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11/10/2023

विश्व की सबसे अधिक समृद्ध भाषा कौन सी है??

अंग्रेजी में 'THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG' एक प्रसिद्ध वाक्य है। जिसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए,

मज़ेदार बात यह है की अंग्रेज़ी वर्णमाला में कुल 26 अक्षर ही उप्लब्ध हैं जबकि इस वाक्य में 33 अक्षरों का प्रयोग किया गया जिसमे चार बार O और A, E, U तथा R अक्षर का प्रयोग क्रमशः 2 बार किया गया है।

इसके अलावा इस वाक्य में अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है। जहां वाक्य T से शुरु होता है वहीं G से खत्म हो रहा है।

अब ज़रा संस्कृत के इस श्लोक को पढिये।-

*क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।*
*तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।*

अर्थात: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन? राजा मय! जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।

श्लोक को ध्यान से पढ़ने पर आप पाते हैं की संस्कृत वर्णमाला के *सभी 33 व्यंजन इस श्लोक में दिखाये दे रहे हैं वो भी क्रमानुसार*। यह खूबसूरती केवल और केवल संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा में ही देखने को मिल सकती है!

पूरे विश्व में केवल एक संस्कृत ही ऐसी भाषा है जिसमें केवल एक अक्षर से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है, किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोडे में बहुत कहा है-

*न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नानानना ननु।*
*नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नुन्ननुन्ननुत्॥*

अर्थात: जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है। वंदेसंस्कृतम्!

एक और उदहारण है।-

दाददो दुद्द्दुद्दादि दादादो दुददीददोः
दुद्दादं दददे दुद्दे ददादददोऽददः

अर्थात: दान देने वाले, खलों को उपताप देने वाले, शुद्धि देने वाले, दुष्ट्मर्दक भुजाओं वाले, दानी तथा अदानी दोनों को दान देने वाले, राक्षसों का खण्डन करने वाले ने, शत्रु के विरुद्ध शस्त्र को उठाया।

है ना खूबसूरत? इतना ही नहीं, क्या किसी भाषा में केवल 2 अक्षर से पूरा वाक्य लिखा जा सकता है? संस्कृत भाषा के अलावा किसी और भाषा में ये करना असम्भव है। माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल “भ” और “र ” दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है। देखिये –

भूरिभिर्भारिभिर्भीराभूभारैरभिरेभिरे
भेरीरे भिभिरभ्राभैरभीरुभिरिभैरिभा:।

अर्थात- निर्भय हाथी जो की भूमि पर भार स्वरूप लगता है, अपने वजन के चलते, जिसकी आवाज नगाड़े की तरह है और जो काले बादलों सा है, वह दूसरे दुश्मन हाथी पर आक्रमण कर रहा है।

एक और उदाहरण-

क्रोरारिकारी कोरेककारक कारिकाकर।
कोरकाकारकरक: करीर कर्करोऽकर्रुक॥

अर्थात- क्रूर शत्रुओं को नष्ट करने वाला, भूमि का एक कर्ता, दुष्टों को यातना देने वाला, कमलमुकुलवत, रमणीय हाथ वाला, हाथियों को फेंकने वाला, रण में कर्कश, सूर्य के समान तेजस्वी [था]।

पुनः क्या किसी भाषा मे केवल *तीन अक्षर* से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है? यह भी संस्कृत भाषा के अलावा किसी और भाषा में असंभव है!
उदहारण

देवानां नन्दनो देवो नोदनो वेदनिंदिनां
दिवं दुदाव नादेन दाने दानवनंदिनः।

अर्थात- वह परमात्मा [विष्णु] जो दूसरे देवों को सुख प्रदान करता है और जो वेदों को नहीं मानते उनको कष्ट प्रदान करता है। वह स्वर्ग को उस ध्वनि नाद से भर देता है, जिस तरह के नाद से उसने दानव [हिरण्यकशिपु] को मारा था

अब इस छंद को ध्यान से देखें इसमें पहला चरण ही चारों चरणों में चार बार आवृत्त हुआ है, लेकिन अर्थ अलग-अलग हैं, जो यमक अलंकार का लक्षण है। इसीलिए ये महायमक संज्ञा का एक विशिष्ट उदाहरण है

विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा विकाशमीयुर्जतीशमार्गणा:।
विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा:॥

अर्थात- पृथ्वीपति अर्जुन के बाण विस्तार को प्राप्त होने लगे, जबकि शिवजी के बाण भंग होने लगे। राक्षसों के हंता प्रथम गण विस्मित होने लगे तथा शिव का ध्यान करने वाले देवता एवं ऋषिगण (इसे देखने के लिए) पक्षियों के मार्गवाले आकाश-मंडल में एकत्र होने लगे।

जब हम कहते हैं की संस्कृत इस पूरी दुनिया की सभी प्राचीन भाषाओं की जननी है तो उसके पीछे इसी तरह के खूबसूरत तर्क होते हैं।
यह विश्व की अकेली ऐसी भाषा है, जिसमें "अभिधान- सार्थकता" मिलती है अर्थात् अमुक वस्तु की अमुक संज्ञा या नाम क्यों है, यह प्रायः सभी शब्दों में मिलता है।

22/09/2023

पक्षी बाजरे और चावल के दानों को धोकर नही खाते।
कपि फ़लों को खाने से पहले नही धोते।
गाय घास को नल के नीचे साफ नही करती। प्रकृति फिर भी चल रही है। जानवर चिड़ियाँ पक्षी कभी भी तुम्हारी तरह अस्पतालों के चक्कर नही लगाते।न उनके फैमिली डॉक्टर होते।
आज आपको एक रहस्य बताता हूँ।

जैसा कि आपको पता है कि जो जैसा इंसान होता है वह ऐसे ही इंसानों को अपनी ओर आकृष्ट कर लेता है। साधु साधु को और असाधु असाधु को। चरसी चरसी को खोज लेता है और चोर चोर की संगत करता है।

इसी प्रकार पेड़ पौधों फलों एवं औषधियुक्त वनस्पतियों का भी अपना एक औरा होता है। जिस पेड़ पौधे फल की जैसी प्रकृति होगी, उसी प्रकार के जीव उसके चारो ओर खिंचे चले आते हैं।

तुलसी पत्रों की प्रकृति सर्वकल्याण की भावना से निहित है तो तुलसी पर जो कीट पतंगे जीवाणु आएंगे वो भी कल्याणकारी होंगे। फलों, सब्जियों सबका यही नियम है। हालाँकि इस नियम का अपवाद भी है। यज्ञ स्थल पर राक्षस भी सदा से विचरण करते आये हैं। किंतु प्रकृति का जो नियम है वह बिल्कुल साफ है कि इन राक्षसों को भी कईं बार अच्छे जीवाणु और अच्छे जीव दूर भगा देते हैं।
एक उदाहरण देता हूँ। आप दो बर्तनों में दूध लीजिये। एक में दही मत डालिये और दूसरे में एक चम्मच दही डाल दीजिए। दोनो को तीन दिन के लिए खुला रख दीजिए।

तीन दिन बाद आप को क्या दिखेगा?

आप देखेंगे कि जिस दूध में दही नही डाला था उसमे बदबू हो गई और वह सड़ गया। किन्तु जिस दूध में दही डाला था उसकी खुश्बूदार दही बन गयी।
ऐसा क्या हुआ कि एक दूध सड़ गया किन्तु दूसरा नही सड़ा?
दूध को सड़ाने वाले जीवाणु तो हवा में थे और हवा दोनो दूध के ऊपर समान ही थी। दोनो बर्तन खुले थे। जो गंदे जीवाणु पहले दूध के ऊपर अटैक किये वही गंदे जीवाणु दूसरे दूध पर भी अटैक करके उसको सड़ाने के लिए स्वतंत्र थे।... थे कि नही?
तो ऐसा क्या हुआ कि ये गंदे जीवाणु पहले बर्तन में तो घुसे किन्तु दूसरे में न घुस पाये?
इसका कारण ऊपर बताया गया प्रकृति का यही सिद्धांत है।

दही में लैक्टोबेसिलस नाम के लाभदायक जीवाणु होते हैं। दूसरे बर्तन वाले दूध में हमने थोड़ी सी दही डाली तो साथ में ये जीवाणु भी चले गए। किन्तु पहले वाले दूध में ये लाभदायक जीवाणु नही थे।

