फोन पे चर्चा....
ब्रह्माण्ड के सबसे पुराने "ठोकतंत्र के सदर-ए-रियासत औऱ "सबसे बड़े जोकतंत्र " के परिधानमंत्री किसी अहम् विषय पर गंभीर चर्चा करते हुए....
डिस्क ले मर - "फोन पे चर्चा" हर विधि से सर्वथा काल्पनिक है..कृपया ऐसा कोई भी प्रयोग न करें कि संयोग से किसी भी जीवित या अर्धमूर्छित व्यक्ति से इसका सम्बन्ध हो जाए.. मतलब नो संयोग नो प्रयोग... प्लीज
Mukesh Prasad Bahuguna
I consider myself as a poet with soldiers's heart ,
24/03/2026
. खबर है कि चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र पर भारतीय जनता पार्टी की मुहर लगी हुई मिली.. औऱ चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में बताया है कि यह लिपिकीय भूल से हुआ है l
लेकिन खेद की बात है कि देशविरोधी, हिन्दूधर्म विरोधी , विकास विरोधी, चुनाव आयोग विरोधी, मोदी विरोधी, भाजपा विरोधी, अमेरिका विरोधी,पन्ना प्रमुख विरोधी, संत आसाराम एवं बाबा राम रहीम विरोधी किस्म के विपक्षी दल चुनाव आयोग में 18 - 18 घंटे काम करने वाले किसी एक मासूम ईमानदार कर्मठ, लिपिक की छोटी सी लिपिकीय भूल को लेकर बेवजह सवाल उठा रहे हैं l
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग के इस स्पष्टकरण के बाद देश देवतुल्य जनता को सचाई का पता चल ही गया होगा l
तथापि मोदी जी की अपार लोकप्रियता एवं श्री ज्ञानेश कुमार की असंदिग्ध निष्पक्षता से कुढ़ने वाले कुछ कंभक्त जलकुखड़े अब भी यह जानना चाहेंगे कि चुनाव आयोग का क्लर्क भूलवश भाजपा के ऑफिस में चला गया था या भाजपा का कोई प्रचारक रास्ता भटक कर चुनाव आयोग के ऑफिस में पार्टी की मुहर लेकर पहुंच गया था?
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को भाजपा के प्रवक्ता के मिलकर एक साझा प्रेस कांन्फ्रेंस कर मिल्क का मिल्क औऱ वाटर का वाटर कर देना चाहिए, तभी इन दुष्ट विपक्षी दलों के दुष्प्रचार का मुंह तोड़ जवाब दिया जा सकेगा l
भारत माता की जय.. वन्देमातरम्
महत्वपूर्ण तथ्य -
1. यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी विश्व के सबसे अधिक लोकप्रिय नेता हैं, उन्होंने लोकतंत्र में लोकप्रियता के लगभग सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं, अब सिर्फ उत्तरी कोरिया के जननायक माननीय किम जोंग द्वारा 99.93 % मत प्राप्त करने का रिकार्ड तोड़ा जाना बाकी है l
2. हमारा चुनाव आयोग औऱ उसके मुख्य चुनाव आयुक्त वाकई स्वतंत्र औऱ निष्पक्ष हैं, इसमें किंचित भी संदेह नहीं है l
20/01/2026
भविष्य का इतिहास....
