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20/06/2022

. बहुप्रतीक्षित "आइस ब्रेकिंग क्लास" कल 21 जून मंगलवार को लालपुर के नए परिसर में 1 बजे होगी।
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29/05/2022
19/01/2021
Acharya Academy, JPSC, UGC-NET: HISTORY, SOCIOLOGY, CTET-JTET on Google 27/11/2020

. #झारखंड_के_जिले भाग 6 : #रामगढ़
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#झारखण्ड

परिचय:
• स्थापना: 12 सितंबर 2007 रामगढ़, पूर्व हजारीबाग जिले से।
• रामगढ़ के नाम का तात्पर्य “भगवान राम का किला” है।
• रामगढ़ नाम रामगढ़ के राजा #रामसिंह_द्वितीय* के नाम से पड़ा है। पहले उर्दा ( #बादम्* ) मे राजधानी थी। रामसिंह द्वितीय ने अपने शासन काल मे रामगढ़ मे राजधानी निर्मांण् का कार्य प्रारंभ किया तथा उनके पुत्र #दलेलसिंह राजधानी स्थान्तरित कर लाये (1670-71) । उन्होंने पिता के नाम से राजधानी का नाम रामगढ़ रखा|
• रामगढ़ जिले में एक उप-विभाजन रामगढ़ और इसके चार खंड अर्थात रामगढ़, गोला, मंडू और पतरातू हैं।

महत्वपूर्ण स्थल

#टूटीझरना_मंदिर*
रामगढ़ केंटोन्मेंट से लगभग आठ किलोमीटर दूर जंगल में अवस्थित इस प्राचीन शिवमंदिर को स्थानीय लोग टूटी झरना के नाम से जानते और पुकारते हैं । दरअसल टूटी झरना के मंदिर में शिवलिंग के ऊपर माँ गंगा की एक प्रतिमा स्थापित है जिसके नाभि से अपने-आप पानी की धारा उसकी हथेलियों से होता हुआ शिवलिंग पर प्रतिक्षण गिरता रहता है और शिव को जल से अभिषिक्त करता रहता है ।

#राजरप्‍पामंदिर*
रजरप्पा के #भैरवी-भेड़ा* और #दामोदर नदी* के संगम पर स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर आस्था की धरोहर है। इस मंदिर को ' #प्रचंडचंडिके* ' के रूप से भी जाना जाता है। मंदिर की उत्तरी दीवार के साथ रखे एक शिलाखंड पर दक्षिण की ओर रुख किए माता छिन्नमस्तिके का दिव्य रूप अंकित है।

असम के #कामाख्यामंदिर के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शक्तिपीठ के रूप में विख्यात मां #छिन्नमस्तिके मंदिर काफी लोकप्रिय है। राजपप्पा मंदिर की कला और वास्तुकला असम के प्रसिद्ध कामख्या मंदिर के समान है।
यहां कई मंदिर हैं जिनमें ' #अष्टामंत्रिका* ' और ' #दक्षिणकाली* ' प्रमुख हैं। यहां आने से तंत्र साधना का अहसास होता है।

रामगढ़ जिले में कई झरने भी मौजूद है जैसे
1. #धरदुरिया_झरना
2. #अमझारिया_झरना
3. #अमलारिया_झरना
4. #गांधोनिया ( गर्म पानी झरना)*

* #बानखेट्टा गुफा यहां से नवपाषाण काल के उपकरण प्राप्त हुए हैं।

ऐतिहासिक स्‍थल
#महात्‍मागांधी समाधि स्‍थल रामगढ़
इस जगह पर महात्‍मा गांधी 1940 में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस अधिनियम की बैठक में शामिल होने आएं थे, जो रामगढ़ में आयोजित की गई थी। उनकी मृत्‍यु के बाद, उनकी याद में एक घड़ा यहां रखा गया।

#चाइनाकब्रिस्तान
कब्रिस्तान में 667 चीनी सैनिकों की कब्र है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान कई सैनिक शहीद भी हाे गए। इनमें से कुछ सैनिकों को यहां दफनाया गया और इसे चाइना सेमेटरी का नाम दिया गया। कब्रों पर सैनिकों के नाम और पद चीनी भाषा में अंकित हैं। कब्रिस्तान के ठीक बीच विशाल स्तंभ है, जिसे तत्कालीन ताईवान के राजा #चांगकाईशेक की स्मृति में बनाया गया है। यहां आनेवाले चीन के प्रतिनिधि और पर्यटक स्तंभ के समक्ष नतमस्तक होकर सैनिकों के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। सेमेटरी के एक छोर पर भगवान बुद्ध का मंदिर है। मंदिर में पहुंचकर असीम शांति का अनुभव किया जा सकता है। इस दो मंजिले मंदिर से पूरी सेमेटरी का मनोरम नजारा दिखता है।