तो गंदे रोग फैलाने वाले जीवाणु दोनो बर्तनों के ऊपर मंडराए और पहले वाले बर्तन के दूध में तो घुस गए किन्तु दूसरे वाले बर्तन में न घुस पाये।... क्योंकि वहाँ पहले से ही लाभदायक जीवाणु विद्यमान थे।

आपको कुछ कुछ समझ आ रहा है।
संदेश बिल्कुल साफ है।

कि तुलसी दल जो स्वयं भी एक औषधि है, पर जितने भी जीवाणु होंगे वो सभी औषधीय गुणों से युक्त होंगे। अगर तुलसी पर कोई बाहरी केमिकल आपने नही छिड़का है तो इसके पत्तों को बिना धोये ही ग्रहण करेंगे तो सौ गुना लाभ होगा।... क्योंकि तब तुलसी दल के साथ उस पर बैठे करोड़ो लाभदायक जीवाणु भी आपके शरीर में जाएंगे।

यही सिद्धांत फलों सब्जियों घास पत्र सभी पर लागू होता है।

अगर फल जंगली है। मानव निर्मित केमिकलों से दूर है तो बिना धोये खाने से जो लाभ होगा वह असीमित होगा।
आपके घर में उगे टमाटर और अन्य सब्जियाँ जो प्राकृतिक वातावरण में उगाई गयी हैं को जहाँ तक हो सके बिना धोये खाएं।

तुलसी दल तो सदैव बिना धोये खाएं। किन्तु जिस तुलसी से आरोग्य के लिये दल प्राप्त किये जाते हैं उसकी नित्य पूजा अर्चना और उसको स्नान करवाने का विधि विधान और प्रावधान है। शर्त यह भी है कि फल फूल सब्जी अनछुई हो।

ध्यान रहे कि औषधि युक्त वनस्पतियों से सदैव हाथ जोड़ कर नतमस्तक हो विनती करके लिया जाए। और सिर्फ उतना लिया जाए जितने की आपको आवश्यकता है।

जहाँ तक हो सके प्रकृति के करीब रहिये। प्रकृति स्वयं आरोग्य प्रदान करती रहेगी। किन्तु प्रकृति का अनावश्यक दोहन न करिए। जैसे ही दोहन शरू हुआ, वनस्पतियाँ फल फूल पत्र अपने गुण को त्याग देगें।

पृथ्वी गोल है, बावजूद उसके, पृथ्वी की ग्रेविटी हमें अपनी और आकर्षित करती है, जिस कारण हम उड़ कर स्पेस की यात्रा पर रवाना ...
05/09/2023

पृथ्वी गोल है, बावजूद उसके, पृथ्वी की ग्रेविटी हमें अपनी और आकर्षित करती है, जिस कारण हम उड़ कर स्पेस की यात्रा पर रवाना नहीं हो जाते।
पर अगर मैं पृथ्वी पर हूँ तो भी सूर्य की ग्रेविटी भी तो मुझे अपनी तरफ खींच रही है।पर चूँकि आप सूर्य के मुकाबले पृथ्वी के ज्यादा करीब हैं, इसलिए इस परिस्थिति में पृथ्वी की ग्रेविटी ज्यादा डोमिनेंट होगी।

अब मान लेते हैं कि आप एक सीधी रेखा में, पृथ्वी से सूर्य की ओर सफ़र कर रहे हैं। जैसे जैसे आप सूर्य की और बढ़ेंगे, वैसे वैसे आप पर लगने वाली सूर्य की ग्रेविटी ज्यादा शक्तिशाली होती जायेगी, और धीरे- धीरे पृथ्वी की ग्रेविटी कमजोर होती जायेगी।

अब इस यात्रा के दौरान, एक समय अथवा बिंदु ऐसा आयेगा, जहां पर आप पर लगने वाला पृथ्वी और सूर्य का गुरुत्व बल एक समान होगा। साधारण शब्दों में: इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी की ग्रेविटी एक दूसरे को कैंसिल आउट कर देंगी। इस बिंदु पर खड़े होने पर आप त्रिशंकु की तरह स्पेस में लटके रह जायेंगे, न इस पार के, न उस पार के, इस ख़ास बिंदु को “लंग्राज पॉइंट Lagrange Point ” कहते हैं। यह बिंदु सूर्य और पृथ्वी के बीच में.पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर अन्तरिक्ष में स्थित है।

