Tagore Residential School

Tagore Residential School An English medium government registered school.

सरस्वती पूजा 2026 की कुछ झलकियाँ। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद। 🙏माँ सरस्व...
25/01/2026

सरस्वती पूजा 2026 की कुछ झलकियाँ।


इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद। 🙏
माँ सरस्वती सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। 🙏😇

01/02/2025
06/09/2024
02/08/2024

एक ट्रेन का कुछकहानी .....✍️✍️✍️🥰

एक भाई को ट्रेन में बिना टिकट चढ़ने की आदत थी।

कभी पकड़े नही गये इसलिये हौंसला भी बढ़ता गया।

अब वो किसी की भी सीट पर जाकर जबरदर्स्ती बैठ भी जाता था।

टोकने पर हाथापाई पर उतर जाता था।

ऐसे ही दिन दिन भाई का हौंसला बुलंद होता गया।

एक दिन एयर कंडीशन बोगी में चढ़ गया बिना टिकट।

और जाकर एक सज्जन की सीट पर बैठ गया।

सज्जन ने मना किया तो आदतन शुरु हो गया, पहले भला बुरा कहा, फिर धमकी देने लगा, उससे भी काम नही चला तो हाथापाई पर उतारु हो गया।

उस सज्जन ने फोन कर पुलिस को बुला दिया।
पुलिस के सामने भी हेकड़ी बघार रहा था।

तब तक टीटी भी आ गया।
उन्होने आते के साथ सबसे पहले उनसे टिकट मांगा। अब टिकट तो उनके पास था नही तो आँय बांय बकने लगा।

अब यहा से ध्यान से पढ़े..

टीटी ने फ़ाइन की बात की, पुलिस ने अरेस्ट करने की बात की तो कहने लगा, "जब मै स्टेशन में घुसा तब आप लोग कहाँ थे।

जब मै ट्रेन में चढ़ा तब क्यों नही रोका?
जब यहाँ आकर बैठा तब तो आप लोगों ने मना नही किया।

अब ये आदमी हमसे झगड़ा करने लगा तो आप लोग टिकट के बहाने इसकी तरफदारी में लग गये?
अब मेरे पास पैसा नही है और जाना इसी ट्रेन में है तो क्या आप हमको ट्रेन में से फेंक दिजियेगा?
कहाँ का न्याय है ये।
हमें पहले नोटिस दीजिए।

हम वर्षों से बिना टिकट चल रहे थे तब आपको क्यों नही दिखा? अब आप खाली इस आदमी का पक्ष लेने के लिये फ़ाइन लगाने लगे?

अब उसकी हिम्मत देख, दो चार बिना टिकट यात्री और आ गये और उसके पक्ष में पूरा हंगामा शुरु कर दिया।

ये क्या तरीका है?

यह ट्रेन हमारी है, हम वर्षो से इसमे़ बिना टिकट सफर कर रहे हैं, इसमें सफर करने में हमने पसीना बहाया है। हमारे पुरखों ने इसे खून से सींचा है‌।

आप लोग बेटिकट यात्रियों से भेदभाव करते हो।
अगर सीट देनी तो सबको देनी होगी, पर तुम भेदभाव करके केवल टिकट वालों को सीट देते हो।
आप लोग तानाशाही कर रहे हैं।

ये आदमी झगड़ा नही करता तो आप आते क्या?
आप खाली इस आदमी के सपोर्ट में ये सब कर रहे हैं। घोर अन्याय है ये। गरीबों को तो कोई देखने वाला नही है। यह गरीबों के साथ अंन्याय है।

तभी कुछ छुटभैये राजनीति बाज भी वहां आ गये।
वे कहने लगे रेल की सीटों पर पहला हक बिना टिकट यात्रियों का है।

रेलवे जानबूझ कर टिकट वाले और बिना टिकट यात्रियों के बीच नफरत फैलाने के लिए यह सब कर रहा है। हम यह नफरत का खेल नहीं होने देंगे।

हम रेलवे से ऐसा नियम बनवाऐंगे कि पहले बिना टिकट यात्रियों को सब सीटे दी जाऐंगी, अगर कोई सीट खाली रही तो वही सीट टिकट लिये यात्री को मिलेगी‌‌।

टीटी और पुलिस की समझ में नही आ रहा था कि बिना टिकट यात्री को फ़ाइन और अरेस्ट करने की बात करके उन्होने गलत किया या सही?

आज देश में यही नैरेटिव सैट करने की कोशिश की जा रही है।

28/04/2024

भारत में लगभग हर विवाह में हम 70% अनावश्यक लोगों को आमंत्रण देते हैं...

अनावश्यक लोग वो है जिन्हें आपके विवाह मे कोई रुचि नही..वे केवल दावत में आये होते हैं...

जो आपका केवल नाम जानते हैं...

जो केवल आपके घर की लोकेशन जानते हैं.. जो केवल आपकी पद-प्रतिष्ठा जानते हैं...

और जो केवल एक वक्त के स्वादिष्ट और विविधता पूर्ण व्यञ्जनों का स्वाद लेने आते हैं...

ये होते हैं अनावश्यक लोग....

विवाह कोई सत्यनारायण भगवान की कथा नही है कि हर आते जाते राह चलते को रोक रोक कर प्रसाद दिया जाए...

केवल आपके रिश्तेदारों, कुछ बहुत निकटस्थ मित्रों के अलावा आपके विवाह मे किसी को रुचि नही होती..

