Dr. Jai Singh Malik

Dr. Jai Singh Malik

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Principal at SWAMI NITANAND SR. SEC. SCHOOL, Near Jannat Banquet Hall, Rohtak

05/09/2020

Happy Teacher's day to our beloved Late Dr. Jai Singh Malik sir.

06/03/2019

योग कर्मसु कौशलम्

Yoga is doing the works in an efficient manner...

Or conversely, if you are efficient in doing works, you are a veritable Yogi...

04/03/2019

At the sunset,
Rose a Nation
out of slumber...
out of lethargy...
out of procrastination...

Believing in Itself...
Trusting in Valour...
Decisive, Strong and Willed

अभिनंदन

26/05/2018
21/05/2018

Here is a pic shared by our friend Yogesh Ohlan. He took this pic two years back, and loves our institute the most. This open space where we met daily for morning prayers is witness to our achievements, mischief and antics.

Tag yourself and your friends and please continue sharing such pictures and stories.

yours truly
Vikram

12/05/2018

Common name and IUPAC name of CH3CHO ?

12/05/2018

Hello everyone. Thank you everyone for contributing to this page. Few previous students of our beloved Dr. Jai Singh Sir are managing this page under guidance of Sh. Sumit Malik. I am one of co-managers. And I would like you all to contribute as much as you can to this page. If anyone of you have any pictures photos etc related to our prestigious institute or Dr. Jai Singh Sir, please email me along with few words about the picture, time/year taken, any other story or instance related to it. We would love to share it here on this page for everyone. My personal email is given below.

Your friend
Vikram Dalal
2007 Batch(XII)
[email protected]

Photos from Dr. Jai Singh Malik's post 03/09/2016
08/01/2016

May this new year bring joy and wonderful opportunities for everyone. We all should resolve to follow our dreams with courage and determination. God bless you all. Stay connected.

15/07/2015

Hey.....
how are you......

26/06/2015

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद कौन हैं ?
और क्यों
जनता अक्सर उन्हें भारतरत्न देने की मांग करती है...?

=================

1. स्वतंत्रता के पहले जब भारतीय हॉकी टीम विदेशी दौरे पर थी,
भारत ने 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते.
और
खेले गए 48 मैचो में से सभी 48 मैच भारत ने जीते.

2. भारत 20 वर्षो से हॉकी में अपराजेय था.
हमने अमेरिका को खेले गए सभी मेचो में करारी मात दी,
इसी के चलते अमेरिका ने कुछ वर्षों तक भारत पर प्रतिबन्ध लगा दिया था,

3. ध्यानचंद के प्रशंसको की लिस्ट में हिटलर का नाम सबसे ऊपर आता है.
हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मनी की नागरिकता लेने के लिए प्रार्थना की,
साथ ही जर्मनी की ओर से खेलने के लिए आमंत्रित किया'

उसके बदले उन्हें सेना में अधिकारी का पद और बहुत सारा पैसा देने की बात कही.
लेकिन
जवाब में ध्यानचंद ने उन्हें कहा कि
"मैं पैसों के लिए नहीं देश के लिए खेलता हूँ...!"

4.कैसे हिटलर ध्यानचंद के प्रशंसक बने?
जब जर्मनी में हॉकी वर्ल्डकप चल रहा था.
तब एक मैच के दौरान जर्मनी के गोल कीपर ने उन्हें घायल कर दिया.
इसी बात का बदला लेने के लिए ध्यानचंद ने टीम के सभी खिलाडियों के साथ एक योजना बनाई,
भारतीय टीम ने गोल तक बॉल पहुचाने के बाद भी गोल नहीं किया,,
और
बॉल को वहीं छोड़ दिया.
यह जर्मनी के लिए बहुत शर्म की बात थी.

