19/01/2026
**कहानी: अपनी पहचान समझना ज़रूरी है**
एक गाँव में एक बतख और एक मुर्गी बहुत अच्छे दोस्त थे। दोनों हमेशा साथ रहते, साथ खेलते और साथ ही दाना चुगते थे। बतख को तालाब से बहुत लगाव था, जबकि मुर्गी को आँगन और खेतों में घूमना अच्छा लगता था।
एक दिन बतख तालाब के किनारे पहुँची। पानी देखकर उसका मन खुश हो गया। उसने बिना देर किए तालाब में छलांग लगा दी और मज़े से तैरने लगी। कभी दाएँ, कभी बाएँ—पानी में उसे बड़ी मस्ती आ रही थी।
किनारे खड़ी मुर्गी यह सब देख रही थी। उसे लगा, “अगर बतख इतना मज़ा कर रही है, तो मैं भी कर सकती हूँ।” बिना सोचे-समझे मुर्गी ने भी तालाब में छलांग लगा दी। लेकिन तैरना उसे आता नहीं था। थोड़ी ही देर में वह डूबने लगी और घबराकर चिल्लाने लगी।
बतख ने तुरंत उसे देखा और पास आकर किसी तरह मुर्गी को बाहर निकाला। मुर्गी काँप रही थी। थोड़ी देर बाद वह बोली,
“मुझसे बड़ी गलती हो गई। मैंने तुम्हारी नकल की, लेकिन यह नहीं सोचा कि मैं कौन हूँ और क्या कर सकती हूँ।”
बतख मुस्कराई और बोली,
“हर किसी की अपनी क्षमता होती है। जो काम मैं कर सकती हूँ, ज़रूरी नहीं तुम भी वही कर सको।”
उसी समय वहाँ कुछ लोग बात कर रहे थे कि कैसे एक आदमी ने रील बनाकर रातों-रात पैसा कमा लिया। यह सुनकर कई लोग बिना सोचे-समझे वही करने लगे, लेकिन ज़्यादातर लोग सफल नहीं हो पाए।
मुर्गी को समझ आ गया कि जीवन में सिर्फ दूसरों की नकल करना सही नहीं है। किसी भी काम को करने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि हमारी रुचि, हमारी क्षमता और हमारी पहचान क्या है।
**सीख:**
दूसरों की सफलता देखकर आँख मूँदकर नकल नहीं करनी चाहिए। कोई भी काम करने से पहले यह ज़रूर देखना चाहिए कि हम कौन हैं और हम क्या कर सकते हैं। अपनी पहचान समझकर किया गया प्रयास ही सच्ची सफलता दिलाता है।