Narendra lodhi

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ॐ ब्रम्हानंदाय नमो नमःआजादी मिली है हमें भारत देश के मूलनिवासी वीरों के बलिदानों से !, रखो संभाल कर इसे अंग्रेजों के मुख...
26/01/2020

ॐ ब्रम्हानंदाय नमो नमः

आजादी मिली है हमें भारत देश के मूलनिवासी वीरों के बलिदानों से !
, रखो संभाल कर इसे अंग्रेजों के मुखबिर विदेशी नस्ल आरएसएस के बेईमानों से !
समस्त देशवासियों को सपरिवार गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

देश को करना जो नमन छोड़ दे,
उसे कह दो कि ये वतन छोड़ दे,

भारत से अधिक जिसे प्यारा है धर्म नाम का पाखण्ड
ऐसे घटिया सोच वाले विदेशी नस्ल के होंगे ख़तम

देश आजाद की कभी शाम नहीं होने देंगे,
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे,
बची हो जो एक बूंद भी गरम लहू की,
तब तक भारत माता का आंचल नीलाम नहीं होने देंगे।

समस्त मित्रो से मेरी प्रार्थना है कि आज 4 दिसंबर को प्रत्येक फेसबुक और ट्वीटर पर स्वामी ब्रम्हानंद ही दिखाई देना चाहिये🙏...
03/12/2019

समस्त मित्रो से मेरी प्रार्थना है कि आज 4 दिसंबर को प्रत्येक फेसबुक और ट्वीटर पर स्वामी ब्रम्हानंद ही दिखाई देना चाहिये

🙏ॐ ब्रम्हानंदाय नमो नमः🌹🙏

4⃣दिसंबर बुंदेलखंड मालवीय,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,त्यागमूर्ति,सन्त प्रवर,शिक्षा के सागर, #परमपूज्य_स्वामी_ब्रम्हानंद_जी के 125 वे #जन्मदिवस_ पर समस्त देशवासियों को सापरिवार हार्दिक शुभकामनाएं !

त्याग मूर्ति स्वामी ब्रम्हानंद
जी का था एक ही सपना !
100 परसेंट में 100 पर्सेंट
शिक्षित हो भारत देश अपना !!