हर्ष का विषय है कि धाकड़ धामी जी ने पौड़ी नर्सिंग कालेज का नाम अंकिता भंडारी के नाम पर कर दिया l
दुनिया भर में जिनकी स्मृति में संस्थानों का नाम रखा जाता है, उनका कुछ इतिहास भी होता है, जिसे अक्सर बताया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास से सबक ले सकें l
तो अंकिता भंडारी का इतिहास कुछ यूं याद किया जायेगा भविष्य में l
स्व. अंकिता भंडारी, जिनका जन्म पौड़ी में हुआ था, स्वर्गीय होने के मूड में कभी नहीं रही l मृत्यु के बाद स्वर्गीय होने के बजाय वो ईमानदारी औऱ मेहनत से अपना जीवन व्यतीत करना चाहती थी, ताकि अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला जमीन पर की पंक्तियों को साकार करते हुए स्वयं औऱ अपने बूढ़े माता पिता को स्वर्ग जैसी सुविधाएं इसी धरती पर दे सके l
इसके लिए अंकिता ने एक रिजार्ट में नौकरी करनी शुरू कर दी l रिजार्ट विश्व की सबसे बड़ी संस्कारी पार्टी के माननीय नेता के संस्कारी पुत्र का था l
संस्कारी पुत्र की पहचान संस्कारी पार्टी के कुछ बड़े ही संस्कारी औऱ आचारवान वीआईपी नेताओं से थी, जो अक्सर संस्कारी बालक के रिजार्ट में संस्कार साधना करने आते थे l
ऐसा माना जाता है कि एक दिन गट्टू निकनेमधारी बड़ा संस्कारी राष्ट्रवादी देशभक्त किस्म का कोई वीआईपी इस रिजार्ट में आया l अंकिता को कहा गया कि इस देवतुल्य वीआईपी को स्पेशल सर्विस दे l
चूंकि अंकिता अभी कम उम्र की बालिका ही थी अतः उसके अंदर संस्कारी पार्टी के वीआईपी नेता की तरह विशेष संस्कार नहीं सीखे थे, तो उसने स्पेशल सर्विस देने से मना कर दिया l
इस पर पार्टी विशेष के बड़े नेता के लायक़ सुपुत्र को क्रोध आ गया औऱ वह गुस्से में अंकिता के मन में कूट कूट कर संस्कार भरने का प्रयास करने लगा l कूटा कूटी की गर्मागर्मी में अंकिता को धक्का लगा औऱ वह नहर के पानी में जा गिरी l
नहर के पानी की गहराई अंकिता की लम्बाई से अधिक होने के कारण अंकिता को नश्वर मिथ्या संसार छोड़ स्वर्गीय होना पड़ गया l
उन्ही स्वर्गीय अंकिता जी की स्मृति में इस कालेज का नाम रखा गया है....कृपया सनद रखें l
एक बार फिर, युवा हृदय सम्राट माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को इस ऐतिहासिक नामकरण के लिए बधाई, धन्यवाद, आभार, साधुवाद... इतिहास में आपका नाम चुनाव आयोग वाली अमिट स्याही से लिखा जायेगा l
भारत माता की जय... वन्देमातरम.. वसुधैवकुटुंबकम
मुकेश प्रसाद बहुगुणा
वरिष्ठ भावी इतिहासकार
27/12/2025
मामला पूंछ की इज्जत का...
कुछ शरारती लोगों द्वारा गट्टूओं भट्टूओं और पट्टूओं को पालतू कुत्ते की उपमा दिए जाने पर कुकुर सुंदरी गिन्नी देवी द्वितीय ने इसे कुकुर समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कृत्य बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है l
आज जारी एक बयान में राष्ट्रीय कुकुर संघ की मोहल्ला प्रमुख गिन्नी देवी ने कहा कुकुर समाज का अपमान करने का कोई भी कुत्सित प्रयास सहन नहीं किया जायेगा और कुकुर संघ के सदस्य इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी घर घर भौंक अभियान चलाएंगे l
सुश्री गिन्नी देवी ने "कुकुर वाहिनी", " कुकुर दल ", "वीर कुकुर सेना", "कुकुर रक्षा दल", "युवा कुकुर मोर्चा " सहित " राष्ट्रीय कुकुर संघ" के सभी आनुसांगिक सगठनों के पदाधिकारियों से अपील की है गट्टूओं भट्टूओं और पट्टूओं को कुत्ता कहने वालों के घरों के आगे भौंक कर घर घर भौंक अभियान को सफल बना कर देश के सभी पालतू कुत्ता विरोधियों को कड़ा जवाब दें l
उन्होंने "विश्व आवारा कुत्ता परिषद" के पदाधिकारियों से भी भावुक अपील करते हुए आवाहन किया कि आज हमारी पूँछ की इज्जत का सवाल है, अतः ऐसे कठिन समय में आवारा कुत्तों को भी सैद्धांतिक मतभेद भुला कर पालतू कुत्तों के मुद्दे के साथ एकजुटता दिखाते हुए आगे आना होगा और पालतू कुत्तों के साथ मिलकर घर घर भौंक अभियान को मजबूती देना होगा l
कुकुर एकता जिन्दाबाद... पूंछ हमारी मूंछ है... मूंछ हमारी पूंछ है
गट्टू भट्टू पट्टू तुम संघर्ष करो.. सारे कुत्ते तुम्हारे साथ हैं
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25/12/2025
हिन्दू सांता क्लॉज़ .. उर्फ बजरंगी धंधा
संतों,
कल मैने देखा कि मेरा पौत्र सांता क्लॉज़ की ड्रेस पहन कर स्कूल जा रहा है...
