29/07/2020
Irba bazar tand chowk, # # badi kabristan # # # # (Jharkhand)
Dawate tablig: ye koi firka nahi hai ye logo ki banane ki mahnat hai jiska makssd hai ki kaise ummat jahannm se Bach Kr jannat chale jai...
29/07/2020
Irba bazar tand chowk, # # badi kabristan # # # # (Jharkhand)
आज कितने भी महंगे जूते पहन लो, लेकिन वैसी,फीलिंग
नहीं आती"
"
"
"जैसी बचपन में "चूँ पूँ चूँ पूँ" वाले जूते पहन कर आती थी!!
∗ ऐ मुसलमानो! तुम सबसे बेहतर उम्मत हो !!!!
आज हम मुसलमान ख़त्म ऐ नुबुव्वत का मतलब सिर्फ यह
समझते हैं कि अब कोई
नबी कभी नहीं आएगा…
बेशक यह अकीदा सही है लेकिन यह
पूरा अकीदा नहीं है …..
पूरी बात यह है कि अब कोई
नबी नहीं आएगा अब
मुसलमानों को ही अल्लाह का पैगामे हक उन लोगों तक
पहुँचाना है जिन तक नहीं पहुंचा …
और इसकी वजाहत भी अल्लाह रब्बुल
इज्ज़त कुरान में बयांन कर चूका है
» अल-कुरान: (ऐ मुसलमानो!)तुम सबसे बेहतर उम्मत हो,
इंसानों के फायदे के लिए तुम्हे निकला (पैदा किया) गया है
(तुम बेहतर इसीलिए हो क्यूंकि) तुम नेक कामो के लिए
हुक्म (दावत) देते हो
और बुरे कामो पर ऐतराज़ करते हो, और अल्लाह पर ईमान रखते हो ..
-[सुरह अल-इमरान (३) : आयत (११०)]
अब हमे गौर करना चाहिए के-
• क्या वाकय में हमने बेहतर उम्मती होने का फ़र्ज़
अदा किया????
• क्या वाकय में हमारे अमाल इंसानियत के भलाई वाले है ?
• क्या लोगों को अच्छाई की दावत और बुराई से रोकने
का काम हम कर रहे है ?
• और क्या वाकय में हम अल्लाह पर इस तरहा ईमान लाये है जिस
तरहा हुक्म है ???
गौर किया जाए तो यह बहुत
बड़ी जीम्मेदारी है…..
इसे निभाने के लिए हमे अपने अन्दर नबियों वाली सिफात
पैदा करनी होंगी…..
वो हमदर्दी, वो तड़प, वो फ़िक्र अपने अन्दर महसूस
करनी होंगी जो अंबिया किया करते थे,
तभी हम इस
जीम्मेदारी की तरफ
अपना पहला कदम बढ़ा सकते हैं….
वरना अल्लाह को हमारी कोई ज़रुरत नहीं,
और जिस चीज़ की ज़रूरत
नहीं होती उसको कबाड़ी के
हवाले कर दिया जाता है…
और यह बताने की ज़रूरत नहीं कि फिर
कबाड़ी उसके साथ क्या करता है.
» इल्ला माशाअल्लाह !!
आज भी दुनिया में ऐसे लोग है – जो
इखलास के साथ लोगों को दीन की दावत देते
है ,
# अल्लाह उनकी जेद्दो-जेहद को कुबूल फरमाए..
# अल्लाह तआला हम तमाम को इखलास के साथ
लोगों को दिन-ऐ-हक की दावत देने की तौफिक
अता फरमाए …
# तमाम किस्म की गुमराही से हमारे ईमान
की सलामती अता फरमाए..
# जब तक हमे जिन्दा रखे , इस्लाम और ईमान पर जिन्दा रखे….
# खात्मा हमारा ईमान पर हो …
!! वा आखिरू दावाना अन’इलहम्दुलिल्लाही रब्बिल
आलमीन !!
एक टी.वी. पत्रकार एक किसान का इंटरव्यू ले
रहा था...
पत्रकार : आप बकरे को क्या खिलाते हैं...??
किसान : काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : सफ़ेद को..
किसान : घाँस..
पत्रकार : और काले को...??
किसान : उसे भी घाँस..
पत्रकार : आप इन बकरों को बांधते कहाँ हो...??
किसान : काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : सफ़ेद को..
किसान : बाहर के कमरे में..
पत्रकार : और काले को...??
किसान : उसे भी बाहर के कमरे में...
पत्रकार : और इन्हें नहलाते कैसे हो...??
किसान : किसे काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : काले को..
किसान : जी पानी से..
पत्रकार : और सफ़ेद को...??
किसान : जी उसे भी पानी से..
पत्रकार का गुस्सा सातवें आसमान पर, बोला : कमीने ! जब दोनों
के साथ सब कुछ एक जैसा करता है, तो मुझे बार-बार क्यों पूछता है..
काला या सफ़ेद...????
किसान : क्योंकि काला बकरा मेरा है...
पत्रकार : और सफ़ेद बकरा...??
किसान : वो भी मेरा है...
पत्रकार बेहोश...
होश आने पे किसान बोला अब पता चला कमीने जब तुम एक
ही news को सारा दिन घुमा फिरा के दिखाते हो हम
भी ऐसे ही दुखी होते है।
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