04/05/2024
सभी को नमस्ते, अछोटी में होने वाले इस अध्ययन का pattern पूज्य बाबा जी के द्वारा तय किया गया है और अब तक उस ही तरह से,नियम पूर्वक दर्शन की सभी पुस्तकों को पढ़ाया जाता है। दर्शन को जीने में लाये बिना ये सिर्फ़ theoretical हो जाता है। तथ्य समझ आना,उसमें समाधान - समझने के लिए तर्क लगाना कि वो व्यावहारिक हो सके ये ज़रूरी है।
पूज्य बाबा जी ने मुझे ये घुट्टी समान पिला दिया कि बेटा जो समझ आया है पठन से उसको जी कर देखो। परिभाषा संहिता को साथ में रख कर पठन करना,और उसको जीने में लाना।
ये घुट्टी बड़ी जीवन वर्धक निकली। आज इसके फल परिणाम सुंदर मिल रहे हैं। अपने आप को skip कर के कुछ भी कितना भी करने जाएँगे,अधूरा ही रहेगा,ख़ुशिया और संतुष्टि नहीं मिलेगी,भुगत के करना या कर के भुगतना या कर के समझना,इस ही स्टाइल में जीते रहेंगे। इन तीन डिज़ाइन में ही सब जी रहे हैं,यहीं से पीड़ा creat होती है।
मैंने साथ में यही हुआ,इन तीन design में जी कर अपना छिछा-लेदर खूब किया ,गर्द तक गिर कर,अपने आप से बे-इंतहाँ नफरत करने के बाद,अपने आप में तय किया कि बस हो गया अब मैं अपने आप को दुखी नहीं रखूँगी,अब इस दलदल से निकलना ही है। वो जैसे एक ख़ूब गहरी और बड़ी दलदल थी और एक बड़े वृक्ष की मज़बूत टहनी रस्सी के रूप में मेरे ऊपर थी। शुरू में मैं जितनी कोशिश करती रस्सी पकड़ बाहर निकलूँ,उतना दलदल में धंसती जाती थी,क्यों कि ध्यान में,प्राथमिकता में दूसरी १० चीजें थीं,बातें थीं,व्यक्ति या वस्तु थीं। बाबा जी के पास आंसुओं से पीड़ा से भरी जाती थी,रातें सिसक-सिसक के बिताने के बाद,और वो स्नेह से कहते सह-अस्तित्व को समझो बेटा,नियति को समझो,पठन करते जाओ करते जाओ,इसके अलावा तरने का कोई रास्ता नहीं। बस वो रस्सी वहाँ कस के पकड़ ली,दम लगा एक बार,अपने आप के साथ न्याय कैसे करूँ समझने में,पर बस फिर दलदल से बाहर,स्वच्छ सुंदर अपनी पहचान अपना आचरण और अपनी solution capacity,अपनी ख़ुशियाँ और एक डंडा बाबा जी थमा गए। उसका उपयोग तब समझ नहीं आया अब आया।
उस दलदल से बाहर निकल पाक और पारदर्शी पवित्र और सुंदर होने में अपने ऊपर 20 वर्ष की मेहनत जिसमें 10 वर्ष आख़िरी के शुद्ध बुद्ध यही किया अपने पे काम,लगातार पठन और उसको जीने में लाना आख़िर घुट्टी पिला गये बाबा जी,और एक जुनून था कि कैसा होता है क्रिया पूर्ण और आचरण पूर्ण होना उसको देख पाऊँ।
बस सब की यात्रा यहीं तक है-साथ२ है। इसमें पचना-पचाना सब समझ आ जाता है आदमी को।
तो ? क्या सोच रहे हैं,अध्ययन के लिए रजिस्टर करें,क्या पता शायद मैं भी मिलूँ वहाँ 😇🥰🥰🥰💕।
ये उत्सव है,ज़रूर पधारें 💫
*घोषणा: अभ्युदय संस्थान, अछोटी में छ: मासिक पठन/अध्ययन का कार्यक्रम*
मान्यवर,
सूचना: *अभ्युदय संस्थान, अछोटी में - अध्ययन शिविर घोषणा (सत्र: 2024-25)*
(01 जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2025 तक)
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पंजीकरण के लिए नीचे इस लिंक से whatsapp ग्रुप जॉइन करें ...
https://chat.whatsapp.com/DtrgiNEruTnJtFhC8w3Uk6
मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद के अध्ययन हेतु इसके प्रणेता आदरणीय *श्री ए नागराज जी* के द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव रूप में सभी 14 वांगमय के पठन में सहयोग के लिए विगत कई वर्षों से अछोटी (कुम्हारी) छत्तीसगढ़ स्थित *अभ्युदय संस्थान में छ: मासिक पठन/अध्ययन का कार्यक्रम* अनवरत चल रहा है. पिछले वर्ष में भी यह शिविर सफलता से हुआ.
आपको यह सूचित करते हुए हमें अत्यंत हर्ष हो रहा है कि इस वर्ष *01 जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2025 तक* यह वांगमय पठन कार्यक्रम को निश्चित किया गया है.
हमें आशा है कि सभी इच्छुक भाई बहन अभी से रजिस्ट्रेशन करा कर अपना स्थान सुनिश्चित कर लेंगे. यह शिविर रहवासी किये जाने की सुलभता के साथ उपलब्ध है.
