23/11/2020
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#झारखंड_के_जिले : #रांची (भाग 2)
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#रांची_के_प्रमुख_स्थल_पर्यटन:
#नक्षत्रवन स्थापना 2003.
राजभवन के पास स्थित एक पार्क है । झारखंड वन विभाग द्वारा निर्मित पार्क को विभिन्न खंडों में विभाजित किया गया है, जो प्रत्येक नक्षत्र अथवा तारे का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक नक्षत्र हिंदू खगोल विज्ञान और ज्योतिष के अनुसार, एक राशि से संबंधित है। पार्क के केंद्र में स्थापित धनवंतरी की मूर्ति है।
पार्क को #तारामंडलगार्डन* के रूप में भी जाना जाता है और इसमें बच्चों के लिए कई झूलों के साथ एक अलग खंड भी है।
#जैवविविधतापार्क
यह तिपुदाना, लालखटंगा में स्थित है। इसमें प्रकृतिक पगडंडियां और समृद्ध किस्म की वनस्पतियां हैं। पार्क में सूर्यास्त बिंदु, झरना, कछुआ पार्क और जापानी और ओरिएंटल वनस्पतियों और औषधियों के पौधों का छोटा उद्यान भी है। दुर्लभ और प्रभावशाली पौधों के संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित यह पार्क कैक्टस हाउस और एक जलीय उद्यान केंद्र भी है।
#हटियाबांध
धुर्वा क्षेत्र में स्थित हटिया बांध 7 वर्ग किमी क्षेत्र को घेरता है और शहर से लगभग 15 किमी दूर है। यह सूर्यास्त देखने या तैराकी के लिए गोता लगाने के लिए एक आदर्श स्थान है।
#पतरातूघाटी
भव्य पतरातू घाटी लोगों में अपने अनोखेपन और अद्वितीय सुंदरता की छाप छोड़ती है। निस्संदेह राँची के आसपास के सबसे मनोरम स्थानों में से एक यह घाटी अपनी घुमावदार सड़कों और हेयरपिन झुकाव के लिए प्रसिद्ध है जिसका नज़ारा पहाड़ियों से देखने लायक़ है।
#जोन्हाजलप्रपात
राँची से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित जोन्हा जलप्रपात 141 फीट की ऊंचाई से गिरते राधू नदी पर स्थित है।
#दशमघाघ जलप्रपात
दस शानदार नदियों में विभाजित दाशम घाघ जलप्रपात को उपयुक्त नाम दिया गया है। स्वर्णलेखा नदी की एक सहायक नदी कांची नदी से अपना जल प्रवाह करते हुए यह झरना 144 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है।
#राँचीझील
राँची पहाड़ी की तलहटी में स्थित राँची झील शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। एक आदर्श संतोषदायक जगह है। यहां नौका-चालन का अवसर उपलब्ध है, जो अपने आसपास की प्राकृतिक सुंदरता को महसूस करने का उत्तम तरीका है। इस झील का निर्माण वर्ष1842 में *कर्नल ओन्सली* नाम के एक ब्रिटिश नागरिक ने कराया था। पर्यटक राँची हिल पर भी जा सकते हैं, जिसमें एक शिव मंदिर है। यहां से, पर्यटक आसपास के नज़ारे का मनोरमम दृश्य भी देख सकते हैं।
#टैगोरहिल
300 फीट की ऊंचाई पर टैगोर हिल पर्यटकों के ठहरने का एक प्रमुख स्थान है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त का प्राकृतिक दृश्य मनोरम होता है।
कहा जाता है कि रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई #ज्योतिंद्रनाथटैगोर इस पहाड़ी की सुंदरता पर मोहित हो गये थे। उन्होंने वर्ष1908 में पहाड़ी का भ्रमण किया था। उन्हें यहां के दृश्यों से बेपनाह स्नेह हो गया था। जल्द ही, उन्होंने पहाड़ी पर अपना शिविर स्थापित किया, जिसके बाद इसे टैगोर हिल के नाम से जाना जाने लगा।