एक दूसरे का चक्कर लगा रहे किन्ही भी दो पिंडो के बीच, जैसे सूर्य पृथ्वी, पृथ्वी चन्द्र, इत्यादि के बीच अन्तरिक्ष में कुल 5 लंग्राज पॉइंट होते हैं, जहाँ एक पिंड दूसरे पिंड से 24.96 गुना भारी हो, तो पिंडो के बीच की ग्रेविटी और सेंट्रीफ्यूगल फ़ोर्स कुछ इस तरह कमाल दिखाती हैं कि इन लंग्राज पॉइंट्स पर स्थित चीज आंशिक या पूरी तरह स्थिर होती है। अर्थात, लंग्राज पॉइंट पर मौजूद चीज को अपनी जगह पर बने रहने के लिए राकेट बूस्टर फायर करने की जरुरत या तो बिलकुल नहीं होती, अथवा आंशिक रूप से होती है। इसे मैं थोड़ा और सरल बनाता हूँ।

पहले लंग्राज पॉइंट की बात हमनें कर ली, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच है। दूसरा लंग्राज पॉइंट पृथ्वी के “इस पार” और तीसरा लंग्राज पॉइंट सूर्य के “उस पार” मौजूद है। ये तीनों पॉइंट आंशिक रूप से स्थिर हैं। अर्थात, यहाँ मौजूद सेटेलाईट लगभग 23 दिन तक अपनी जगह पर बने रह सकते हैं। उसके बाद थोड़े बहुत राकेट फायर कर अपनी पूर्वस्थिति में पहुँच सकते हैं।

लंग्राज पॉइंट 4 और 5 स्पेस में वहां हैं जिस जगह पर सूर्य और पृथ्वी से बनाए गये 60 डिग्री के कोण एक दूसरे को काटते हैं। ये दोनों बिंदु पूरी तरह स्थिर हैं।

अर्थात, अगर आप इन बिन्दुओं पर मौजूद हैं, और मैं आपको धक्का भी दे दूँ तो भी वापस अपनी जगह पर आ जायेंगे। इन बिन्दुओं की तुलना आप चारों दिशाओं में पर्वतों से घिरी एक घाटी से कर सकते हैं जहाँ जाने के लिए लेफ्ट राईट आगे पीछे जैसा कोई आप्शन उपलब्ध ही नहीं है।

ज़रा सोचिये, ये लग्रांज पॉइंट मनुष्य के अन्तरिक्ष में विस्तार के सन्दर्भ में कितना सामरिक महत्त्व रखते हैं। यहाँ आप बिना ईंधन की चिंता किये रहने योग्य मानव बस्तियां बना कर छोड़ सकते हैं। आवश्यक लौह अयस्क अथवा अन्य पदार्थों की पूर्ति हेतु माइनिंग के लिए पकडे लिए उल्का खण्डों को इन पॉइंट्स पर छोड़ सकते हैं, बिना यह चिंता किये कि वे अन्तरिक्ष में कहीं भटक जायेंगे। सोचिये, कि ईंधन को पी लेने वाली ग्रेविटी अथवा वायु के अभाव में इन लग्रांज पॉइंट्स से भविष्य के स्पेस मिशन भेजना कितना आसान होगा।

सोचिये, शायद एक वक़्त ऐसा आये जब हमनें ब्रह्माण्ड के अनेक सोलर सिस्टम के लग्रांज पॉइंट पर अपनी बस्तियां बसा ली हों। भविष्य के अन्तरिक्ष यात्री सितारों के सफ़र से लौट कर लग्रांज बिन्दुओं पर बसी बस्तियों में अपने यान उतारेंगे, ईंधन भरवाएंगे, परिजनों के साथ समय बिताएंगे और फिर से, एक अनजान साहसिक सफ़र पर रवाना हो जायेंगे।

वैसे यह कहानी मैंने आपको इसलिए भी सुनाई है क्यूंकि भारत का भेजा आदित्य सूर्ययान ऐसे ही लंग्राज बिंदु 1 पर स्थित रह कर सूर्य की अंदरूनी और बाहरी सतह का अध्ययन करेगा। लग्रांज-1 इसलिए क्यूंकि यह बिंदु सूर्य और पृथ्वी के बीच में है और यहाँ से सूर्य का बाधारहित व्यू प्राप्त कर अध्ययन करना आसान है।