और हे संतों, यह देखते ही मुझे क्रोध आ गया .. मेरा, अर्थात एक कट्टर और सच्चे हिंदू ब्राह्मण, मतलब देवभूमि उत्तराखण्ड में गंगा किनारे रहने वाले हिंदू खोपड़ी सम्राट पंडित मुकेश प्रसाद बहुगुणा का पौत्र विधर्मी मलेच्छ सांता क्लॉज़ का वेश ग्रहण करे? यह तो Prima facie सरासर धर्म की ग्लानि का सीरियस केस बनता है...
और फिर मैं क्रोध से "लाल पीला" होने लगा.. आखिर एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण का पौत्र ऐसा घोर पाप करने का दुस्साहस कैसे कर सकता है? क्या ऐसे ही बजेगा विश्व में हमारा डंका? क्या ऐसे ही फहरेगी धर्म ध्वजा? हे भगवान, ये दिन दिखाने से पहले तूने मेरे चश्मे का नम्बर क्यों नहीं बदल दिया ...
मुझे लाल पीला होते देख मेरे पौत्र ने कहा -
अथ पौत्रश्री उवाचः - हे ग्रांडपा श्रेष्ठ, कृपया क्रोध में "लाल पीले " न हों, लाल रंग तो बदमाश वामपंथी रंग है जो आपको शोभा नहीं देता.. अगर आपको क्रोध ही करना है तो सिर्फ "पीला पीला " ही होना आपके लिए श्रेष्ठ है, क्योंकि पीला रंग सात्विक भक्तों का रंग है... आप देख सकते हैं कि आजकल हर भक्त को पीलिया हो रखा है..
पौत्र के यह वचन सुन मैने क्रोध में से लाल रंग निकाल फेंका और सिर्फ पीला हो कर बोला - अबे, गुस्सा क्यों न करूँ ? तूने ये विधर्मी सांता सांता क्लॉज़ का बाना जो धारण किया है..
पौत्र अगेन उवाचः - हे तातश्री , ये वेश सांता क्लॉज़ का अवश्य है, किंतु ये वस्त्र हनुमान भक्त द्वारा बनाये गए हैं, ताकि सांता क्लॉज़ को हिंदू बनाया जा सके.. आप खुद देखिये, वस्त्र "बजरंग " निर्मित हैं.. "बजरंग " के वस्त्र वाला सांता क्लॉज़ ईसाई धर्म त्याग कर हिंदू बन जाता है .. यही एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक है जो आप जैसा भूतपूर्व मास्टर भी न समझ सके...
हे संतों, पौत्र के ऐसे वचन सुन अपुन अति प्रमुदित भये और ठेका अंग्रेजी शराब की तरफ उछलते कूदते कूच कर गए...
धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो.. बजरंगी ड्रेस हर सांता के पास हो . . ॐ सांता क्लॉजाय नमः ॐ मैरी क्रिसमस...
