PRSI Raipur Chapter

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The Public Relations Society of India, Raipur Chapter has been set up in Chhattisgarh to promote inn

Photos from PRSI Raipur Chapter's post 25/09/2022

जयपुर (राजस्थान) में पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया की नेशनल कौंसिल की बैठक में रायपुर चैप्टर के चेयरमैन डॉ. शाहिद अली शामिल हुए।
नेशनल प्रेसिडेंट माननीय डॉ. अजीत पाठक जी ने देश भर से आए चैप्टर चेयरमैन का मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर 'आजादी का अमृत महोत्सव : एक राष्ट्र, एक प्राण, एक स्वर' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी हुआ। जिसमें जयपुर के माननीय सांसद श्री राम चरण वोहरा, महाकौशल टाईम्स के संपादक श्री गोपाल शर्मा, कुलपति श्री अशोक गुप्ता, पीआरएसआई के सेक्रेटरी जनरल श्री बाब जी सहित अनेक विद्वानों ने हिस्सा लिया।

Photos from PRSI Raipur Chapter's post 20/12/2021

पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया, रायपुर चैप्टर, रायपुर छ.ग.

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 20-12-2021

"छत्तीसगढ़ का विकास माडल, मीडिया एवं जनसंपर्क" विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार

रायपुर । पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया रायपुर चैप्टर द्वारा सोमवार को "छत्तीसगढ़ का विकास माडल, मीडिया एवं जनसंपर्क" विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. अजीत पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश की आर्थिक समृद्धि मे कदम से कदम मिलाकर चल रहा है, राज्य सरकार के प्रयास से हर व्यक्ति तक विकास का फल पहुंच रहा है। छत्तीसगढ़ के विकास में सामाजिक संगठन ने बहुत अच्छी भूमिका निभाई है। इसके साथ बहुत आवश्यक हो जाता है की जनसम्पर्क और मीडियाकर्मी अपने विश्वास को जानता के बीच बनाये रखे। जनसम्पर्क ने जानता और प्रशासन के बीच एक सेतु का काम किया है आज और कोरोना काल में सबसे ज्यादा जरूरत थी। सम्पूर्ण देश में जहां कोरोना का बुरा असर देखा वही छत्तीसगढ़ में कोरोना काल में भी आर्थिक, सामाजिक दृष्टि से मजबूत पाया।

वेबीनार की अध्यक्षता करते हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर के कुलपति प्रो.(डॉ.) शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हमारा देश लगभग एक सौ उनतालीस करोड़ की आबादी वाला देश है जिसमें युवाओं की आबादी उनहत्तर प्रतिशत है हम अपनी योजना में इन युवाओं को केंद्र में रखकर योजना का निर्माण करना चाहिए। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी योजना के विकास मॉडल की भी प्रशंसा की जिससे विकास हर व्यक्ति तक पहुंच पा रहा है।

इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, रायपुर के कार्यकारी अध्यक्ष ने व्यवसाय की बात करते हुए कहा कि यहां के व्यावसायिक स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बहुत अच्छी है। यहां के किसानों को कर्ज मुक्त करना, वनोपज की खरीदी, धान की खरीदी जैसी योजनाओं ने यहां के युवा को रोजगार दिलाने में बहुत मदद किया है। कोरोना काल जैसे विकराल संकट में भी यहां की व्यावसायिक स्थिति में कोई खास प्रभाव नहीं देखा गया। विकास के अनेक मोड़ होता है जिनमें शहरों का विकास होता है और दूसरा ग्रामों का विकास होता है। वही ग्रामीणों का विकास होगा तो शहरों का विकास अपने आप होने लगेगा। छत्तीसगढ़ की योजनाओं की ओर ध्यान केंद्रित करते हुए बताया की ग्राम वासियों के लिए प्रशासन की योजना कितनी लाभदायक सिद्ध हो रही है। महात्मा गांधी जी का सपना मेरे सपनों का भारत छत्तीसगढ़ को एक विश्व मॉडल के रूप में देखकर ही पूरा होने जैसा लगता है।

