Neeti Jain_Jeevan Vidya_Co-Existential Philosophy

Neeti Jain_Jeevan Vidya_Co-Existential Philosophy

Share

Also I belong to a School "Abhibhavak Vidyalaya" based on the same philosophy.

Where happiness in child, family & society is the vision and humanity is the mission & for this I am a student of Madhyasth Darshan - SahAstitvavad - Jeevan Vidya.

24/04/2026

अभ्यास का प्रभाव और विचार अभ्यास से खूबसूरत परिमार्जन - place yourself,स्वयं में check करें कि अभी हमारा अभ्यास कहाँ-कितना है ?

१. मन तथा वृत्ति का निर्विरोध = सुख (अपराधहीन व्यवहार)

२. ⁠वृत्ति तथा चित्त का निर्विरोध = शान्ति (अन्याय रहित विचार)

३. ⁠चित्त तथा बुद्धि का निर्विरोध = संतोष (आसक्ति रहित इच्छा )

४. ⁠बुद्धि व आत्मा का निर्विरोध = आनंद ( अज्ञान रहित बुद्धि)

अभ्यास दर्शन

24/04/2026

Patent (पेटेंट )
ये फैशन है आज कल। पेटेंट करवाना और फिर उस पेटेंट का पैसा ( जितनी मेरी जानकारी है ) हर माह मिलते जाता है। आप ने जिसका पेटेंट करवाया उस का कोई और उपयोग नहीं कर सकता बिन आप की सहमति के।
तो फिर परिश्रम यानी physical labour करने की ज़रूरत कम होती नज़र आती है।अपने technical thought process यानी विज्ञानी समझ और सूज-बूझ ( चलती भाषा में) या समझदारी ( विवेक) को उपयोग करने की कम ही ज़रूरत पड़ेगी।
ना जी ये कदाचित किसी को ठेस पहुँचाने या मानव को आलसी कहना नहीं है। पेटेंट करना/करवाना एक profession हो गया है।
इसको ऐसे समझें की मानव की ज़रूरत की वस्तु तो धरती पर पहले से ही थी। हज़ारों साल लगे होंगे उस वस्तु को बनने में,क्यों कि नियति का एक क्रम है,उस क्रमानुसार ही वस्तु का प्रयत्न धरती पर,अवस्था अनुरूप होता है। बस उस ही क्रम में मानव जब आया तो ये पहचाना की ये गेहूँ है ( उदाहरण के लिए) इसको खाया जा सकता है,वो भी आग समझ आई तो ये भी समझ आया की लोहा एक धातु है । इन तीनो चीजों को शायद तीन अलग अलग लोगों ने पहचाना होगा। किसी ने लोहे का तवा बनाया होगा। किसी ने गेहूँ से आटा बनाने का जुगाड़ बनाया होगा। किसी ने ये सोचा होगा कि क्यों ना इसको पानी से गूथ लें तो रोटी बनाई होगी उस लोहे के तवे को आग पर रख कर। कितना ग़ज़ब और ख़ूबसूरत है- सह-अस्तित्व की बुनाई-गुथाई । अब उस समय आदमी ने पेटेंट को नहीं समझा होगा,वर्ना गेंहू का भी नाम कुछ और होता,किसी मानव के नाम पे। शायद ये इस भी लिए कि जब तक आदमी आहार,आवास,अलंकार कपड़े चप्पल आदि को समझ कर अपने शरीर को सुरक्षित और स्वस्थ रखने का प्रयास कर रहा था तब विज्ञान का दिया ना टिमटिमाया हो इस धरती पर।
1416/1421 के बीच कभी पहला पेटेंट issue किया गया था,Florence शहर में। ऐसा गूगल से मिली जानकारी कहती है।
पेटेंट का अर्थ हो जाता है उस वस्तु के उपयोग पर आपका एकाधिकार हो जाना। यानी दूसरा कोई इसको उपयोग नहीं कर सकता,बिन आप से permission लिए।
Google में इसकी परिभाषा कुछ यूँ है-
पेटेंट (Patent) सरकार द्वारा किसी आविष्कारक (inventor) को उनके नए उत्पाद, प्रक्रिया या डिज़ाइन के लिए दिया गया एक विशेष कानूनी एकाधिकार है। यह अधिकार आविष्कार को सार्वजनिक करने के बदले में दिया जाता है, जो आमतौर पर आवेदन की तारीख से 20 वर्षों के लिए मान्य होता है। इस दौरान, पेटेंट धारक की अनुमति के बिना कोई अन्य व्यक्ति या संस्था उस आविष्कार का व्यावसायिक उपयोग, निर्माण या बिक्री नहीं कर सकती।
मेरा भी दिमाग़ कुछ ऐसा ही चलता था। क्या मजे की ज़िंदगी होगी सोचती थी। पर एक घटना घटी-
बात है उस समय कि जब छत्तीसगढ़ राज्य बना था। उसके कोई 4-5 साल बाद छत्तीसगढ़ वन औषधि बोर्ड का एक विज्ञापन आया। लिखा था ( अब मेरे शब्दों में ) कि अगर आप किसी औषधीय वृक्ष/झाड़ी की आप को पहचान हो और वो इस प्रदेश में पाई जाती हो, तो हमारे ऑफिस आ कर जानकारी दें,सब सही पाया गया तो उस औषधि को आप के नाम से पेटेंट करा दिया जाएगा।
मैं पढ़ के खुश हो गई और जब पूज्य बाबाजी से मिली तो मैंने वो विज्ञापन की cutting दिखाई और कहा,” बाबाजी,आप तो कितनी सारी औषधियों को जानते हैं क्यों ना हम यहाँ जा कर जानकारी दें और आप के नाम से पेटेंट करवा दें।”
बाबा जी ने उस विज्ञापन को पढ़ा और अपने चितपरिचित अंदाज़ में बोले,” ये अपराध है बेटा,पेटेंट कुछ हो नहीं सकता ,ये अपराध की दुकान है।”
तब कुछ बात समझ आई,कुछ नहीं-पर आज पूरी बात समझ आ गई।
धरती की समृद्धि,संपदा पर तो सिर्फ़ इतना किया जा सकता है कि मानव उसकी आवर्तनशीलता बनाए रखें,ऋतु चक्र बना रहे-अब इस आवर्तनशीलता और नियति क्रम की समझ को सार्वभौम होना चाहिए या इसका पेटेंट होना चाहिए,ये अपराध है या पुण्य का काम इसको सभी मानव सोचें-समझें और निर्णय स्वरूप जियें 🙏🥰।

