Sultan salauddin Ayyubi सुल्तान सलाउद्दीन अय्युबी

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Sultan salauddin Ayyubi सुल्तान सलाउद्दीन अय्युबी Islamic history

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19/10/2023

*_हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 6_*

मुसलमानों की तारीख देखें। उनके रसूले अकरमﷺ ) के बाद ये लोग ख़िलाफ़त पर एक दूसरे से लड़ते रहे। उनके जरनलयों ने निहायत दियानत दारी से अपना काम जारी रखा। वह दूसरे मुल्कों को तहो तेग़ करते रहे और इसलामी सलतनत को वसीअ करते रहे। लेकिन उनके ख़लीफों ने जहां देखा कि फलां जरनल एसा मकबूल हो गया है कि उस की फतुहात की बदौलत कौम उसे ख़लीफा से ज़्यादा मुकाम देने लगी है तो ख़लीफा उसके हव्वारीयों ने उस जरनल को ग़लत अहकाम देकर उसे ज़लील और रुसवा कर दिया। खुद खलीफा की गद्दी मुखालीफीन से महफूज़ न रही। मुखालिफीन की निगाह इसलामी सलतनत की वुसअत से हट कर ख़िलाफ़त के हुसूल पर मरकूज़ हो गई। नतीजे में हारते चले गये और उनके फतह किये हुए इलाके उनके हाथों से निकलते चले गये। इसी का नतीजा है कि आज हम अरब में बैठे हैं। सलाउद्दीन अय्यूबी इन्हीं जरनल में से है जो सलतनत को उन्हीं सरहदों तक ले जाना चाहता है जहां तक उन जरनैलों ने पहुंचाई थीं। उस शख़्श में खूबी ये है कि वह इन्तिज़ामिया और ख़िलाफ़त की परवाह नहीं करता। उसने मिस्र की ख़िलाफ़त को अपने इरादों के सामने रुकावट बनते देखा तो ख़लीफ़ा को ही माजूल कर दिया।
ये दिलेराना कदम उसने फौजी ताकत और अपनी फहम व फरासत के बल बूते पर उठाया है।"
हरमन बोलता जा रहा था। तमाम हुक्मरां और सलीबी कमाण्डर इनहिमाक से सुन रहे थे। वह कह रहा था...." सलाउद्दीन अय्यूबी अपनी कौम की इस कमज़ोरी को समझ गया है
