एक ख्याल था की कुछ बदलाव देश की शहर की व्यवस्था में मेरा भी हो
जो हो रहा है कुछ उससे बेहतर कर सके
पर अकेले शायद ये संभव नहीं पर चाहत है
आज भी
कुछ करने की और उसके लिए आज की युवा पीढ़ी के कुछ लोग जो बदलाव से जुड़ना चाहे मुझसे जुड़ सकते हैं
हम मिलकर कुछ नया कुछ बेहतर समाज बनाने की मेरी योजना को शायद कुछ कदम और आगे बढ़ा सके
School Station
We intend to be a starting point in your search to explore alternatives in education.
दरअसल आप सच को स्वीकार ही करना नहीं चाहते।
कभी बोरे में, कभी सूटकेस तो कभी फ्रिज में मिलती लड़कियों की लाशों पर लोग यह मान लेते हैं कि लड़की उदण्ड थी, परिवार की बात नहीं सुनी सो अपनी करनी का फल पा गयी। वस्तुतः यह 99% मामलों में गलत आकलन होता है।
सच यह है कि लड़की फँसती नहीं, फँसाई जाती है। उसके चारों ओर इतना मजबूत जाल बनाया जाता है कि अंततः उसे फंसना ही होता है। लड़के का सहयोग करने वाले हजार होते हैं, पर लड़की को किसी ने बताया तक नहीं होता है कि इन लुटेरों से दूर रहना है।
गाँव में मैट्रिक इंटर में पढ़ने वाली अधिकांश लड़कियां ना तो सोशल मीडिया से जुड़ी हैं, ना ही अखबार पढ़ती या समाचार देखती हैं। जो सोशल मीडिया में हैं भी, वे अपनी सहेलियों, दोस्तों से जुड़ी गीत, गजल शायरी में डूबी हैं। परिवार के लोगों ने कभी ढंग से समझाया तक नहीं होता कि ऐसे लड़कों से दूर रहना है। भरोसा नहीं होता तो अपने पड़ोस की किसी इंटरमीडिएट की स्टूडेंट से पूछिये कि क्या वह इस तरह की सूटकेस वाली घटनाओं को जानती है। आपको उत्तर 'नहीं' में ही मिलेगा।
लड़की का क्या दोष? वह टीवी देखती है, वहाँ प्यार पसरा हुआ है। इंस्टा, फेसबुक पर भी लभ वाली शायरी पसरी हुई है। गार्जियन उससे मिलते भी हैं तो रिजल्ट पर बात करते हैं। धर्म तो कभी बातचीत का हिस्सा ही नहीं होता। वैसी लड़की किसी शिकारी के जाल से कहाँ बच पाएगी?
टीवी पर, स्कूल-कॉलेज में, खेलकूद में, अखबार पत्रिका में, कोर्स की किताबों तक में सेक्युलरिज्म की महिमा गायी जा रही है। ऐसे समय में यदि परिवार भी बच्चों से धर्म को लेकर बात नहीं करे तो फिर बच्ची कैसे समझेगी? ऐसी लड़की को कोई आफताब मिलता है जिसने अपनी फेसबुक आईडी तक में धर्म के कॉलम में "मानवता" लिखा है, और प्रेम की मूर्ति बना उसकी दुनिया बदल देने के दावे करता है, तो उसके लिए बचना आसान है क्या? उसे तो सब सामान्य ही लगेगा न?
और जब लड़की फँस जाती है तो लोग उसे ही गाली देने लगते हैं। लोग भूल जाते हैं कि वह "शिकार" है। जो विरोध शिकारी का होना चाहिये, वह शिकार का होने लगता है। सच यह है कि एक बार फँस जाने के बाद बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता लड़की के पास। एक ओर से इमोशनल ब्लैकमेलिंग तो दूसरी ओर से फोटो वीडियो वायरल करने का भय। कुछ भी कीजिये, वह नहीं निकल पाती।
सूटकेस या फ्रीज में लाश बन कर पड़ी लड़कियों पर हँस कर आप मुद्दे का मजाक भले बना लें, इस भयावह बीमारी को दूर नहीं कर सकेंगे। इसे दूर करने के लिए आपको पीड़ित का नहीं, शिकारी का विरोध करना होगा।
इस भयावह बीमारी पर बात कीजिये, अपने अड़ोस-पड़ोस में चर्चा कीजिये, बच्चियों को बताइये कि वे टारगेट पर हैं। तब बीमारी खत्म हो पाएगी। हँस कर आप शिकारी का मनोबल ही बढ़ा रहे हैं।
11/11/2022
जीवन में इतना सच और इतना स्पष्ट रह कर भी दुनिया की नज़र में कामयाब और चमकना बड़ी बात है
देखिए शायद पाँच मिनट देख ने के बाद पूरा देख ले और उसके बाद लगे की शायद कोई seminar पहली बार ही देख पाए हो आप
Ashneer Grover most inspiring session for youth|Must Watch|Inspiring youth Watch Ashneer Grover having a seminar in LPU to inspire youth and motivate. He is no actor but pure business mind and is one of the best talks with no drama #...
तुम रक्षक काहू को डरना !