. शेष अगले अंक मे

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Acharya Academy, JPSC, UGC-NET: HISTORY, SOCIOLOGY, CTET-JTET on Google 24/11/2020

.. #झारखण्ड_के_जिले -3 ( रांची: भाग 3 )
#रांची_के_ऐतिहासिक_धरोहर

✓ #पिठोरिया-
रांची से 12 किलोमीटर दूर स्थित पिठोरिया का पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व है। करीब 2000 साल पहले यहां नागवंश शासन का आरंभ हुआ था। 16वीं शताब्दी में शेरशाह का कुछ दिनों के लिए आगमन हुआ था।
#मुडहर_पहाड़- मुंडा स्थल
राजधानी से सटे पिठोरिया की पहाड़ी पर ऐतिहासिक धरोहर मिलते है। राजधानी से सटे पिठोरिया स्थित मुडहर पहाड़ (मुंडरा हिल) और उसपर मिले बिना मस्तक वाले शिव, गणेश, घुडसवार, तीर्थंकर सहित मृदभांडों व प्राचीन कुआं मिले हैं।
#पिठोरियाईदगाह
16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी की बनाई मस्जिद का भग्नावशेष बचा है,जिसके परिसर में शेरशाह द्वारा बनवाई मस्जिद भी है। समीप में स्थित कब्रिस्तान में 4 कब्र शेरशाह काल के हैं।
शेरशाह सूरी ने झारखंड क्षेत्र को मुगल बादशाह हुमायूं से संघर्ष के दौरान कई बार उपयोग किया था। शेरखान मुगल साम्राज्य का अंत कर पुन: अफगान साम्राज्य स्थापित करना चाहता था।

✓ #बोड़ेयामंदिर:
राँची शहर से 8 किमी० उतर पूर्व कांके प्रखंड के अर्न्तगत बोड़ेया ग्राम में स्थित इस मंदिर में राम-लक्षमण और जानकी की मूर्तियां है। यह मंदिर 1665 ई० में लक्ष्मी नारायण तिवारी के द्वारा बनवाया गया। बंदर की लंबाई और चौड़ाई दोनों ही 33 मीटर है।

✓ #जगन्नाथपुरमंदिर :
राँची शहर से लगभग 10-12 किमी0 दूर जगन्नाथपुर में एक छोटी पहाड़ी पर जगन्नाथपुर का एकमात्र मंदिर है जिसकी स्थापना 1691 में की गई थी। यह उड़ीसा के जगन्नाथपुर मंदिर पर आधारित है। आषाढ़ महीने में यहाँ पुरी की तरह रथ का निर्माण कर रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। रथ यात्रा के दौरान यहाँ एक विशाल मेला भी लगता है।

✓ #राममंदिर, चुटिया
रांची रेलवे स्टेशन से पांच मिनट पैदल चलने पर राधा *वल्लभ मंदिर* या *प्राचीन राम मंदिर स्थित* है। नागवंशी राजा #रघुनाथशाहदेव ने इसे 1687 ईस्वी में बनवाया था। मंदिर को साधारणतया लोग सीताराम मंदिर के नाम से जानते हैं, लेकिन मंदिर में एक *शिलालेख* में #राधावल्लभमंदिर नाम अंकित है। गर्भगृह में राम , सीता, लक्ष्मण के साथ राधा-वल्लभ की मूर्ति स्थापित हैं। राम-कृष्ण को मानने वाले धर्मावलंबियों के लिए यह मंदिर खास है।
वर्तमान राम मंदिर कभी नागवंशी राजा रघुनाथ शाहदेव का महल था। यहां *राधा कुंड* भी था जहां रानी स्नान किया करतीं थीं और राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना किया करती थीं। स्वयं राजा कृष्ण भक्त थे।
#चैतन्यमहाप्रभु* के दो भक्त गौर और निताय कीर्तन करते हुए चुटिया आए। तभी राजा को स्वप्न हुआ कि यहां पर आमूक आकृति का मंदिर बनाओ।
*राजा रघुनाथ शाहदेव* ने 1687 ई. में पत्थर का खूबसूरत मंदिर बनवाया और मंदिर के रख-रखाव के लिए गांव दान में दिया। बाद में राजा रघुनाथ रातू किला चले गए।