कि गैर फौजी कियादत गद्दी की ख्वाहिश मन्द है और ये ख्वाहिश ऐसी है जो ज़न और ज़र परसती और शराब नोशी जैसी आदतें पैदा करती हैं। हमने सिर्फ उन फौजी अफसरों को हाथ में लिया है जो इक्तदार के ख्वाहिश मन्द हैं। इसी लिये हम ज़्यादा तर असर इन्तिज़ामिया के सरबराहों पर डाल रहें हैं। फ़ौज को कमज़ोर करने का तरीका ये है कि उसे लोगों कि नज़रों में रुसवा कर दिया जाये। यह काम मेरा है जो मैं कर रहा हूं। आप शायद मेरी ताईद
न करें लेकिन मैं आपको बता देना चाहता हूं कि आप सलाउद्दीन अय्यूबी को मैदाने जंग में आसानी से शिकस्त नहीं दे सकते। वह सिर्फ लड़ने के लिये नही लड़ता। उसकी अज़्म की बुनयाद एक एसे मनसूबे पर हैं जिसे उसकी सारी फ़ौज समझती है। उसकी बुन्यादी खूबी यह है कि वह अपने ख़लीफा से या गैर फौजी कियादत से हुक्म नहीं लेता। वह कट्टर मुसलमान है।
वह कहता है कि मैं खुदा और कुरआन से हुक्म लेता हूं। मेरे जो जासूस बगदाद में हैं उन्होंने इत्तिला दी है कि अय्यूबी ने नूरुद्दीम जंगी को साथ मिला कर यहां से इनकलाबी तजाबीज़ भेजी हैं जिन पर अमल दर आमद शुरू हो गया है। एक यह है कि अमीरे उलमा से ये फतवा सादिर कराया गया है कि ख़िलाफ़त सिर्फ एक होगी और ये बगदाद की ख़िलाफ़त होगी। ये ख़िलाफ़त दूसरे मुमालिक के मुतअल्लिक एहकाम नाफिज़ करने और समझौतों की बात चीत करने से पहले आला फ़ौजी कियादत से मन्जूरी लेगी। जंगी उमूर में फौजी हुक्काम के हाथ में होगें। खलिफा दूर दराज़ इलाकों में लड़ने वाले जरनैलों को कोई हुक्म नही भेज सकता । तिसरे यह कि खलिफा का नाम खुतबे में नहीं लिया जाएगा और ख़िलाफत का असर व रसूख ख़त्म करने के लिये अय्यूबी ने हुक्म जारी करादिया है कि ख़लीफा या उसके नाएब या कोई किला दार वगैरह, जब दौरे वगैरह के लिये बाहर निकलेगें तो लोगों को रास्ते मे खड़े होने, नारे लगाने और सलाम करने की इजाजत नहीं होगी..
📚 *दास्तान ईमान फरोसा की हिस्सा दो पेज 12*