( फोटो और वीडियो - बजरंगी सांता )
16/12/2025
𝗗𝗘𝗖𝗘𝗠𝗕𝗘𝗥 𝟭𝟲, 𝟭𝟵𝟳𝟭
विजय दिवस - ज़ब दक्षिण एशिया का राजनैतिक नक्शा बदल दिया गया
सन 70 के उत्तरार्ध और 71 के पूर्वार्ध में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश ) में चल रहे घटनाक्रमों से यह लगभग तय हो गया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच एक और सशस्त्र संघर्ष अनिवार्य हो गया है I
सन 71 के अप्रैल माह में ही तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने आर्मी चीफ जरनल मानेक शा (जो कि बाद में फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत हुए ) से पूछा कि क्या सेना युद्ध के लिए तैयार है ? जरनल मानेक शा ने अप्रैल -मई का समय उपयुक्त नहीं बताया और वर्ष के अंत तक युद्द की सलाह दी I माना जाता है कि जरनल ने इंदिरा जी को यह भी कहा कि यदि वे युद्ध का समय और अन्य शर्ते तय करने का अधिकार दें, तो वह युद्ध में विजय की गारंटी दे सकते हैं ई
इंन्दिरा जी देश और दक्षिण एशिया की बदलती परिस्थितयों से भली भांति वाकिफ थी , और जल्दबाजी में भी न थी , अतः उन्होंने जरनल के सुझाव को मान लिया I
राजनीतिक नेतृत्व से संकेत मिलते ही सैन्य नेतृत्व ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी I जरनल मानेक शा ( थल सेनाध्यक्ष ) , एडमिरल एस एम नन्दा (नौ सेनाध्यक्ष ) एवं एयर चीफ मार्शल पी सी लाल ने अपने कमांडर्स को उचित निर्देश दे दिए I
नवम्बर 71 में पाकिस्तान के अतिवादी राजनैतिक –धार्मिक कठमुल्लों के नेतृत्व में पाकिस्तान के लाहौर एवं अन्य शहरों में हजारों पाकिस्तानियों ने “ भारत को नेस्तनाबूद कर दो “ के नारों के साथ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया I पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सीमा पर हथियारों और सैनिकों का जमाव शुरू कर दिया I जबाब में भारतीय सेनायें भी सीमाओं पर मुस्तैद हो गयी ,ताकि पाक की किसी भी नापाक हरकत का तुरंत मुंहतोड़ जबाब दिया जा सके I 23 नवंबर 1971 को पाकिस्तान के सैन्य शासक एवं राष्ट्रपति जरनल याह्या खान ने पाकिस्तान में आपातकाल घोषित कर दिया और देश को युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा I पाकिस्तान को भरोसा था कि अमेरिका और चीन युद्ध में उसकी मदद करेंगे I अमेरिका और चीन की तरफ से भारत को अप्रत्यक्ष धमकियाँ पहले से ही दी जा रही थी I बड़ी शक्तियों में सिर्फ सोवियत संघ भारत के साथ था I
3 दिसम्बर की शाम को लगभग 5 बजकर 42 मिनट पर पाकिस्तान ने बिना किसी उकसावे के ही , भारत की पश्चिमी सीमा पर स्थित 11 वायुसेना अड्डों पर एक साथ भारी बमवर्षकों के द्वारा हवाई हमला कर दिया I इस हमले का कोड नाम " आपरेशन चंगेज खान “ रखा गया था I
पाकिस्तान का यह अचानक हमला ( surprise attack या pre-emptive attack ) अरब –इजराइल युद्ध ( जिसे युद्ध इतिहास में "six days war" के नाम से जाना जाता है ) के उस हमले की नकल थी जिसमें इजराइल ने अचानक एक साथ कई ठिकानों पर हमला कर अरब के कई हवाई ठिकानों सहित उसकी वायु प्रतिरक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर दिया था I
हमला अचानक जरूर था , पर भारतीय सेनाएं तैयार थी I दुश्मन ने आगरा तक बम बरसाए, किन्तु कुछ स्थानों पर छिटपुट नुकसान के अलावा कहीं कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ I
तुरंत हुई कैबिनेट की आपात बैठक में निर्णायक- All Out War -युद्ध के निर्णय के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी राष्ट्रपति इंदिरा गांधी वी वी गिरी से मिली और उन्हें कैबिनेट के फैसले के बारे में बताया I राष्ट्रपति ने युद्ध की घोषणा की ( declaration of state of war and hostility ) I
इंदिरा जी ने तुरंत रेडियो पर देश को संबोधित किया और पाकिस्तान को “ दुश्मन “ देश घोषित करते हुए युद्ध की घोषणा की I