........... क्रमशः ✍️

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23/11/2020

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#झारखंड_के_जिले : #रांची (भाग 2)
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#रांची_के_प्रमुख_स्थल_पर्यटन:

#नक्षत्रवन स्थापना 2003.
राजभवन के पास स्थित एक पार्क है । झारखंड वन विभाग द्वारा निर्मित पार्क को विभिन्न खंडों में विभाजित किया गया है, जो प्रत्येक नक्षत्र अथवा तारे का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक नक्षत्र हिंदू खगोल विज्ञान और ज्योतिष के अनुसार, एक राशि से संबंधित है। पार्क के केंद्र में स्थापित धनवंतरी की मूर्ति है।

पार्क को #तारामंडलगार्डन* के रूप में भी जाना जाता है और इसमें बच्चों के लिए कई झूलों के साथ एक अलग खंड भी है।

#जैवविविधतापार्क
यह तिपुदाना, लालखटंगा में स्थित है। इसमें प्रकृतिक पगडंडियां और समृद्ध किस्म की वनस्पतियां हैं। पार्क में सूर्यास्त बिंदु, झरना, कछुआ पार्क और जापानी और ओरिएंटल वनस्पतियों और औषधियों के पौधों का छोटा उद्यान भी है। दुर्लभ और प्रभावशाली पौधों के संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित यह पार्क कैक्टस हाउस और एक जलीय उद्यान केंद्र भी है।

#हटियाबांध
धुर्वा क्षेत्र में स्थित हटिया बांध 7 वर्ग किमी क्षेत्र को घेरता है और शहर से लगभग 15 किमी दूर है। यह सूर्यास्त देखने या तैराकी के लिए गोता लगाने के लिए एक आदर्श स्थान है।

#पतरातूघाटी
भव्य पतरातू घाटी लोगों में अपने अनोखेपन और अद्वितीय सुंदरता की छाप छोड़ती है। निस्संदेह राँची के आसपास के सबसे मनोरम स्थानों में से एक यह घाटी अपनी घुमावदार सड़कों और हेयरपिन झुकाव के लिए प्रसिद्ध है जिसका नज़ारा पहाड़ियों से देखने लायक़ है।

#जोन्हाजलप्रपात
राँची से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित जोन्हा जलप्रपात 141 फीट की ऊंचाई से गिरते राधू नदी पर स्थित है।

#दशमघाघ जलप्रपात
दस शानदार नदियों में विभाजित दाशम घाघ जलप्रपात को उपयुक्त नाम दिया गया है। स्वर्णलेखा नदी की एक सहायक नदी कांची नदी से अपना जल प्रवाह करते हुए यह झरना 144 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है।

#राँचीझील
राँची पहाड़ी की तलहटी में स्थित राँची झील शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। एक आदर्श संतोषदायक जगह है। यहां नौका-चालन का अवसर उपलब्ध है, जो अपने आसपास की प्राकृतिक सुंदरता को महसूस करने का उत्तम तरीका है। इस झील का निर्माण वर्ष1842 में *कर्नल ओन्सली* नाम के एक ब्रिटिश नागरिक ने कराया था। पर्यटक राँची हिल पर भी जा सकते हैं, जिसमें एक शिव मंदिर है। यहां से, पर्यटक आसपास के नज़ारे का मनोरमम दृश्य भी देख सकते हैं।

#टैगोरहिल
300 फीट की ऊंचाई पर टैगोर हिल पर्यटकों के ठहरने का एक प्रमुख स्थान है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त का प्राकृतिक दृश्य मनोरम होता है।
कहा जाता है कि रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई #ज्योतिंद्रनाथटैगोर इस पहाड़ी की सुंदरता पर मोहित हो गये थे। उन्होंने वर्ष1908 में पहाड़ी का भ्रमण किया था। उन्हें यहां के दृश्यों से बेपनाह स्नेह हो गया था। जल्द ही, उन्होंने पहाड़ी पर अपना शिविर स्थापित किया, जिसके बाद इसे टैगोर हिल के नाम से जाना जाने लगा।
पर्यटक इस पहाड़ी के समीप स्थित #रामकृष्णमिशन आश्रम का भी दौरा कर सकते हैं, जो कि #एग्रेरियन_वोकेशनल_इंस्टीट्यूट* और #दिव्यायन* का केंद्र है। टैगोर पहाड़ी पर राँची के सभी हिस्सों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