✍🏻✍🏻अली रजवी 8237878378

15/09/2023

*_हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 5_*

काहरा से उस की गैर हाज़री से बहुत फाइदा उठाया है। काहिरा के नाएब माज़िम मुसलिहुद्दीन को फांतमियों ने अपने साथ मिला लिया है। मुसलिहूद्दीन अय्यूबी का भोतमदे खास है लेकिन अब हमारे हाथ में है। फातमियों ने दर परदा एक ख़लीफा मुकर्रर कर दिया है। वह काहिरा के अन्दर से बगावत और सूडानियों के हमले का इन्तजार कर रहें है। हमारे फौजी अफसर सूडान में सूडानियों की फौज तय्यार कर रहें हैं काहिरा में जो सुलतान अय्यूबी फौज छोड़ आया है, उसके दो नाएब सालार हमारे हाथ में खेल रहे हैं। उधर से सूडानी हमला करेंगे । काहिरा में बगावत होगी और फातमी अपनी ख़िलाफ़त का ऐलान कर देगें।"
'तुम लोग ये भूल रहे हो कि सलाऊद्दीन अय्यूबी इस क़दर तेज़ है कि करक पर हमला करके काहिरा पहुंच जाएगा।" रिमाण्ड ने कहा। ....... उसे यहीं रहने के लिये मजबूर करने के लिये ज़रूरी है कि उसे यहीं उलझा लिया जाये। इस का एक तरीका यह है कि उसका रास्ता रोक लिया जाये और उसका एक भी सिपाही काहिरा तक न पहुंच सके।"
'मुझे सौ फिसद उम्मीद है कि काहिरा में जो उसकी फ़ौज है वह उसके काम नही आ सकेगी " हरमन ने कहा..... मेरे आदमियों ने फ़ौज में इस किस्म के क़ूक पैदा कर दिये हैं कि इन्हें काहिरा में पीछे छोड़ कर माले गनीमत से महरूम कर दिया गया है और शोबक की सॅकड़ों इसाई लड़कियां सलाऊद्दीन अय्यूबी के हाथ आई हैं जो उसने वहां फौज के हवाले कर दी हैं। मेरी कामयाबी ये है कि मैंने मुसलमान फौजी हुक्काम के ही मुंह में ये अफवाहें डाल कर उनकी फ़ौज में फैलाई हैं। मैंने एसे हालात पैदा कर दियें हैं कि काहिरा की तमाम फ़ौज सूडानीयों का साथ देंगी और सलाऊद्दीन अय्यूबी को बगावत रफा करने के लिये यहां से तमाम अफवाज ले जानी पड़ेगी। मगर यह फ़ौज उस वक़्त वहां पहुंचेगी जब काहिरा एक बार फिर फातमी ख़िलाफत की गद्दी बन चुका होगा और वहां सूडान की फ़ौज काबिज़ होगी ।
ज़रूरी नहीं कि हम यहां सलाहऊद्दीन अय्यूबी पर हमला करें और उसे रोकें। हम उसे भटकने के लिये खुला छोड़ देंगे। हम उसे मुसलमानों के हाथों मरवाएगें।" हरमन ने जोर देकर कहा। आप अभी तक मुसलमान की नफसियात नहीं समझ सके। यही वजह है कि मेरी बाज कारगर बातें नज़र अन्दाज़ कर देते हैं। मुसलमान अगर फौजी हो और उसको टरेनिंग के दौरान उसके दिमाग में ये बिठा दिया जाए कि वह मुल्क और कौम का मुहाफिज़ है तो वह मुल्क और कौम की खातिर जान कुरबान कर देता है। दुनिया की बादशाही उसके कदमों पर रख दो, वह सिपाही रहना पसन्द करेगा कौम से गद्दारी नहीं करेगा। अगर उसी फ़ौज में जिन्सी लज़्ज़त, शराब नोशी और ओहदों की ख्वाहिश पैदा करदो तो वह अपना मज़हब भी दाव पर लगा देता है। हमने जिन मुसलमान फ़ौजी हुक्काम को अपने साथ मिलाया है उनमें यही खामियां पैदा की थीं और कर रहें हैं।"
"मगर फौजी को गद्दार बनाना इतना आसान नही जितना इन्तिज़ामिया के हुक्काम को अपने हाथ मे लेना आसान है।" हरमन ने कहा।" इन्तिजामिया के हर हाकिम में उमरा और वुजरा की सफ़ मे आने की श्दीद ख्वाहिश होती हैं। उन लोगों पर बादशाह बन्ने का खब्त सवार है
📚 *दास्तान ईमान फरोसा की हिस्सा दो पेज 11*