स्वामी ब्रह्मानंद का व्यक्तित्व बहुँत ही महान था। उन्होंने समाज सुधार के लिए काफी इतिहासिक कार्य किए। देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जहां स्वयं को समर्पित कर कईआंदोलनों में जेल काटी। आजादी के बाद भी देश की राजनीति में भी उनका भावी योगदान रहा है। स्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही एतिहासिक कार्य किए। समाज केलोगों को शिक्षा की ओर बढ़ ने का आहवान किया। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज जी के पिता का नाम मातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था।स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। स्वामी ब्रह्मानंद ने बचपन से ही समाज में फैले हुए अंधविश्वास और अशिक्षा जैसी कुरूतियों का डटकर विरोधकिया। स्वामी ब्रह्मानंद जी की प्रारम्भिक शिक्षा हमीरपुर में ही हुई। इसके पश्चात् स्वामी ब्रह्मानंद जी ने घर पर ही रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद औरअन्य शास्त्रों का अध्ययन किया। इसी समय से लोग उन्हें स्वामी ब्रह्मानंद से बुलाने लगे। कहा जाता है कि बालक शिवदयाल के बारे में संतों ने भविष्यवाणी किथी कि यह बालक या तो राजा होगा या प्रख्यात सन्यासी। बालक शिवदयाल का रुझान आध्यात्मिकता कि तरफ ज्यादा होने के कारण पिता मातादीन लोधीको डर सताने लगा कि कहीं वे साधु न बन जाए। इस डर से मातादीन लोधी ने स्वामी ब्रह्मानंद जी का विवाह साथ वर्ष की उम्र में हमीरपुर के ही गोपाल महतोकि पुत्री राधाबाई से करा दिया। आगे चलकर राधाबाई ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन स्वामी जी का चित्त अब भी आध्यात्मिकता कि तरफथा। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 24 वर्ष की आयु में पुत्र और पत्नी का मोह त्याग गेरूए वस्त्र धारण कर परम पावन तीर्थ स्थान हरिद्वार में भागीरथी के तट पर ‘‘हरकि पेड़ी’’ पर सन्यास कि दीक्षा ली। संन्यास के बाद शिवदयाल लोधी संसार में ‘‘स्वामी ब्रह्मानंद’’ के रूप में प्रख्यात हुए। संन्यास ग्रहण करने के unnamed-3बाद स्वामीब्रह्मानंद ने सम्पूर्ण भारत के तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। इसी बीच उनका अनेक महान साधु संतों से संपर्क हुआ। इसी बीच उन्हें गीता रहस्य प्राप्त हुआ।पंजाब के भटिंडा में स्वामी ब्रह्मानंद जी की महात्मा गाँधी जी से भेट हुई। गाँधी जी ने उनसे मिलकर कहा कि अगर आप जैसे 100 लोग आ जायें तो स्वतंत्रताअविलम्ब प्राप्त की जा सकती है। गीता रहस्य प्राप्त कर स्वामी ब्रह्मानंद ने पंजाब में अनेक हिंदी पाठशालाएं खुलवायीं और गौबध बंदी के लिए आंदोलन चलाये।इसी बीच स्वामी जी ने अनेक सामजिक कार्य किये 1956 में स्वामी ब्रह्मानंद को अखिल भारतीय साधु संतों के अधिवेशन में आजीवन सदस्य बनाया गया औरउन्हें कार्यकारिणी में भी शामिल किया गया। इस अवसर पर देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी सम्मिलित हुए। स्वामी जी सन् 1921 में गाँधीजी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रता आन्दोलन में भी स्वामी ब्रह्मानंद जी ने बढ चढकर हिस्सा लिया। 1928 में गाँधी जी स्वामीब्रह्मानंद के प्रयासों से राठ पधारे। 1930 में स्वामी जी ने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया। इस बीच उन्हें दो वर्ष का कारावास हुआ। उन्हें हमीरपुर, हरदोई औरकानपूर कि जेलों में रखा गया। उन्हें पुनः फिर जेल जाना पड़ा। