05/04/2016
रे मानव इन मूक बधिर पशु - पक्षियों पर रहम कर
यह भी तुझ पर निर्भर है
न सता इन उन्मुक्त प्राणियों कॊ
यह मूक बधिर बोल तो सकते नही
लेकिन इनकी खामोशी कॊ समझ
बन्द कर इन पर अत्याचार
अरे समझ तू इनकी करुण-पुकार
यह कब तक सहेँगे तू ही सोच
इनके अन्न पानी का तू कर इंतजाम
इन मूक बधिरो की आशीषे बहुत है
सोच समझ और कर इन पर उपकार