नीति
रायपुर
16.04.2026

Photos from Neeti Jain_Jeevan Vidya_Co-Existential Philosophy's post 12/10/2024

I had this beautiful opportunity to take a book session on detailing each & every detail, aspect, dimension of Behavioural Value Conversation or Vyavhaaraatmak Janvaad. It was a blissful,anandmay time spent in staying at Achhoti,Abhuday sansthan.

The book seems easy but goes deep into thought process for each & every feeling & thoughts we are having & then what & how we are speaking, behaving. Gives so many topics of happy conversation in public also.

Thorough streaming of thoughts process 😂😂😂. Using editing, deleting, space & pause buttons before hand ( in thoughts ) only.

It’s always beautiful to be beautiful so the physical ailments, the challenging ones, doesn’t seem challenging at all.

I have my inner full of gratitude for Sanket Thakur bhaiya ji for giving me this opportunity, Manjeet bhaiya ji & Dolly bhabhi ji for all
the care,kadha, pampering, each & every one there participating in managing the sansthan smoothly, all the members who attended the session & off course my care take kachra didi for taking so good care for me.

A hall of gratitude to our mentor Shri A Nagraj ji cause he made coexistence beautiful & living 🥰💫🎉.

27/06/2024

प्रश्न-मानसिक रूप से थक जाने का प्रमाण क्या है ?
How to understand that we are mentally tired/exhausted ?