अली रजवी 8237878378

12/09/2023

*_हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 4_*

'इसके बजाए अगर आप उन्हें अपना दोस्त बना लें तो वह आपकी मदद करेंगे।" हरमन ने कहा।" अगर आप मुझे इजाज़त दें तो मैं प्यार और मुहब्बत से उन्हें उनका मज़हब तबदील किये बगैर सलीब का गरवीदा बना लुंगा। मै उन्हीं मुसलामानों को मुसलमानों के ख़िलाफ़ लड़ा दूंगा।"
"तुम भूलं रहे हो हरमन !" एक मशहूर सलीबी बादशाह रिमाण्ड ने कहा...... तुम चन्द मुसलमानों को लालच देकर उन्हें ग़द्दार बना सकते हो मगर हर एक मुसलमान को इसलामी फौज के ख़िलाफ़ नही कर सकते। पूरी कौम ग़द्दार नही हो सकती। हरमन! तुम उन लोगों पर इतना भरोसा न करो। हम उन्हें दोस्त नही बनाना चाहते। हम उनकी नस्ल ख़त्म करना चाहते हैं। कोई भी गैर मुस्लिम किसी मुसलमान के साथ मुहब्बत करता है तो उस का मतलब य है कि वह इसलाम से मुहब्बत करता है जब्कि हमारा मक्सद इसलाम का खातमा है ।
करक मे, अकरा और अदीसा में और जहां भी सलीब की हुक्मरानी है मुसलमानों को इस कदर परीशान करदें कि वह मर जाऐं या वह सलीब के आगे घुटने टेक दें।"
'मुसलमानों के साथ जो कुछ हो रहा है वह सलाऊद्दीन अय्यूबी को बाकायदा मालूम होता जा रहा है।" हरमन ने कहा..... आप उसे उकसा रहे हैं कि वह करक पर जल्दी हमला करे। आप ये भूल रहें हैं कि हमारी फौज फौरी हमले के आगे ठहरने के काबिल नहीं।"
"'उस का हल ये नहीं कि हम यहां के बाशिन्दों को सर पर बिठालें ।" फिलप आगसिटस ने कहा। " आप लोग मुसलमान जनगी को अभी तक पाल रहे हैं। इन्हें कत्ल क्यों नही कर देते?"
"'इस लिये कि अय्यूबी हमारे कैदियों को कत्ल कर डालेगा । "गेआफ लोजिबान ने जवाब दिया...... हमारे पास मुसलमानों के कुल तीन सौ इकसठ जनगी कैदी हैं। मुसलमानों के पास हमारे बारह सौ पचहत्तर कैदी हैं।
"क्या हम एक मुसलमान को मारने के लिये चार सलीबी नही मरवा सकते?"....
आगसटिस ने कहा...... हमारे वह कैदी जो सलाऊद्दीन के पास हैं बुज़दिल थे। वह लड़ने कि बजाए कैद हुए। वह जिन्दा रहना चाहते थे। वह मुसलमानों के हाथों मर जाऐं तो अच्छा है। तुम इतमिनान से मुसलमान कैदियों को ख़त्म कर दो।"
*'क्या मुसलमान बाशिन्दों के साथ दरिन्दो जैसा सूलूक करके और मुसलमान जनगी कैदियों को कत्ल करके तुम सलाउद्दीन अय्यूबी को शिकस्त दे दोगे?" सालार के ओहदे के एक सलीबी ने कहा।..... इस वक्त फ़ौज के साथ मसला ये है कि अय्यूबी पेश कदमी कर आया तो उसे किस तरह रोकेंगें और उस से शोबक का किला वापस किस तरह लिया जा सकता है। करक के तमाम मुसलमानों को क़त्ल करदो। फिर क्या होगा? अय्यूबी की तरह तुम अपनी नज़र में उसअत क्यों नही पैदा करते। क्या हरमन बता सकता है कि मिस्र मे उसकी ज़मीन दूज़ कारवाईयां किया हैं और कामयाबी कितनी है?"
'तवक्को से ज़्यादा हरमन ने जवाब दिया।" अली बिन सुफ़यान सलाऊद्दीन अय्यूबी के साथ शोबक में है
📚 *दास्तान ईमान फरोसा की हिस्सा दो पेज 10*