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने पूरे उत्तर भारत में उन्होने अग्रेजों के खिलाफ लोगों में अलख जगाई।स्वतंत्रता आन्दोलन के समय स्वामी जी का नारा था उठो! वीरो उठो!! दासता की जंजीरों को तोड फेंको। उखाड़ फेंको इस शासन को एक साथ उठो आज भारतमाता बलिदान चाहती है। उन्होने कहा था की दासता के जीवन से म्रत्यु कही श्रेयस्कर है। बरेली जेल में स्वामी ब्रह्मानंद की भेट पंडित जवाहर लाल नेहरू जी सेहुई। जेल से छूटकर स्वामी ब्रह्मानंद शिक्षा प्रचार में जुट गए। 1942 में स्वामी जी को पुनः भारत छोडो आंदोलन में जेल जाना पड़ा। स्वामी जी ने सम्पूर्ण बुन्देलखंड में शिक्षा की अलख जगाई आज भी उनके नाम से हमीरपुर में डिग्री कॉलेज चल रहा है। जिसकी नीव स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 1938 में ब्रह्मानंदविद्यालय के रूप में रखी। 1966 में गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद ने 10-12 लाख लोगों के साथ संसद के सामने आंदोलन किया। गौहत्या निषेधआंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद को गिरप्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। तब स्वामी ब्रह्मानंद ने प्रण लिया कि अगली बार चुनाव लड़कर ही संसद में आएंगे।स्वामी जी 1967 से 1977 तक हमीरपुर से संासद रहे। जेल से मुक्त होकर स्वामी जी ने हमीरपुर लोकसभा सीट से 1967 में चुनाव लड़ा और भारीमतों से जीतकर संसद भवन पहुंचे। देश की संसद में स्वामी ब्रह्मानंद जी पहले वक्ता थे जिन्होने गौवंश की रक्षा और गौवध का विरोध करते हुए संसद में करीबएक घंटे तक अपना ऐतहासिक भाषण दिया था। 1972 में स्वामी जी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आग्रह पर कांग्रेस से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। पूर्वप्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति वीवी गिरि से स्वामी ब्रह्मानंद के काफी निकट संबंध थे। स्वामी जी की निजी संपत्ति नहीं थी। सन्यास ग्रहण करनेके बाद उन्होने पैसा न छूने का प्रण लिया था और इस प्रण का पालन मरते दम तक किया। स्वामी ब्रह्मानंद अपनी पेंशन छात्र-छात्राओं के हित में दान कर दियाकरते थे। समाज सुधार और शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होने अपना जीवन अर्पित कर दिया। वह कहा करते थे मेरी निजी संपत्ति नहीं है, यह तो सब जनता की सम्पति है। कर्मयोगी शब्द का जीवंत उदाहरण यदि भारत देश में है तो स्वामी ब्रह्मानंद का नाम अग्रिम पंक्ति में लिखा है। कर्म को योग बनाने की कला अगर किसी मे थी तो वो स्वामी ब्रह्मानंद जी ही थे। स्वामी जी का वैराग्य नैसर्गिक था उनका वैराग्य स्वयं या अपने आप तक सीमित नहीं था। बल्कि उनके वैराग्य का लाभ सारे समाज को मिला। हमेशा गरीबों की लड़ाई लड़ने वाले बुन्देलखण्ड के मालवीय नाम से प्रख्यात, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, त्यागमूर्ति, सन्त प्रवर, परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी 13 सितम्बर 1984 को ब्रह्मलीन हो गए। लेकिन उनका जीवन और शिक्षाएं आज भी हमें राह दिखाती हैं। आज हम त्यागमूर्ति, सन्तप्रवर, परम पूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी को उनकी 125वीं जयंती 04 दिसंबर 2019 पर शत शत नमन 🙏करते हुए यही कह सकते हैं कि-

