Alps Institute of Management and Technology

Alps Institute of Management and Technology Alps Infotech is a chain of Computer Education Institutes professionally managed by Alps Education S From Govt of India.

Alps infotech is a chain of Computer Education Institutes professionally managed by Alps Education Society. Alps Education Society has been registered under the Society Act. To ensure quality IT education to its students Alps Education Society is certified by ISO 9001: 2000 CERTIFATION. Alps Infotech was formed by a group of professionals having more than Ten years experience in Computer Education

field keeping in the view the increasing demand of IT professionals in India. Alps Education Society is having its registered office in Rewari, a district headquarter in southern Haryana also known as Capital of Ahirwal. Rewari is one of the fastest growing residential and Industrial city in NCR and is well connected with Delhi, Gurgaon, Alwar and Jaipur through road and railways. Alps Infotech first started its operation in rural India to cater the increasing demand of high quality IT Education in rural India at a reasonable cost. As all of us are aware of the fact that initially IT education in India was very costly due to dominance of commercial organizations in this field. Keeping in the mind the rural masses of India having low income as compared to its urban counterparts, Alps Infotech started its operation in Rural India with first and only Institute in Rewari. Alps infotech started this mission of providing quality IT education to masses with the slogan “COMPUTER SHIKSHA ABHIYAN”. With the passes of time Alps Infotech realized the need of expansion and started expanding its operations in other parts of Haryana. Alps infotech managed 11 Centre in all India.

Admission open
28/11/2020

Admission open

01/01/2017

आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं |

31/12/2016
28/12/2016

गांव कोसली के सौ से अधिक लोग सेना में हैं अधिकारी

52 बंगला कोसली बांके कई हजार, घर-घर में चौधरी अर गली-गली सरदार। यह कहावत कोसली के लिए ही बनी है। करीब 800 वर्ष पुराने गांव में आज भी ये 52 बंगले वैसे ही हैं। इस गांव से सेना में भी सौ से अधिक अधिकारी कार्यरत हैं। इतनी प्रसिद्धी के बाद भी आज भी अहीरवाल के इस गांव का विकास नहीं हो सका है। गांव के लोग गांव से किसी बड़े नेता का नहीं होना इसका बड़ा कारण मानते हैं।

800 साल पहले बसा था
सेवानिवृत कर्नल विजय कौसल, डॉ. सुचेत, पूर्व पंच राजीव यादव आदि ने बताया कि करीब 800 साल पहले गांव के एक हिस्से में बाबा मुक्तेश्वरपुरी तपस्या में लीन थे। शेखावटी के राजा कोसल सिंह यहां से गुजरते समय रात होने के कारण यहां रुके तो बाबा ने उन्हें यहीं बसने को कहा। उन्होंने कहा कि आपसे इस गांव को ना तो कोई जीत सकेगा और ना ही हरा सकेगा। आपके नाम से ही कोसल गोत्र होगा। इसके बाद राजा कोसल ने गांव बसाया और इसके बाद पठानों, नवाब फिरोजपुर झिरका एवं जाटों ने इस गांव पर तीन बार आक्रमण किया लेकिन वे यहां से हार कर ही गए। राजा ने गांव के चारों ओर चोवल खाई बनाकर गांव को किला का रूप दिया हुआ था। जिसका आज नामोनिशान नहीं है। पहले विश्वयुद्ध में इस गांव के 9 लोग वीरगति को प्राप्त हुए थे। 1857 से 1914 तक सेना में भर्ती बन्द कर देने के बाद गांव के लोग इंदौर और हैदराबाद जाकर सेना में नौकरी करने लगे। दूसरे विश्वयुद्ध में इस गांव से 247 लोगों ने भाग लिया। इनमें से छह वीरगति को प्राप्त हुए। अंग्रेजों ने गांव के लोगों की बहादुरी को देखते हुए यहां आठवीं तक स्कूल बनवाया। जिसमें ग्रामीणों ने सवा सौ बीघा जमीन दान की। आज यहां दस जमा दो स्कूल और कॉलेज चल रहा है।

गांव के युवक को मिला था जंगगी इनाम
यह गांव इलाके में बहादुुरी के लिए जाना जाता है। इस गांव के एक युवक को जंगगी इनाम दिया गया था। जो आज भी उसके परिवार को दिया जा रहा है। इसके बाद इस गांव से 1939 से 45 की वार में एक दर्जन से अधिक लोगों को अपनी बहादुरी दिखाने पर सेना में अंग्रेजों ने अफसर बनाया। इसी गांव के मेजर उमराव सिंह को मिलिट्री कार्स से सम्मानित किया गया। इस गांव से पांच ब्रिगेडियर, 25 कर्नल और तीनों सेनाओं में करीब 106 अफसर हैं। इसके अतिरिक्त गांव के ही सुधीर यादव पुलिस मेेें आईजी हैं। मेजर जरनल यशवंत यादव जो मेजर उमराव सिह के पोते हैऔर स्वर्गीय उर्मिला यादव के भतीजे है।
----
प्रदेश को दिया पहला इंजीनियर
हरियाणा के पहले इंजीनियर महासिंह इसी गांव से थे। इसके अतिरिक्त आरपीएफ और बीएसएफ में भी 50 से अधिक अफसर इसी गांव से हैं। गांव के रावरामनारायण देवीलाल सरकार में एमएलए 1977 में बने थे। इसके बाद 1987 में पुन: एमएलए बनने के बाद मंत्री बने। कोसली को लंबे इंतजार के बाद 1978 में सब तहसील का दर्जा मिला। कोसली के लिए लोग शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाते हैं।

गांव में मठ है आस्था का केन्द्र
कोसली गांव का मठ कोसलीया गोत्र का आस्था का केन्द्र बना है। गांव में विद्यमान कोसली का मठ विदेेशों में भी प्रसिद्ध है। दुनिया के किसी भी कौने में कोसलीया गोत्र के घर पर शुभ कार्य विवाह, बच्चा जन्म होने यहां तक नौकरी पाने पर यहां कोसली मठ में मत्था टेकने जरूर आते हैं। कोसली मठ को कोसलीया गोत्र के ही नहीं बल्कि सभी गोत्रों के लोग पूजते हैं। ग्रामीणों ने अपनी जमीनों सरकारी सुविधाओं के लिए दी हैं। हर वर्ष भंडारे होते हैं।

यह है मांगें
गांव के लोगों ने बताया कि गांव में स्वीकृत नर्सिंग कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज एवं म्युनसिपलिटी कमेटी शीघ्र बने।

04/06/2015

Address

Koslia Tower, 93 RL, Model Town
Rewari
123401

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Alps Institute of Management and Technology posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category