छत्तीसगढ़ आदिवासियों का है और हमेशा रहेगा

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छत्तीसगढ़ आदिवासियों का है और हमेशा रहेगा छत्तीसगढ़ आदिवासियों का है और हमेशा र?

कल भारत बंद के शहीदो को श्रद्धांजलि के लिए सभी को डीपी सोशल नेटवर्क से
01/04/2019

कल भारत बंद के शहीदो को श्रद्धांजलि के लिए सभी को डीपी सोशल नेटवर्क से

http://cgbasket.in/cgbasket-inwp-adminpost-new-php-31/
29/09/2017

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** रायगढ.के खरसिया के सात सरपंच से लेकर बालौद के कई पंचायतों ने पत्र लिखकर शासन को चेतावनी दी हैं, कि भारत देश के मूलनिवासी आदिवासी प्रकृति को मानने वाले हैं हमारे पूर्वज भी इसी पर विश्वास रखते थे.जो आज भी इसी परपंरा को निभाते हैं ,भारत.एक धर्म निरपेक्ष देश है यहां सबको अपना अपनाComplete Reading

adhivashi mahla
29/09/2017

adhivashi mahla

Jai Ravan Raja sheyar kare ye bate logo ko janna jaruri hai
29/09/2017

Jai Ravan Raja sheyar kare ye bate logo ko janna jaruri hai

Jai Seva
29/09/2017

Jai Seva

 #पाचवीं अनुसूची व ." #सावधान प्रवेश निषेध" की मूल भावना/आधार....को जानना है तो.... .  #गायता  #जोहारनी(भूमका/ठाकुर जोहा...
11/09/2017

