Abhibhavak Vidyalaya, Raipur

Abhibhavak Vidyalaya, Raipur

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A value education school which focuses on development of human consciousness. The curriculum is based on Madhyasth Darshan, propounded by Shri A. Nagraj ji.

Photos from Abhibhavak Vidyalaya, Raipur's post 24/04/2026
Anil Singh Tomar 18/04/2026

Anil Singh Tomar 14 likes. "अभिभावक विद्यालय(हिंदी) "

15/04/2026

नमस्ते🙏😊 सभी नए अभिभावकों का पुनः एक बार हार्दिक स्वागत है 🎊😊

आप सभी अभिभावकों के लिए एक अवसर है ये जानने का कि अभिभावक विद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार पक्ष का क्या स्वरूप है क्या पाठ्यक्रम है ।
विद्यालय के उद्देश्य , विधि , नीति क्या है और ये आज के समय क्यों आवश्यक है।
इसे जानने के लिए आप सब आमंत्रित है 20 से 24 अप्रैल , सुबह 8 से 12 बजे तक अभिभावक विद्यालय में *चेतना विकास मूल्य शिक्षा वर्कशॉप* में 🙏😊
ये जानना जरूरी है कि बच्चो को देखने की दृष्टि हमारी क्या हो बच्चे किन मूल चाहना के साथ जन्म लेते है उन्हें अभिभावक एवं अध्यापक कैसे पूरा करे ।
छोटे बच्चों के साथ काम करना है तो अभिभावक एवं अध्यापक के बीच तालमेल अतिमहत्वपूर्ण भाग है🙏😊

★अभिभावक विद्यालय टीम★

04/04/2026
04/04/2026

*कोई भी व्यक्ति कभी शून्य नहीं होता*
रूस की शिक्षा प्रणाली में किसी परीक्षा में अधिकतम अंक 5 होते हैं। परन्तु एक चौंकाने वाली बात यह है कि—अगर कोई छात्र पूरी तरह खाली उत्तर पुस्तिका भी जमा कर दे, तब भी उसे 2 अंक दिए जाते हैं।

मॉस्को विश्वविद्यालय में जब मुझे यह बात पहले दिन पता चली, तो मैं सचमुच हैरान रह गया। मुझे यह बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा — अगर किसी ने कुछ भी नहीं लिखा, तो उसे शून्य अंक क्यों नहीं मिलते?

जिज्ञासा के कारण मैंने डॉ. थियोडोर मेद्रायेव से पूछा, “सर, यह कैसे सही है कि जिसने कुछ भी नहीं लिखा, उसे भी 2 अंक दिए जाएँ?”

डॉ. मेद्रायेव मुस्कराए। फिर शांत और विचारशील स्वर में बोले : “शून्य का अर्थ है—अस्तित्वहीन। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह शून्य कैसे हो सकता है ? ज़रा सोचिए—कक्षा तक पहुँचने के लिए एक छात्र कितना प्रयास करता है। हो सकता है वह ठिठुरती ठंड में सुबह-सुबह उठा हो, दूर से बस, ट्राम या ट्रेन में खड़े-खड़े आया हो। भले ही उसने खाली काग़ज़ जमा किया हो, लेकिन उसका आना ही यह बताता है कि उसने कोशिश की। फिर मैं उसे शून्य कैसे दे सकता हूँ ?”

उन्होंने आगे कहा : “हो सकता है छात्र उत्तर न लिख पाया हो। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसका पूरा प्रयास मिटा दिया जाए ? जिन रातों में वह जागा, जिन कॉपियों को उसने खरीदा, जिन किताबों को खोला, जिन संघर्षों से वह गुज़रा—क्या हम सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दें ? नहीं, मेरे प्रिय ! इंसान कभी शून्य नहीं होता। जब हम शून्य देते हैं, तो हम उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं, उसके भीतर की आग बुझा देते हैं। एक शिक्षक के रूप में हमारा उद्देश्य छात्रों को बार-बार खड़ा होने में मदद करना है—उन्हें हार मानने पर मजबूर करना नहीं।”

मैं चुपचाप सुनता रहा। उस क्षण मेरे भीतर कुछ हिल गया। तब मुझे समझ आया—शिक्षा केवल अंकों या लिखे गए उत्तरों का नाम नहीं है। शिक्षा लोगों को जीवित रखने की प्रक्रिया है, प्रयास को पहचानने की कला है, आशा की रक्षा करने का माध्यम है।

