Gurukul Educational Nagri

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22/04/2026

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

1. विभिन्न वन उत्पादों के दावेदार कौन हैं ?

उत्तर ⇒ विभिन्न वन उत्पादों के दावेदार निम्नलिखित हैं

(i) वन के अंदर एवं इसके निकट रहने वाले अपनी अनेक आवश्यकताओं के लिए वन पर निर्भर रहते हैं।

(ii) सरकार का वन विभाग जिनके पास वनों का स्वामित्व है तथा वे वनों से प्राप्त संसाधनों का नियंत्रण करते हैं।

(iii) उद्योगपति जो तेंदू पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने से लेकर कागज मिल तक विभिन्न वन उत्पादों का उपयोग करते हैं। परंतु वे वनों के किसी भी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहते ।

(iv) वन्य जीवन एवं प्रकृति प्रेमी जो प्रकृति का संरक्षण इसकी आद्य अवस्था में करना चाहते हैं ।

2. घुमंतु चरवाहों को विशाल हिमालय राष्ट्रीय उद्यान में रोकने का क्या नतीजा हुआ ?

उत्तर ⇒ घुमंतु चरवाहों को विशाल हिमालय राष्ट्रीय उद्यान में रोकने से वहाँ घास पहले बहुत लंबी हो जाती है, फिर लंबाई के कारण जमीन पर गिर जाती है जिससे नयी घास की वृद्धि रुक जाती है ।

3. राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार’ किनकी स्मृति में दिया जाता है ?

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार’ अमृता देवी विश्नोई की स्मृति में दिया जाता है जिन्होंने 1731 में जोधपुर के पास खेजराल गाँव में ‘खेजरी वृक्षों को बचाने हेतु 363 लोगों के साथ अपने आपको बलिदान कर दिया था ।

4. ‘गंगा का प्रदूषण’ पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर ⇒ गंगा हिमालय में स्थित अपने उद्गम गंगोत्री से बंगाल की खाड़ी में गंगा सागर तक 2500 km तक की यात्रा करती है । इसके किनारे स्थित नगरों ने इसमें उत्सर्जित कचरा एवं मल प्रवाहित कर इसे एक नाले में परिवर्तित कर दिया है । मानव के अन्य क्रियाकलाप जैसे—नहाना, कपड़े धोना, मृत व्यक्तियों की राख एवं शवों को बहाना, उद्योगों द्वारा उत्पादित रासायनिक उत्सर्जन ने गंगा का प्रदूषण बढ़ाकर इसमें कोलिफार्म जीवाणु उपस्थिति द्वारा जल को संदूषित कर दिया है । जल में इन सबके विषैले प्रभाव के कारण जल में मछलियाँ मरने लगी हैं।जल और समुद्र विज्ञान

5. कैसे कहा जा सकता है कि वन ‘जैव विविधता के विशिष्ट (Hotspots) स्थल’ हैं ?

उत्तर ⇒ वन ‘जैव विविधता के विशिष्ट (hotspots) स्थल हैं । जैव विविधता का एक आधार उस क्षेत्र में पायी जानेवाली विभिन्न स्पीशीज़ की संख्या है। परंत जीवों के विभिन्न स्वरूप (जीवाणु, कवक, फर्न, पुष्पी पादप, सूत्रकृमि, कीट, पक्षी, सरीसृप इत्यादि) भी महत्त्वपूर्ण हैं । वंशागत जैव विविधता को संरक्षित करने का प्रयास प्राकृतिक संरक्षण के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। विभिन्न प्रकार के अध्ययन से हमें पता चलता है कि विविधता के नष्ट होने से पारिस्थितिक स्थायित्व के भी नष्ट होने की संभावना रहती है।

6. आप अपनी जीवन शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के संपोषण को प्रोत्साहन मिल सके ?

