Naman Classes

Naman Classes मेहनत का इशारा हैं, सारा जहाँ हमारा हैं तख्त बदलता है ताज बदलेगा, सारा जहाँ अपना होगा।

स्वाभिमान जब आनंद से जुड़ जाता है तब जीवन का हर क्षण प्रेरणा बन जाता है।
15/01/2025

स्वाभिमान जब आनंद से जुड़ जाता है
तब जीवन का हर क्षण प्रेरणा बन जाता है।

20/12/2024

इंसान तो
वही रहता हैं पार्थ..
परंतु कुछ परिस्थीयाँ
उसका स्वभाव
बदल देती हैं.!! 💯

28/11/2024

हमे हराने निकली है ऐ ज़िंदगी तो ज़रा कमर कस लेना!
तकलीफ़ों से खेल कर बड़ा हुवा हूँ मुक़ाबला थोड़ा लंबा चलेगा!

19/11/2024

‘कठपुतली’ बन जाएं किसीकी
इतनी ‘ख़ुदगर्ज़ी’ भी अच्छी नहीं!
आईना मुँह मोड़ ले तुम्हें देख के
इतनी भी बे-ज़मीरी अच्छी नहीं!
जब बने हो तुम ‘हक़ के पहरेदार’
तो सरेआम ‘हक़मारी’ अच्छी नहीं!
अवाम को है ‘तुमसे’ उम्मीदें बहुत
यूँ तख़्तों की वफ़ादारी अच्छी नहीं!
वक़्त रहते सुन लो दिल की आवाज़
यूँ ख़ुद से की गई ग़द्दारी अच्छी नहीं!
जब मौक़ा है ‘दुआओं’ को पाने का
यूँ बद्दुआओं की कमाई अच्छी नहीं!

17/11/2024

केहु साथ दी , केहु छलत रहीं.
केहु खुश होई केहु जलत रहीं.
ई ज़िनगी ह येही लेखा चलत रहीं.

दुख - सुख तऽ जात आवत रही
कबो हँसाइ त कबो रूलावत रही
क़बो दिन चढ़ी, कबो ढलत रही
ई ज़िनगी ह येही लेखा चलत रहीं

जे आपन बा उहो पराया होई
बहुत कुछ जिनगी में नया होई
केहु धधाई ,केहूं हाथ मलत रहीं
ई ज़िनगी ह येही लेखा चलत रहीं

अनहरियाँ बा त अजोरों होई
ये रतिया एक दिन भोरों होई
केहु सोहाई केहु आँख में हलत रही
ई ज़िनगी ह येही लेखा चलत रहीं

09/11/2024

थकान पैरों से उठ कर दिल से आ लिपटी है..
सफ़र भी अब कोई ठिकाना चाहता है....😳

24/10/2024

भाग गए रणछोड़ सभी,
देख अभी तक खड़ा हूँ मैं
क्या हुआ विजय न चूम सका,
क्षमता भर अपनी लड़ा हूँ मैं।

ग्लानि जो खुद से हार गए,
वैसा बेचारा नही हूँ मैं
जाके कह दो विषम लक्ष्य से,
हारा नही हूँ मैं।

प्रत्यंचा टूट गई तो क्या
फिर से पिनाक मैं बाँधूंगा
अड़चन आएंगी आने दो
अंतिम साँसों तक साधूंगा
कब तक चूकेंगे साध्य मेरे
भाग्य सहारा नहीं हूँ मैं
जाके कह दो विषम लक्ष्य से हारा नहीं हूँ मैं।

जितना संघर्ष कठिन होगा
उतनी ही प्यारी जय होगी
फिर तूफानों में भी लड़ने में
काया वो निर्भय होगी
मजधारों का ही राही हूँ
देख किनारा नही हूँ मैं
जाके कह दो विषम लक्ष्य से हारा नही हूँ मैं।

जीवन तो है बस इतना ही
हम जीते हैं या मरते हैं
बेकार बैठने से अच्छा
जो शुरूआत तो करते हैं

कम से कम अपनी आकांक्षाओं,
का हत्यारा नही हूँ मैं
जाके कह दो विषम लक्ष्य से, हारा नही हूँ मैं।

जब मेहनत सफल नही होती,
हिम्मतें दांव दे जाती है

विश्राम नही दूंगा खुद को,
ये हार बहुत सिखलाती है
गिरकर उठने का आदी हूँ,

ठोकर का मारा नहीं हूँ मैं।

जाके कह दो विषम लक्ष्य से, हारा नहीं हूँ मैं।

19/10/2024

हर एक खैरियत पूछने वाला...
आपकी खैरियत नहीं चाहता...

