Abhigya

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A writer likes everything and he writes poems or stories as per his choice

06/10/2025
Photos from Abhigya's post 22/09/2025
17/02/2025

बेटियाँ घर की उड़ान

बेटियाँ घर की उड़ान होती हैं,
बेटियाँ ही समाज की भविष्यकाल होती हैं।
मत बनाओ बेटियों को ढाल समाज की,
उन्हे तो उड़ने की चाह होती है।

बेटियाँ तो अपने माँ-बाप की सम्मान होती हैं,
बेटियों से ही माँ-बाप की पहचान होती है,
अब बेटे नही बेटियाँ हर घर की चिराग होती हैं।
वो किसी की बेटी होती हैं, तो किसी की माँ होती हैं

किसी की बहन होती हैं, तो किसी की पत्नी होती हैं।
किसी की बहू होती हैं, तो किसी के घर की इज्जत होती हैं।
पर दुष्टों के विनाश के लिए, वो स्वयं काल होती हैं।

मत बनाओ बेटियों को पिंजरा खूबसूरती का,
वो तो हर घर की मान-सम्मान होती हैं।

उन्ही से सुबह और शाम होती है।
उन्ही से रौशन है घर बार हमारा,
वो तो हर घर की शान होती हैं।

[कड़वा सत्य का संग्रह]
(सत्यमार्गदर्शक)

16/02/2025

_यादें_
पुरानी यादें,
पल मे धूप पल मे छाँव देख होते,
याद आती हैं पुरानी बातें,
वो यादें जो बचपन के थें।
बचपन मे बिताए वो पल,
ना कोई खुशी ना कोई गम
गर्मी की कड़कड़ाती धूप,
पल में बदलते छांव
जाड़े की ठंड
बचपन के दोस्त,
वो थी हमारी बचपना
बारिश से भी जुड़ी हैं
वो यादें।
पानी की बुंदे और,
बचपन की वो यादें।
कीचड़ मे छपछप करते बच्चें,
तालाब मे टर्र टर्र करते मेंढक।
याद दिलातीं वो रातें,
हमारी बचपन की यादें।

[कड़वा सत्य का संग्रह]
(सत्यमार्गदर्शक)

16/02/2025

A writer mind...

02/02/2025

We need Justice...
परीक्षार्थियों पर किए जा रहे अत्याचार...
😞😞😠😡😡✊️✊️✊️

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