Sun temple kandaha

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सूर्य मंदिर कन्दाहा

19/11/2023

एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम ,19/11/2023
सूर्य मंदिर कंदाहाजय सहरसा का सूर्य मंदिर, छठ व्रतियों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जहाँ श्रद्धालु भगवान भास्कर की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस पौराणिक मंदिर में सूर्यदेव की सात घोड़ों के रथ पर सवार, एक अद्भुत मूर्ति स्थापित है।
छठ ना केवल हमारा प्रमुख त्योहार है , हमारी भावनाएं जुड़ी हुई होती है इस महोत्सव से।
जो कभी किसी कारणवश घर में किसी साल छठ ना हो तो ऐसा लगता है मानों जीवन के रंग सारे बेरंग हो गए हों।
इन सब से ऊपर , अल्पाहार, सात्विकता, निर्जला, शुद्धता, आराधना, प्रेम और आस्था का महासंगम है ये .. छठ केवल त्योहार नही वरन, सौहार्द, स्वच्छता और साधना का महापर्व है हमारा।

चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे हों, छठ का मौसम आते ही हर बिहारी के कान में Sharda Sinha जी के वो अमर गीत गूंजने लगते हैं जिसे सुनने मात्र से उनके पांव अपने गांव आने को बेताब हो उठते हैं। वो पूजा घर से आ रही ठेकुआ की सोंधी सोंधी खुशबू, घर में सजाए जा रहे सूप, कोनिया और दौरा और छठ घाट के सारे दृश्य याद आने लगते हैं । ऐसा लगता है कि मन में और कुछ अटक ही नही रहा है, बस घर जाने की जिद मन में ठन जाती है।

सब कुछ की तैयारी हो चुकी है, बस अब आपके आने की देर है। तो देर किस बात की, उठाइए बैग और सीधा घर की तरफ निकल पड़िए।
वो छठ घाट, वो पूजा का दौड़ा, वो गांव की सौहार्दता, वो आपके सारे दोस्त जो सिर्फ छठ में मिल पाते हैं, सब आपको बुला रहे हैं।
अब बस अपने घर आइए और इस महापर्व के आनंद का रसास्वादन कीजिए।

जय श्री दिनकर 🙏
जय छठि मैया 🙏


Photos from Sun temple kandaha's post 31/10/2022

वर्षो पूर्व की भारी आज भी हमारे गांव में भव्य सूर्य महोत्सव हो रहे हैं सहरसा का इतना प्राचीन सूर्य मंदिर आज भी इस प्रकार उपेक्षित है यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने अपने सम्बोधन में इस पर चर्चा भी किया। मंचासीन स्थानीय महिषी विधानसभा के विधायक आदरणीय श्री गूंजेश्वर शाह जी ने सूर्य मंदिर के विकास को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर किया है। हम उम्मीद करते हैं आगे आने वाले समय में सूर्य मंदिर कंदाहा का विकास तेजी से होगा साथ ही कंदाहा को महोत्सव का दर्जा भी प्राप्त होगा।

Photos from Sun temple kandaha's post 18/07/2022

मधुश्रावणी पर्व जीवन में सिर्फ एक बार शादी के पहले सावन में मनाया जाता है . यह व्रत नवविवाहिताएं करती हैं . नमक के बिना 14 दिन भोजन ग्रहण करती हैं . इस व्रत में अनाज , मीठा भोजन खाया जाता है . व्रत के पहले दिन फलाहार किया जाता है . यह पूजा लगातार 14 दिनों तक चलती है . इन दिनों सुहागन व्रत रखकर मिट्टी और गोबर से बने विषहारा और गौरीशंकर की विशेष पूजा कर कथा सुनती हैं . कथा की शुरुआत विषहारा के जन्म और राजा श्रीकर से होती है . मधु श्रावणी व्रत के अंतिम दिन टेमी दागने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है . मधुश्रावणी व्रत का महत्व सावन मास में भगवान शिव और माता पार्वती से संबंधित मधुश्रावणी त्योहार मनाया जाता है . सावन मधुश्रावणी मिथिलांचल में बहुत धूमधाम से मनायी जाती है . इस दौरान माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है . इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है . कई तरह की कहानियां और कथाए बुजुर्गों द्वारा सुनायी जाती हैं पंचमी तिथि से एक दिन पूर्व ही नवविवाहित महिला फल , फूल पत्ते तोड़ती है . इसे फूल लोढ़ी कहा जाता है . इसके बाद पंचमी तिथि को उसी बासी फूल से पूजा करती हैं . कथा सुनते वक्त एक ही साड़ी हर दिन पहनती हैं . पूजा स्थान पर रंगोली बनाई जाती है . फिर नाग नागिन , विषहारा पर फूल पत्ते चढ़ाकर पूजा करती हैं महिलाएं गीत गाती हैं . कथा पढ़ती और सुनती हैं . पूजा शुरू होने से पहले नाग - नागिन और उनके पांच बच्चों को मिट्टी से बनाया जाता है . हल्दी से गौरी बनाने की परंपरा शुरू की जाती है . सोलह श्रृंगार करके फूल तोड़ने जाती नवविवाहिताएं 14 दिनों तक नवविवाहिताएं सोलह श्रृंगार करके शाम में फूल और पत्ते तोड़ने जाती हैं . इस त्योहार में प्रकृति की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है . मिट्टी और हरियाली से जुड़ी इस पूजा के पीछे पति की लंबी आयु की कामना होती है . इस पर्व के दौरान मैथिली लोकगीत की आवाज हर नवविवाहिताओं के घरों से सुनाई देती है . हर शाम महिलाएं आरती करती हैं और गीत गाती है