( understand the beautiful answer 🥰)

उत्तर - अपने द्वारा किए गए विश्लेषण ( analysis ) से ही निकले प्रश्नों ( questions ) में फँस जाना। इसको कुंठा ( frustration ) नाम भी दिया जा सकता है। कुंठित होना,रास्ता बंद हो जाना,रास्ता ठीक नहीं लगता इनमें से किसी प्रमाण में हम गलती करने के रास्ते में आ जाते हैं। अपने ग़लत विश्लेषण को छोड़ कर के स्वयं में सहीपन की प्यास को पहचानना ही सह-अस्तित्ववाद ( coexistence, understanding, practising & learning to live together ) के लिये जुड़ने की स्थली है। इस प्यास को हर एक व्यक्ति बुझाना चाहता ही है। सकारात्मक बात ( solution oriented positive talk) के लिए हर व्यक्ति के पास जगह बनी ही हुई है।

श्री ए नागराज
जनवरी 2007 अमरकण्टक

04/05/2024

सभी को नमस्ते, अछोटी में होने वाले इस अध्ययन का pattern पूज्य बाबा जी के द्वारा तय किया गया है और अब तक उस ही तरह से,नियम पूर्वक दर्शन की सभी पुस्तकों को पढ़ाया जाता है। दर्शन को जीने में लाये बिना ये सिर्फ़ theoretical हो जाता है। तथ्य समझ आना,उसमें समाधान - समझने के लिए तर्क लगाना कि वो व्यावहारिक हो सके ये ज़रूरी है।

पूज्य बाबा जी ने मुझे ये घुट्टी समान पिला दिया कि बेटा जो समझ आया है पठन से उसको जी कर देखो। परिभाषा संहिता को साथ में रख कर पठन करना,और उसको जीने में लाना।

ये घुट्टी बड़ी जीवन वर्धक निकली। आज इसके फल परिणाम सुंदर मिल रहे हैं। अपने आप को skip कर के कुछ भी कितना भी करने जाएँगे,अधूरा ही रहेगा,ख़ुशिया और संतुष्टि नहीं मिलेगी,भुगत के करना या कर के भुगतना या कर के समझना,इस ही स्टाइल में जीते रहेंगे। इन तीन डिज़ाइन में ही सब जी रहे हैं,यहीं से पीड़ा creat होती है।

मैंने साथ में यही हुआ,इन तीन design में जी कर अपना छिछा-लेदर खूब किया ,गर्द तक गिर कर,अपने आप से बे-इंतहाँ नफरत करने के बाद,अपने आप में तय किया कि बस हो गया अब मैं अपने आप को दुखी नहीं रखूँगी,अब इस दलदल से निकलना ही है। वो जैसे एक ख़ूब गहरी और बड़ी दलदल थी और एक बड़े वृक्ष की मज़बूत टहनी रस्सी के रूप में मेरे ऊपर थी। शुरू में मैं जितनी कोशिश करती रस्सी पकड़ बाहर निकलूँ,उतना दलदल में धंसती जाती थी,क्यों कि ध्यान में,प्राथमिकता में दूसरी १० चीजें थीं,बातें थीं,व्यक्ति या वस्तु थीं। बाबा जी के पास आंसुओं से पीड़ा से भरी जाती थी,रातें सिसक-सिसक के बिताने के बाद,और वो स्नेह से कहते सह-अस्तित्व को समझो बेटा,नियति को समझो,पठन करते जाओ करते जाओ,इसके अलावा तरने का कोई रास्ता नहीं। बस वो रस्सी वहाँ कस के पकड़ ली,दम लगा एक बार,अपने आप के साथ न्याय कैसे करूँ समझने में,पर बस फिर दलदल से बाहर,स्वच्छ सुंदर अपनी पहचान अपना आचरण और अपनी solution capacity,अपनी ख़ुशियाँ और एक डंडा बाबा जी थमा गए। उसका उपयोग तब समझ नहीं आया अब आया।

