25/08/2026
💥 परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactor) असल में शुरू कैसे होता है? (संकेत: जैसा आप सोच रहे हैं, वैसा बिल्कुल नहीं है!)
हम सबने वह पुरानी पहेली तो सुनी ही है: पहले मुर्गी आई या अंडा?परमाणु भौतिकी (Nuclear Physics) में भी कुछ ऐसा ही सवाल लोगों को उलझा देता है:अगर फ़िशन (Fission/परमाणु विखंडन) शुरू करने के लिए न्यूट्रॉन चाहिए, और न्यूट्रॉन खुद फ़िशन से ही पैदा होता है... तो फिर पहला फ़िशन बिना किसी पिछले न्यूट्रॉन के कैसे हो सकता है?यह एक कभी न खत्म होने वाले चक्र जैसा लगता है—जब तक कि आप परमाणु के भीतर झांककर न देखें।
उत्तर: फ़िशन ही पहले आया!मुर्गी और अंडे वाली कहानी के उलट, यूरेनियम का एक अस्थिर परमाणु किसी बाहरी धक्के का इंतजार नहीं करता। स्पॉन्टेनियस फ़िशन (Spontaneous Fission / स्वतः विखंडन) के कारण U-238 के परमाणु खुद-ब-खुद विभाजित हो जाते हैं और न्यूट्रॉन की पहली पीढ़ी को जन्म देते हैं।
कुदरती चिंगारी का हिसाब-किताब:1 किलो U-238 में हर सेकंड लगभग 7 स्वतः विखंडन होते हैं, जिससे हर सेकंड 15 से 16 न्यूट्रॉन निकलते हैं।700 MWe PHWR रिएक्टर कोर में लगभग 95 टन प्राकृतिक यूरेनियम होता है। इसमें हर सेकंड लगभग 6.6 लाख स्वतः विखंडन होते हैं, जिससे 15 लाख से अधिक न्यूट्रॉन पैदा होते हैं।संख्या बड़ी, लेकिन ऊर्जा न के बराबर:सुनने में 6.6 लाख फ़िशन प्रति सेकंड बहुत बड़ा लगता है, लेकिन इससे मिलने वाली ऊर्जा 1 वाट से भी बहुत कम होती है। इनका असली काम बिजली बनाना नहीं, बल्कि रिएक्टर शुरू करने के लिए न्यूट्रॉन की बुनियादी आबादी देना है।
PHWR इस चिंगारी का इस्तेमाल कर लेता है — लेकिन LWR को मदद क्यों चाहिए?PHWR (भारी पानी / Heavy Water): भारी पानी न्यूट्रॉन को नहीं सोखता। इसलिए ये कुदरती न्यूट्रॉन बच जाते हैं, धीमे होते हैं और धीरे-धीरे श्रृंखला (chain reaction) को आगे बढ़ाते हैं। यहाँ प्रकृति खुद अपना काम करती है।LWR (हल्का पानी / Light Water): संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) में U-238 कम होता है, जिससे स्वतः विखंडन कम होते हैं। साथ ही, साधारण पानी न्यूट्रॉन सोख लेता है। इसलिए LWR में रिएक्टर चालू करने के लिए बाहर से न्यूट्रॉन सोर्स (जैसे Sb-Be या Cf-252) लगाना पड़ता है।
एक जादुई क्षण जल्द ही आने वाला है...आप इस परमाणु भौतिकी के जादू को जल्द ही RAPS-8 (700 MWe PHWR) के क्रिटिकल (First Approach to Criticality) होने के दौरान देखेंगे! जैसे-जैसे कोर क्रिटिकल होगा, प्रकृति की यह छोटी सी चिंगारी कई गुना बढ़कर 1 वाट से भी कम ऊर्जा को 700 मेगावाट की स्वच्छ बिजली में बदल देगी।
प्रकृति सिद्धांत देती है। इंजीनियरिंग उसे इस्तेमाल करना सीखती है।