13/09/2026
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट की घटना की कड़ी निंदा करती है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधि पत्रकार के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार और मारपीट किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पत्रकार समाज की आवाज को सामने लाने का कार्य करते हैं, ऐसे में उनके साथ हिंसा और दबाव की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अभाविप जिला प्रशासन से मांग करती है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले संबंधित डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी अथवा अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, अभाविप मांग करती है कि सदर अस्पताल की संपूर्ण कार्यप्रणाली, चिकित्सकों की ड्यूटी, उपस्थिति, मरीजों के साथ व्यवहार एवं अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर भी सख्त कार्रवाई हो।
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर मरीजों, उनके परिजनों और पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी भी व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी या पद का दुरुपयोग करते हुए कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अभाविप स्पष्ट रूप से कहना चाहती है कि पत्रकारों की आवाज दबाने अथवा उनके साथ दुर्व्यवहार करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला प्रशासन तत्काल मामले का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करे, पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा सदर अस्पताल की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार के लिए ठोस कदम उठाए।
पत्रकारों का सम्मान और सुरक्षा—लोकतंत्र की मजबूती की पहचान है।
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