विशिष्ट वक्ता अमृत संदेश, रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक बाबूलाल शर्मा ने मीडियाकर्मी की भूमिका के लिए कहा जिस तरह से ग्रामों में विकास का दौर चला रहा है उसी तरह जनसम्पर्क और मीडिया कर्मियों ने फ्रंट वॉरियर के रूप मे कोरोना काल में जानता का साथ दिया। विकास के एक खबर के साथ ऐसे युवा जो गांव छोड़कर शहरों में बस गये थे। वह किस प्रकार अपने गांव को लौट रहे है और अपने ही अंचल में रहकर रोजगार कर रहे है। जैसे महात्मा गांधी जी का गांव के विकास का सपना रहा उसी प्रकार जवाहर लाल का ग्रामों मे औद्योगिक विकास का सपना भी रहा जिसे छत्तीसगढ़ ने पूरा करने की भरसक कोशिश की। आज यह परिणाम है की यह एक विश्व मॉडल के रूप में देश के समक्ष ख़ड़ा है। चाहे आर्थिक भूमिका की बात कहे या सांस्कृतिक की समृद्धता की बात कही। महिला शिक्षा से लेकर शिशु पोषण आहार का। युवा रोजगार से लेकर कर्जमुक्त किसान तक आज छत्तीसगढ़ एक समृद्ध राज्य के रूप मे देखा जा सकता है।

विशिष्ट वक्ता सोशियल ए़ड बिहेवियर चेंंज यूनिसेफ, रायपुर के स्पेशलिस्ट अभिषेक सिंह ने कहा कि यूनिसेफ ने प्रशासन की योजनाओं से अंतिम व्यक्ति तक पोषण आहार को पहुंचाने का काम किया है। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण छत्तीसगढ़ में अनेक आनुवंशिक बीमारियों को भी देखा गया है जिनका इलाज भी ग्रामीण अंचल में मिलने वाले जड़ी बूटियों से किया जाने लगा है। जिसे एक योजना के तहत अपनाया गया है साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहुंच हर घर में बनाये जाने की बात कही।जच्चा-बच्चा योजना में नवजात किस तरह से मां और शिशु के लालन-पालन पोषण में यूनिसेफ ने हमेशा साथ दिया। इस ओर ध्यान आकर्षित किया की दादी के नुस्खे कार्यक्रम से छोटी- मोटी बीमारियों का इलाज ग्रामीण अंचलों में किया जाता है और उन्हे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

विशिष्ट वक्ता फाउंडेशन फाउंडेशन फॉर इकोलॉजी सिक्योरिटी, रायपुर की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. मनजीत कौर बल ने प्रशासन की योजनाओं के लाभ के बारे मे बताया की किस तरह से सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के हर एक व्यक्ति को मिल रहा है। मंजीत कौर ने ग्रामीण जमीनी स्तर की बात की किस तरह से ग्राम सभा को अपने अधिकार दिलाये जा रहे है। सरकार की नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी योजना की सराहना की और कहा कि जहां गांव में भी शहरों जैसी अतिक्रमण की स्थिति बनती जा रही है, उसके लिए आवश्यक है ग्रामीणों को सामने रख कर जंगलो, सामुदायिक जमीनों को संरक्षित किया जा सके।जैसे किसान के पास केवल कृषि भूमि होती है उसी तरह आदिवासियों के पास केवल जंगल ही अपना होता है जिनसे वह अपने विकास का सपना देख सकता है। छत्तीसगढ़ को देश के सामने एक मॉडल के रूप मे प्रस्तुत करने में इस योजना ने शक्तिशाली भूमिका निभाई। जहां किसान यूरिया युक्त फसल उगाने के लिए मजबूर और वही इस योजना ने किसानों को ऑर्गेनिक खेती से अच्छे फसल उगाने के लिए प्रेरित किया। गोठान योजना से गांव के हर युवा को रोजगार प्राप्त हुआ साथ ही गांव में जो पशुधन है उन्हें भी आसानी से संरक्षित किया जाने लगा है। आदिवासी अंचलो में जंगली फसलों को आर्थिक रूप से हिस्सा दिया गया है। जिसका फायदा जंगलों में रह रहे आदिवासियों को मिल रहा है और आज समाज की मुख्यधारा में अपना सार्थक कदम रख पाने में सक्षम हो रहे है।