भारत को आदित्य यान के लिए बधाई।

हमें गर्व है उस युग के साक्षी होने का, जब भारत का स्पेस कार्यक्रम प्रगति के नित नये सोपान छू रहा है।

रोचक- समुद्र या किसी अन्य बड़ी बाधा को पार करने की आवश्यकता के बिना दुनिया का सबसे लंबा रास्ता केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) ...
30/09/2022

रोचक- समुद्र या किसी अन्य बड़ी बाधा को पार करने की आवश्यकता के बिना
दुनिया का सबसे लंबा रास्ता
केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) से मगदान (रूस) तक है।
इस रास्ते में आपको विमानों या नावों की जरूरत नहीं पड़ेगी है ।
कुल दूरी 21,808 किमी है और चलने में औसतन 4,310 घंटे लगेंगे। बिना रुके कोई चले तो 187 दिन लगेंगे 
या 561 दिन प्रतिदिन 8 घंटे पैदल चलना होगा। यात्रा के दौरान , आप 17 देशों, 6 Time Zones और सभी मौसमों से गुजरेंगे!

You Keep the right spirit,it is a very good education,for it compels you to make a special effort and to exceed your ord...
29/08/2020

You Keep the right spirit,it is a very good education,for it compels you to make a special effort and to exceed your ordinary limits a little-The Mother
सभी बच्चे रोज खेलें और नियमित खेलें।

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12/07/2020

On Line Sports quiz- Attractive Prizes Download from our website इस क्विज के लिए आंसर शीट को आप विद्यालय की वेबसाइट
https://auroschool.com/utilities
से भी डाउनलोड करके या हाथ से बनाकर भेज सकते हैं।
8103236080 पर व्हाट्सएप भेजें (कृपया व्हाट्सएप नंबर पर कॉल ना करें।) या ईमेल करें [email protected]

आपका बच्चा अगले सत्र में किस स्कूल में जाएगा?निर्णय लेने का सही समय है और यही समय हैएक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे फिर...
22/04/2020

आपका बच्चा अगले सत्र में किस स्कूल में जाएगा?
निर्णय लेने का सही समय है और यही समय है
एक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे फिर निर्णय लेना मुश्किल होगा
कोरोना संकट+लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था में भारी मंदी है।
इतनी कम फीस देकर
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आपका बच्चा अगले सत्र में किस स्कूल में जाएगा? निर्णय लेने का सही और यही समय है.एक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे फिर न....

आपका बच्चा अगले सत्र में किस स्कूल में जाएगा?निर्णय लेने का सही समय है और यही समय हैएक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे फिर...
20/04/2020

आपका बच्चा अगले सत्र में किस स्कूल में जाएगा?
निर्णय लेने का सही समय है और यही समय है
एक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे फिर निर्णय लेना मुश्किल होगा
कोरोना संकट+लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था में भारी मंदी है।
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निर्णय लेने का सही समय है !निर्णय लेने का यही समय है !अपने बच्चे का अगले वर्ष स्कूल बदल लीजिए!कोरोना संकट और लॉकडाउन के ...
10/04/2020

निर्णय लेने का सही समय है !
निर्णय लेने का यही समय है !
अपने बच्चे का अगले वर्ष स्कूल बदल लीजिए!
कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अर्थव्यवस्था में भारी मंदी है।
संकट की इस घड़ी में ऑरोस्कूल रतलाम भी देश के साथ मजबूती से कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है।
विचार कीजिए
एक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे तब यह मुश्किल होगा।
इतनी कम फीस देकर जब
इतना सुंदर स्कूल
इतना बड़ा स्कूल
इतनी शानदार पढ़ाई
इतने समर्पित टीचर उपलब्ध हैं,
तो आप क्यों इतनी ज्यादा फीस भर रहे हैं?दी गई लिंक से आज ही प्रवेश फॉर्म भर कर निश्चिंत हो जाएं।

बच्चे का स्कूल बदलने संबंधी निर्णय लेने का यही समय है एक बार स्कूल पुनः शुरू हो जाएंगे फिर यह मुश्किल होगा कृपया वि....

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457001

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