Pitara chhattisgarh

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एक ऐसा पिटारा जहां आप छत्तीसगढ़ का सफर कर सकते हैं।

16/10/2025

दिवाली आ गई है, और सुवा नृत्य भी।

13/10/2025

छत्तीसगढ़ की अमृत लता – गिलोय (Guduchi)
आज जब हम तरह-तरह की गोलियाँ और सीरप पी रहे हैं, तब हमें अपने गाँव के पुराने नुस्खों को याद करना चाहिए।
🌱 “प्रकृति ने जो वरदान दिया है, उसका असली स्वाद और फायदा हमें अपने जंगलों से ही मिलता है।”छत्तीसगढ़ की मिट्टी, जंगल और लोग – सब में एक अपनापन है और इसी धरती की गोद में उगती है एक ऐसी लता या बेल जो हर बीमारी को हराने की ताकत रखती है – गिलोय, जिसे हमारे गाँवों में अमृत लता या गुड़ूची भी कहा जाता है।

🌿 क्या है गिलोय?
गिलोय एक बेल होती है जो पेड़ों पर लिपट कर बढ़ती है – अक्सर नीम या आम के पेड़ों पर इसे देखा जाता है। इसकी डंडी हल्की हरी, रस से भरी और भीतर से बहुत ठंडी मानी जाती है।
हमारे बुजुर्ग कहते हैं ।गिलोय घर के पास उग जाए, तो अस्पताल की जरूरत कम पड़ती है।
💪 गिलोय के फायदे जानकर आप हैरान हो जाएंगे, पुराने समय में जब दवाइयां नहीं होती थी तब गांव के लोग इसका रस निकालकर इसे टाइफाइड डेंगू और वायरल जैसे बुखार जल्दी उतारने के लिए काढा के रूप में उपयोग किया करते थे।
🤧 सर्दी–खाँसी में रामबाण: गिलोय को तुलसी और अदरक के साथ उबालकर पीने से।
🔰इम्युन बूस्टर - हफ्ते में एक या दो बार थोड़ा-सा गिलोय का रस या उसका पाउडर लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।
❤️ ब्लड और शुगर कंट्रोल में उपयोगी:
बुजुर्ग लोग इसे “खून साफ करने वाली बेल” कहते हैं।
डायबिटीज के मरीज इसे खाली पेट लेते हैं जिससे शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
🌿 त्वचा और पेट के रोगों में कारगर:
गिलोय का रस या पेस्ट चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ होती है, और पेट के रोग जैसे गैस, कब्ज में भी राहत मिलती है।

गिलोय लेने के देसी तरीके (हमारे गाँवों के अनुसार)
🌿 इसकी डंडी और पत्तियों को आप पानी में काली मिर्च और तुलसी मिला कर उबाल कर पीना सबसे बढ़िया माना है या फिर आप इसकी पत्तियों को पीसकर उसका रस छान कर आधा कप पी सकते हैं। यदि आप शहर में रहते और गिलोय उपलब्ध नहीं होता तो, आप किसी फार्मेसी शॉप से हिमालया या अन्य आयुर्वेदिक कंपनियों के आने वाले गिलोय(गुडुची) के टैबलेट ले सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के गाँवों में लोग इसे सिर्फ दावा नहीं अमृत मानते हैं।
हमारे दादा-दादी कहा करते थे –“जंगल में गिलोय मिले, तो समझो भगवान ने खुद दवा दी।”

❤️ Pitara Chhattisgarh की बात:
गिलोय जैसी जड़ी-बूटी हमें बताती है कि असली सेहत प्रकृति के करीब रहने में है। पोस्ट किए गए तस्वीर को देखकर बताएं कि आपके गाँव में गिलोय को क्या नाम से बुलाया जाता है? क्या आपने कभी इसका रस या काढ़ा पिया है? अपने अनुभव कमेंट में जरूर बताइए — अगली बार आपके बताए नुस्खे को “Pitara Chhattisgarh” में जगह दी जाएगी 🙌

11/07/2025

Tatamari - Keshkal का अद्भुत दृश्य ✨🌿

छत्तीसगढ़ के हरे-भरे अंचल में बसा Tatamari, Keshkal Ghati की ऊंचाइयों से वो नज़ारा पेश करता है — जो आंखों से नहीं, दिल से महसूस होता है।