विशिष्ट वक्ता अर्थशास्त्र विभाग पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आर.के. ब्रह्मे ने कहा कि छत्तीसगढ़ वर्तमान समय में विकास के नये मॉडल के रूप में भारत देश के सामने खड़ा है।छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए वक्तव्य प्रस्तुत किया और बताया यह मॉडल एक आल्टरनेट रोल मॉडल है जो एक ग्रोथ मॉडल के रूप मे उभरा है। जिसके अंतर्गत सस्टेनेबल डेवलपमेंट को ध्यान में रखा गया है। यह मॉडल अपनी पहुंच जंगलो में रह रहे आदिवासियों से लेकर शहरों में निवास कर रहे मजदूरों तक है। इस मॉडल के अंतर्गत ग्रामीण आदिवासी को केंद्र में रखा गया है, जिसमे लोकल रिसोर्स को यूटिलाइज करने की बात कही गयी है। साथ की यह लोकल टेलेंट या जो भी ग्रामीण की कार्य कुशलता और दक्षता को सामने लाने का काम किया है। यह मॉडल रुलार माइग्रेशन को कम करने में कारगर हुआ है। ग्रामीण के बीच ही इस मॉडल से ग्रामीणों का विकास किया जा रहा है। जिससे गांव का हर व्यक्ति अपनी काबिलियत के अनुसार रोजगार पाकर अपनी जरूरत को पूरा करने में सक्षम है।

कार्यक्रम का सफल संचालन पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर के चेयरमैन डॉ. शाहिद अली ने किया । अंत में वक्ताओं तथा सहभागियों का आभार भी व्यक्त किया। वेबिनार में काफी संख्या में देश भर के प्रोफेसर, विद्यार्थी, शोधार्थी एवं शिक्षकगण ने हिस्सा लिया।

डॉ. शाहिद अली

चेयरमैन

पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर

Photos from PRSI Raipur Chapter's post 13/06/2021

पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया, रायपुर चैप्टर, रायपुर छ.ग.

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 13-06-2021

"कोरोना काल में शिक्षा का बदलता परिदृश्य" विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार

शिक्षा में निवेश और ज्यादा बढ़ाने की जरूरत पर बल

रायपुर । पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया रायपुर चैप्टर द्वारा आज रविवार को "कोरोना काल में शिक्षा का बदलता परिदृश्य" विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति प्रो.(डॉ.) ए.डी.एन.बाजपेयी ने कहा कि आज शिक्षा ने तकनीक को विकल्प के रूप में अपनाया है लेकिन तकनीक कभी भी क्रिएटिविटी पैदा नहीं कर सकती है वह केवल पारंपरिक और संस्कार युक्त शिक्षा में ही पैदा हो सकती है। उन्होंने कोरोना काल में शिक्षा के डिजिटल डिवाइड पर कहा कि इसने हमें बहुत रूप में विभाजित किया है जिसका कारण आर्थिक स्थिति में बदलाव है, यह बदलाव उत्पादन हो या फिर वितरण सभी क्षेत्रों में देखने को मिला है जिसे तकनीक पूरा नहीं कर सकती है। नई शिक्षा नीति बनाने से ही शिक्षा का कल्याण नहीं होगा बल्कि संरचना के साथ-साथ हमें इंडिजिनियस ज्ञान पर भी बल देने की आवश्यकता है। जब तक किसी देश की सरकारें वहां की जनता के अनुकूल नीति नहीं बनायेगी तब तक नीति निर्माण का कोई महत्व नहीं रहेगा। डा बाजपेयी ने शिक्षकों में प्रतिबद्धता की जरूरत को भी आवश्यक माना जिसे आत्मबल से ही पैदा किया जा सकता है। परीक्षा मूल्यांकन पद्धति पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जो पुरानी शिक्षा प्रणाली थी उसी से आज हम सब यहां तक पहुँचे है तो वह गलत कैसे हो सकती है इस पर सोचने और विमर्श करने की जरूरत है। हमें जिस मुद्दों पर बात करनी चाहिए उस पर बात नहीं करते है बल्कि हमें आत्मनिर्भरता की बात के साथ स्वदेशी मॉडल पर भी बात करनी चाहिए और विकेंद्रीकरण और पर्यावरण जैसे गंभीर विषयों पर भी सोचने की जरुरत है।

