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25/06/2021
हरियाल या हरियल (अंग्रेजी: Theyellow-footed green pigeon) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक पक्षी है। हरियल पक्षी ...
04/05/2021

हरियाल या हरियल (अंग्रेजी: Theyellow-footed green pigeon) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक पक्षी है। हरियल पक्षी के बारे में कहा जाता है कि यह जमीन पर नहीं बैठता है। हरियाल[1]भारत के महाराष्ट्र राज्य की राजकीय पक्षी है। यह ट्रेरन फॉनीकॉप्टेरा (Treron phoenicoptera) की प्रजाति की है। [2]

रियल पक्षी महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी है, परन्तु यह मुख्यतः उत्तर प्रदेश में पाया जाता है। इस पक्षी के बारे में मान्यता है कि यह धरती पर कभी पैर नहीं रखता। यदि यह धरती पर उतरता भी है तो अपने पैरों पर लकड़ी का टुकड़ा लेकर उतरता है एवं उसी पर बैठता है। यह पक्षी भी विलुप्त प्राय जीवों की श्रेणी में आता है। इस पक्षी का आकार 29 सेंटीमीटर से लेकर 33 सेंटीमीटर तक होता है तथा इसका वजन मात्र 225 ग्राम से 260 ग्राम के बीच होता है, यह एक सामाजिक प्राणी है और झुंडो में ही पाए जाते हैं, इनके पंखों का फैलाव 17 से 19 सेंटीमीटर लंबा होता है, इनके शरीर का रंग हल्का पीला हरा होता है जोकि ओलिव के फल से मिलता-जुलता होता है। इनके सर के ऊपर हल्के नीले भूरे रंग के बाल होते हैं। इनकी आंखें काले रंग की होती है, जिसके आसपास लाल रंग की रिंग होती है। हरियल पक्षी के पैर चमकीले पीले रंग के होते हैं। हरियल पक्षी को ऊंचे ऊंचे पेड़ वाले जंगल पसंद है यह सदाबहार जंगलों में पाया जाता है यह अक्सर अपना घोंसला पीपल और बरगद के पेड़ पर बनाना पसंद करता है, भोजन की तलाश में यह उड़ते हुए शहरों के पार्क में भी अक्सर देखे जाते हैं, हरियल पक्षी दूसरे कबूतरों की तरह ही सामाजिक पक्षी होते हैं यह भी कई पक्षियों के झुंडों में रहते हैं इन का सबसे छोटा ग्रुप छोटा समूह 5 से 10 कबूतरों का होता है यह जमीन पर बहुत कम उतरते हैं तथा अक्सर पेड़ों पर और ऊंचे स्थानों पर ही बैठते हैं।

हरियल पक्षी पूर्णता शाकाहारी होता है यह कई प्रकार के फल खाता है तथा अनाज और दाने भी खा लेता है, यह कई प्रकार के फूलों की कलियां छोटे पौधों के अंकुर और बीज खाना पसंद करता है

यह हमेशा समूहों में ही उड़ान भरते हैं सुबह के वक्त इन्हें पेड़ों की सबसे ऊंची शाखों पर बैठा हुआ देखा जा सकता है.

हरियल पक्षी का प्रजनन काल मार्च से जून तक होता है, दूसरे कबूतरों की तरह ही नर हरियल पक्षी भी अपने गर्दन की थैली को फुला लेता है तथा मादा को रिझाने के लिए नृत्य करता है इस प्रकार का व्यवहार लगभग सभी प्रकार के कप्तानों की प्रजातियों में देखा जाता है.

हरियल पक्षी अपना घोंसला तिनको और पत्तियों से पेड़ों और झाड़ियों में बनाते हैं यह एक प्रजनन काल में एक से दो अंडे ही देते हैं इन अंडो का रंग चमकीला सफेद होता है, नर तथा मादा दोनों अंडों को 13 दिन तक रहते हैं अंडे से बच्चे बाहर आने पर दोनों हरियल पक्षी बच्चों की देखभाल करते हैं।

17/12/2020

🐅बाघ जनगणना रिपोर्ट 2019-20🐅

★ भारत में बाघों की कुल संख्या 🔸 2967
★ 2014 से 19 में कुल वृद्धि दर 🔸 30%💯सर्वाधिक

(राज्य/क्षेत्र ) (बांघो की संख्या)

📌 मध्य प्रदेश 👉 526 🥇प्रथम स्थान
📌कर्नाटक 👉 524 🥈दूसरा स्थान
📌उत्तराखंड 👉 442 🥉तीसरा स्थान
📌महाराष्ट्र 👉 312
📌उत्तरप्रदेश 👉 173
📌सुंदरबन 👉 88
📌बिहार 👉 31

10 Sep-- CA with Static
10/09/2020

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9 Sep-- Current AffairsSatya Online Study
09/09/2020

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07/09/2020

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📣↘️Channapatna Toys: क्या है चन्नापटना खिलौने, इनकी ख़ासियत और प्रधानमंत्री मोदी ने इनका ज़िक्र क्यों किया? ⬇️✍🏻  Satya ...
06/09/2020