उत्तर ⇒ हम अपनी जीवन शैली में ऐसे अनेक परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के संपोषण को प्रोत्साहन मिल सके. हम ‘कम उपयोग’, ‘पुनः उपयोग’ तथा ‘पुनः चक्रण’ की नीति अपनाएँगे, जीवाश्म ईंधन-कोयला एवं पेट्रोलियम का निम्नतम उपयोग करेंगे, जल की अतिव्ययता को रोकेंगे, बिजली का कम उपयोग करके, वन-संपदा को बचाने हतु उठाये गये कदम में सहयोग करके, लिफ्ट का प्रयोग न कर सीढ़ियों का प्रयोग करेंगे, जल संरक्षण में सहयोग देंगे इत्यादि।

7. पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-कौन से परिवर्तन ला सकते हैं ?

उत्तर ⇒

(i) धुआँ रहित वाहनों का प्रयोग करके

(ii) पॉलीथीन का उपयोग न करक

(iii) जल संरक्षण को बढावा देकर

(iv) वनों की कटाई पर रोक लगाकर

(v) वृक्षारोपण करके

(vi) तेल से चालित वाहनों का कम-से-कम उपयोग करके।
उपरोक्त विभिन्न विधियों को अपनाकर हम पर्यावरण-संरक्षण में योगदान कर सकते हैं।

8. प्लास्टिक का पुनः चक्रण किस प्रकार होता है? क्या प्लास्टिक के पुनः चक्रण का पर्यावरण पर कोई समाघात होता है ?

उत्तर ⇒ प्लास्टिक के डिस्पोजेबुल कप एवं गिलास की जगह मिट्टी के कुल्हड़ या पेपर के डिस्पोजेबुल कप एवं गिलास का प्रयोग करना ज्यादा सही है। प्लास्टिक का पुनः चक्रण आसान नहीं है। इसे बार-बार उपयोग करना इसका जमाव पर्यावरण में अपेक्षाकृत कम हो जाता है। इससे पर्यावरण से प्लास्टिक समाप्त तो नहीं हो जाएगा, पर इसका जमाव कम हो सकता है।

9. जीवाश्म क्या है ? जैव विकास प्रक्रम के विषय में ये क्या बतलाता है ?

उत्तर ⇒ किसी जीव की मृत्यु के बाद उसके शरीर का अपघटन हो जाता है तथा वह समाप्त हो जाता है। परंतु कभी-कभी जीव अथवा उसके कुछ भाग ऐसे वातावरण में चले जाते हैं जिसके कारण इनका अपघटन पूरी तरह से नहीं हो पाता । जीव के इस प्रकार के परिरक्षित अवशेष जीवाश्म कहलाते हैं। जीवाश्मों के अध्ययन से जैव विकास के प्रमाण मिलते हैं। आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx) एक ऐसा ही जीवाश्म है जिसमें रेप्टीलिया तथा एवीज (पक्षी) दोनों के गुण पाये जाते हैं। आर्कियोप्टेरिक्स में रेप्टीलिया की तरह जबड़ों में दाँत तथा अंगुलियों में नख थे। पक्षियों की तरह इसमें डैने (wings) तथा पर या पंख (feathers) थे । इसके अध्ययन से इस बात की पुष्टि होती है कि रेप्टीलिया तथा एवीज का विकास एक ही पूर्वज से हुआ है । इसी तरह यह (जीवाश्म) जैव प्रक्रम है एक धीरे-धीरे होनेवाला जीवों के विकास का ।

जीवाश्म क्या है ? जैव विकास प्रक्रम के विषय में ये क्या बतलाता है ?

10. जल संग्रहण की पारंपरिक व्यवस्था-खादिन पद्धति का रेखांकित चित्र बनाइये ।जल और समुद्र विज्ञान

उत्तर ⇒

चित्र : जल संग्रहण की पारंपरिक व्यवस्था-खादिन पद्धति का आदर्श व्यवस्थापन

चित्र : जल संग्रहण की पारंपरिक व्यवस्था-खादिन पद्धति का आदर्श व्यवस्थापन

11. बड़े बाँध के विरोध में मुख्यतः किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है ?

उत्तर ⇒ बड़े बाँध के विरोध में मुख्यतः तीन समस्याओं का सामना करना पड़ता है –

(i) सामाजिक समस्याएँ – इससे बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी विस्थापित होते हैं, और इन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता ।

(ii) आर्थिक समस्याएँ – इनमें जनता का बहुत अधिक धन लगता है और उस अनुपात में लाभ अपेक्षित नहीं है

(iii) पर्यावरणीय समस्याएँ – इससे बड़े स्तर पर वनों का विनाश होता है तथा जैव विविधता की क्षति होती है ।

12. यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारे कचरे जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ?