वेबीनार की अध्यक्षता करते हुए हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग की कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा ने कहा कि कोरोना काल के कारण शिक्षा पद्धति में बहुत कुछ बदलाव आया है जिसमें परीक्षा में भी बदलाव की स्थिति आ गई है। अगर यही स्थिति लगातार बनी रही तो शिक्षा के नए परिदृश्य पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आनलाईन पद्धति के परिवेश से शिक्षको और विद्यार्थियों में असहजता महसूस की जाती है और असमंजस्य की स्थिति है। डा पल्टा ने आज के दौर में बदलते शिक्षा परिदृश्य पर तीन सवाल रखे जिसमें पहला यह कि बिना कॉलेज परिवेश के विद्यार्थी कैसा महसूस करते हैं। दूसरा आज शिक्षक की स्थिति कैसी है केवल जैसा चल रहा है वैसा ही विकल्प के साथ शिक्षा देनी होगी। तीसरा आज की परीक्षा पद्धति कितनी सार्थक है।

प्रो. पल्टा ने सुझाव देते हुए कहा कि कोरोना काल में हमें ऑनलाइन शिक्षा और सीखने की कला को और सशक्त बनना की जरूरत है। अमीर और गरीब में शिक्षा का अंतर अधिक न हो जाए इसका भी ध्यान रखने की जरूरत है। शिक्षकों के लिए यह समय अधिक से अधिक विचार विमर्श का है। विद्यार्थी और शिक्षक के बीच अनुशासन व जवाबदेही को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। वहीं अगर भविष्य में सामान्य शिक्षा लागू भी हो तो हमें ऑनलाइन शिक्षा को जारी रखना होगा ताकि भविष्य के लिए हम तैयार हो सकें।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली के प्रो.(डॉ.) फुरकान क़मर ने कहा कि कोरोना काल ने सबको हैरत में डाल दिया है जिसमें जीविका और जीवन बचाने की चुनौती देखी जा सकती है। जिसमें एक को बचाने में दूसरे को खोना पड़ रहा है। शिक्षा क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। इस स्थिति के कारण विश्वविद्यालय सबसे दूर हो गये है चाहे वह विद्यार्थी हो या फिर शिक्षक। ऑनलाइन शिक्षा ने इस दुविधा को दूर करने में सहयोग तो दिया है पर कुछ शंका भी पैदा की है। जिसमें विद्यार्थी कुछ सीख भी रहे या नहीं यह समझना मुश्किल है। इसे मोटे तौर पर तकनीकी इंथ्यूजिएजम में बांटा जा सकता है। जिसमें बहुत सारी समस्या और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जैसे भारत में घर की परिभाषा, तकनीक के प्रयोग की भी परिभाषा अलग-अलग है। यहां पर डाटा और बिजली मिलने में भी चुनौती का सामना करना पड़ता है। सब जन आपदा को सेकुलर मानते है पर ऐसा नहीं है सबको यह अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। कोरोना काल में शिक्षा के बदलते परिदृश्य पर सुझाव देते हुए कहा कि हमें शिक्षा में निवेश और ज्यादा बढ़ाने की जरूरत है जिसमें तकनीक खर्च के साथ-साथ उसके पहुँचाने पर भी खर्च करने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा सबको समान रूप से मिल सके।

विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र ) के पूर्व कुलपति प्रो.(डॉ.) गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि नई शिक्षा नीति के कारण शिक्षा को एक पक्षी की तरह नये पंख मिले थे परंतु कोरोना ने इन पंखों को काट दिया है। जिसने बंधनों को और मजबूत कर दिया। जो शिक्षा पद्धति चल रही थी कोरोना ने इसे और भी अधिक कठिन कर दिया है। आज भी ऑनलाइन शिक्षा मोड से बहुत लोग वंचित है। शिक्षा में तकनीक के चलन पर सवाल करते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीक तो आ गई पर बैलेंस मोड तकनीक का अभाव साफ देखा जा सकता है। जिसमें सशक्त पढ़ाई की कमी स्पष्ट देखी जा सकती है। अगर शिक्षा को मजूबत करना है तो हमें तकनीक को प्रबल बनाने की आवश्यकता है। तकनीक से शिक्षा लेने के चलते विद्यालय के परिवेश से जो भावनात्मक लगाव होता था वह तकनीक परिवेश नहीं दे पा रहा है। ऑनलाइन शिक्षा के कारण कई सारी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है जिसमें परीक्षा मूल्यांकन और प्रमाणीकरण पर सवाल पैदा हो रहे है। मेरा सुझाव है कि इन बदलती परिस्थितियों में विद्यार्थियों के मूल्यांकन और प्रतिभा को अध्ययन के साथ-साथ मुख्य रूप से देखने की जरूरत है ताकि तीन सौ साठ डिग्री मूल्यांकन को अपनाया जा सके। प्रो गिरिश्वर मिश्र ने दोहराया कि शिक्षा इस समाज की मूलभूत आवश्यकता है जिसमें मौलिक प्रश्नों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।

कार्यक्रम के संरक्षक पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. अजीत पाठक ने कहा की हमारा संगठन राष्ट्रीय मुद्दों पर जनजागृति लाने का कार्य लगातार करता रहा है। कोरोना काल में जनजागृति लाने में जनसंपर्क ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। हमारा कार्य है लोगों के बीच विश्वास पैदा करना जिसे हम लगातार करते हुए आये है। शिक्षा के बदलते परिदृश्य में विचार रखते हुए कहा कि वर्चुअल क्लास ने शिक्षा के क्षेत्र में नई विधा को जन्म दिया है जिससे शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों को ही लाभ मिला है। परंतु वर्चुअल शिक्षा के कारण कई नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहे है जिसमें भौतिक शिक्षा का अभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। वेबिनार के माध्यम से कोरोना काल में शिक्षा के क्षेत्र में उभर रही नई तस्वीर को बहुत करीब से समझने और ने भारत के निर्माण में इसके उपयोग की जरूरत है। उन्होंने पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी के जरिए विजयी भारत अभियान को सशक्त करने पर बल दिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर के चेयरमैन डॉ. शाहिद अली ने किया । अंत में पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर के सचिव श्री संजीव शर्मा एवं सदस्य श्री चन्द्रेश चौधरी ने वक्ताओं तथा सहभागियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन में काफी संख्या में इस वेबिनार में देश भर के प्रोफेसर, विद्यार्थी, शोधार्थी एवं शिक्षकगण ने हिस्सा लिया और विद्वान वक्ताओं ने प्रतिभागियों के जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

डॉ. शाहिद अली
चेयरमैन
पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर

Photos from PRSI Raipur Chapter's post 30/05/2021

पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया, रायपुर चैप्टर, रायपुर छ.ग.