यहाँ की सुबहें बादलों की रज़ाई ओढ़े होती हैं और शामें सूरज की सुनहरी किरणों में डूब जाती हैं।
Tatamari View Point से दिखता है 12 मोड़ों वाली केशकाल घाटी, जहां हर मोड़ एक नई कहानी कहता है।

यह सिर्फ एक टूरिस्ट स्पॉट नहीं, बल्कि एक मन की शांति का ठिकाना है।
जहाँ प्रकृति खुद आपको गले लगाती है और कहती है — रुको, सांस लो, और इस खूबसूरती को जी लो।

📍 Tatamari, Keshkal – Where clouds touch the earth & silence speaks louder than words.

02/06/2025

🌱 पेड़ के नीचे उगने वाला "बोड़ा" — क्या आप जानते हैं इसके बारे में?
बरसात के दिनों में या पुरानी ज़मीन पर लगे पेड़ों के नीचे अक्सर एक अजीब-सी गाँठ मिट्टी में छिपी होती है। गांवों में लोग इसे कहते हैं — "बोड़ा"।

यह कोई मशरूम नहीं, बल्कि एक कंदनुमा गाँठ होती है जो पेड़ की जड़ों के आसपास उगती है।
👉 कभी यह खाद्य होती है — जैसे जिमीकंद( जिमिकान्दा)।
👉 कभी यह पेड़ और मिट्टी के बीच सहजीविता (symbiosis) का संकेत होती है।

💡 कुछ बोड़े फंगल माइकोराइज़ा के कारण बनते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।
💡 और कुछ स्थानीय लोग इसे औषधीय गुणों के लिए भी जानते हैं।

क्या आपने कभी बोड़ा देखा है?
कौन से पेड़ के नीचे मिला था?
क्या आपके गांव में इसे खाया जाता है?

👇 कमेंट में हमें बताएं।
#गांवकीजड़ें #बोड़ा #प्रकृति_की_गूढ़ता #लोकज्ञान #पिटारा

12/04/2025

मैनपाट, छत्तीसगढ़ का शिमला
छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग द्वारा मैनपाट की खूबसूरती को बेहद ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है। ❤️

Mist in the air, peace in the heart, that’s the magic of Mainpat.

Tucked away in the hills, Mainpat is a soulful answer when



24/12/2024

धुरवारास छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित एक खूबसूरत गांव है, जो तीरथगढ़ जलप्रपात के पास स्थित है। यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक खेल गतिविधियों के लिए जाना जाता है। धुरवारास में पर्यटक कयाकिंग और बांस राफ्टिंग (बम्बू राफ्टिंग) का आनंद ले सकते हैं। यहां की नदियां और हरियाली इसे रोमांच और शांति का अनूठा संगम बनाती हैं।

इस गांव की खासियत यह है कि इसे ग्रामीण पर्यटन और सतत विकास में उत्कृष्टता के लिए **संयुक्त राष्ट्र (UN)** से एक विशेष पुरस्कार मिला है। यह अवार्ड ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका को मान्यता देता है।

धुरवारास न केवल एक पर्यटन स्थल है बल्कि स्थानीय आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समझने का भी एक उत्कृष्ट स्थान है। यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, और जीवनशैली का अनुभव कर सकते हैं।

15/02/2023

राजिम मेला के बारे में आप कितना जानते है??

06/05/2022

समय है साथ मिलकर खड़े होने का, समय है अपने लिए लड़ने का, समय है भविष्य के लिए लड़ने का....!
आओ मिलकर आवाज उठाये...