11/08/2024

*मुंशी प्रेमचंद जी की एक "सुंदर कविता", जिसके एक-एक शब्द को, बार-बार "पढ़ने" को "मन करता" है-_*

ख्वाहिश नहीं, मुझे
मशहूर होने की,"

_आप मुझे "पहचानते" हो,_
_बस इतना ही "काफी" है।_😇

_अच्छे ने अच्छा और_
_बुरे ने बुरा "जाना" मुझे,_

_जिसकी जितनी "जरूरत" थी_
_उसने उतना ही "पहचाना "मुझे!_

_जिन्दगी का "फलसफा" भी_
_कितना अजीब है,_

_"शामें "कटती नहीं और_
-"साल" गुजरते चले जा रहे हैं!_

_एक अजीब सी_
_'दौड़' है ये जिन्दगी,_

-"जीत" जाओ तो कई_
-अपने "पीछे छूट" जाते हैं और_

_हार जाओ तो,_
_अपने ही "पीछे छोड़ "जाते हैं!_😥

_बैठ जाता हूँ_
_मिट्टी पे अक्सर,_

_मुझे अपनी_
_"औकात" अच्छी लगती है।_

_मैंने समंदर से_
_"सीखा "है जीने का तरीका,_

_चुपचाप से "बहना "और_
_अपनी "मौज" में रहना।_

_ऐसा नहीं कि मुझमें_
_कोई "ऐब "नहीं है,_

_पर सच कहता हूँ_
_मुझमें कोई "फरेब" नहीं है।_

_जल जाते हैं मेरे "अंदाज" से_,
_मेरे "दुश्मन",_

-एक मुद्दत से मैंने_
_न तो "मोहब्बत बदली"_
_और न ही "दोस्त बदले "हैं।_

_एक "घड़ी" खरीदकर_,
_हाथ में क्या बाँध ली,_

_"वक्त" पीछे ही_
_पड़ गया मेरे!_😓

_सोचा था घर बनाकर_
_बैठूँगा "सुकून" से,_

-पर घर की जरूरतों ने_
_"मुसाफिर" बना डाला मुझे!_

_"सुकून" की बात मत कर-
-बचपन वाला, "इतवार" अब नहीं आता!_😓😥

_जीवन की "भागदौड़" में_
_क्यूँ वक्त के साथ, "रंगत "खो जाती है ?_

-हँसती-खेलती जिन्दगी भी_
_आम हो जाती है!_😢

_एक सबेरा था_
_जब "हँसकर "उठते थे हम,_😊

-और आज कई बार, बिना मुस्कुराए_
_ही "शाम" हो जाती है!_😓

_कितने "दूर" निकल गए_
_रिश्तों को निभाते-निभाते,_😘

_खुद को "खो" दिया हमने_
_अपनों को "पाते-पाते"।_😥

_लोग कहते हैं_
_हम "मुस्कुराते "बहुत हैं,_😊

_और हम थक गए_,
_"दर्द छुपाते-छुपाते"!😥😥

_खुश हूँ और सबको_
_"खुश "रखता हूँ,_

_ *"लापरवाह" हूँ ख़ुद के लिए_*
*-मगर सबकी "परवाह" करता हूँ।_😇🙏*

*_मालूम है_*
*कोई मोल नहीं है "मेरा" फिर भी_*

*कुछ "अनमोल" लोगों से_*
*-"रिश्ते" रखता हूँ।*

09/05/2024
21/04/2024

थोड़ा सुकून भी जरूरी है जिन्दगी में.!!
ये जरूरतें तो कभी खत्म नहीं होती.!!

08/04/2024

सुनना पड़ेगा

जीतोगे तो तारीफ
हारोगे तो ताने,

सहना पड़ेगा

अपनों से अपमान
गैरों से मान,

लड़ना पड़ेगा

वक्त हालात किस्मत से
तुम्हें आसानी से कुछ न मिलेगा,

छीनना पड़ेगा

मेहनत से
किस्मत से.....

बहुतों के सच को और ज़िंदगी को बयां कर दिया आपने।

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