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 30-05-2021

बुरे वक्त को अच्छे वक्त में बदलने का कार्य करता है मीडिया :प्रो बल्देव भाई शर्मा

रायपुर, हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया रायपुर चैप्टर ने कोविड -19 : जनसंपर्क एवं मीडिया के समक्ष चुनौतियां और समाधान विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि बुरे वक्त को अच्छे वक्त में बदलने का कार्य केवल मीडिया ही कर सकता है। जनसंपर्क और मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए कहा कि दोनों एक दूसरे के पूरक के रुप में कार्य करते है। व्यवस्था और आमजन के बीच सेतू का कार्य दोनों पर निर्भर रहता है । उन्होंने कहा कि बाजार की शक्ति से जनसंपर्क और मीडिया को बचाने की कोशिश करनी चाहिए, नहीं तो यह अपना मूल उद्देश्य छोड़ सकता है। हमें ऐसे सत्य को खोजना है जो लोक हितकारी हो। समाचार पत्र पर बात रखते हुए कहा कि समाचार पत्रों को आमजन की भाषा कहा जाता है जिसको वह अपनी मुख्य भूमिका मानते है। हर पत्रकार को पत्रकारिता इतिहास जरूर पढ़ना चाहिए ताकि पत्रकारों में आदर्श पत्रकारिता की स्थापना हो सके। साथ ही हम सबको अपनी जड़ों की ओर लौटने की भी आवश्यकता है ताकि पत्रकारिता अपने मुख्य उद्देश्य जनकल्याण से लोगों को जोड़ सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इंडिया के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ.अजीत पाठक ने कहा कि मीडिया और जनसंपर्क एक ही गाड़ी के दो पहिये है जिसका कार्य सूचनाओं को आमजन तक पहुँचाना है। जनसंपर्क पत्रकारिता को बेहतर करने में सहयोग प्रदान करता है। इस महामारी के दौर में सोशल मीडिया के महत्व पर भी बात रखी जिसमें सूचना का विश्लेषण होना अब शुरू हो गया है और जनसंपर्क ने अपने माध्यम में ऑनलाइन के नये चलन की शुरूआत की है।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार व दैनिक भास्कर,नागपुर के समूह संपादक श्री प्रकाश दूबे ने मीडिया और जनसंपर्क के मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी जिसमें मीडिया के अवमूल्यन पर अपनी चिंता रखी। वहीं जनसंपर्क क्षेत्र को परिभाषित करते हुए कहा कि यह वह क्षेत्र है जहां कहा भी नहीं जाए और सहा भी न जाए वाली बात सामने आती है। उन्होंने कहा कि आज अनैतिक प्रचार रणनीति ने मानवता का बड़ा नुक़सान किया है। लोकतंत्र में असहमति का स्थान भी खत्म हो गया है जबकि असहमति के रास्ते ही कोई सरकार बनती है। कोविड के संकट में लाकडाउन के समक्ष एक वर्ष पहले रोटी के साथ पटरियों के रास्ते चल रहे मजदूरों की रेल से कटकर मौत के मामले में मीडिया और सरकार के मौन पर दुःख प्रकट किया। श्री दूबे ने कहा कि हमें अपने मौन को तोड़ना होगा। मीडिया और जनसंपर्क की यह सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा किआर्थिक अभावों में उदंत मार्तंड एक साल बाद बंद हों गया लेकिन उस दौर के पत्रकारिता के आदर्शों से हमें सीखने की जरूरत है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के सदस्य तथा दैनिक विश्व परिवार के संपादक श्री प्रदीप जैन ने कहा कि इस कोविड 19 ने पत्रकारिता के सामने कई चुनौतियों को रखा है जिसमें सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस भयानक महामारी में सही सूचना को लोगों तक कैसे प्रेषित की जाए। मीडिया को आर्थिक स्थिति के लिए भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ संस्थाओं ने इन आर्थिक चुनौती के समय भी अपने संस्था के लोगों के लिए कार्य किया है जिसकी हमें सराहना करने की आवश्यकता है।

एम्स रायपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, श्री शिव शंकर शर्मा ने कहा कि इस महामारी ने पत्रकारों और जनसंपर्क क्षेत्र के लिए बहुत सी चुनौती दी है। पर इन सबका समाधान सोशल मीडिया ने दिया है। जिसके लिए उन्होंने एम्स रायपुर की एक केस स्टडी का उदाहरण दिया जिसमें टि्वटर द्वारा सभी मीडिया को सूचना का प्रसारण बहुत ही सटीक तरीके से किया गया और आमजन की समस्या का समाधान दिया गया। छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी श्री आलोक देव ने जनसंपर्क की चुनौतियों पर अपनी बात रखी।

वेबिनार में पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर की ओर से 11,000/- कोविड हेल्प के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को, 11,000/- श्री प्रयास, सामाजिक संगठन को, 2100/- केटीयू के भूतपूर्व छात्र श्री चंद्रेश चौधरी , जनसंपर्क के क्षेत्र में एम्स रायपुर के श्री शिवशंकर शर्मा और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुपमा कुमारी को जनसंपर्क के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र के साथ पुरस्कृत करने की घोषणा की ।कार्यक्रम का सफल संचालन पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर के चेयरमैन डॉ. शाहिद अली ने किया । अंत में पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर के सचिव श्री संजीव शर्मा ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी अतिथि वक्ताओं तथा सहभागियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन में काफी संख्या में पत्रकारों, जनसंपर्क अधिकारियों, रिपोर्टर, फोटोग्राफर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों, संचारविदों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं मीडिया शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