📣↘️Channapatna Toys: क्या है चन्नापटना खिलौने, इनकी ख़ासियत और प्रधानमंत्री मोदी ने इनका ज़िक्र क्यों किया? ⬇️

✍🏻 Satya ( Owner)

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में घरेलू खिलौनों को बढ़ावा देने पर ज़ोर देते हुए चन्नापटना खिलौनों का ज़िक्र किया था। कोविड-19 महामारी के कारण बाकी उद्योग प्रसिद्ध चन्नापटना खिलौनों के उद्योग को भारी नुकसान हुआ है।

महामारी के कारण सिर्फ 2000 से 2500 कारीगर और मज़दूर ही खिलौने बनाने के काम में जुटे हुए हैं, जबकि महामारी से पहले 9000 से 10,000 कारीगर और मज़दूर खिलौने बना रहे थे।

🔶चन्नापटना खिलौनों की ख़ासियत

चन्नापटना खिलौने एक प्रकार के लकड़ी के खिलौने हैं। ये खिलौने हल्के और कठोर होते हैं। पुराने ज़माने में इन खिलौनों को Ivory wood से बनाकर इनपर पॉलिश की जाती थी। मौजूदा दौर में इन खिलौनों का निर्माण सागौन, गूलर, देवदार, रबरवुड, पाइनवुड आदि की लकड़ियों से किया जाता है। इन खिलौनों के GI Tag मिला हुआ है और इनका पुनचर्क्रण भी किया जा सकता है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इन खिलौनों को बनाने में थोड़ी सी भी लकड़ी बर्बाद नहीं होती है और बची हुई लकड़ी को अन्य खिलौने बनाने में या हवन सामग्री के उद्दयोग में इस्तेमाल किया जाता है। सिर्फ भारत में ही नहीं ब्लकि यूरोप और अमेरिका में भी इन खिलौनों का निर्यात किया जाता है।

🔶चन्नापटना खिलौने कहां बनाए जाते हैं?

चन्नापटना खिलौनों को कर्नाटक के चन्नपटना शहर में बनाया जाता है। इस शहर को 'कर्नाटक का खिलौना शहर' भी कहा जाता है। आपको बता दें कि भारत का पहला शिल्प पार्क भी यहीं स्थित है। इस शहर के निवासियों की जीविका का मुख्य स्रोत यहां के खिलौने ही हैं।

🔶चन्नापटना खिलौनों का इतिहास

चन्नापटना खिलौनों का संबंध टीपू सुल्तान के शासन से है। ऐसा कहा जैतै है कि सुल्तान को फारस से एक लकड़ी का खिलौना भेंट स्वरूप मिला था। भेंट में मिले इस उपहार से सुल्तान इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने फारस से कारीगरों को बुलवाकर अपने वहां के कारीगरों को कला सिखवाई। अत: जो कारीगर इन खिलौनों को बनाना सीख गए वो चन्नापटना में ही रह कर खिलौने बनाने लगे।

साल 2015 में गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्नाटक में एक झांकी के दौरान इन खिलौनों को दिखाया गया था। बेस्ट झांकी के पुरस्कार में इस झांकी को तीसरा स्थान मिला था।

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5 सितंबर
05/09/2020

5 सितंबर

04/09/2020

राष्ट्रपति की क्षमा करने की प्रक्रिया🇮🇳✍🏻

Mr.Satya(Owner)🇮🇳✍🏻

👉यह प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने से शुरू होती है।

👉इसके बाद याचिका पर विचार करने के लिये यह गृह मंत्रालय को भेजी जाती है, जिसके बाद संबंधित राज्य सरकार से सलाह ली जाती है।

👉गृह मंत्री की सिफारिश पर परामर्श के बाद याचिका राष्ट्रपति को वापस भेजी जाती है।

♦️ क्षमादान का उद्देश्य🇮🇳✍🏻

क्षमादान किसी निर्दोष व्यक्ति को न्यायालय की गलती के कारण दंडित होने से बचाने या संदेहास्पद सज़ा के मामलों में मददगार साबित हो सकती है।

✍🏻🇮🇳➡️राष्ट्रपति को प्राप्त इस शक्ति के दो रूप हैं: -

1. विधि के प्रयोग में होने वाली न्यायिक गलती को सुधारने के लिये।आप जीके ट्रिक्स टेलीग्राम चैनल पर पढ़ रहे हो।

2. यदि राष्ट्रपति दंड का स्वरूप अधिक कठोर समझता है तो उसका बचाव करने के लिये।

✍🏻🇮🇳 क्षमा करने की शक्तियों पर न्यायिक रुख

मारू राम बनाम भारत संघ मामले (1980) में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 72 के तहत शक्ति का प्रयोग केंद्र सरकार की सलाह पर किया जाना चाहिये, न कि राष्ट्रपति द्वारा अपने विवेक से और राष्ट्रपति के लिये यह सलाह बाध्यकारी है।
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01/09/2020

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