पर्यटक इस पहाड़ी के समीप स्थित #रामकृष्णमिशन आश्रम का भी दौरा कर सकते हैं, जो कि #एग्रेरियन_वोकेशनल_इंस्टीट्यूट* और #दिव्यायन* का केंद्र है। टैगोर पहाड़ी पर राँची के सभी हिस्सों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
#गोंडाहिल्स और #रॉकगार्डन*
राँची के गोंडा हिल्स में रॉक गार्डन एक प्रसिद्ध पिकनिक स्थल है जहां पर्यटक कई मनोरंजक गतिविधियों जैसे नौका-चालन, अंतरिक्ष की सवारी और डरावने शो का आनंद उठा सकते हैं। बच्चों के साथ जाने का एक आदर्श स्थान है, एक ही चट्टान को तराश कर सुंदर पार्क को उकेरा गया है और यह चारों तरफ़ कांके डैम झील के शांदार दृश्य को दर्शाता है। इस पार्क में एक छोटा सा हैंगिंग ब्रिज (पुल) और मानव निर्मित झरना भी है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत हैं।
पार्क के भूत बंगला या हॉरर पार्क में जा कर पर्यटक सबसे रोमांचकारी अनुभव प्राप्त कर सकते हैं, जिसे मिस्र के पिरामिड जैसी संरचना के तहत स्थापित किया गया है।
#राँचीपहाड़ी #फांसी_टंगड़ी
शहर का लोकप्रिय पर्यटन स्थल ‘राँची हिल’ 2,140 फीट की ऊंचाई पर है, जहां से शहर का एक मनोरम दृश्य आंखों के सामने होता है। मुख्य आकर्षण एक सदियों पुराना मंदिर है, जो पहाड़ी मंदिर के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। 468 सीढ़ियां चढ़ने के बाद भक्त #‘पहाड़ीबाबा’* अर्थात भगवान शिव के मंदिर में पहुंचते हैं, जिनकी पूजा यहां लिंगम के रूप में की जाती है।
#जगन्नाथमंदिर
जगन्नाथ मंदिर पहाड की चोटी पर बना एक खूबसूरत मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 17 वी शताबदी में जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। जो कि देखने योग्य है। यहां से आप क्रिकेट स्टेडियम को भी आसानी से देख सकते है ।।
#भगवान्बिरसाजैविकउद्यान
भगवान् बिरसा जैविक उद्यान झारखण्ड की राजधानी रांची में स्थित एक उद्यान हैं। यह रांची-हज़ारीबाग़ रोड पर स्थित यह उद्यान सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। बिरसा जैविक उद्यान की स्थापना 1994 मे हुई।
#मूटामगरमच्छप्रजननकेंद्र
बिहार सरकार ने वर्ष 1983 में मूटा मगरमच्छ प्रजनन केंद्र खोला था। उस समय काफी संख्या में मगरमच्छ यहां लाए गए थे। लगभग 8-10 वर्षों तक यहां मगरमच्छों को प्रजनन हुआ।
केंद्र से सटी भैरवी नदी में आज भी मगरमच्छ रहते हैं। मूटा में जो नोटिस बोर्ड विभाग ने लगाया है, उसमें 13 दह का नाम अंकित है। वहीं छोटे दह में भी मगरमच्छ को गांव के लोगों ने देखा है।
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*केंद्र संरक्षित झारखण्ड के दर्शनीय स्थल*
केंद्र सरकार के द्वारा आदिम जनजाति असुर से संबंधित कई प्राचीन स्थलों को धरोहर के रूप में संरक्षित किया है जो इस प्रकार है
N-JH-1: असुर स्थल, हंसा
N-JH-2: खूंटी टोला
N-JH-3 : शिवलिंग स्थापित प्राचीन पुस्तक मंदिर,खेकपेत्ता ( Khekpetta )
N-JH-4 : असुर स्थल, खूंटी टोला
N-JH-5: असुर स्थल, कुंजला ( Kunjla) Ranchi
क्रमशः ( रांची: प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल जैसे चुटिया राम मंदिर, सुतियंबे तथा पिठौरिया के विभिन्न मंदिरों की जानकारी भाग 3 में)
https://g.page/acharya-academy-jpsc-history-net?gm