#गोंडाहिल्स और #रॉकगार्डन*
राँची के गोंडा हिल्स में रॉक गार्डन एक प्रसिद्ध पिकनिक स्थल है जहां पर्यटक कई मनोरंजक गतिविधियों जैसे नौका-चालन, अंतरिक्ष की सवारी और डरावने शो का आनंद उठा सकते हैं। बच्चों के साथ जाने का एक आदर्श स्थान है, एक ही चट्टान को तराश कर सुंदर पार्क को उकेरा गया है और यह चारों तरफ़ कांके डैम झील के शांदार दृश्य को दर्शाता है। इस पार्क में एक छोटा सा हैंगिंग ब्रिज (पुल) और मानव निर्मित झरना भी है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत हैं।
पार्क के भूत बंगला या हॉरर पार्क में जा कर पर्यटक सबसे रोमांचकारी अनुभव प्राप्त कर सकते हैं, जिसे मिस्र के पिरामिड जैसी संरचना के तहत स्थापित किया गया है।

#राँचीपहाड़ी #फांसी_टंगड़ी
शहर का लोकप्रिय पर्यटन स्थल ‘राँची हिल’ 2,140 फीट की ऊंचाई पर है, जहां से शहर का एक मनोरम दृश्य आंखों के सामने होता है। मुख्य आकर्षण एक सदियों पुराना मंदिर है, जो पहाड़ी मंदिर के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। 468 सीढ़ियां चढ़ने के बाद भक्त #‘पहाड़ीबाबा’* अर्थात भगवान शिव के मंदिर में पहुंचते हैं, जिनकी पूजा यहां लिंगम के रूप में की जाती है।

#जगन्नाथमंदिर
जगन्नाथ मंदिर पहाड की चोटी पर बना एक खूबसूरत मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 17 वी शताबदी में जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। जो कि देखने योग्य है। यहां से आप क्रिकेट स्टेडियम को भी आसानी से देख सकते है ।।

#भगवान्बिरसाजैविकउद्यान

भगवान् बिरसा जैविक उद्यान झारखण्ड की राजधानी रांची में स्थित एक उद्यान हैं। यह रांची-हज़ारीबाग़ रोड पर स्थित यह उद्यान सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। बिरसा जैविक उद्यान की स्थापना 1994 मे हुई।

#मूटामगरमच्छप्रजननकेंद्र
बिहार सरकार ने वर्ष 1983 में मूटा मगरमच्छ प्रजनन केंद्र खोला था। उस समय काफी संख्या में मगरमच्छ यहां लाए गए थे। लगभग 8-10 वर्षों तक यहां मगरमच्छों को प्रजनन हुआ।
केंद्र से सटी भैरवी नदी में आज भी मगरमच्छ रहते हैं। मूटा में जो नोटिस बोर्ड विभाग ने लगाया है, उसमें 13 दह का नाम अंकित है। वहीं छोटे दह में भी मगरमच्छ को गांव के लोगों ने देखा है।

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*केंद्र संरक्षित झारखण्ड के दर्शनीय स्थल*

केंद्र सरकार के द्वारा आदिम जनजाति असुर से संबंधित कई प्राचीन स्थलों को धरोहर के रूप में संरक्षित किया है जो इस प्रकार है

N-JH-1: असुर स्थल, हंसा
N-JH-2: खूंटी टोला

N-JH-3 : शिवलिंग स्थापित प्राचीन पुस्तक मंदिर,खेकपेत्ता ( Khekpetta )

N-JH-4 : असुर स्थल, खूंटी टोला

N-JH-5: असुर स्थल, कुंजला ( Kunjla) Ranchi

क्रमशः ( रांची: प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल जैसे चुटिया राम मंदिर, सुतियंबे तथा पिठौरिया के विभिन्न मंदिरों की जानकारी भाग 3 में)

https://g.page/acharya-academy-jpsc-history-net?gm

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