उत्तर ⇒ यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारे कचरे. जैव निम्नीकरण हो तो, अपशिष्ट पदार्थ जमा नहीं होंगे। सारे पदार्थ को पुनः पर्यावरण में वापस भेज देते हैं। इसके कारण हमारा पर्यावरण हमेशा स्वच्छ रहेगा।

13. हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए ?

उत्तर ⇒ हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण इसलिए करना चाहिए क्योंकि वन ‘जैव विविधता के विशिष्ट (Hotspots) स्थल’ हैं। जैव विविधता का एक आधार उस क्षेत्र में पाई जानेवाली विभिन्न स्पशीज की संख्या है। परंतु जीवों के विभिन्न स्वरूप (जीवाणु, कवक, फर्न, पुष्पी पादप, सूक्ष्मकृमि, कीट, पक्षी, सरीसृप इत्यादि) भी महत्त्वपूर्ण हैं। वंशागत जैव विविधता को संरक्षित करने का प्रयास प्राकृतिक संरक्षण के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। प्रयोगों एवं वस्तु स्थिति के अध्ययन से हमें पता चलता है कि विविधता के नष्ट होने से पारिस्थितिक स्थायित्व भी नष्ट हो सकता है। विभिन्न व्यक्ति फल, नट्स तथा औषधि एकत्र करने के साथ-साथ अपने पशुओं को वन में चराते हैं अथवा उनका चारा वनों में एकत्र करते हैं।

22/12/2025

("Trigonometry") के मूल सूत्रों (sin, cos, tan) का उपयोग करके किसी वस्तु की ऊँचाई या दूरी निकाली जाती है, जैसे: tan(θ) = लम्ब / आधार (Height / Distance) और sin(θ) = लम्ब / कर्ण (Height / Hypotenuse), जहाँ θ कोण है और 'लम्ब' (Height) हमें ज्ञात करनी होती है.
मुख्य सूत्र (Main Formulas):
tan(θ) = (वस्तु की ऊँचाई) / (क्षैतिज दूरी) (अगर कोण और क्षैतिज दूरी पता हो)
Height = Distance × tan(θ) (ऊँचाई ज्ञात करने के लिए)
sin(θ) = (वस्तु की ऊँचाई) / (तिरछी दूरी) (अगर कोण और तिरछी दूरी पता हो)
Height = Hypotenuse × sin(θ)
कैसे उपयोग करें (How to Use):
समकोण त्रिभुज बनाएं (Draw a Right Triangle): समस्या को एक समकोण त्रिभुज के रूप में दर्शाएं (वस्तु की ऊँचाई लम्ब, ज़मीन की दूरी आधार, और देखने की रेखा कर्ण होगी).
कोण (θ) पहचानें (Identify the Angle): प्रश्न में दिए गए उन्नयन कोण (Angle of Elevation) या अवनमन कोण (Angle of Depression) को पहचानें.
सही त्रिकोणमितीय अनुपात चुनें (Choose the Right Ratio): देखें कि आपको कौन-सी भुजाएँ पता हैं और कौन-सी ज्ञात करनी है (जैसे, यदि लम्ब और आधार पता है, तो tan का उपयोग करें).
सूत्र लगाएं और हल करें (Apply Formula & Solve): सूत्र में मान रखकर ऊँचाई ज्ञात करें, ज़रूरत पड़ने पर हर का परिमेयकरण (Rationalization) करें (जैसे 6/√3 को 2√3 में बदलने के लिए).
उदाहरण (Example): यदि किसी मीनार के आधार से 30 मीटर दूर एक बिंदु से उसके शिखर का उन्नयन कोण 30° है, तो मीनार की ऊँचाई क्या होगी?
tan(30°) = (ऊँचाई) / 30
1/√3 = (ऊँचाई) / 30
ऊँचाई = 30 / √3 = 10√3 मीटर.