#पाचवीं अनुसूची व ." #सावधान प्रवेश निषेध" की मूल भावना/आधार....को जानना है तो.... . #गायता #जोहारनी(भूमका/ठाकुर जोहारनी)(पुनांग तिन्दाना पंडुम के दुसरा दिन/पखवाड़े भर) को #जांचो- #परखों फिर #मानो... .....................................
( टीप:- #खुटीं झारखंड व #साल्हेभाट - कुलगांव छतीसगढ़ के गांवों में दंगा फसाद करने जाने वाले प्रशासनिक अधिकारी जरूर पढ़े)....... हजारों साल पहले गाँव की सर्वप्रथम स्थापना व प्रकृति सम्मत ढंग से वेल डिजाइन / रचना करने वाले व गोण्डवाना के 07 महान आधार " #गण्ड - गोण्ड - गोण्डवाना - गोटूल _ गुडी - गायता-गोण्डी" में से एक " #गायता"/बुमियार को सम्मान देने तथा 18 महान #लिगों मे से एक मौसम विज्ञानी, 12 वाद्ययंत्रो के खोजकर्ता संगीतज्ञ #भिमा लिगों के अध्ययन को सतत् #हस्तांतरित करने के लिए पुनांग तिन्दाना पंडुम के दुसरे दिन " #गायता जोहारनी" आयोजित की जाती है...... #गायता याने जिनके बिना परमिशन से दिकू मानव तो क्या .....दिकूओ की गलत आत्माओं (अवांछनीय देवी देवताओं) का भी प्रवेश वर्जित रहता है .....इसके लिए गांव के दसो दिशाओं में 10 अलग अलग #रावेन पेनो की #रक्षकों के रूप में स्थापना की गई होती है( दिकू #ग्रंथों में इन्हीं शक्तिशाली वेन रूपो को राक्षस के रूप में वर्णित किया गया है क्योंकि चोरी के इरादे से घुसने वाले दिकूओ को इनसे दहशत हुआ करती थी )..... इन्हीं नार (गांव) गायता के डीएनए धारी वंशजों को वर्तमान में भी यही जिम्मेदारी निर्वहन करनी होती है.....इन्हीं गायताओ के द्वारा #तलुरमुत्ते, कण्डरेगाल, #जिम्मेदारीन, #भैंसासुर , #भिमाल पेन, रावेन, कैनांग आदि पेन शक्तियों को सेवा की जाती है...... ग्राम सीमाओं में किसी भी तरह के बाहरी व्यक्ति, जीव जंतुओं , अवांछनीय हलचलों, गलत देवीय शक्तियों के हल्की हलचल भी .... पेन ऊर्जा तंरगो के द्वारा गायता के इन्दीय संरचनाओं तक पहुंच जाती है......फिर गायता पेन परीक्षण कर गांव के पारंपरिक ग्राम सभा "नार #बुमकाल" को तुरंत सूचित कर देता है. ...... अर्थात #गायता वह है जो हमारे सुरक्षा के लिए साल भर रात दिन 365×24 घण्टे सेवा में लगे रहता है. ..... बिना किसी आर्थिक लाभ के निस्वार्थ सेवा करने वाले महान #गायता को वर्ष में आज के दिन सम्मान देने सभी गांववासी सेवा जोहारनी करने गायता के घर में आते हैं.......और गांव के विकास व रक्षा में योगदान देने वाले लिए अपने महान पुर्वजो को सेवा तर्पण करते हैं.....उन्हें याद करते हुए ससम्मान #रेला पाटा गीत गाते हैं.... #हुल्कि पर्रांग नृत्य करते हैं...... #भिमा लिगों के अध्ययन के अनुसार इस साल मौसम का विश्लेषण व अगले साल के मौसम के मिजाज का अनुमान लगाया जाता है...... युवा पीढी में इस ज्ञान का हस्तांतरण किया जाता है......प्राकृतिक संकेतों के आधार पर अगले वर्ष के मौसम की भविष्यवाणी भी की जाती है. .....
आज हम युवाओं को यह अच्छे से समझना होगा कि इन महान परम्पराओं के मजबूती से ही हमारे संविधान निर्माताओं को " #पाचवीं अनुसूची की व्यवस्था" करने को मजबूर होना पडा था. ..... आदिवासी समुदायों को दिया गया #संवैधानिक अधिकार किसी का दिया हुआ भिख नहीं वरन् यह हमारे पुरखों का हजारों सालों से सतत् जांची परखी रूढ़िगत विश्वासों को बनाए रखने का नतीजा है. ....... अगर यही ध्वस्त होगा तो हमारा संवैधानिक अधिकार भी क्रमश : शिथिल होते जाऐगा....... दुसरी तरह से विश्लेषण करें तो यह वही महान गायता सिस्टम है जिसके बदौलत हमारे गाँवो में .....ना दहेज प्रथा है....ना भ्रूण हत्या हैं.....ना रामरहीम आशाराम जैसे बलात्कारी हैं....... ना वेश्यालय है..... ना छुवाछुत है.... और ना ही चोरी.. डकैती...आदि आदि.......... अतः आप सभी "गण्ड - गोण्ड - गोण्डवाना - गोटूल _ गुडी - गायता-गोण्डी " के संरक्षकों व "लिगों-भिमा-रावेन-भैसासुर-बिरसा मुण्डा-गुण्डाधूर-" के डीएनए धारी वंशजों को पुनांग तिन्दाना पंडुम व गायता जोहारनी की बहुत बहुत बधाई. ....बहुत बहुत सेवा जोहार!

