11/04/2025
सक्सेस स्टोरी
भाई-पिता के ताने से डिप्रेशन हुआ, दोस्तों ने संभाला:प्रीलिम्स निकालने के लिए दो ट्रिक काम आईं, दूसरे अटेम्प्ट में क्रैक कर दिया BPSC
‘पिता जी गांव-रिश्तेदारों के दबाव में आकर मुझ पर बहुत प्रेशर बनाते थे। मुझे कहने में गुरेज नहीं कि मैं उनकी बातों से डिमोटिवेट होता था। मगर ठीक है, आज उनकी उन्हीं बातों की बदौलत यहां तक पहुंचा हूं।’
भास्कर की स्पेशल ‘BPSC सक्सेस स्टोरी’ में 7वीं कहानी खगड़िया के कौशल कुमार की। 69वीं BPSC में 79वां रैंक हासिल करने वाले 26 साल के कौशल फाइनेंस डिपार्टमेंट में असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अकाउंट ऑफिसर हैं।
आगे की कहानी, देखिए और पढ़िए उनकी जुबानी…
पिता, भाई और कुछ और लोगों के बारे में बिना झिझके अपनी बात रखते हुए कौशल कहते हैं, ‘बड़े भाई आर्मी में हैं और उनका मुझ पर बहुत दबाव था। BA पास करने के बाद पापा ने भी चार लोगों की बातों में आकर सवाल-जवाब करना शुरू कर दिया। मैं मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। बाद में धीरे-धीरे उस दौर से बाहर निकल आया। अब लगता है कि वही बातें मुझे यहां तक ले आई है।’
छठवीं से ही प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल, चितौड़गढ़ में पढ़े-बढ़े कौशल कुमार को लगता था कि सेना की नौकरी ही देश सेवा के लिए सबसे जरूरी है।
वो कहते हैं, ‘मेरी बहन सब इंस्पेक्टर है और बड़े भाई आर्मी में हैं। मेरा एडमिशन सैनिक स्कूल में करा दिया गया। इस कारण मेरे दिलो-दिमाग में भी सेना ही चलता था। मैंने 12वीं की परीक्षा देने के साथ ही NDA (नेशनल डिफेंस एकेडमी) का अटेम्प्ट देना शुरू किया।
कई बार मेहनत के बाद भी जब नहीं हुआ तो बीएचयू, बनारस में एडमिशन ले लिया। बीए-पॉलिटिकल साइंस में पढ़ने के दौरान भी मैंने सेना का जुनून नहीं त्यागा और सीडीएस के अटेंप्ट दिए।’
असफलता से मन टूटा तो दोस्तों ने समझाया
2021 तक इन तैयारियों में समय खपाते हुए कौशल तो अपनी जिंदगी में कुछ न कुछ नया और बेहतर सीख रहे थे, लेकिन समाज के लिए ये काफी नहीं था। कौशल बताते हैं,
‘मेरा छुट्टियों में घर जाना मुश्किल हो जाता था। शादी- ब्याह में लोग मुझसे पूछ देते थे कि आगे का क्या प्लान है। मैंने सोचा कि इसका कुछ तो जवाब होगा। फिर घर वालों से बातचीत करने के बाद और यूनिवर्सिटी में हुए एक्सपोजर को देखने के बाद मैंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी।’
कौशल बताते हैं, ‘अक्टूबर 2022 में दिल्ली की एक नामी कोचिंग में एडमिशन लिया। छह महीने में ही UPSC और स्टेट PCS के एग्जाम शुरू हो गए। UPSC की तैयारी कच्ची ही रही। सिलेबस कंप्लीट करते-करते कई सारे प्री एग्जाम आ गए और मेरा किसी में नहीं हुआ। बहुत निराश होकर घर लौट आना चाहता था, मगर दोस्तों ने BPSC पूरी तैयारी के साथ देने की सलाह दी।’
कौशल ने पहले भी BPSC दिया था, मगर प्री में छंट जाते थे। वो कहते हैं, ‘मैं बढ़िया लिख लेता था, इसलिए मेरा सारा फोकस किसी भी तरह प्री निकालना था। छोटे-छोटे नोट्स और रिवीजन के जरिए 2023 में मेरा प्री निकला और मेंस भी निकला।’
बच्चों से खुलकर बात करें पेरेंट्स