ये ताम झाम, पंडाल झालर, सैकड़ों पकवान, आर्केस्ट्रा DJ, दहेज का मंहगा सामान एक संक्रामक बीमारी का काम करता है.. कैसे..?

लोग आते हैं इसे देखते हैं और सोचते हैं..

"मै भी ऐसा ही इंतजाम करूँगा,

बल्कि इससे बेहतर करूंगा "..

और लोग करते हैं... चाहे उनकी चमड़ी बिक जाए..

लोग 70% अनावश्यक लोगों को अपने वैभव प्रदर्शन करने में अपने जीवन भर की कमाई लुटा देते हैं.. लोन तक ले लेते हैं..

और उधर विवाह मे आमंत्रित फालतू जनता , गेस्ट हाउस के गेट से अंदर सीधे भोजन तक पहुच कर, भोजन उदरस्थ करके, लिफाफा पकड़ा कर निकल लेती है..

और सबसे ज्यादा खाने की बर्बादी होती है लोग आते हैं और खूब सारा खाना प्लेट में ठूस ठूस कर लेते हैं थोड़ा खाते हैं बाकी फेंक देते हैं ।

पर आप उसकी किश्तें जीवन भर चुकाते हो...

क्या हमें इस अपव्यय और दिखावे को रोकना नहीं चाहिए..!

24/03/2024

बुजुर्ग पिताजी जिद कर रहे थे कि, उनकी चारपाई बाहर बरामदे में डाल दी जाये। बेटा परेशान था...बहू बड़बड़ा रही थी....।कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नही देता, हमने दूसरी मंजिल पर कमरा दिया.... AC TV FRIDGE सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं..?

पिता कमजोर और बीमार हैं....जिद कर रहे हैं, तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ, निकित ने सोचा। पिता इच्छा की पू्री करना उसने स्वभाव बना लिया था।

अब पिता की एक चारपाई बरामदे में भी आ गई थी। हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते। कुछ देर लान में टहलते लान में नाती - पोतों से खेलते, बातें करते, हंसते , बोलते और मुस्कुराते। कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें भी लाने की फरमाईश भी करते। खुद खाते , बहू - बेटे और बच्चों को भी खिलाते ....धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था।

दादा ! मेरी बाल फेंको। गेट में प्रवेश करते हुए निकित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी, तो बेटा अपने बेटे को डांटने लगा...अंशुल बाबा बुजुर्ग हैं, उन्हें ऐसे कामों के लिए मत बोला करो।

पापा ! दादा रोज हमारी बॉल उठाकर फेंकते हैं....अंशुल भोलेपन से बोला।

क्या... "निकित ने आश्चर्य से पिता की तरफ देखा ?

पिता- हां बेटा तुमने ऊपर वाले कमरे में सुविधाएं तो बहुत दी थीं। लेकिन अपनों का साथ नहीं था। तुम लोगों से बातें नहीं हो पाती थी। जब से गैलरी मे चारपाई पड़ी है, निकलते बैठते तुम लोगों से बातें हो जाती है। शाम को अंशुल -पाशी का साथ मिल जाता है।

पिता कहे जा रहे थे और निकित सोच रहा था.....बुजुर्गों को शायद भौतिक सुख सुविधाओं से ज्यादा अपनों के साथ की जरूरत होती है....।

बुज़ुर्गों का सम्मान करें यह हमारी धरोहर हैं और अपने बुजुर्गों का खयाल हर हाल में अवश्य रखें...यह वो पेड़ हैं, जो थोड़े कड़वे है, लेकिन इनके फल बहुत मीठे है, और इनकी छांव का कोई मुक़ाबला नहीं।
🙏🏼🙏🏼🙏🙏🙏🙏🙏🙏🏼🙏🙏🙏🙏

10/03/2024

जब शादी की तारीख फिक्स हो जाती है तो लड़की का बाप लड़के के बाप से पूछता है कितनी बारात लाओगे?
लड़के का बाप कहता है तीन सौ।
लड़की का बाप बोलता है इतनी बारात बहुत ज्यादा हो जाएगी, दो सौ बारात ले आना।
लड़के का बाप कहता है दो सौ बारात में हमें नहीं होगी हमारी इज्जत चली जाएगी। गांव में हर घर से कम से कम एक आदमी तो पूछना ही पड़ेगा तो सिर्फ गांव के दो सौ लोग हो जाएंगे फिर हमारे रिश्तेदार और घर की औरतें हो जाएंगी, जिसे नहीं पूछेंगे वही बुरा मान जाएगा इसलिए कम से कम तीन सौ लोग आएंगे। हम तो आपके हालात देखकर तीन सौ बाराती ला रहे हैं वरना हमारा परिवार इतना बड़ा है कि और इतने नाते रिश्तेदार हैं कि हमें चार सौ बाराती से ज्यादा लाना चाहिए।

कुछ दिनों बाद जब उसी लड़के वालों के घर में कोई बीमार हो जाता है तो पूरे गांव में कोई एक यूनिट खून देने वाला नहीं मिलता। सोशल मीडिया में अपील करना पड़ता है। अगर किसी से झगड़ा हो जाता है तो पूरे गांव में दो लोग ऐसे नहीं मिलते जो कोर्ट में चलकर ज़मानत ले लें।

मेरा मानना है कि #बारात में सिर्फ उन्हें ही लेकर जाना चाहिए जो
एक यूनिट ब्लड दे सकें और जो कोर्ट में खड़े होकर तुम्हारी जमानत_ले सकें।

बस यही तुम्हारे हैं बाकी सब गैर हैं।
🙏

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Saharsa
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