हर गांव के[गायता का नारा है "मावा नार ते मावा बुमकाल ( मेरे गांव में मेरी पारम्परिक ग्राम सभा )" फिर से लाना है] ........ क्रमश : अगले अंक में जारी .........
(केबीकेएस कोया पुनेम विंग के लया लयोरो के अध्ययनो पर आधारित)
नारायण मरकाम ( शोधार्थी केबीकेएस बुम गोटूल यूनिवर्सिटी बेड़मा माड़ )

11/09/2017

गोंडवाना की शान सिंगौरगढ किला़ जिला दमोह (मध्यप्रदेश)
★★★★★★★★★★★★★★★
मध्यप्रदेश मे गोंडवाना राज्य की भव्यता एवं संस्कृती की उजागर करनेवालें गोंडराओं के जो प्राचीनतम किले है। उनमें
सिंगौरगढ़ किले का भी प्रमुख स्थान है। दमोह जिले में जबलपूर दमोह मार्ग जबलपूर
से करीब ५१ की.मी.दूरी पर स्थित यह किला गोंडकालीन स्थापत्य कला एक बेजोड नमुना है। पर्वतीय श्रुंखलाओं मे
एक उँची पहाडी पर कठोर बलुआ पत्थरों से बना यह किला ईसिलिऎ भी महत्वपूर्ण है
की प्राचीन काल में उत्तर दिशा
की ओर सें गोंडवाना राज्य पर
आक्रमण करनेवाले शत्रुओं को
रोखने का वह एक अभेद्य गढ़ था।यह किला समुद्र सतह सें करीब ३०४१ फिट उंचसखल पर स्थित है।सर्करा रास्ते सें पहाडी पर चढ़णे सें किले का परकोट दिखाई देता है।जो पत्थरों का बना है।काटकोनाकार तराशें एवं काटे गये लंबे चौडे बलुआ पत्थरों की अद्भुत जुडाई कर किले का मुख्यद्वार बनाया गया है।जो १३ वी सदी के गोंडकालीन स्थापत्य कला को प्रदर्शित करता है।यह विशालकाय पत्थरों की जुडाई कों देखकर यह अनुमान लगाया जा सखता है,की उतनें बड़े और भारी पत्थरों को पहाडी की चोटी पर ले जाने की व्यवस्था कितनी अद्भुत होगी।आज के युग में यही कार्य क्रेनों के माध्यम से किया जा सखता..लेकिन उस वक्त किले कें निर्माताओं ने कीन क्रेनों का उपयोग किया होंगा।आश्चर्यजनक है।
किले के भीतर अनेक सुंदर महल है..सभी प्रकारो कें राजवंशियों का निवासस्थल किले के अंदर दिखाई देता है।लेकीन अाज ईस अद्भुत कीले की ढहती दिवारे आसू बहाती नजर दिखाई देती है।क्यों की उनकी जिम्मेवारी लेनेवाला कोई गोंडराजवंशी सपुत सामने आया नही। वे सदीओं से अपने वारस की राहें देखने को मजबूर है।लेकीन आज तक कोई आया नही और उनका काया पालट किसिने किया नही।विरान के भाती सिंगौरगढ़ धरासाही अवस्था में खडा है। सरकारे और पुरातत्त्व विभाग का भी कोई ध्यान नही..लोग अाते है.। निहारते है ..और चले जाते है.
सिंगौरगढ़ का प्राचीन नाम सुरगढ़ था मध्यभारत में ई.स.२३० के दरम्यान सुहनालसिंह उईके नामक गोंडराजाने गोंडवाना राज्य की स्थापना की और ईस किलेपर अपनी राजधानी बनवाई थी। जिसें आज वर्तमान में सिंगौरगढ़ कहा जाता ..सिंगौरगढ़ पहाडी पर आज जों किला विद्यमान है
उसे गढ़ा कटंगा के गोंडराज
वंश के ४१ वे राजा शिवसिंह उईका ने १३ वी सदी में बनवाया शिवसिंह राजा के नाम सें सिंगौरगढ का नामकरण हुवाँ ....
सिंगौरगढ़ के पास संग्रामपुर नामक गांव है..इसि राजवंश के ४८ वे महाप्रतापी राजा संग्रामशाह मडावीजी ने बसाया ..राजा संग्रामशाह के शासनकाल में भी सिंगौरगढ़ एक महत्वपूर्ण केन्द्रस्थान था
राजा संग्रामशाह ने ईस किले में सुंदर महल बनवाऎ थे।
संग्रामशाह के पश्चात दलपतशाह मडावी ने भी चौरागढ़ से सिंगौरगढ अपने शासनकाल में राजधानी बनवाई..राणी दुर्गावतीजी कें संग यही किले मे वे रहतें थे।पती के अकाली निधन के बाद राणी दुर्गावती ने भी सिंगौरगढ से ही गोंडवाना राज्य की कमान संभाली..ईसतरहा गोंडवाना साम्राज्य में सिंगौरगढ किले का महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन यह गोंडवाना की ऎतिहासिक विरासत कों सभी ने अनदेखा किया..गोंडवाना इतिहास मिट्टी मे मिलाने की साजिश यहा के कुछ ..बाहरी लोगोनें कि.आज हम सभी गोंडवाना के गोंडीयन राजपुत्रों सें अनुरोध करना चाहुंगा की गोंडवाना की ऐतिहासिक धरोहर को बचानें का प्रयास करें.। साथही अपनें पुर्वजों का महान इतिहास अपनी आनेवाली नश्लों को बताऎं ताकी वे हमारें वंशजो से कुछ प्रेरणा लें सखें .और उसि तरहा..हम भी नया इतिहास बनायें..
जय गोंडवाना ..