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*अभ्युदय संस्थान का उद्देश्य* सभी वांगमय के अध्ययन, अभ्यास एवं शिक्षा में दर्शन के लोकव्यापीकरण का एक विशुद्ध स्थान होना है, साथ ही ऐसे परिवारों, गाँवों और समूहों को जो इस दर्शन को समझने में और जीने में प्रयासरत हैं, के इस प्रयास में एक सहयोगी संस्थान के रूप में अपनी भूमिका को व्यवस्थित करना है.
ताकि सभी शिक्षा के मानवीयकरण, अखंड समाज – सार्वभौम व्यवस्था की ओर अग्रसर हो पायें.
इस प्रक्रिया के लिए प्रबोधकों का चयन संस्थान करती है, जो संस्थान से, रायपुर से व देश भर के प्रबोधक मित्रों में से होते हैं. ज्यादातर प्रबोधक 10 से 15 वर्ष या अधिक समय से अध्ययन एवं अभ्यास में रत् हैं और अपने विवेक अनुसार पठन प्रक्रिया करायेंगे. *सभी प्रबोधक प्रतिफल अपेक्षा विहीन तरीके से पठन में सहयोग करते है.* इस प्रकार कई दृष्टिकोण से सभी वांगमय के पठन अध्ययन को कर पाना शिविरार्थियों के लिए बहुत उपयोगी होना देखा गया है.- संस्थान के पास ही अभिभावक विद्यालय अछोटी (cg-बोर्ड, English medium, nursery तो क्लास 10th) संभावित शिविरार्थीयों के बच्चों के लिए उपलब्ध है।
*शिविरार्थी योग्यता:*
1. “जीवन विद्या” से सामान्य परिचय हो, *जिसमें कम से कम 2-3 परिचय शिविर,* एक अध्ययन बिंदु शिविर शामिल हो. इस शिविर संख्या में youtube में uploaded शिविर भी शामिल हैं.
2. कुछ किताबों के पठन का प्रयास किया होना, इस प्रक्रिया के लिये बहुत उपयोगी होगा.
3. विकल्प के प्रति स्वीकृती और शोध की मानसिकता बहुत अनुकूल होगी.
4. इस समयावधि में स्वयं में वांगमय पठन की प्राथमिकता हो.
*शास्त्राभ्यास:*
मध्यस्थ दर्थन वांगमय “शास्त्राभ्यास” में पठन कर पाने में विश्वास.
सभी दर्शन, वाद, शास्त्र व अन्य किताबों का विभिन्न प्रबोधक के सहयोग से पठन और विश्लेषण करने के पश्चात् स्वयं में, से, के लिए पठन व अभ्यास कर पाने में विश्वास.
यह *पठन अध्ययन प्रधानतः विचाराभ्यास केन्द्रित है,* व्यवहार अभ्यास साथ साथ है ही. पूरी प्रक्रिया में कर्माभ्यास स्वेच्छिक है.
आपके स्वास्थ हेतु, संभावित प्रिकॉशन के साथ ही संस्थान आने में सहमति हो और हर संभावित बीमारी से स्वयंस्फूर्त इलाज कराने में स्वयं में साहस और सहमति हो, जिसमें निश्चित ही, संस्थान परिवार सहयोग के लिए निरंतर जिम्मेदारी पूर्वक उपलब्ध होंगे ही।
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*अवकाश:*
- इस वर्ष 01 जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2025 तक यह वांगमय पठन कार्यक्रम को निश्चित किया गया है.
इस अध्ययन शिविर का समापन सत्र 1 फरवरी 2025 को प्रस्तावित है।
- यह पठन कार्यक्रम प्रतिदिन चलेगा. जिसमें प्रबोधक सहयोग समय प्रतिदिन लगभग 4 घंटे (या आवश्यकतानुसार) निश्चित होता है. दोपहर को ग्रुप स्टडी और रात को गोष्ठी होती है।
- इस दौरान *तीन बार अवकाश* की सम्भावना है. पूर्व निश्चित अवकाश के आलावा अवकाश आवश्यकतानुसार दिया जाएगा.
*पहली* – जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मलेन.
*दूसरी* – दीपावली के आस पास.
*तीसरी* – एक सामाजिक परिचय शिविर या अन्य शिविर में भागीदारी के अवसर के रूप में.
*पंजीयन:*
- शिविर का और रहने का कोई भी शुल्क नहीं है, शिविर में रहने की सामान्य व्यवस्था उपलब्ध है;
और खाने के खर्च का वहन हो सके, इसलिए भोजन हेतु सहयोग राशि अपेक्षित है।
(अनुमानित खर्च के अनुसार, सहयोग राशि ₹150 प्रति व्यक्ति प्रति दिन अपेक्षित है); 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का कोई शुल्क नही है। साथ ही, शिविर में भाग लेने के लिए योगदान राशि में कोई बात हो तो संपर्क कर ही सकते हैं।
- संस्थान में गुटका, तम्बाखू और मद्यपान प्रतिबंधित है ।
- यदि आप इस शिविर में शामिल होना चाहते हैं, तो पंजीकरण के लिए निम्नलिखित लिंक से
whatsapp ग्रुप जॉइन करें ...
https://chat.whatsapp.com/DtrgiNEruTnJtFhC8w3Uk6
- कठिनाई होने पर कृपया नीचे दिए गए संपर्क पर कॉल करें।
*संपर्क:*
98930-25307; 99811-86657
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