अली रजवी 8237878378

09/09/2023

*_हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 3_*

अगर हम कुफर के तूफान को न रोकें । तो हम बेग़ैरत हैं और हम मुसलमान नही और अगर इसलाम का दिफा इस अन्दाज़ से करें कि दुशमन का हमला पसपसा कर दिया है तो ये सबूत है हमारी बुज़दिली का । दिफा का तरीका ये होता है कि दुशमन तुम्हें मारने के लिये नियाम से तलवार निकालने लगे तो तुम्हारी तलवार उसकी गरदन काट चूकी हो। वह कल हमले के लिये आने वाला हो तो आज उस पर हमला कर दो।"
'मेरे पास इसका एक ही इलाज है कि मुहतरम नुरूद्दीन जन्गी से कुम्क मांगी जाए अली बिन सुफियान ने कहा। " और करक पर हमला कर दिया जाए।" “ ये भी नुकसान देह होगा... 'सुलतान अय्यूबी ने कहा...... "ज़न्गी के पास इतनी फ़ौज मौजूद रहनी चाहिये कि सलीबी हमारे अकब पर हमला करें तो ज़न्गी उन के अकब पर हमला कर सकें (मैं मदद मांगने का काएल नहीं। इसकी बजाए मैं ये भी कर सकता हूं कि करक में छापे मार दस्ते भेज कर सलीबीयों का जीना हराम किये रखूं। मुझे उम्मीद है कि हमारे जासूस छापा मार सलीबीयों की जड़ें चूहों की तरह काटते रहेंगे मगर उस की सजा वहां के बेगुनाह बाशिन्दों को मिलेगी। छापा मार तो अपना काम करके इधर उधर हो जाऐंगे। वह हर किस्म की सख्ती और मुसीबत झेल सकते हैं। हमारे निहत्ते बहन भाई कुचले जाएगें। अलबत्ता इस तजवीज़ पर गौर करो कि वहां से मुसलमान कुम्बों को निकालने का कोई खुफया इन्तजाम किया जाए। हमले में कुछ वक्त लगेगा। हमें खासी भरती मिल गई है। करक के जवान भी आगऐ हैं और आरहें हैं।"
मैं महसूस करने लगा हूं कि हमें यहां के मुसलमान बाशिन्दों के मुतअल्लिक अपनी पालीसी में तबदीली करनी पड़ेगी।" सलीबीयों के मोहक्माए जासूस और सुरागरसानी के सर बराह हरमन ने कहा किला करक में चन्द एक सलीबी बादशाह, उन के फ़ौजी कमाण्डर और इन्तमज़ामिया के हुकाम जमा थे। वह जुं जुं अपनी हारी हुई फौज को देख रहे थे, उन की अकल पर गुस्सा और इन्तकाम गालिब आता जा रहा था। वह शिकस्त को बहुत जल्दी फतेह में बदलना चहते थे। उन में उनकी इन्टेली जिन्स का सरबराह हरमन, वाहिद आदमी था, जो ठण्डे दिल से सोंचता और अकल की बात करता था। वह देख रहा था कि उस के सलीबी भाई करक के मुसलमान बाशिन्दों के साथ कैसा वहशियाना सुलूक कर रहे हैं। उस ने कहा..... आप ने यही सुलूक शोबक के मुसलमानों के साथ रवा रखा था। इस का नतीजा ये था कि उन्होंने वहां मुसलामानों के कैम्प से उस मुसलमान फ़ौजी को भगा दिया जिसे हम ने ख़तरनाक जासूस समझ कर कैद मे डाल दिया था। मुझे यकीन है कि उसे वहां के मुसलमानों ने पनाह दी थी। वह किले की अन्दुरूनी हालात और दिफा को देख गया था। उस के अलावा सुलतान सलाऊद्दीन अय्यूबी ने हमारे किले की दीवार जो तोड़ी थी इस में अन्दर के मुसलमानों का भी हाथ था। वह आप के इस सुलूक से इस कदर तंग आये हुए थे कि उन्होंने जान की बाज़ी लगाकर मुसलमान फ़ौज की मदद की और जब फ़ौज का हरावल दस्ता अन्दर आया तो मुसलमानों ने उनकी रहनुमाई की।"
'इसी लिये हम करक के मुसलमानों का दम ख़म तोड़ रहें हैं कि उन मे जज़बा और हिम्मत ही न रहे.... एक सलीबी सालार ने कहा
📚 *दास्तान ईमान फरोसा की हिस्सा दो पेज 9*
Ali Razvi
Tarikh e islam
Ali Razvi
अली रजवी 8237878378