युद्ध घोषित होते ही कुछ ही समय बाद 3 दिसंबर 71 की रात्रि को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के कई ठिकानों पर हवाई हमला कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया I पूर्वी पाकिस्तान में तो भारतीय हमला इतना तीव्र और सटीक था कि 4 दिसम्बर की सुबह होते तक पूर्वी पाकिस्तान की वायुसेना लगभग तबाह हो चुकी थी , उसका एक भी हवाई ठिकाना ऐसा न बचा जहाँ से उनके लड़ाकू जहाज उड़ान भर सकें I पूर्वी पाकिस्तान के वायु क्षेत्र में अब भारत का वर्चस्व था I
इस हमले के साथ ही जल -थल और नभ सेना के तीनों अंगों ने पूर्वी और पश्चिमी सीमा पर एक साथ कई जगह co -ordineted attack शुरू कर दिया l
थल सेना को आदेश दे दिया गया कि दुश्मन के क्षेत्र में घुस कर कब्ज़ा करें I पूर्वी और पश्चिमी –दोनों ही सीमाओं पर भारतीय फ़ौज आगे बढ़ने लगी I पाकिस्तानी जमीन भारतीय टैंकों और फ़ौजी बूटों की धमक से काँप उठी I तोपखानों के गोलों ने पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों को दोजख में बदल दिया I
4-5 की रात को भारतीय नौ सेना ने अपना गुप्त आपरेशन “ त्रिशूल “ शुरू कर दिया I इस आपरेशन के तहत करांची बंदरगाह और नौसेना ठिकानों – युद्धपोतो पर जबरदस्त हमला बोल दिया गया I करांची धू धू कर जलने लगा , कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के युद्धपोत "पीएनएस खैबर " , "पीएनएस हफीज" और "पीएनएस जहाँ " समुद्र के गर्भ में डूबा दिए गए I बंदरगाह को भारी नुकसान पहुंचा , पाकिस्तान के अनुसार उसके 720 नौसैनिक हताहत हुए I यह हमला इतना भयंकर था कि करांची बंदरगाह की आग बुझाने में हफ़्तों लग गए I युद्द समाप्त होने के बाद भी कई दिनों तक बंदरगाह से उठने वाले धुंवे ने मीलों तक आसमान पर घने बादल बना दिए थे I इस हमले के चार दिन बाद करांची पर एक और बड़ा हमला किया गया ( आपरेशन अजगर ) l अरब सागर पर अब भारतीय नियंत्रण पूरी तरह से स्थापित हो चुका था I
नौसेना की पूर्वी कमांड ( वाइस एडमिरल नीलकंठ कृष्णन के नेतृत्व में ) ने बंगाल की खाड़ी को पूरी तरह से नियंत्रण में ले लिया था I 4 दिसम्बर को भारतीय विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत बंगाल की खाड़ी में पोजीशन ले चुका था और यहाँ से पाकिस्तानी नौसैनिक ठिकानों और युद्धपोतों पर इतना भारी हमला किया गया कि पाकिस्तानी नौसेना लुंज-पुंज हो गयी I चंद दिनों में ही पूर्वी पकिस्तान का समुद्री और वायु क्षेत्र एवं पश्चिम में अरब सागर हमारे नियंत्रण में आ गया I बहुत से पाकिस्तानी नौसैनिक मोर्चा छोड़ कर भाग भी गए I
अब पाकिस्तान हमला करने की बजाय बचाव की मुद्रा में आ गया I उसके मुख्य संरक्षक अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ में युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, किन्तु सोवियत संघ ने उसे वीटो कर दिया I
पूर्वी कमांड के प्रमुख लेफ्टनेंट जरनल जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान पर इतना भयानक हमला बोला कि पाकिस्तानी सेना का पैर ही उखड़ गए I हर दिन –हर घंटे –हर मिनट न उसे सिर्फ पीछे भागना पड़ रहा था ,बल्कि भारी नुक्सान भी झेलना पड़ रहा था I
16 दिसम्बर 1971 को जरनल अरोड़ा ने पाकिस्तान की सेना को अंतिम अल्टीमेटम के रूप में महज आधे घंटे की मोहलत दी कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें , या निश्चित मृत्यु के लिए तैयार हो जाएँ I जल -थल -नभ में कहीं भी बचाव का कोई रास्ता न देख 16 दिसम्बर 1971 की शाम 4 बजकर 31 मिनट पर पाकिस्तानी सेना की पूर्वी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जरनल नियाजी एवं वाइस एडमिरल खान के नेतृत्व में पूर्वी पाकिस्तान की सेना ने बिना शर्त सशस्त्र आत्मसमर्पण कर दिया I
संसार के युद्धों के इतिहास में आज तक यह सबसे बड़ा आत्मसमर्पण है I
जयहिंद ...
JWO (Retd) MP Bahuguna
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