नाभि में अरंडी के तेल की 3 बूंदें डालें और इसे अपनी नाभि के चारों ओर डेढ़ इंच तक फैलाएं।

*कंपकंपी और सुस्ती के लिए, जोड़ों के दर्द, शुष्क त्वचा से राहत*

रात को सोने से पहले अपनी नाभि में 3 बूंद सरसों का तेल डालें और इसे अपनी नाभि के चारों ओर डेढ़ इंच तक फैला लें।

*अपनी नाभि में तेल क्यों डालें?*

आप नाभि का पता लगा सकते हैं कि कौन सी नसें सूख गई हैं और इस तेल को उसमें डालें ताकि वे खुल जाएं।

जब किसी बच्चे को पेट में दर्द होता है, तो हम आम तौर पर हींग और पानी या तेल मिलाकर नाभि के चारों ओर लगाते हैं। कुछ ही मिनटों में दर्द ठीक हो जाता है। तेल भी इसी तरह काम करता है.

इसे अजमाएं। कोशिश करने में कोई बुराई नहीं है.

आप अपने बिस्तर के बगल में आवश्यक तेल की एक छोटी ड्रॉपर बोतल रख सकते हैं और सोने से पहले नाभि पर कुछ बूंदें डालकर मालिश कर सकते हैं। इससे डालने में सुविधा होगी और आकस्मिक रिसाव से बचा जा सकेगा।

मैं एक बहुत अच्छे मित्र से प्राप्त इस मूल्यवान और बहुत उपयोगी जानकारी को अग्रेषित कर रहा हूं। यह वास्तव में आश्चर्यजनक है। मित्र को लाख-लाख धन्यवाद। इसे मित्रों के साथ साझा करके खुशी हो रही है।

🥀🥀🥀🥀Thank you 🥀🥀🥀🥀

👉 जो इन तीनो को छोड़ता है भगवान उसे नहीं छोड़ते !हनुमान जी को भगवान सदा अपने पास बैठाते है ; क्यों ?क्योंकि हनुमान जी ने...
02/07/2023

👉 जो इन तीनो को छोड़ता है भगवान उसे नहीं छोड़ते !

हनुमान जी को भगवान सदा अपने पास बैठाते है ; क्यों ?

क्योंकि हनुमान जी ने तीन काम किये और जो ये तीन कार्य करता है भगवान उसे अपने पास सदा रखते है !...

1- नाम छोड़ा -हनुमान जी ने अपना कोई नाम नहीं रखा !हनुमान जी के जितने भी नाम है सभी उनके कार्यों से अलग अलग नाम हुए है !

किसी ने पूछा -आपने अपना कोई नाम क्यों नहीं रखा तो हनुमान जी बोले -जो है नाम वाला वही तो बदनाम है नाम तो दो ही सुन्दर है राम और कृष्ण का !

विभीषण जी के पास जब हनुमान जी गए तो विभीषण जी बोले -आपने भगवान की इतनी सुन्दर कथा सुनाई आप अपना नाम तो बताईये !

हनुमान जी बोले -नाम की तो बड़ी महिमा है

प्रात लेई जो नाम हमारा ;

तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा !

अर्थात प्रात:काल हमारा नाम जो लेता है उस दिन उसे आहार तक नहीं मिलता !

हनुमान जी ने नाम छोड़ा और हम नाम के पीछे ही मरे जाते है !मंदिर में एक पत्थर भी लगवाते है तो पहले अपना नाम उस पर खुदवाते है !

एक व्यक्ति ने एक मंदिर में पंखे लगवाए ;पंखे की हर पंखङी पर अपने पिता जी का नाम लिखवाया !

एक संत ने पूछा -ये पंखे पर किसका नाम लिखा है !उसके बेटे ने कहा -मेरे पिता जी का नाम है !संत बोले -जीते जी खूब चक्कर काटे कम से कम मरने के बाद तो छोड़ दो क्यों चक्कर लगवा रहे हो !

2- रूप छोड़ा -हनुमान जी बंदर का रूप लेकर आये !हमें किसी का मजाक उड़ाना होता है तो हम कहते है कैसा बंदर जैसा मुख है कैसे बंदर जैसे दाँत दिखा रहा है !