उस दलदल से बाहर निकल पाक और पारदर्शी पवित्र और सुंदर होने में अपने ऊपर 20 वर्ष की मेहनत जिसमें 10 वर्ष आख़िरी के शुद्ध बुद्ध यही किया अपने पे काम,लगातार पठन और उसको जीने में लाना आख़िर घुट्टी पिला गये बाबा जी,और एक जुनून था कि कैसा होता है क्रिया पूर्ण और आचरण पूर्ण होना उसको देख पाऊँ।

बस सब की यात्रा यहीं तक है-साथ२ है। इसमें पचना-पचाना सब समझ आ जाता है आदमी को।

तो ? क्या सोच रहे हैं,अध्ययन के लिए रजिस्टर करें,क्या पता शायद मैं भी मिलूँ वहाँ 😇🥰🥰🥰💕।

ये उत्सव है,ज़रूर पधारें 💫






*घोषणा: अभ्युदय संस्थान, अछोटी में छ: मासिक पठन/अध्ययन का कार्यक्रम*
मान्यवर,
सूचना: *अभ्युदय संस्थान, अछोटी में - अध्ययन शिविर घोषणा (सत्र: 2024-25)*
(01 जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2025 तक)
.
पंजीकरण के लिए नीचे इस लिंक से whatsapp ग्रुप जॉइन करें ...
https://chat.whatsapp.com/DtrgiNEruTnJtFhC8w3Uk6

मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद के अध्ययन हेतु इसके प्रणेता आदरणीय *श्री ए नागराज जी* के द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव रूप में सभी 14 वांगमय के पठन में सहयोग के लिए विगत कई वर्षों से अछोटी (कुम्हारी) छत्तीसगढ़ स्थित *अभ्युदय संस्थान में छ: मासिक पठन/अध्ययन का कार्यक्रम* अनवरत चल रहा है. पिछले वर्ष में भी यह शिविर सफलता से हुआ.
आपको यह सूचित करते हुए हमें अत्यंत हर्ष हो रहा है कि इस वर्ष *01 जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2025 तक* यह वांगमय पठन कार्यक्रम को निश्चित किया गया है.
हमें आशा है कि सभी इच्छुक भाई बहन अभी से रजिस्ट्रेशन करा कर अपना स्थान सुनिश्चित कर लेंगे. यह शिविर रहवासी किये जाने की सुलभता के साथ उपलब्ध है.
.
*अभ्युदय संस्थान का उद्देश्य* सभी वांगमय के अध्ययन, अभ्यास एवं शिक्षा में दर्शन के लोकव्यापीकरण का एक विशुद्ध स्थान होना है, साथ ही ऐसे परिवारों, गाँवों और समूहों को जो इस दर्शन को समझने में और जीने में प्रयासरत हैं, के इस प्रयास में एक सहयोगी संस्थान के रूप में अपनी भूमिका को व्यवस्थित करना है.
ताकि सभी शिक्षा के मानवीयकरण, अखंड समाज – सार्वभौम व्यवस्था की ओर अग्रसर हो पायें.

इस प्रक्रिया के लिए प्रबोधकों का चयन संस्थान करती है, जो संस्थान से, रायपुर से व देश भर के प्रबोधक मित्रों में से होते हैं. ज्यादातर प्रबोधक 10 से 15 वर्ष या अधिक समय से अध्ययन एवं अभ्यास में रत् हैं और अपने विवेक अनुसार पठन प्रक्रिया करायेंगे. *सभी प्रबोधक प्रतिफल अपेक्षा विहीन तरीके से पठन में सहयोग करते है.* इस प्रकार कई दृष्टिकोण से सभी वांगमय के पठन अध्ययन को कर पाना शिविरार्थियों के लिए बहुत उपयोगी होना देखा गया है.
- संस्थान के पास ही अभिभावक विद्यालय अछोटी (cg-बोर्ड, English medium, nursery तो क्लास 10th) संभावित शिविरार्थीयों के बच्चों के लिए उपलब्ध है।

