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26/01/2019
मैं एक घर के करीब से गुजर रहा था कि अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज आई। उस बच्चे की आवाज में इतन...
17/01/2019

मैं एक घर के करीब से गुजर रहा था कि अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज आई। उस बच्चे की आवाज में इतना दर्द था कि अंदर जा कर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका। अंदर जा कर मैंने देखा कि एक माँ अपने दस साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती। मैंने आगे हो कर पूछा बहनजी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मार रही हो जब कि आप खुद भी रोती हो। उस ने जवाब दिया भाई साहब इस के पिताजी भगवान को प्यारे हो गए हैं और हम लोग बहुत ही गरीब हैं, उन के जाने के बाद मैं लोगों के घरों में काम करके घर और इस की पढ़ाई का खर्च बामुश्किल उठाती हूँ और यह कमबख्त स्कूल रोजाना देर से जाता है और रोजाना घर देर से आता है। जाते हुए रास्ते में कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ जरा भी ध्यान नहीं देता है जिस की वजह से रोजाना अपनी स्कूल की वर्दी गन्दी कर लेता है। मैंने बच्चे और उसकी माँ को जैसे तैसे थोड़ा समझाया और चल दिया। इस घटना को कुछ दिन ही बीते थे की एक दिन सुबह सुबह कुछ काम से मैं सब्जी मंडी गया। अचानक मेरी नजर उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोजाना घर से मार खाता था। मैं क्या देखता हूँ कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्जी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो उन से कोई सब्जी जमीन पर गिर जाती थी वह बच्चा उसे फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता। मैं यह नजारा देख कर परेशानी में सोच रहा था कि ये चक्कर क्या है। मैं उस बच्चे का चोरी चोरी पीछा करने लगा। जब उस की झोली सब्जी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊंची ऊंची आवाजें लगा कर वह सब्जी बेचने लगा। मुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आंखों में नमी, ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार जिन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ । अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिस की दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी। उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाजुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया। वह बच्चा आंखों में आंसू लिए चुप चाप दोबारा अपनी सब्जी को इकट्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्जी एक दूसरे दुकान के सामने डरते डरते लगा ली। भला हो उस शख्स का जिस की दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही दुकान लगाई, उस शख्स ने बच्चे को कुछ नहीं कहा। थोड़ी सी सब्जी थी, ऊपर से बाकी दुकानों से कम कीमत। जल्द ही बिक्री हो गयी और वह बच्चा उठा और बाजार में एक कपड़े वाली दुकान में दाखिल हुआ और दुकानदार को वह पैसे देकर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की और चल पड़ा। मैं भी उस के पीछे पीछे चल रहा था। बच्चे ने रास्ते में अपना मुंह धो कर स्कूल चल दिया। मैं भी उस के पीछे स्कूल चला गया। जब वह बच्चा स्कूल गया तो एक घंटा लेट हो चुका था। जिस पर उस के टीचर ने डंडे से उसे खूब मारा। मैने जल्दी से जा कर टीचर को मना किया कि मासूम बच्चा है, इसे मत मारो। टीचर कहने लगे कि यह रोजाना एक डेढ़ घण्टे लेट से ही आता है और मैं रोजाना इसे सजा देता हूँ कि डर से स्कूल वक्त पर आए और कई बार मै इस के घर पर भी खबर दे चुका हूँ। खैर, बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढऩे लगा। मैने उसके टीचर का मोबाइल नम्बर लिया और घर की तरफ चल दिया। घर पहुंच कर एहसास हुआ कि जिस काम के लिए सब्जी मंडी गया था, वह तो भूल ही गया। मासूम बच्चे ने घर आ कर माँ से एक बार फिर मार खाई। सारी रात मेरा सर चकराता रहा। सुबह उठकर फौरन बच्चे के टीचर को काल की कि मंडी टाइम हर हालत में मंडी पहुंचें और वो मान गए। सूरज निकला और बच्चे का स्कूल जाने का वक्त हुआ और बच्चा घर से सीधा मंडी अपनी नन्हीं दुकान का इंतेजाम करने निकला। मैंने उसके घर जाकर उसकी माँ को कहा कि बहनजी, आप मेरे साथ चलो, मैं आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है। वह फौरन मेरे साथ मुंह में यह कहते हुए चल पड़ीं कि आज इस लड़के की मेरे हाथों खैर नही। छोडूंगी नहीं उसे आज। मंडी में लड़के का टीचर भी आ चुका था। हम तीनों ने मंडी की तीन जगहों पर पोजीशन संभाल ली, और उस लड़के को छुप कर देखने लगे। आज भी उसे काफी लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्जी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल दिया। अचानक मेरी नजर उसकी माँ पर पड़ी तो क्या देखता हूँ कि वह बहुत ही दर्द भरी सिसकियां लेकर लगातार रो रही थी। मैंने फौरन उस के टीचर की तरफ देखा तो बहुत शिद्दत से उसके आंसू बह रहे थे। दोनों के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हों ने किसी मासूम पर बहुत जुल्म किया हो और आज उन को अपनी गलती का एहसास हो रहा हो। उसकी माँ रोते रोते घर चली गयी और टीचर भी सिसकियां लेते हुए स्कूल चला गया। बच्चे ने दुकानदार को पैसे दिए और आज उसको दुकानदार ने एक लेडी सूट देते हुए कहा कि बेटा, आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट ले लो। बच्चे ने उस सूट को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया। आज भी वह एक घंटा देर से था। वह सीधा टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रख कर मार खाने के लिए अपनी पोजीशन संभाल ली और हाथ आगे बढ़ा दिए कि टीचर डंडे से उसे मार ले। टीचर कुर्सी से उठा और फौरन बच्चे को गले लगा कर इस कदर जोर से रोया कि मैं भी देख कर अपने आंसुओं पर काबू न रख सका। मैंने अपने आप को संभाला और आगे बढ़कर टीचर को चुप कराया और बच्चे से पूछा कि यह जो बैग में सूट है, वह किस के लिए है। बच्चे ने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ अमीर लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं। कोई जिस्म को पूरी तरह से ढांपने वाला सूट नहीं और और मेरी माँ के पास पैसे नही हैं इस लिये अपने माँ के लिए यह सूट खरीदा है। तो यह सूट अब घर ले जाकर माँ को आज दोगे? मैंने बच्चे से सवाल पूछा। जवाब ने मेरे और उस बच्चे के टीचर के पैरों के नीचे से जमीन ही निकाल दी। बच्चे ने जवाब दिया, नहीं अंकल छुट्टी के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए दे दूँगा। रोजाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़े थोड़े पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं। टीचर और मैं सोच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे समाज में गरीबों और विधवाओं के साथ ऐसा होता रहेगा और उन के बच्चे त्योहार की खुशियों में शामिल होने के लिए जलते रहेंगे आखिर कब तक

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