हनुमान जी से किसी ने पूछा -आप रूप बिगाड़कर क्यों आये तो हनुमान जी बोले यदि मै रूपवान हो गया तो भगवान पीछे रह जायेगे !

इस पर भगवान बोले -चिंता मत करो हनुमान मेरे नाम से ज्यादा तुम्हारा नाम होगा और ऐसा हुआ भी राम जी के मंदिर से ज्यादा हनुमान जी के मंदिर है !मेरे दरबार में पहले तुम्हारा दर्शन होगा (राम द्वारे तुम रखवाले) !

3- यश छोड़ा -हम थोड़ा सा भी बड़ा और अच्छा काम करते है तो चाहते है पेपर में हमारी फोटो छपे नाम छपे पर हनुमान जी ने कितने बड़े-2 काम किये पर यश स्वयं नहीं लिया !

एक बार भगवान वानरों के बीच में बैठे थे ;सोचने लगे हनुमान तो अपने मुख से स्वयं कहेगा नहीं इसलिए हनुमान की बडाई करते हुए बोले -हनुमान तुमने इतना बड़ा सागर लांघा जिसे कोई नहीं लांघ सका !

हनुमान जी बोले -प्रभु इसमें मेरी क्या बिसात

प्रभु मुद्रिका मेल मुख माही !

आपके नाम की मुंदरी ने पार लगाया !

भगवान बोले -अच्छा हनुमान चलो मेरी नाम की मुंदरी ने उस पार लगाया फिर जब तुम लौटे तब तो मुंदरी जानकी को दे आये थे फिर लौटते में तो नहीं थी फिर किसने पार लगाया ?

इस पर हनुमान जी बोले -प्रभु आपकी कृपा ने (मुंदरी) ने उस पार किया और माता सीता की कृपा ने (चूड़ामणि) इस पार किया !

भगवान ने मुस्कराते हुए पूछा -और लंका कैसे जली ?

हनुमान जी -लंका को जलाया आपके प्रताप ने लंका को जलाया रावण के पाप ने लंका को जलाया माँ जानकी के श्राप ने !

भगवान ने मुस्कराते हुए घोषणा की -हे हनुमान तुमने यश छोड़ा है इसलिए न जाने तुम्हारा यश कौन-2 गायेगा !

सहस बदन तुम्हारो यश गावे

सारा जगत तुम्हारा यश गायेगा !

कहना यह है जो इन तीनो को छोडता है भगवान फिर उसे नहीं छोडते सदा अपने साथ रखते है !

🥀🥀जय सिया राम

जय जय हनुमान🙏🙏🙏

काशीवासी चार प्रकार के होते है.👉1- जिनका जन्म काशी में हुआ हों वो काशीवासी है2- जिनका जन्म कहीं और हुआ लेकिन रहते काशी म...
01/07/2023

काशीवासी चार प्रकार के होते है.👉

1- जिनका जन्म काशी में हुआ हों वो काशीवासी है

2- जिनका जन्म कहीं और हुआ लेकिन रहते काशी में है वो काशीवासी है

3- जिनका जन्म कहीं और हुआ काशी में रहते भी नहीं लेकिन काशी के प्रमुख पर्व त्योहारों पर श्रद्धा पूर्वक काशी आते हैं वो काशीवासी है

4- जिनका जन्म काशी में नहीं हुआ और काशी में रहते भी नहीं कभी काशी आए ना हो लेकिन जिनका मन पल-पल काशी आने के लिए तड़पता हो, वह सबसे बड़ा काशीवासी है क्योंकि उसका मन सदैव काशी में वास करता है

🥀🥀“सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्। —🥀🥀👨‍👩‍👦🙏🙏🙏सभी सुखी होवें,...
01/07/2023

🥀🥀“सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्। —🥀🥀
👨‍👩‍👦
🙏🙏🙏सभी सुखी होवें, सभी रोग मुक्त रहें, सभी मंगलमय के साक्षी बनें और किसी को भी दु:ख का भागी ना बनना पड़े।🙏🙏🙏

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