07/08/2025

Class 10th Hindi Grammer Question Answer

भाषा- व्यक्ति द्वारा सार्थक उच्चरित वाणी को भाषा कहते हैं।

वर्ण– उस ध्वनि को कहते हैं जिसके और टुकड़े नहीं किए जा सकते।

वर्ण का प्रयोग- वर्ण का प्रयोग ध्वनि चिह्न तथा लिपि चिह्न दोनों के लिए होता है। इस प्रकार ये वर्ण भाषा के मौखिक तथा लिखित दोनों रूपों के प्रतीक हैं।

अक्षर- किसी एक ध्वनि या ध्वनि-समूह की उच्चरित न्यूनतम इकाई को अक्षर कहते हैं। अक्षर का उच्चारण वायु के एक झटके के साथ होता है।

वर्णमाला- वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

स्वर – जिन ध्वनियों के उच्चारण के समय हवा बिना किसी रुकावट के मुंह से निकलती है, उन्हें स्वर कहते हैं।

ह्रस्व स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं। जैसे अ, इ।

दीर्घ स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व से दुगना समय लगे, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। जैसे आ, ई ।

व्यंजन – जिस वर्ण के उच्चारण में स्वर की सहायता लेनी पड़ती है, उसे व्यंजन कहते हैं। जैसे क = क् + अ।

व्यंजन-गुच्छ – जब दो या दो से अधिक व्यंजन एकसाथ एक श्वास के झटके से बोले जाते हैं, तो उन्हें व्यंजन-गुच्छ कहते हैं। जैसे क्यारी, स्मरण। .

अंत:स्थ व्यंजन – जिन वर्णों के उच्चारण में जीभ, तालु, दाँत तथा ओठ आपस में हल्का स्पर्श करते हैं। उसे अंत:स्थ व्यंजन कहते हैं। जैसे य, र, ल, व।

बलाघात – किसी शब्द के उच्चारण में किसी अक्षर पर जो बल दिया जाता है, वह बलाघात कहलाता है। जैसे करण, कमल में क्रमशः ‘क’ तथा ‘म’ पर बल दिया जाता है। अतः, ‘र’ तथा ‘म’ पर बलाघात है। कभी-कभी पूरे शब्द पर भी बलाघात होता है।

अल्पप्राण – जिस वर्ण के उच्चारण में थोड़ा श्रम लगाना पड़ता है और जिससे ‘हकार’ की ध्वनि नहीं निकलती है, उसे अल्पप्राण कहते हैं। जैसे – प्रत्येक व्यंजन का पहला, तीसरा तथा पाँचवाँ वर्ण अल्पप्राण हैं। जैसे क, ग, ङ ।

महाप्राण – जिस व्यंजनों के उच्चारण में अधिक परिश्रम लगता है तथा जिससे ‘हकार’ की ध्वनि निकलती है, उसे महाप्राण कहते हैं। प्रत्येक व्यंजन का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण है। जैसे ख, घ।

घोष वर्ण- जिन व्यंजन वर्णों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में झंकार उत्पन्न होने से नाद उत्पन्न होता है, उन्हें घोष वर्ण कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवाँ वर्ण तथा य, र, ल, ह।.

अघोष वर्ण – जिन व्यंजन वर्णों के उच्चारण में स्वरतंत्रियाँ झंकृत नहीं होती, उन्हें अघोष वर्ण कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण और श, ष, स अघोष हैं।

संयक्त/संपृक्त ध्वनि – जब एक ध्वनि दो व्यंजनों से मिल जाए तो उसे संयक्त/संपक्तं ध्वनि कहते हैं। जैसे ‘संभव’। इसमें ‘स’ और ‘भ’ के बीच ‘म्’ का मेल है।

संगम – किसी शब्द के उच्चारण में जो विराम आता है, उसे संगम कहते हैं। जैसे ‘मत जाना’ शब्द में ‘मत जाना’ के बीच थोड़ा विराम हैं।

अनुतान – अनुतान भावों की वह स्वाभाविक अभिव्यक्ति है जिसके कारण शब्द का अर्थ स्पष्ट हो जाता है । वह अनुतान कहलाता है। जैसे हमें तो करना ही होगा।