08/09/2023

*_हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 2_*

और फौज में भर्ती हों जाऐं ताकि कमक का इन्तज़ार किए बगैर करक पर हमला किया जा सके।" चंगेज़ तुर्क ने कहा। "हमारी मौजूदगी में कुछ लोग वहां से निकल आए थे लेकिन ये काम एक तो इस लिए
मुश्किल है कि हर तरफ सलीबी फ़ौज फैली हुई है और दूसरी मुश्किल ये है कि करक पर हमला किया जाए और मुसलमानों को निजात दिलाई जाए।"
इस से पहले एक और जासूस ये इत्तेला दे चुका था कि सलीबियों की स्कीम अब यह है. कि सुलतान अय्यूबी करक का मुहासरा करेगा तो सलीबियों की एक फ़ौज, जो एक सलीबी हुक्मरान रेमांड के ज़ेरे कमान है, अक़ब से हमला करे गी। सुल्तान अय्यूबी ने पहले ही से अपने फ़ौजी सरबराहों से कह दिया था कि सलीबी अख़ब से हमला करेंगे। इस सूरते हाल के लिए उसे ज़्यादा फौज की ज़रूरत थी। उस ने चंगेज़ को रुखसत करके अली बिन सुफ़ियान से कहा- "जज़बात का तकाज़ा यह है कि हमें फ़ौरन करक पर हमला करदेना चाहिए। मैं अछी तरह जानता हूं कि वहां के मुसलमान किस जहन्नम में पड़े हुए हैं लेकिन हकाइक का तकाजा यह है कि अपनी सफों को मुस्तहकम किए बगैर-आगे एक कदम न उठाओ। ज़र्ब उस वक़्त लगाओ जब तुम्हें यकीन हो कि ज़र्ब कारी होगी। हम उन औरतों और बच्चों को नहीं भूल सकते जो दुश्मन के हाथों ज़लीलो ख्वार और कत्ल हो रहे हैं। ये हमारे गुम्नाम शहीद हैं। ये कौम की अज़ीम कुर्बानी है। मैं उन्हीं की आबरू और उन्हीं के वकार के लिए फिलिस्तीन लेना चाहता हूं। अगर मेरा मक़सद ये न हो तो जंग का मक्सद डाका और लूट मार रह जाता है। वह कौम जो अपनी उन बच्चियों और बच्चों को भूल जाए जो दुश्मन से इन्तकाम लेने की बजाए एक दूसरे को धोके और फरेब देते हैं। उन के हाकिम कौम को लूटते और ऐशो इश्रत करते हैं और जब दुश्मन उन्हें कमजोर पाकर उन के सर आजाता है तो खोखले नारे लगा कर कौम को बेवकूफ बनाते और दुश्मन के साथ दरपरदह सौदा बाज़ी करते हैं। वह अपने मुल्क का कुछ हिस्सा और उस हिस्से की आबादी निहायत राज़ दाराना तरीके से दुशमन के हवाले करके बाकी मुल्क में अपनी हुक्मरानी काएम रखते हैं। फिर वह और ज़ियादा एश और लूट खसूट करते हैं कियोंकि वह जानते हैं कि दुशमन उन्हें बखशेगा नहीं... ये ऐश चन्द रोज़ है लिहाज़ा कौम की रगों से खून का आखरी कतरा भी जल्दी जल्दी निचोड़ लो।”

सुलतान अय्यूबी ने एसी मुतअदद कौमों के नाम लिये और कहा.'वह तौसीअ पसन्द थे। उन के सामने इस के सिवा कोई मक़सद न था कि सारी दुन्या पर बादशाही करें और दुनिया भर की दौलत समेट कर अपने कदमों में ढेर लगा लें। उन्होंने दुसरी कौमों की इसमत दरी की और उन की अपनी बेटियां और बहनें दूसरों के हाथों बेआबरू हुई उन क़ौमों के हुकमरान पराई ज़मीन पर हलाक हुए और उन का नाम व निशान किस ने मिटाया? उन कौमों ने जो ग़ैरत मन्द थीं और जिन्हें एहसास था कि उन की ज़मीन को और उन की इसमत को दुश्मन ने नापाक किया है और उस का इन्तकाम लेना है। हम भी हमला आवर हैं सलेबी भी हमला आवर हैं, लेकिन हम में फर्क है। वह दूर दराज़ मुल्कों से हमारे मज़हब का नाम व निशान मिटाने आयें हैं। वह इस लिये आये हैं कि मुसलमान औरतों को अपनी गिरफत में लेकर उनके बत्न (कोक) से सलीबी पैदा करें। हम उन की आबरू के दिफा के लिये हमला आवर हुए
है 📚 *दास्तान ईमान फरोसा की हिस्सा एक पेज 8*
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Ali Razvi
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अली रजवी 8237878378

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हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 1*काहेरा में बगावत और सुल्तान अय्यूबी*फिलिस्तीन अभी सलीबियों के पांव तले कराह रहा थ...
07/09/2023

