11/06/2025
कोडिंग: बच्चों के लिए एक रचनात्मक नशा
आज का युग तकनीक और डिजिटल क्रांति का युग है। बच्चे मोबाइल और कंप्यूटर की दुनिया में दिन-रात डूबे रहते हैं। विशेषकर मोबाइल गेम्स का आकर्षण इस कदर बढ़ गया है कि बच्चे घंटों-घंटों तक स्क्रीन से चिपके रहते हैं। यह आदत धीरे-धीरे एक नशे का रूप ले लेती है, जो उनके मानसिक विकास, शारीरिक स्वास्थ्य और पढ़ाई-लिखाई को प्रभावित करती है। लेकिन यदि इसी स्क्रीन टाइम को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जाए तो यही आदत एक रचनात्मक नशा बन सकती है — कोडिंग का नशा।
जिस प्रकार मोबाइल गेम खेलना बच्चों के लिए आनंददायक होता है, उसी प्रकार कोडिंग भी एक रोचक और चुनौतीपूर्ण गतिविधि है। फर्क सिर्फ इतना है कि गेम खेलकर बच्चा केवल समय व्यतीत करता है, जबकि कोडिंग सीखकर वह कुछ नया बनाता है। यही निर्माण की भावना बच्चों में आत्मविश्वास और सृजनात्मकता को जन्म देती है।
कोडिंग का मतलब केवल कंप्यूटर से संवाद करना नहीं है, बल्कि यह एक सोचने की प्रक्रिया है। जब बच्चा कोडिंग करता है, तो वह समस्याओं का समाधान ढूंढना सीखता है, लॉजिकल तरीके से सोचता है और अपने विचारों को एक नया रूप देने का प्रयास करता है। अगर बच्चे को यह समझाया जाए कि वह गेम केवल खेल ही नहीं सकता, बल्कि खुद एक गेम बना भी सकता है, तो उसकी रुचि स्वतः ही कोडिंग की ओर मुड़ जाएगी।
एक मोबाइल गेम खेलने वाला बच्चा केवल एक उपभोक्ता होता है, जबकि कोडिंग करने वाला बच्चा एक निर्माता बनता है। कल्पना कीजिए यदि कोई बच्चा एक ऐप बनाता है जो स्कूल में पढ़ाई को आसान बना दे या कोई ऐसा गेम बनाता है जो ज्ञानवर्धक हो — तो उसका आत्मविश्वास किस हद तक बढ़ जाएगा!
हमें बच्चों को रोकने के बजाय उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना होगा। उन्हें यह समझाना होगा कि स्क्रीन टाइम भी रचनात्मक हो सकता है। यदि बच्चा रोज 2 घंटे गेम खेलता है, तो उसमें से 1 घंटा कोडिंग सीखने में लगाए — यह संतुलन उसके भविष्य को संवार सकता है।
अतः कोडिंग को एक "रचनात्मक नशा" मानें। जैसे कलाकार चित्र बनाता है, कवि कविता रचता है, उसी प्रकार एक कोडर कोड से नई दुनिया बनाता है। यह नशा बच्चों को केवल वर्तमान में ही नहीं, भविष्य में भी एक सशक्त करियर और पहचान देने में सक्षम है।
जिसने कभी कोडिंग नहीं की, वह उसके आनंद को नहीं समझ सकता। कोडिंग केवल कंप्यूटर से संवाद नहीं, बल्कि एक कल्पना को साकार करने की कला है। जब कोई कठिन समस्या हल होती है, और कोड बिना त्रुटि के चलता है, तो जो संतोष और सुकून मिलता है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह खुशी किसी पुरस्कार से कम नहीं होती। ऐसा लगता है जैसे दिमाग की हर नस ने तालियों की गूंज सुनी हो। सच कहें तो, उस क्षण की खुशी जन्नत की आरामगाहों में भी न मिले — यह Coder का असली नशा है।
आइए, बच्चों को कोडिंग का जादू दिखाएं और उन्हें मोबाइल गेम्स के उपभोक्ता से तकनीक के निर्माता बनाएं।
जिस दिन कोडिंग के परिश्रम की पहली कमाई हाथ में आती है, तो दिल कहता है — "क्या यही था वो मेहनत का फल?" पर जैसे-जैसे समय बीतता है, और कोडिंग में निखार आने लगता है, तब समझ आता है कि असली आनंद तो इस सफर में छुपा था।
जब अपने बनाए प्रोजेक्ट को कोई सराहता है, तो वैसा ही एहसास होता है जैसा किसी शायर को महफ़िल में भरपूर दाद मिलने पर होता है। आत्मा गदगद हो उठती है। फिर जब कोई कंपनी बुलाकर काम का मूल्य तय करती है — बोलियां लगती हैं, कीमत मिलती है — तब आत्मविश्वास आसमान छूने लगता है।
और जब मेहनत इतनी रंग लाए कि विदेश से बुलावा आ जाए — वीज़ा लगे, पासपोर्ट में मोहर पड़े और विमान की खिड़की से नई दुनिया दिखे — तब यक़ीन होता है कि यह सफर सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं था। यह तो एक जुनून था, जिसने पहचान दी, सम्मान दिया और दुनिया की सीमाओं से परे ले गया।
कोडिंग सिर्फ एक काम नहीं, एक कला है — जो सही लगन से की जाए, तो जीवन को ही नई परिभाषा दे देती है।
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