बाल्यकाल से ही हनुमान चालीसा सुनता आ रहा हूं। जब भी डर लगता है तो मैं हनुमान चालीसा मन में या मंद आवाज में बोलने लग जाता हूँ। थोड़ी देर बाद डर कहां चला जाता है, पता ही नही चलता। इसी हनुमान चालीसा में एक दोहा है -
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डरना ॥
इसमे तुलसीदास जी कह रहे है कि जो भी आपकी शरण में आते है उन को सभी प्रकार का सुख प्राप्त हो जाता है और आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।
जब मैं वाल्मीकि रामायण पढ़ रहा था तब एक घटना पढ़ने पर मुझे इस दोहे की याद आ गयी।
जब युद्ध में इंद्रजीत ने ब्रह्मास्त्र से प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी सहित सम्पूर्ण सेना को मरणासन्न कर दिया था। तब हनुमान जी ने ही सबके प्राणों की रक्षा की थी।
जब सब लोग घायल होकर अचेत थे तब जाम्बवान् जी, विभीषण जी से बोले -
अञ्जना सुप्रजा येन मातरिश्वा च सुव्रत ।
हनूमान् वानरश्रेष्ठः प्राणान् धारयते क्वचित् ॥
हे उत्तम व्रतके पालक विभीषण! यह तो बताओ, जिनको जन्म देनेसे अञ्जनादेवी उत्तम पुत्रकी जननी और वायुदेव श्रेष्ठ पुत्रके जनक माने जाते हैं, वे वानरश्रेष्ठ हनुमान् कहीं जीवित हैं?
अस्मिञ्जीवति वीरे तु हृतमप्यहतं बलम् ।
हनूमत्युज्झितप्राणे जीवन्तोऽपि मृता वयम् ॥
यदि वीरवर हनुमान् जीवित हों तो यह मरी हुई सेना भी जीवित ही है, ऐसा समझना चाहिये और यदि उनके प्राण निकल गये हों तो हमलोग जीते हुए भी मरे हुए के ही समान हैं।
धरते मारुतिस्तात मारुतप्रतिमो यदि ।
वैश्वानरसमो वीर्ये जीविताशा ततो भवेत् ॥
तात! यदि वायुके समान वेगशाली और अग्निके समान पराक्रमी पवनकुमार हनुमान् जीवित हैं तो हम सबके जीवित होनेकी आशा की जा सकती है।
(वा. रा. युद्धकाण्ड सर्ग 74)
इसके बाद हनुमान जी ने जाम्बवान् जी द्वारा बताए गए स्थान से औषधियों का पर्वत ही उठा कर ले आये। सभी लोग उन औषधियों के प्रयोग से स्वस्थ हो गए।
यह प्रसंग पढ़ते हुए मन खुद ही गाने लगा -
कोऽऽऽ नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो....
हमारी पीढ़ी ने ये सुना था की
मेरे देश की मिट्टी सोना उगले
उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती
पर ये मौक़ा आने वाली पीढ़ी को भी दें
हीरे मोती ना सही पर सुकून उगलने लायक़ तो इस
ज़मीन को रहने ही दें ताकि ज़मीन उपजाऊ रह जाए और सब पथर ना हो जाए
14/04/2022
Inspiring and innovative.
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🌏 *Nalmitha and Darshan* took their commitment to the Save Soil movement a step further.
💫Inspired by the Save Soil Movement and to raise awareness, this *young couple* from Karnataka have dedicated one part of their _*wedding invite*_ for Save Soil content to educate their friends and relatives about save soil movement 🔔 💐💐
🌱 *Save Soil, Let us make it happen!* 🥁🎷be a part of change.
Let’s make it happen.
शिक्षा का उदेशय सिर्फ़ बचो को शिक्षा दे कर पैसे कमाने लायक़ बनाना नहीं है बल्कि ऐसे लोग तयार करना है जिनके समाज के प्रति समवेदना हो। मेरा प्रयास है की अब मै अपने इस छोटे से मंच का प्रयोग उस शिक्षा के लिए करूँ जिसकी ज़रूरत आप और मुझे हम सबको है नाकि सिर्फ़ आने वाली पीढ़ी के लिए ।
सबसे पहले आज की पीढ़ी समझदार और लायक़ होगी तो आने वाली पीढ़ी जीने लायक़ हो सकेगी। ज़रूरत है समझने की मिट्टी की अहमियत को समझने की । जिस तरीक़े से हम लगे हुए आने वाले पीढ़ी के पास सिर्फ़ रेत होगी मिट्टी नहीं जिससे कोई पेड़ फल नहीं उगेगा।
*कोविड वेक्सिनेशन कैंप सूचना *
आप सभी को सूचित किया जाता है कि भारत विकास परिषद भगत सिंह शाखा के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक कोविड टीकाकरण शिविर रविवार 9 मई, 2021 को आयोजित किया जा रहा है।
समय : प्रातः 10:00 से 2:00 तक
स्थान : जीवनराम बशेशर लाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जनता कालोनी नज़दीक जागरण पार्क, रोहतक।
नोट :
#शिविर में 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को कोरोना की वेक्सिन लगाई जायेगी।
# शिविर में कोविशिल्ड वेक्सिन की दूसरे डोज़ भी लगाई जाएगी।
# अपने साथ अपना आधार कार्ड अवश्य साथ लाएं।
# *दो गज़ दूरी मास्क़ है ज़रूरी*
दीपक जिंदल (अध्यक्ष)
सुनील जैन (सचिव)
सतीश गोयल (कोषाध्यक्ष)
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