01/04/2025

द्विघात समीकरण (quadratic equation) एक ऐसा समीकरण है जिसमें चर (variable) की सबसे बड़ी घात 2 होती है, जिसे सामान्य रूप से ax² + bx + c = 0 के रूप में लिखा जाता है, जहाँ a, b, और c स्थिरांक (constants) हैं और a ≠ 0.
यहाँ द्विघात समीकरण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं:
मानक रूप (Standard Form): द्विघात समीकरण का मानक रूप ax² + bx + c = 0 है.
चर (Variable): समीकरण में चर x है, जिसकी सबसे बड़ी घात 2 है.
गुणांक (Coefficients): a, b और c गुणांक हैं, जो संख्यात्मक मान होते हैं.
स्थिरांक (Constant): c स्थिर पद है.
द्विघात सूत्र (Quadratic Formula): द्विघात समीकरण के हल (roots) ज्ञात करने के लिए द्विघात सूत्र का उपयोग किया जाता है: x = (-b ± √(b² - 4ac)) / (2a).
विभेदक (Discriminant): विभेदक (b² - 4ac) समीकरण के मूलों की प्रकृति (nature) के बारे में जानकारी देता है:
यदि विभेदक > 0, तो दो अलग-अलग वास्तविक मूल होते हैं.
यदि विभेदक = 0, तो दो समान वास्तविक मूल होते हैं.
यदि विभेदक < 0, तो दो जटिल (complex) मूल होते हैं.
उदाहरण:
x² + 5x + 6 = 0
2x² - 8x + 3 = 0
x² - 4 = 0
द्विघात समीकरणों को हल करने के तरीके:
गुणन विधि (Factorization Method):
यदि समीकरण को आसानी से गुणनखंड किया जा सकता है, तो यह विधि उपयोगी है.
द्विघात सूत्र (Quadratic Formula):
यह विधि किसी भी द्विघात समीकरण को हल करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.
वर्ग पूर्ण विधि (Completing the Square):
यह विधि द्विघात समीकरण को हल करने का एक और तरीका है.
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
द्विघात समीकरणों का उपयोग कई वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है, जैसे कि गति, भौतिकी और इंजीनियरिंग.
द्विघात समीकरणों का ग्राफ एक परवलय (parabola) होता है.
भारत के महान गणितज्ञ आर्यभट और भास्कराचार्य ने द्विघात समीकरणों के बारे में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

03/03/2025

Wald map lines and polls

28/03/2022

03 ,धातु एवं अधातु ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) Class 10th Science Dhatu Aur Adhatu Subjective Question Answer For Bihar Board
1. धातु किसे कहते हैं ?
उत्तर⇒ आवर्त सारणी के बायीं तरफ तथा मध्य में रखे जाने वाले तत्त्व धातु कहलाते हैं, जिनमें धात्विक चमक होती है । वे प्रायः तन्य, आघातवर्ध्य, विद्युत् और ऊष्मा की सुचालक, दृढ़ और अधिक घनत्व वाली होती हैं। इनके ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं । लोहा, सोना, चाँदी, ताँबा, प्लैटिनम आदि धातुओं के उदाहरण हैं ।

2. धातुओं के दो रासायनिक गणों को लिखें।
उत्तर⇒(i) धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं।
(ii) अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस विस्थापित करते हैं।
2Na +2HCL→ 2NaCl + H 2


3. अधातु के दो गुणधर्मों को लिखें।
उत्तर⇒ (i) अधिकतर अधातुएँ गैसीय अवस्था में पाये जाते हैं।
(ii) अधातुएँ सोनोरस ध्वनि उत्पन्न नहीं करते हैं।

4. कौन-सी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं ?
उत्तर⇒ सोना और चाँदी ऐसी धातुएँ हैं जो अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे नीचे आती हैं। ये धातुएँ काफी कम अभिक्रियाशील हैं। ऐसी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं।

5. धातुओं का परिष्करण से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर⇒ अपचयन प्रक्रम से प्राप्त धातुएँ शुद्ध नहीं होती हैं। इनमें अपद्रव्य होती हैं। शुद्ध धातु की प्राप्ति इन अपद्रव्यों को धातु से हटाकर किया जाता है। अत: अशुद्ध धातुओं से अपद्रव्यों को हटाना धातुओं का परिष्करण कहा जाता है।