5. एक मैच ऐसा भी था,
जिसमे ध्यानचंद एक भी गोल नहीं कर पा रहे थे .
इस बीच
उन्होंने रेफरी से कहा-
"मुझे मैदान की लम्बाई कम लग रही है..!"
जांच करने पर ध्यानचंद सही पाए गए,
और मैदान को ठीक किया गया.

उसके बाद ध्यानचंद ने उसी मैच में 8 गोल दागे.

6. वे एक अकेले भारतीय थे जिन्होंने आजादी से पहले भारत में ही नहीं जर्मनी में भी भारतीय झंडे को फहराया.

उस समय हम अंग्रेजो के गुलाम हुआ करते थे,
भारतीय ध्वज पर प्रतिबंध था.
इसलिए उन्होंने ध्वज को अपनी नाईटड्रेस में छुपाया और उसे जर्मनी ले गए.
इस पर अंग्रेजी शासन के अनुसार उन्हें कारावास
हो सकती थी,
लेकिन हिटलर ने ऐसा नहीं किया.

7. जीवन के अंतिम समय में उनके पास खाने के लिए पैसे नहीं थे.
इसी दौरान
जर्मनी और अमेरिका ने उन्हें कोच का पद ऑफर किया लेकिन उन्होंने यह कहकर नकार दिया कि
"अगर मैं उन्हें हॉकी खेलना सिखाता हूँ,
तो भारत और अधिक
समय तक विश्व चैंपियन नहीं रहेगा..!"

लेकिन भारत की सरकार ने उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं की
तदुपरांत भारतीय आर्मी ने उनकी मदद की.

एक बार ध्यानचंद अहमदाबाद में एक हॉकी मैच देखने गए. लेकिन,
उन्हें स्टेडियम में प्रवेश नहीं दिया गया,
स्टेडियम संचालको ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया .
इसी मैच में जवाहरलाल नेहरु भी उपस्थित थे..

8. आख़िरकार क्रिकेट के आदर्श सर डॉन ब्रेडमैन ने कहा "मैं ध्यानचंद का बहुत
बड़ा प्रशंसक हूँ,
मेरे रन बनाने से भी ज्यादा आसानी से वे गोल करते है,"
9.एक मैच मे उनके द्वारा गोल पर गोल करने से विरोधी टीम ने कहा की उनकी हॉकी को तोड़ के देखा जाना चाहिए सायद उसमे कोई चुम्बक का प्रयोग किया गया है क्योकि जब उनके पास बाल होती है तो वो उनसे चुम्बक की तरह चिपक सी जाती है और हमारे तीन तीन खिलाडी भी बाल उनसे छीन नही पाते है और उनकी हॉकी को तोड़ कर देखा गया जो की लकड़ी की बनी हुई थी । उस पर ध्यानचंद जी ने कहा माना की मेरी हॉकी में चुम्बक लगा हो पर पहले आप ये बताये की क्या आपकी बोल लोहे की है ।

अब
आप बताएं क्या ध्यानचंद की उपलब्धियां
भारतरत्न के लिए पर्याप्त नहीं है..???

यह चौंकाने वाली बात है
कि
भारत सरकार ने उन्हें भारतरत्न नहीं दिया,

लेकिन,

लगभग 50 से भी अधिक देशों द्वारा उन्हें 400 से अधिक अवार्ड प्राप्त हुए.

नतमस्तक हैं हम
ऐसी महान हस्ती के समक्ष !!

क्या हम सब मिलकर सरकार का ध्यान
इस महान व्यक्तित्व की ओर नहीं खींच सकते..?

आइये हम सब मिल कर इस पोस्ट को इतना फैला दें
कि
सरकार स्वयं सोचने पर मजबूर हो जाये,
और मेजर ध्यानचंद को भारतरत्न मिल सके !

आप सभी से
विनम्र निवेदन-
उपरोक्त मेसेज को अपने सभी कॉन्टेक्ट्स तक अवश्य पहुंचायें,
और
आगे हर किसी को फॉरवर्ड करने का अनुरोध करें...!

जय भारत !!!!

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