11/09/2017

सरकार ने फरमान जारी किया है कि 50 साल से ज्यादा के कर्मचारियों को कार्य कुशलता की समीक्षा के आधार पर जबरन रिटायर किया जाएगा। इसलिए आओ सब भारत वासी आज प्रण करें कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक ऐसे किसी नेता को वोट देकर नहीं चुनेंगे, जो 50 वर्ष से अधिक हो! ताकि देश की कार्य कुशलता प्रभावित न हो और मेरा भारत और महान बन सके और निम्नलिखित अनुसार यह कानून अनिवार्य रूप से सभी पर लागू हों 🙏👇

1- नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाय ?
2- क्यों नहीं नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाय ?
3- क्यों नहीं नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य किया जाय ?
4- क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए LAW की डिग्री अनिवार्य हो,
05-स्वास्थ्य मंत्री बनने के लिये MBBS की डिग्री अनिवार्य हो, 06-समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हो
07- मानव संसाधन के लिए M.Ed. की डिग्री अनिवार्य हो,
08-वित्त मंत्री को अर्थशास्त्री होना अनिवार्य हो इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किया जाय ।
09-क्यों नहीं फ्री का डीजल, पेट्रोल, फोन की सुविधा, हवाई सुविधा, रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होता हैं उसमें कटौती की जाय ।
10-क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक किये जाय ।
11-क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन बंद किया जाय जिसपर सरकार प्रतिवर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं ।
12- क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद किया जाय जिस पर देश का करोड़ों रूपये नुकसान होता हैं ।
13-क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं ? यह कौन सा मानक हैं ? नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश हैं क्या ? जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ?
देश को कितना गर्त में आप नेताजी लोग ले जायेंगे? जब स्वयं की तनख्वाह लाखों में करते हैं तो सभी पार्टियों के कोई भी नेता विरोध नहीं करता सभी मिलकर मेज थपथपा देते हैं । क्या देश पर आप की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार नहीं पडता ? गजब की सोच हैं आप नेताओं की जब कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता तो यह उपरोक्त बिन्दुओं पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता है!!

"जनहित में शेयर जरूर करें !"🙏🙏
[8:38 PM, 9/5/2017] Gambhir Mandavi: शिक्षक की कद्र ...
मशहूर पाकिस्तानी लेखक मरहूम अशफ़ाक़ अहमद लिखते है
रोम (इटली) में मेरा चालान हुआ बिज़ी होने की वजह से फीस वक़्त पर जमा नहीं करवा सका जिसकी वजह से कोर्ट जाना पड़ा ।
जज के सामने पेश हुआ तो उस ने वजह पूछी
मैंनें कहा प्रोफ़ेसर हूँ मसरूफ ऐसा रहा के वक़्त ही नहीं मिला ।
इस से पहले कि मैं बात पूरी करता, जज ने कहा -

A TEACHER IS IN THE COURT ....!