*शिविरार्थी योग्यता:*
1. “जीवन विद्या” से सामान्य परिचय हो, *जिसमें कम से कम 2-3 परिचय शिविर,* एक अध्ययन बिंदु शिविर शामिल हो. इस शिविर संख्या में youtube में uploaded शिविर भी शामिल हैं.
2. कुछ किताबों के पठन का प्रयास किया होना, इस प्रक्रिया के लिये बहुत उपयोगी होगा.
3. विकल्प के प्रति स्वीकृती और शोध की मानसिकता बहुत अनुकूल होगी.
4. इस समयावधि में स्वयं में वांगमय पठन की प्राथमिकता हो.

*शास्त्राभ्यास:*
 मध्यस्थ दर्थन वांगमय “शास्त्राभ्यास” में पठन कर पाने में विश्वास.
 सभी दर्शन, वाद, शास्त्र व अन्य किताबों का विभिन्न प्रबोधक के सहयोग से पठन और विश्लेषण करने के पश्चात् स्वयं में, से, के लिए पठन व अभ्यास कर पाने में विश्वास.
 यह *पठन अध्ययन प्रधानतः विचाराभ्यास केन्द्रित है,* व्यवहार अभ्यास साथ साथ है ही. पूरी प्रक्रिया में कर्माभ्यास स्वेच्छिक है.
 आपके स्वास्थ हेतु, संभावित प्रिकॉशन के साथ ही संस्थान आने में सहमति हो और हर संभावित बीमारी से स्वयंस्फूर्त इलाज कराने में स्वयं में साहस और सहमति हो, जिसमें निश्चित ही, संस्थान परिवार सहयोग के लिए निरंतर जिम्मेदारी पूर्वक उपलब्ध होंगे ही।
.
*अवकाश:*
- इस वर्ष 01 जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2025 तक यह वांगमय पठन कार्यक्रम को निश्चित किया गया है.
इस अध्ययन शिविर का समापन सत्र 1 फरवरी 2025 को प्रस्तावित है।
- यह पठन कार्यक्रम प्रतिदिन चलेगा. जिसमें प्रबोधक सहयोग समय प्रतिदिन लगभग 4 घंटे (या आवश्यकतानुसार) निश्चित होता है. दोपहर को ग्रुप स्टडी और रात को गोष्ठी होती है।
- इस दौरान *तीन बार अवकाश* की सम्भावना है. पूर्व निश्चित अवकाश के आलावा अवकाश आवश्यकतानुसार दिया जाएगा.
*पहली* – जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मलेन.
*दूसरी* – दीपावली के आस पास.
*तीसरी* – एक सामाजिक परिचय शिविर या अन्य शिविर में भागीदारी के अवसर के रूप में.

*पंजीयन:*
- शिविर का और रहने का कोई भी शुल्क नहीं है, शिविर में रहने की सामान्य व्यवस्था उपलब्ध है;
और खाने के खर्च का वहन हो सके, इसलिए भोजन हेतु सहयोग राशि अपेक्षित है।
(अनुमानित खर्च के अनुसार, सहयोग राशि ₹150 प्रति व्यक्ति प्रति दिन अपेक्षित है); 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का कोई शुल्क नही है। साथ ही, शिविर में भाग लेने के लिए योगदान राशि में कोई बात हो तो संपर्क कर ही सकते हैं।
- संस्थान में गुटका, तम्बाखू और मद्यपान प्रतिबंधित है ।
- यदि आप इस शिविर में शामिल होना चाहते हैं, तो पंजीकरण के लिए निम्नलिखित लिंक से
whatsapp ग्रुप जॉइन करें ...
https://chat.whatsapp.com/DtrgiNEruTnJtFhC8w3Uk6

- कठिनाई होने पर कृपया नीचे दिए गए संपर्क पर कॉल करें।

*संपर्क:*
98930-25307; 99811-86657
🙏🙏🙏🙏

Want your school to be the top-listed School/college in Raipur?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Website

Address


Raipur
492001