29/05/2020
अगर आप मैथमेटिक्स के दुनिया में कुछ नया और बड़ा करना चाहते हैं तब “चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टिट्यूट” में जरुर एडमिशन के लिए प्लान करें | कैसे, पढ़ें आज के दैनिक भास्कर में | प्रतिभा किसी प्रश्रय की मोहताज नहीं होती है। वह अपने बलबूते पर हवा का रुख मोड़कर समय और समाज में हस्तक्षेप करती है। फिर क्षेत्र चाहे साहित्य का हो या गणित का। हमारे देश में ऐसे ही गणितज्ञों की एक लम्बी फेहरिस्त है, जिनकी नई सोच ने पूरी दुनिया को बदल दिया है। वह चाहे आर्यभट के द्वारा शून्य का अविष्कार हो या ब्रह्मगुप्त द्वारा द्विघात समीकरण का हल हो या फिर नंबर्स थ्योरी में श्रीनिवास रामानुजन का योगदान। आने वाली पीढ़ियां भी गणित के क्षेत्र में दुनिया को कुछ नया दे सकें, इसी लिहाज से 1989 में ‘चेन्नई मैथेमैटिकल इंस्टीट्यूट’ (सीएमआई) की शुरुआत की गयी। बहुत कम समय में ही सीएमआई की पहचान विश्व स्तर पर बन गई है। इस संस्थान में कम्प्यूटर साइंस तथा मैथेमैटिक्स में काफी स्तरीय रिसर्च हो रहे हैं।
भारत सरकार द्वारा 1996 से सीएमआई को ऑटोनॉमस संस्थान का दर्जा भी मिल गया है। यहां मैथेमैटिक्स में बीएससी तथा एमएससी की पढ़ाई भी होती है। लेकिन, हमारे देश में बहुत ही कम विद्यार्थियों को इतने अच्छे संस्थान के बारे में जानकारी है। आज चर्चा करेंगे सीएमआई और इसमे दाखिले की प्रक्रिया के बारे में। सीएमआई में स्टूडेंट्स को पढ़ाने का तरीका एकदम अलग है। यहां कुछ इस तरह से पढ़ाने का प्रयास किया जाता है कि स्टूडेंट्स में कुछ नया सोचने की प्रवृति जाग सके। कुछ इनोवेशन कर सकें। यूरोप और अमेरिका के स्टूडेंट्स के मुकाबले में खड़ा करने के उद्देश्य से यहां का सिलेबस भी अलग से बनाया गया है। यही कारण है कि यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को एमआईटी, हावर्ड, येल तथा प्रिन्सटन जैसे विश्वविद्यालयों में पूरे स्कालरशिप के साथ पढ़ने का मौका मिल जाता है।
पीएचडी तथा एमएससी प्रोग्राम में भी दाखिले का प्रावधान है। लेकिन, अगर आप मैथेमैटिक्स में ही अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं तब यहां बीएससी में एडमिशन लेना सबसे अच्छा निर्णय है। अब यहां बीएससी फिजिक्स की भी पढ़ाई शुरू हो गयी है। एडमिशन के लिए स्टूडेंट को मैथेमैटिक्स के साथ बारहवीं कक्षा पास होना जरूरी है। हर साल बीएससी मैथेमैटिक्स तथा फिजिक्स दोनों के लिए एक ही प्रवेश-परीक्षा होती है। जिसमे सिर्फ मैथेमैटिक्स से ही सवाल पूछे जाते हैं। 3 घंटे की परीक्षा में सवाल दो भागों में बटे होते हैं। पहले भाग में 10 छोटे सवाल होते हैं, जिनका संक्षिप्त जवाब देना होता है। लेकिन, दूसरे भाग के 6 बड़े सवालों का जवाब बहुत विस्तार से देना पड़ता है। ज्यादातर सवाल कैलकुलस, एल्जेब्रा, ज्योमेट्री तथा ट्रिगोनोमेट्री से होते हैं। और हां, अगर कोई विद्यार्थी इंटरनेशनल या नेशनल मैथेमैटिक्स या फिजिक्स ओलिंपियाड का विनर है तब उसे एडमिशन के लिए प्रवेश-परीक्षा देने की जरूरत नहीं है। प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ किताबें बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। जैसे आईए मैरून की कैलकुलस। एसएल लोनी की ज्योमेट्री तथा ट्रिगोनोमेट्री तथा हॉल एंड नाईट की एल्जेब्रा। आईआईटी प्रवेश-परीक्षा में पूछे गए पुराने सवालों की प्रैक्टिस से भी बहुत फायदा मिलेगा। कुछ रीजनल तथा नेशनल मैथेमैटिकल ओलिंपियाड के सवाल भी प्रैक्टिस में मददगार साबित होंगे।
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