हजरत सुल्तान अलाउद्दीन अय्यूबी पोस्ट 1

*काहेरा में बगावत और सुल्तान अय्यूबी*

फिलिस्तीन अभी सलीबियों के पांव तले कराह रहा था। युरो शलम सलीब पर लटका हुआ था। इस मुकद्दस शहर से खून रिस रहा था। वहां के मुसलमान जो सलीबियों के ज़ालिमाना शिकंजे में आए हुए थे। पिस रहे थे, तड़प रहे थे और सलाऊद्दीन अय्यूबी का इन्तज़ार कर रहे थे। उन तक ये इत्लाऐं पहुंच चुकी थीं कि सुल्तान अय्यूबी फिलिस्तीन की सरज़मीन में दाख़िल हो चुका है और शूबक का किला मुसलमानों के कब्ज़े में है। ये उन के लिए खुश ख़बरी की बात थी मगर ये खुशख़बरी पैग़ामे अजल साबित हुई। सलीबियों ने शूबक की शिकस्त का इन्तकाम यरोशलम और दीगर शहरों और कस्बों के मुसलमानों से लेना शुरू कर दिया था। वह मुसलमानों को मुरदह कर देना चाहते थे ताकि वह जासूसी न कर सकें और हमले की सूरत में सलाऊद्दीन अय्यूबी की मदद करने की जुरत न करें। सब से ज़्यादा मज़ालिम करक के मुसलमानों पर तोड़े जारहे थे। शूबक के बाद करक एक बड़ा किला था जिस पर सलीबियों को बहुत नाज़ था. ऐसा ही नाज़ उन्हें शूबक पर भी था मगर उन के नाज़ को सुल्तान सलाऊद्दीन अय्यूबी की निहायत अछी चाल और उस के मुजाहिदीन की शुजाअत ने रेत के ज़रों की तरह बिखेर दिया था। अब सलीबी करक को मज़बूत कर रहे थे। वहां के
मुसलमान बाशिंदों पर तशददुंद एक एहत्याती तदबीर थी। सलीबियों को ये वहम था कि मुसलमान जासूसी करते हैं। चुनानचे उन्हों ने शूबक की तरह मुश्तबह मुसलमानों को बेगार कैम्प में फेंकना शुरू कर दिया था।
"फिलिस्तीन की फ़तह हमारा एक अज़ीम मकसद है मगर करक से मुसलमानों को निकालना उस से भी अज़ीम तर मक्सद होना चाहिऐ।" जासूसों के एक गिरोह का सरबराह सुल्तान सलाऊद्दीन अय्यूबी को बता रहा था। वह तलअत चंगेज़ नामी एक तुर्क था जो छः जासूसों को शूबक से भागते हुए ईसाई बाशिन्दों के बहरूप में करक ले गया था। वह तीन
महीनों बाद वापस आया था। सुल्तान अय्यूबी को अली बिन सुफ़ियान की मौजूदगी में वहां के हालात बता रहा था। सलीबी जो भाग कर करक पहुंचे थे उस के मुतअल्लिक उस ने बताया कि खासी बुरी हालत में है और फौरी तौर पर लड़ने के काबिल नहीं। इस हारी हुई फौज ने. करक में जाते ही मुसलमानों का जीना हराम कर दिया। अन्धा धुन्द गिरिफतारियां शुरू हो गई। मुसलमान औरतों ने बाहर निकलना छोड़ दिया है। जहां इंसान ऐसा मवेशी बन जाता है जो बोल नहीं सकता। सुबह के अंधेरे से रात के अंधेरे तक काम करता, सूखी रोटी और पानी पर ज़िन्दा रहता है। "हम ने वहां ज़मीन दोज़ मुहिम चलाई है कि जितने मुसलमान जवान हैं या लड़ने की उम्र में हैं वह यहां से निकल कर शूबक पहुंचें और फ़ौज में भरती.
📚 *दास्तान ईमान फरोसा की हिस्सा एक पेज 7*

अली रजवी

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Bahut hi jald Muhammad bin  kasim post Start ki jayegi in sha ALLAH.   Aap log fallowup karwaye apne dosto se jazak ALLA...
25/07/2023

Bahut hi jald Muhammad bin kasim post Start ki jayegi in sha ALLAH. Aap log fallowup karwaye apne dosto se jazak ALLAH hu khair

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