और सब लोग खड़े हो गए और मुझ से माफ़ी मांग कर चालान कैंसिल कर दिया ।
उस रोज़ मैं उस मुल्क की कामयाबी का राज़ जान गया !

सभी शिक्षकवृन्द को ससम्मान समर्पित🙏 ✅अति विशिष्ट व्यक्ति / VIPकौन है?
🙏 क्या आप को जानकारी है कि............

💥1)अमेरिका में सिर्फ दो तरह के लोगों को वी आई पी मानते हैं :
वैज्ञानिक और शिक्षक ।

💥2) फ्रांस के न्यायालय में सिर्फ शिक्षकों को ही कुर्सी पर बैठने का अधिकार है।
💥3) जापान में पुलिस सरकार से अनुमति लेने के बाद ही किसी शिक्षक को गिरफ्तार कर सकती है।
💥4) कोरिया में हर शिक्षक को वे सारे अधिकार प्राप्त हैं, जो भारत के मंत्री को प्राप्त हैं, सिर्फ अपना आई कार्ड दिखा कर ।
💥5) अमेरिकन तथा यूरोपीय देशों में प्राथमिक अध्यापक को सर्वाधिक वेतन मिलता है, क्योंकि कच्ची मिट्टी को वे ही पक्का करते हैं ।
🚷एक ऐसा समाज, जहाँ शिक्षकों का अपमान होता रहेगा, वहाँ सिर्फ चोर, डाकू, लुटेरे और भ्रष्टाचारी लोग ही पनपते है।
🇮🇳शिक्षक बचाओ, देश बचेगा🇮🇳
कृपया इस post को ज्यादा से ज्यादा share करे
जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगो तक ये अच्छी post पहुँच सके

11/09/2017

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रावण कौन था ?

मौर्य राजाओं का शासन काल 137 वर्ष चला .....
मौर्य राजाओं की पीढ़ीवार सूची

1 .चन्द्रगुप्त मौर्य
2 .बिन्दुसार मौर्य
3 .सम्राट अशोक
4 .कुणाल मौर्य
5 .दशरथ मौर्य
6 .संप्रति मौर्य
7 .शाली शुक्त मौर्य
8 .देववर्मा मौर्य
9 .सत्यधनु मौर्य
10 .बृहद्रथ मौर्य

यहाँ ध्यान देने की बात है कि पुष्यमित्र ब्राह्मण ने मौर्य के दसवें सम्राट की हत्या की थी, इसलिए हिन्दू ब्राह्मणों ने इस दिन को खुशी का दिन घोषित कर दिया और इसका नाम विजयदशमी से दशहरा रख दिया

यह रावण के सिर काटने की घटना नहीं है न ही रावण के पास दस सिर थे।।

वैसे भी वास्तविक मर्यादा पुरूषोत्तम महाराजा रावण का देहांत तुलसीकृत राम चरित मानस के अनुसार चैत माह में हुआ अश्विन माह में नहीं।।

यह तो मौर्यवंश के दसवें सम्राट बृहद्रथ को मारकर उसके दस पीढ़ियों के अस्तित्व को समाप्त करने के कारण दशहरा (दश+हरा=दश को मारने वाला) नाम से प्रचारित किया गया और राम रावण की कहानी थोपी गई और इसे बुद्ध से भी पहले की घटना बताकर प्रचारित कर दिया गया।
(इतिहास को समझने के अनुसार)

🏹🏹 राज रावण परते 🏹🏹
जय जोहर जय भीम जय जय आदिवासी जय भारत

11/06/2017

lo ji aa gye hum

22/03/2015

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Subho jan bol bo
28/11/2014

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