11/09/2021
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ओड़िशा के प्रमुख लोक-पर्व ‘नुआखाई’ का सांस्कृतिक प्रभाव भी पश्चिम ओड़िशा के सीमावर्ती छत्तीसगढ़ में भी साफ देखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद, महासमुन्द, रायगढ़, जशपुर, धमतरी सहित बस्तर संभाग के कुछ जिले भी इनमें शामिल हैं, जहाँ पड़ोसी राज्य की तरह उत्कल संस्कृति से जुड़े लाखों लोग इसे पारम्परिक रीति-रिवाजों के साथ उत्साह से मनाते हैं।
छत्तीसगढ़ जब दक्षिण कोसल के नाम से प्रसिद्ध था, तब उसके भौगोलिक क्षेत्र में वर्तमान ओड़िशा के भी कई इलाके शामिल थे। इसलिए यह कहा जा सकता है कि ‘नुआखाई’ दोनों राज्यों की साझा लोक-संस्कृति का प्रतीक है।
नुआखाई का सरल शाब्दिक अर्थ है नया खाना। नुआ यानी नया। खेतों में खड़ी नई फ़सल के स्वागत में यह मुख्य रूप से ओड़िशा के किसानों और खेतिहर श्रमिकों द्वारा मनाया जाने वाला पारम्परिक त्यौहार है, लेकिन समाज के सभी वर्ग इसे उत्साह के साथ मनाते हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी पश्चिम ओड़िशा के हजारों लोग विगत कई दशकों से निवास कर रहे हैं। वे हर साल यहाँ नुआखाई का त्यौहार परम्परगत तरीके से उत्साह के साथ मनाते आ रहे हैं। नुआखाई के एक दिन पहले यहाँ नये धान की बालियों के साथ चुड़ा (चिवड़ा ), मूंग और परसा पत्तों की बिक्री की जाती है
इतिहासकार जनश्रुतियों का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि पश्चिम ओड़िशा में नुआखाई की परम्परा शुरू करने का श्रेय बारहवीं शताब्दी में हुए चौहान वंश के प्रथम राजा रमईदेव को दिया जाता है। वह तत्कालीन पटना (वर्तमान पाटनागढ़) के राजा थे। पाटनागढ़ वर्तमान में बलांगीर जिले में है। कुछ जानकारों का कहना है कि पहले बलांगीर को ही पाटनागढ़ कहा जाता था।
रमईदेव ने देखा कि उनकी प्रजा केवल शिकार और कुछ वनोपजों के संग्रहण से ही अपनी आजीविका चलाती है और यह जीवनयापन की एक अस्थायी व्यवस्था है। इससे कोई अतिरिक्त आमदनी भी नहीं होती और प्रजा के साथ-साथ राज्य की अर्थ व्यवस्था भी बेहतर नहीं हो सकती। उन्होंने लोगों के जीवन में स्थायित्व लाने के लिए उन्हें स्थायी खेती के लिए प्रोत्साहित करने की सोची और इसके लिए धार्मिक विधि-विधान के साथ नुआखाई पर्व मनाने की शुरुआत की। कालांतर में यह पश्चिम ओड़िशा के लोकजीवन का एक प्रमुख पर्व बन गया।
वर्षा ऋतु के दौरान भाद्र महीने के शुक्ल पक्ष में खेतों में धान की नई फसल, विशेष रूप से जल्दी पकने वाले धान में बालियां आने लगती हैं। तब नई फ़सल के स्वागत में नुआखाई का आयोजन होता है। यह हमारी कृषि संस्कृति और ऋषि संस्कृति पर आधारित त्यौहार है।