डॉ. शाहिद अली
चेयरमैन
पीआरएसआई, रायपुर चैप्टर

29/05/2021
28/05/2021

हिंदी पत्रकारिता दिवस-
कोविड-19 : जनसम्पर्क एवं मीडिया के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान

30/05/2020

🙏🙏🙏🙏

21/04/2020

🙏🙏

Photos from PRSI Raipur Chapter's post 15/02/2020

भाषा पर गहरी पैठ से आवाज की दुनिया में अवसर दे सकती है: मनोहर महाजन

Shubhra Nandi



February 15, 2020

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रायपुर। भाषा पर गहरी पैठ से आवाज की दुनिया में अवसर दे सकती है। ये कहना है रेडियो श्रीलांग में अपनी मनमोहक जादूई आवाज से ऑडियंस को दीवाना करने वाला उदघोषक मनोहर महाजन का। मौका था रायपु कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का। ‘रेडियो की लोकप्रियता और उसके विकास यात्रा’ को केन्द्रित इस आयोजन में मुख्य वक्ता के रुप उदघोषक मनोहर महाजन ने कहा कि भाषा पर अधिकार से युवाओं को आवाज के क्षेत्र मे रोजगार के कई अवसर मिल सकते है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पहचान के लिए जिस तरह से चेहेरे की जरूरत होती है उसी तरह आवाज की भूमिका भी मुख्य रहती है। आवाज के जादू से कल्पनाओं को नये पंख मिलते है। रेडियो में काम के दिनों को याद करते हुए अपने संघर्ष एवं तत्कालीन भारतीय रेडियो परिस्थितियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया। साथ ही रेडियों के क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न बारीकियों की जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रख्यात उद्घोषक एवं रंगकर्मी मिर्जा मसूद का विशेष वक्तव्य हुआ जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों के साथ रायपुर रेडियो के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। वही रेडियो के महत्व को बताते हुए कहा कि साक्षरतापूर्व मे सामज को जोड़ने का सबसे बड़ा काम रेडियो ने किया है। आज के संक्रमण दौर में भी रेडियो ने अपनी अलग पहचान बना कर रखी हुई है। साथ ही विभाग द्वारा मिर्जा मसूद पर बनाये गए विशेष साक्षात्कार कार्यक्राम को दिखाया गया।
विशिष्ट वक्ता के रुप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. आनन्द शंकर बहादुर रहे जिन्होंने रेडियो में हो रहे श्रव्य और दृश्य के संक्रमण पर अपनी बात रखी। वही पुराने उदघोषकों को याद किया।
रिसोर्स पर्सन के रुप में हसन खान, नीति जैन एवं गोपा सान्याल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यशाला में रूसेन कुमार प्रबंध संपादक इंडिया सी. एस. आर. नेटवर्क रायगढ़, संजीव शर्मा सचिव पीआरएसआई रायपुर चैप्टर एवं दयानंद अवस्थी प्रमुख संयोजक रामदास द्रौपदी फाउंडेशन रायपुर सहयोगी रहे। कार्यशाला में विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें विजेताओं को उपहार स्वरूप पुरस्कार वितरित किये गए। कार्यशाला में मीडिया जगत से जुड़े बुद्धिजीवी, लेखक, पत्रकार, शिक्षक और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के अंत में जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. शाहिद अली ने कार्यक्रम की सफलता के लिए आये हुए सभी वक्ताओं तथा कार्यक्रम के सहभागियों का आभार प्रदर्शन किया।

Photos from PRSI Raipur Chapter's post 21/10/2019

राष्ट्रीय संगोष्ठी
“गाँधी का स्वराज”
दिनांक 19 अक्टूबर 2019

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