Chhattisgarh Diaries
CMO Chhattisgarh
Bhupesh Baghel

29/03/2022

बस्तर धरोहर – नारायणपाल,विष्णु मंदिर

बस्तर प्राकृतिक संसाधनो से संपन्न है, यहां की हरी भरी वादियां, नदी पहाड़ झरने अपनी खुबसूरती के कारण पुरे विश्व में अद्वितीय है। ऐतिहासिक महत्व के धरोहरों के मामले में भी संपन्न है किन्तु अनदेखी के चलते कई पुराने मंदिर ध्वस्त हो गये या ध्वस्त होने की कगार में है।
ऐसा ही एक मंदिर चित्रकोट जलप्रपात के पास नारायणपाल ग्राम में स्थित है, इंद्रावती और नारंगी नदी के संगम पर बसे नारायणपाल ग्राम में भगवान विष्णु को समर्पित एक विशाल मंदिर स्थित है। इस मंदिर की खासियत यह है कि बस्तर में भगवान विष्णु को समर्पित एक मात्र सुरक्षित मंदिर है। इस मंदिर का मंडप नष्ट हो गया था जिसके कारण यह मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया था। इस मंदिर के इतिहास को जानने के लिये हमें हजार साल पीछे जाकर अतीत के पन्ने पलटने पड़ते है।
नारायणपाल ग्राम तत्कालीन समय में नारायणपुर ग्राम के नाम से जाना जाता था।
इंद्रावती और नारंगी नदी के संगम पर बसे इस ग्राम में स्थित यह मंदिर बस्तर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। चित्रकोट जलप्रपात से कुछ दुर पहले ही इंद्रावती के उपर भानपुरी जाने के लिये पुल बना हुआ है। पुल पार करते ही सड़क से ही इस मंदिर के दर्शन हो जाते है।



28/03/2022

चित्रधारा जलप्रपात/छत्तीसगढ़..

चित्रधारा झरना बस्तर की सुंदरता का एक अद्भुत नमूना है, चित्रकोट झरने के रास्ते पर एक छोटी सी पहाड़ी के घाटी के माध्यम से एक छोटी नदी बहती है और यह किसानों की सोपानी पात की शुरुआत है। इस कारण से, बारिश के दौरान पानी होता है लेकिन गर्मियों में इसकी उत्कृष्टता फीकी हो जाती है।

झरने के ऊपरी हिस्से में, भक्तों ने एक शिव मंदिर और झरना के आकर्षण को देखने के लिए एक प्रेक्षण स्थान बनाया है, यह झरना 50 फीट की ऊंचाई से गिरता है। अगला मुख्य झरना 100 फीट की ऊंचाई से सोपानी पात में बाईं ओर से नीचे की ओर बहता है और पहाड़ियों की ओर बढ़ता है। झरने की धाराओं में सिर्फ एक नहीं बल्कि अनेकों धाराएं हैं जो देखने में बहुत ही शानदार प्रतीत होती है यदि आप चित्रकूट या जगदलपुर घूमने जाएं तो एक बार चित्रधारा जलप्रपात देखना भी जरूर जाए, बस इस बात का ध्यान रखें कि उस और झरने में पानी भरपूर होना चाहिए तभी आप इसकी पूरी खूबसूरती को निहार पाएंगे।



27/03/2022

नकटा मंदिर, जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़

जांजगीर-चांपा क्षेत्र में भगवान विष्णु का बहुत ही प्राचीन और रहस्यमई मंदिर है, जिसका निर्माण लगभग 12वीं शताब्दी में किया गया था।

एक किवदन्ती के अनुसार प्राचीन समय में इस क्षेत्र में शासन करने वाले एक राजा जाज्वल्य देव प्रथम और उनकी एक रानी दोनों के बीच में शिवरीनारायण और जांजगीर में भगवान विष्णु की मंदिर बनाने की प्रतिस्पर्धा हुई, शिवरीनारायण मंदिर का निर्माण रानी के द्वारा और जांजगीर के मंदिर का निर्माण राजा के द्वारा किया जाना निश्चित हुआ।

कहा जाता है इस प्रतिस्पर्धा में रानी की जीत हुई और बाद में भी राजा द्वारा जांजगीर क्षेत्र में मंदिर का निर्माण पूरा नहीं किया गया और मंदिर में कलश स्थापना का कार्य अधूरा रह गया। इस प्रकार मंदिर अधूरा होने के कारण मंदिर को नकटा मंदिर के नाम से भी जानते हैं। इस मंदिर के ऊपर के पत्थरों पर शानदार नक्काशी की गई है, दूर से देखने पर यह मंदिर भले ही छोटा दिखाई पड़ता है पर पास से यह बहुत ही बड़ा और भव्य है पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर बनाया गया यहां मंदिर पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित है और जब आप इसे देखते हैं तो यह सीधे आपको उस समय से जोड़ता है जिसे प्रदर्शित करने के लिए इस मंदिर को बनाया गया है।

ऐसे ही छत्तीसगढ़ से जुड़े रोचक जानकारी के लिए फॉलो करें पिटारा छत्तीसगढ़ को.

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