6. ऐसा धातु का उदाहरण दीजिए जो-
(i) कमरे के ताप पर द्रव होता है।
(ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
(iii) ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक हाता है।
(iv) ऊष्मा का कुचालक होता है।

उत्तर⇒ (i) पारा (ii) सोडियम तथा पोटाशियम, (iii) सोना और चांदी (iv) लेड तथा मरकरी।

7. मिश्रधातु क्या है ? तांबे के मिश्रधातु के दो उदाहरण दें।
उत्तर⇒ किसी धातु में अन्य धातु या अधातु की एक निश्चित मात्रा मिलाकर इच्छित गुण-धर्म वाली मिश्रधातुएँ प्राप्त की जा सकती हैं। ताम्बे के दो मिश्रधातु निम्नांकित हैं—पीतल और काँसा। पीतल में 80% Cu और काँसा में 90% Cu पाया
जाता है।

8. धातुएँ विद्युत के सुचालक क्यों होती हैं ?
उत्तर⇒ धातुएँ विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। ये विद्युत धनात्मक भी हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति तीव्र होती है। ये ताप और विद्युत के सुचालक होते हैं। इसके तार से होकर विद्युत का प्रवाह आसानी से की जा सकती है। धातुओं को चालकता उनमें उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण होती है। ये इलेक्ट्रॉन धातु से होकर आसानी से दौड़ सकत हैं। यही कारण है कि धातु विद्युत और ताप के अच्छे चालक हैं।

9. संयोजकता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर⇒ किसी भी तत्त्व को संयाजकता उसक परमाण के सबसे बाहरी काश में उपस्थित संयाजकता इलक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित होती है। मान लिया कि एक तत्त्व Na है। इसका परमाणु संख्या: 11 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। अत: परमाण के बाहरी काश में इलेक्ट्रॉन संख्या । है। अत: इसकी संयोजकता 1 होगी।

10. आघातवर्थ्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।
उत्तर⇒ कुछ धातुओं को पीटकर उनके चद्दर बनाए जाते हैं। इस गुणधर्म का आघातवर्थ्यता कहते हैं और धातु आघातवर्ध्य कहलाती है। किसी धातु के पतले तार खींचे जा सकते हैं। धातुओं के इस गुणधर्म को तन्यता कहते हैं तथा धातु तन्य कहलाती है। एक ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार बनाया जा सकता है।

11. संक्षारण से क्या समझते हैं?
उत्तर⇒ जब धात सतह जल, वायु अथवा आस-पास के अन्य किसा पदार्थ से प्रभावित होती है, तो इसे धातु का संक्षारित होना कहते हैं तथा इस परिघटना का संक्षारण कहा जाता है। गोल्ड तथा सिल्वर जैसी उत्कष्ट धातएँ सुगमतापूर्वक संक्षारित नहीं होती हैं। एलुमिनियम जैसी धातुएँ संक्षारित नहीं होती हैं।

12. संक्षारण से बचने की तीन विधियों को लिखें।
उत्तर⇒ संक्षारण रोकने की तीन विधियाँ –

(i) यशदलेपन द्वारा
(ii) विद्युत लेपन द्वारा
(iii) एनोडीकरण द्वारा

13. एक धातु और एक अधातु का नाम लिखें जो वायु के सम्पर्क में आने पर जल उठते हैं ?
उत्तर⇒ सोडियम धातु वायु के सम्पर्क में आन पर वायमंडलीय सामान्य ताप पर ही जल उठते हैं। श्वेत फॉस्फोरस अधातु है इसे पानी में डुबाकर रखा जाता है। यह वायु के सम्पर्क में आते ही जल उठता है।

14. जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया करती है तो हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होता है। क्यों ?
उत्तर⇒ क्योंकि HNO3 एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो उत्पन्न हाइड्रोजन का ऑक्सीकृत करके जल में परिवर्तित कर देता है एवं स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड (N2O, NO, NO2 ) में अपचयित हो जाता है। लेकिन Mn ही एक ऐसा धातु है जो अति तनु HNO3 के साथ अभिक्रिया कर H2 गैस उत्पन्न करता है।