उस दिन डॉ. मेद्रायेव ने मुझे एक गहरी सच्चाई सिखाई : शिक्षा केवल ज्ञान का वितरण नहीं है, बल्कि मानवता का अभ्यास है। काग़ज़ पर लगा शून्य अक्सर छात्रों के लिए मृत्यु-घंटी बन जाता है। वह शून्य उन्हें भय से भर देता है, रुचि छीन लेता है और धीरे-धीरे सीखने से घृणा पैदा कर देता है। लेकिन एक शिक्षक का दायित्व है प्रोत्साहित करना, आश्वस्त करना और कहना—
“तुम कर सकते हो। फिर से कोशिश करो।”

जब हम खाली उत्तर पुस्तिका पर भी न्यूनतम अंक देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं—
“तुम शून्य नहीं हो। तुम अब भी महत्वपूर्ण हो। तुम सक्षम हो। तुम असफल नहीं हुए—बस इस बार सफल नहीं हो पाए। फिर से प्रयास करो।”

यही सच्ची शिक्षा है। एक छात्र का भविष्य शिक्षक के हाथों में आकार लेता है। अगर शिक्षक थोड़ा और मानवीय बन जाएँ, अगर वे अंकों से परे प्रयास को देखना सीख लें, तो कितने ही हतोत्साहित छात्र फिर से सपने देखने का साहस कर सकते हैं।

मुझे लगता है यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे दुनिया भर के शिक्षकों तक पहुँचना चाहिए। क्योंकि शून्य अंक कभी शिक्षा नहीं होते। शून्य अंक अक्सर किसी की यात्रा का अंत होते हैं। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह कम से कम आश्वासन और पहचान का अधिकारी है।

#प्रेरक_प्रसंग

01/04/2026

*Good Morning* 🙏😊
*New academic session*

*The new academic session will begin on 6th April 2026* for Class 1 to 5.
*Timing*: 8:30 am to 11:30 am.

*For pre-primary classes (nursery to PP2)* the new session will start on 29th June 2026.

Abhibhavak Vidyalaya Team

28/03/2026

📚*Result PTM*📝

Congratulations !!
🥳👏🏼🎗️🎯🥇🥳

With your support, the children have happily given their final exams. They have shown that working hard, putting in effort, can be done without pressure. 👍🏼😊

आपके सपोर्ट से बच्चों ने खुशी खुशी तैयारी की और exam लिखा। 👍🏼😊

At Abhibhavak Vidyalaya, we firmly believe that for the child's balanced development, they need a whole lot of love, appreciation and encouragement.

🩷🫂This, balanced with our own conduct as a model for them to emulate and firm guidance, ensures that the child will grow into a confident and sincere person.

हमारे आचरण को देखकर ही बच्चे उसका अनुकरण करते हैं। हमारे प्यार, और प्रोत्साहन से वे खिलते हैं और ज़िम्मेदार- ईमानदार बनते हैं। 👍🏼

*On Sunday, 29th March*, we will hand over your child's annual report card. 📝☺️

*Timing* : 10 am to 12 pm

*New academic session*
We are at the end of this academic session. *The new academic session will begin on 6th April 2026* for Class 1 to 5.
*Timing*: 8:30 am to 11:30 am.

*For pre-primary classes (nursery to PP2)* the new session will start on 29th June 2026.

Hope you all have a comfortable break.

~Abhibhavak Vidyalaya Team~

Photos from Abhibhavak Vidyalaya, Raipur's post 28/03/2026

Pause the noise and join us for exploring
*Harmony & Co-Existence* - An exclusive 2-day discussion with *Ankit Pogula* (award winning filmmaker and social activist) to explore clarity, purpose, lasting peace and special screening of his movie “*Bhed Chal*”- nominated for *Green Oscars 2025*.
Please see the attached invite for details and RSVP to confirm your spot✨

🗓️ 28th & 29th March
⏰ 9:30am - 4:30pm
📍 The Soul Garden

Hoping to see you there🌻

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Abhibhavak Vidyalaya , VIP Road , Beside Royal Park
Raipur
492001