नव धर्मान्तरित ज्यादा खतरनाक होते हैं
भाग-3: मोहम्मद अली जिन्ना
(कारण, नव धर्मान्तरित को साबित करना होता है कि 1. जिस नाले में उसने डुबकी लगाई है वह पवित्र गंगाजल से बेहतर है और 2. उसे नाले में रहने केलिए अनुकूलित होना पड़ता है।)
बेशक पाकिस्तान का जन्म धर्म के आधार पर हुआ और उसके संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना था पर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के पिता हिंदू परिवार में पैदा हुए थे। एक नाराजगी के चलते उन्होंने अपना धर्म बदल लिया। वो मुस्लिम बन गए। ताजिंदगी न केवल इसी धर्म के साथ रहे बल्कि उनके बच्चों ने इसी धर्म का पालन किया। बाद में तो मोहम्मद अली जिन्ना ने धर्म के आधार पर पाकिस्तान ही बनवा डाला।
जिन्ना का परिवार मुख्य तौर पर गुजरात के काठियावाड़ का रहने वाला था। उनके दादा का नाम पूंजाभाई मेघजी ठक्कर था। वो हिंदू थे। वो काठियावाड़ के गांव पनेली के रहने वाले थे। पूंजाभाई ने मछली के कारोबार से बहुत पैसा कमाया। वो ऐसे व्यापारी थे, जिनका कारोबार विदेशों में भी था। पूंजाभाई लोहना जाति से ताल्लुक रखते थे और उनकी बिरादरी वालों को उनका ये बिजनेस नापसंद था। लोहना कट्टर तौर पर शाकाहारी थे और धार्मिक तौर पर मांसाहार से सख्त परहेज ही नहीं करते थे बल्कि उससे दूर रहते थे। लोहाना मूल तौर पर वैश्य होते हैं, जो गुजरात, सिंध और कच्छ में होते हैं। कुछ लोहाना राजपूत जाति से भी ताल्लुक रखते हैं। (नोट: लोहान राजपूत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पुत्र लव के वंशज माने जाते हैं। लाहौर शहर और लाहौर का किला लोहानों ने ही बनबाया था। लोहान क्षत्रिय और जिन्ना का लोहाना वैश्य एक ही हैं या अलग इस पर शोध जारी है। हालाँकि Encyclopadeia Britanicca में मोहम्मद अली जिन्ना के पूर्वज को लोहान राजपूत ही बताया गया है)
मछली के कारोबार ने कराया जाति से बहिष्कार
जब पूंजाभाई ने मछली का कारोबार शुरू किया और वो इससे पैसा कमाने लगे तो उनके ही जाति से इसका विरोध होना शुरू हो गया। उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने इस बिजनेस से हाथ नहीं खींचे तो उन्हें जाति से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। पूंजाभाई ने बिजनेस जारी रखने के साथ जाति समुदाय में लौटने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी। उनका बहिष्कार जारी रहा।
इस बहिष्कार के बाद भी पूंजाभाई तो लगातार हिंदू बने रहे लेकिन उनके बेटे जेनाभाई पुंजा ठक्कर को पिता और परिवार का बहिष्कार इतना अपमानजनक लगा कि उन्होंने गुस्से में पत्नी के साथ तब तक हो चुके अपने चारों बेटों का धर्म ही बदल डाला। वो लोग मुस्लिम बन गए।
हालांकि पूंजाभाई के बाकी बेटे हिंदू धर्म में ही रहे। इसके बाद जिन्ना के पिता जेनाभाई पुंजा ठक्कर के रास्ते अपने भाइयों और रिश्तेदारों तक से अलग हो गए। वो काठियावाड़ से कराची चले गए। वहां उनका बिजनेस और फला-फूला। वो इतने समृद्ध व्यापारी बन गए कि उनकी कंपनी का आफिस लंदन तक में खुल गया। कहा जाता है कि जिन्ना के बहुत से रिश्तेदार अब भी हिंदू हैं और गुजरात में रहते हैं।
डॉ हरि देसाई कहते हैं, ''बाद में जेनाभाई पूंजा ठक्कर हिन्दू बनना भी चाहते थे लेकिन लोगों ने स्वीकार नहीं किया। उनके पुत्र मोहम्मद अली जेनाभाई व्यवसाय के लिए कराची गए। मोहम्मद अली जेनाभाई ने बाद में अपने नाम का अंग्रेज़ीकरण करते हुए जिन्ना कर लिया था। जिन्ना लंदन पढ़ाई करने नहीं बल्कि बिज़नेस के लिए गए थे। बाद में उन्होंने वहाँ बैरिस्ट्री की पढ़ाई शुरू कर दी थी। जिन्ना की जिस लड़की से शादी हुई उसका नाम एमीबाई था। जिन्ना की माँ चाहती थीं कि विदेश जाने से पहले शादी हो जाए ताकि लंदन में किसी गोरी लड़की से शादी ना कर ले। जिन्ना ने बाद में एक पारसी लड़की से शादी की थी।''
शुरू में धार्मिक पहचान से परहेज करते थे जिन्ना
जिन्ना के परिवार के सभी लोग न केवल मुस्लिम हो गए बल्कि इसी धर्म में अपनी पहचान बनाई। हालांकि पिता-मां ने अपने बच्चों की परवरिश खुले धार्मिक माहौल में की। जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों का प्रभाव था। इसलिए जिन्ना शुरुआत में धार्मिक तौर पर काफी ओपन और उदारवादी थे। वह लंबे समय तक लंदन में रहे। मुस्लिम लीग में आने से पहले उनके जीने का अंदाज मुस्लिम धर्म से एकदम अलग था। शुरुआती दौर में वह खुद की पहचान मुस्लिम बताए जाने से भी परहेज करते थे। लेकिन सियासत उन्हें न केवल उन्हें उस मुस्लिम लीग की ओर ले गई, जिसके एक जमाने में वो खुद कट्टर आलोचक थे। बाद में वो धार्मिक आधार पर ही पाकिस्तान के ऐसे पैरोकार बने कि देश के दो टुकड़े ही करा डाले। हालाँकि आधुनिक शोधों से पता चलता है कि मोहम्मद अली जिन्ना को कट्टर, हिन्दू विरोधी और भारत को टुकड़े कर पाकिस्तान बनाने की नौबत तक लाने वाला “शैतान शायर मोहम्मद इक़बाल” था जिसकी चर्चा हम अगले लेख में करेंगे। मोहम्मद इक़बाल का बाप रामलाल भी हिन्दू पैदा हुआ था। धर्म के आधार पर भारत विभाजन केलिए ये दोनों शैतान बराबर के जिम्मेदार थे।
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