कौशल कहते हैं, ‘इस हेक्टिक तैयारी में दोस्तों सहित आसपास के लोगों का साथ देना जरूरी है। मुझ पर तो सोसाइटी से ज्यादा घर वालों का प्रेशर था। घर वाले अविश्वास में थे। दिल्ली रहता है, रिजल्ट नहीं आता। ये सब निगेटिविटी से लड़ने में मेरी एनर्जी ज्यादा चली जाती थी। मुझे डॉक्टर को दिखाने की नौबत आ गई थी। लेकिन मैंने अपने बड़े भाई और पिता की बातों को दिल से लगाना छोड़ दिया।’
‘फिर भी जब ऐसी बातें होती थी तो मूड पॉजिटिव करने में समय लगता था। लेकिन जब एक बार मैंने इस पर पार पा लिया तब से मुझे किसी की बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं थी। मुझे बस प्री निकालना था, क्योंकि मेरा वही फंसता था।’
बड़े भाई के साथ कौशल। वह बताते हैं कि भाई और पिता जी ने प्रेशर तो बनाया, लेकिन उनकी बदौलत ही हम आज इस मुकाम पर हैं।
बड़े भाई के साथ कौशल। वह बताते हैं कि भाई और पिता जी ने प्रेशर तो बनाया, लेकिन उनकी बदौलत ही हम आज इस मुकाम पर हैं।
कौशल कहते हैं, ‘मुझे भरोसा था कि प्री निकला तो मेंस निकल जाएगा। मेरी राइटिंग स्किल अच्छी है। वही हुआ भी। मैंने दूसरे एटेम्ट में BPSC क्वालिफाई कर लिया और आज ट्रेनिंग ले रहा हूं।’
‘कोई भी रैंक वन जितनी ही मेहनत करता है, लेकिन पेरेंट्स कई बार रिएक्ट कर देते हैं। या फिर दो-चार बार मन मुताबिक रिजल्ट नहीं आने पर संकोच में ही सही, बातचीत कम कर देते हैं। ऐसे में बच्चा सोचता है कि इस किराए के कमरे में ही खप जाऊंगा, लेकिन घर नहीं जाऊंगा। कई बार ऐसा होता भी है। लड़के घर नहीं लौटते हैं और दिल्ली-पटना में ही रह जाते हैं। कुछ उससे भी बुरा दौर देखते हैं।’
ऐसी बातों का बस एक ही इलाज है कि संघर्ष के दिनों में बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए। साथ ही उन्हें कभी भी नेगेटिव बातें नहीं करनी चाहिए। पेरेंट्स को पता होना चाहिए कि बच्चा डेली लाइफ में क्या फेस कर रहा है। पेरेंट्स दिल से बातें करेंगे तो बच्चा भी दिल से मेहनत करेगा।
मेंस लिखने वाले सेंटेंस फॉर्मेशन पर ध्यान दें
कौशल मेंस लिखने वालों को सलाह देते हैं कि वो छोटे सेंटेंस फ्रेम करें और शब्दों के बीच में गैप छोड़ें। वो कहते हैं, ‘आंसर राइटिंग को तीन हिस्से में बांटकर लिखा जा सकता है। जिसमें शुरू के दो हिस्से में अपने सारे प्वाइंट्स और आखिरी में निष्कर्ष में सारी बातें समझा सकते हैं।
खगड़िया के रहने वाले कौशल कुमार बिपार्ड में ट्रेनिंग कर रहे हैं।
खगड़िया के रहने वाले कौशल कुमार बिपार्ड में ट्रेनिंग कर रहे हैं।
कोशिश करनी चाहिए कि जवाब संतुलित और तार्किक रखें। किसी भी मुद्दे का केवल एक पक्ष न रखते हुए बैलेंस्ड जवाब लिखने से असर पड़ता है।’
वह बताते हैं, ‘अगर आप डायग्राम और बुलेट पॉइंट्स बनाते हैं तो कॉपी थोड़ी सुंदर दिखती है। आपकी लिखावट बहुत अच्छी न हो तो ये तरीका काम आता है। लम्बे पैराग्राफ की बजाय बुलेट पॉइंट्स में उत्तर लिखने से कॉपी अधिक व्यवस्थित दिखती है।’
कौशल जवाब लिखने का रिवीजन करने पर जोर देते हैं। वो कहते हैं, ‘डेली कुछ उत्तर लिखने की कोशिश करें। इसके लिए पुराने क्वेश्चन पेपर हल कर सकते हैं। चाहें तो इन जवाबों को अपने सीनियर या किसी मेंटर्स से जांचवाएं।’