‘‘लाखों जीते लाखों मरते याद कहा किसी की रह जाती, है !
करोड़ो में होते है एक ब्रम्हानंद जी जिनकी याद हमेशा आती है !!

आप सभी का मित्र
लोधी नरेंद्र आजाद देहली 🙏

🙏 ्रम्हानंदाय_नमो_नमः🙏👊🇨🇮History of the great glorious important truth of Lodhi society of India✍💪👨‍🙏 #ग्वारी_राजवंश_लोध...
22/07/2019

🙏 ्रम्हानंदाय_नमो_नमः🙏

👊🇨🇮History of the great glorious important truth of Lodhi society of India✍💪👨‍🙏

#ग्वारी_राजवंश_लोधी_समाज_का_गौरवशाली_इतिहास

अपील _ समस्त लोधी भाईयो से मेरी प्रथना है कि पाखण्ड को छोड़ कर अपनी शक्ति पहचानो

✍इटावा के ग्वारी राजवंश की स्थापना 15वीं सदी की है जिसकी स्थापना दिल्ली के लोधी सुल्तानों के समय हुई दिल्ली के लोधी सुल्तान से अटूट दोस्ती के कारण कोई भी राजा ग्वारी राज्य पर आँख उठाने की हिम्मत नही करते पर मुगलकाल में यह राज्य इटावा में अपना अस्तत्व बनाये रहे किन्तु 17 वी सदी के अंतिम चरण में यह राज्य मुगलो व राजा छत्रसाल की राजनीतिक लड़ाई की भेंट चढ़ गया राज्य विस्तार की दृष्टि से आगे बढ़ रहे छत्रसाल ने इस राज्य को धोखे से जीता और लूटकर मिट्टी में मिला दिया राजा छत्रसाल कन्नौज के एक अभियान से लौटते हुये छत्रसाल ग्वारी से गुजरे उन्होंने ग्वारी के समकालीन राजा रतनसिंह लोधी जिनके वैभवपूर्ण ठाठ बाट और वीरता की बात उसने सुनी थी उसे अच्छे सत्कार की उम्मीद थी किन्तु राजा रतन सिंह लोधी से सम्मान नही मिलने से वह बौखला गया राजा रतनसिंह की मुगलो से सीधी मित्रता थी संभवता इसलियें छत्रसाल के स्वागत सत्कार में रुचि नही ली इससे बौखलाये छत्रसाल ने ग्वारी को धोखे से हरने की नीति बनाई उन्हीने राजा रतनसिंह की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया औऱ उसे दोस्ती का जश्न मनाने के लिये राजा रतनसिंह को सरदारों सहित शिविर में आमंत्रित किया जश्न में राजा छत्रसाल द्वारा ग्वारी नरेश व सरदारों को विषैला पेय परोसा गया जिसे पीकर सब अचेत हो गये छत्रसाल के सरदारों ने अचेत ग्वारी नरेश व सरदारों का बध कर दिया और इनके बाद रातभर ग्वारी किले व नगर को लूटा गया किले में मौजूद राज परिवार के सभी सदस्यों व सेना को सोते समय ही मौत के घाट उतार दिया सारा खजाना लूट ले गये छत्रसाल का मकसद सिर्फ ग्वारी को लूटना मिटाना भर था इसलिए अगले दिन ही वह अपनी सेना सहित वहा से चला गया संभवतः वह मुगलो की सेना से वहाँ मुकाबला नही करना चाहता था इस कत्लेआम से उस परिवार की महिला जो चांवरपुर के जमींदार की पुत्री थी और हमले से कुछ दिन पहले ही गर्भवती होने के कारण अपने मायके आ गयी थी वो बच गयी थी दुर्ग ध्वस्त हो चुका था खजाना लूट चुका था नगर वीरान हो चुका था धनाभाव में सेना को फिर से संगठित करना कठिन था समय आने पर ग्वारी राजवंश की उस महिला ने एक वीर पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम कुरुरोम लोधी रखा कुरुरोम लोधी ने आगे चलकर फिर से ग्वारी की सेना एकत्रित की और वीरता के साथ छत्रसाल से युद्ध करते हुऐ छत्रसाल की अनेक सैनिक मार करके छत्रसाल के सेना पति को मार डाला साहसी वीर कुरुरोम लोधी के चार पुत्र हुये जय सिंह आशा सिंह हंसा सिंह और लखर सिंह जो बहुँत ही वीर और साहसी योद्धा थे इन चारों योद्धाओं ने मिलकर एक बार फिर छत्रसाल के राज्य पर आक्रमण कर दिया जो उस समय छत्रसाल का भतीजा राजा था के ऊपर चढ़ाई कर दी इस बार इन चारों वीर योद्धाओं ने छत्रसाल के भतीजे और सेना पति को मार डाला आगे चलकर इन भाइयो ने डिवीयपुर रेलवे स्टेशन से दक्षिण की ओर दिवियापुर औरैया रोड पर क्रमशः नगला जयसिंह आशा का पुरवा हंस का पुरवा व लखन पुरवा आदि गांव बसाये ये गांव आज भी मौजूद है छत्रसाल द्वारा तबाह कर दिये गये ग्वारी राजवंश की नो बुर्ज का गढ़ इटावा जनपद में अछल्दा रेलवे स्टेशन से तीन मील दूर पश्चमीउत्तर पर ग्वारी नामक स्थान मौजूद है पर मात्र अवशेष ही शेष है !✍💐🙏

लोधी नरेंद्र आजाद 🙏

विदेशी नस्ल े संगठन मंत्री 377का सही प्रयोग करते हुए 😂प्रदीप जोशी जी जोश में- भाजपा RSS के संगठन मंत्री,,, #विशेष_नोट =क...
12/07/2019

विदेशी नस्ल े संगठन मंत्री 377का सही प्रयोग करते हुए 😂
प्रदीप जोशी जी जोश में- भाजपा RSS के संगठन मंत्री,,,
#विशेष_नोट =किसी को RSSके संगठन मंत्री की विडियो देखनी हो तो बताए 😂😂
#फिल्म_अभी_बाकि_है

ये तस्वीरें सिर्फ यही कहने का प्रयास कर रही है की  #पेड़_बचाओ _
06/06/2019

ये तस्वीरें सिर्फ यही कहने का प्रयास कर रही है की #पेड़_बचाओ _

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