10/07/2022

मैथिल हमर नाम यौ मधुरी बोली टीका चानन ,खाई मगहिया पान यौ ।
हम सभ छी मिथिला के वासी , मैथिल हमर नाम यौ ।।
महिसी परखंड अछि बाबा दिनकर , सीताजी के गाम , धनुष यज्ञ में धीर वीर के टुटल छैन गुमान ।
बनला तोड़िते धनुष रामजी सियापति राम यौ । हम सभ छी मिथिला के वासी , मैथिल हमर नाम यौ ।।
भोले शंकर शिव त्रिपुरारी , अयला मिथिला धाम , उगना बनिकऽ विद्यापति के कैलन्हि सगरो काम । कुर्ता , धोती लाल , अंगोछा , टीक हमर पहचान यौ ।
हम सभ छी मिथिला के वासी , मैथिल हमर नाम यौ ।।
थानेश्वर , कपलेश्वर बाबा , कुशेश्वर धाम , उच्चैठ दुर्गा माताजी , अहिल्या स्थान ।
खेलू सामा - चकेबा गाऊ , जट - जटिन गान यौ । हम सभ छी मिथिला के वासी , मैथिल हमर नाम यौ ।।
दही - चूडा , तरूआ - तिमन , नामी मालदह आम , छठि माई के पूजा करू गंगा स्नान ।
सभ केओ हाथ जोड़ि करू , मिथिला के प्रणाम यौ
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हम सभ छी मिथिला के वासी , मैथिल हमर नाम यौ ।।
नवनीत झा के तरफ से सब मैथिल वासी के
प्रनाम 🙏🙏🙏🙏🙏

Photos from Sun temple kandaha's post 10/07/2022

सहरसा की प्राचीन विरासत सुर्य मन्दिर ,
ग्राम- कंदाहा , सहरसा , बिहार सूर्य मंदिर कंदाहा कोशी प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा के महिषी प्रखंड अंतर्गत प्राचीन नाम कंचनपुर ( कंदाहा ) में मिथिला के ओइनवर ( ओनिहरा ) वंश के राजा हरिसिंह देव के द्वारा चौदहवीं शताब्दी में सूर्य मंदिर बनवाया गया था मूर्ति के माथे के ऊपर मेष राशि का चित्र अंकित रहने की वजह से यह भी कहा जाता है 🙏🙏
की द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्भ के द्वारा यह मंदिर स्थापित किया गया । कंचनपुर को कभी सुजालगढ़ के नाम से भी जाना जाता था ।
काले पत्थर के सूर्य की अदभुत मूर्ति और चौखट पर उत्कृष्ट लिपि पर्यटकों व पुरातत्वविदों को अपनी ओर आकर्षित करती है ।
सुर्य मन्दिर सहरसा जिला के कन्दाहा ग्राम में स्थित है ।
यह जगह धार्मिक तथा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है ।
कन्दाहा जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर पश्चिम , गोरहो चौक से 2.4 किमी उत्तर मे अवस्थित है
यहाँ पहुँचने के लिए सहरसा जिला मुख्यालय से बस एवं ऑटो सेवा उपलब्ध है
बारहवीं शत्ताबदी में मिथिला पर नरसिमहा देव का ही शासन था । ये मिथिला के राजा थे । मन्दिर निर्मान के कुछ ही समय बाद मिथिला पर मुगल का शासन हुआ । कालापहार नामक मुगल शासक ने इस मन्दिर को तोड़ने की भी कोशिस की लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुआ । आज भी यह मन्दिर देश विदेश पर्यटकों के लिए काफी महत्वपुर्ण है
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ओर ई हमर अहोभाग्य ये जे हम ई ही मिथिला मैं जन्म लेलो 🙏🙏

25/02/2021
Photos from Sun temple kandaha's post 21/12/2020

कन्दाहा भव्य सूर्य मंदिर पर कोलकाता के श्रद्धालु ने आज दिनांक
२१ दिसंबर २०२०
को एक पौधा लगाकर स्वच्छ वातावरण का संकपल लिया
ओर अपने कन्दाहा के नवयुवक भी शामिल थे
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Create :- jha

25/04/2020

Jay dinkar

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