15. एनोड पंक क्या है? उदाहरण के साथ समझावें।
उत्तर⇒ विद्युत शोधन में जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब एनोड पर स्थित अशद्ध धातु केटायन के रूप में घोल में जाने लगती है। उतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है। घुलनशील अशुद्धियाँ घोल में चली जाती हैं। अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड के नीचे जमा हो जाती हैं। इन्हें एनोड पंक कहते हैं।

16. निम्न पदों की परिभाषा दें–
(i) खनिज
(ii) अयस्क
(iii) गैंग
(iv) निस्तापन
(v) भर्जन

उत्तर⇒

(i) खनिज- भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। ये प्रायः खानों से निकाले जाते हैं।

(ii) अयस्क- वैसे खनिज जिनसे धातु का व्यावसायिक उत्पादन होता है, अयस्क कहलाते हैं। अयस्कों में धातु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं। इससे धात का उत्पादन सरलता से कम खर्च में होता है।

(iii) गैंग- पथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि कई अशद्धियाँ होती हैं। धातओं के निष्कर्षण स पहल अयस्क से अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। ये अशुद्धियाँ गैंग कहे जाते हैं। अयस्कों को गैंग से हटाने के लिए जिन प्रक्रियाओं का उपयोग होता है वे अयस्क एवं गैंग के भौतिक अथवा रासायनिक गुण धर्मों पर आधारित होते हैं। इनके पृथक्करण के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

(iv) निस्तापन- अयस्क को उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने की क्रिया जिससे उड़नशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं और ऑक्सीलवण ऑक्साइड में परिणत हो जाता है निस्तापन कहा जाता है। .

(v) भर्जन-अयस्क को वायु की अनियंत्रित आपूर्ति में उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने की क्रिया भर्जन कहलाती है। इसमें अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर बाहर निकल जाती है।

17. आघातवर्ध्यता से क्या समझते हैं ?
उत्तर⇒ कुछ धातुओं को पीटकर चद्दर बनाए जाते हैं। इस गुणधर्म का आघातवर्ध्यता कहते हैं। इसी गुण के कारण एलुमिनियम के चद्दर, लोहे के चद्दर आदि बनाए जाते हैं।

18. पोटैशियम तथा सोडियम धातुओं को किरोसीन तेल में डुबाकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर⇒ सोडियम तथा पोटैशियम तीव्र अभिक्रियाशील तत्त्व हैं। यह वायुमंडलीय ताप पर ही जल उठता है। अत: इसे खुले वायु में रखने से दुर्घटना की सम्भावना होती है। यही कारण है कि इसे किरोसीन तेल में डुबा कर रखा जाता है जिससे इसकी अभिक्रियाशीलता बिलकुल कम हो जाती है और यह वायमंडलीय ताप से अप्रभावित रहता है।

19.आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च क्यों होते हैं ?
उत्तर⇒ आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में पाए जाते हैं। इनमें अंतर आण्विक आकर्षण बल काफी मजबूत होते हैं। अतः अंतर आण्विक आकर्षण को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों के गलनांक काफी उच्च होते हैं।

20. द्विधर्मी ऑक्साइड क्या है? उदाहरण दें।
उत्तर⇒ वैसे ऑक्साइड को द्विधर्मी अथवा उभयधर्मी ऑक्साइड कहे जाते हैं जिनमें अम्लीय और क्षारीय दानों गुण मौजूद होते हैं। जैसे एलुमिनियम ऑक्साइड। ये अम्लों और क्षारों से अभिक्रिया कर भिन्न-भिन्न यौगिकों का निर्माण करता है।

Al2O3 + 6HCI → 2AICI3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAIO2 + H2O

21. कैरेट सोना का क्या अर्थ है ?
उत्तर⇒ शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं। यह काफी नर्म होता है। इससे आभूषण बनाना कठिन है। आजकल गहने बनाने के लिए 22 कैरेट सोने की आवश्यकता होती है। 22 कैरेट सोना थोड़ा कठोर होता है। इसमें 22 भाग शुद्ध सोना और 2 भाग ताँबा या चाँदी मिला रहता है।

22. चाँदी, सोना एवं प्लैटिनम का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है। क्यों ?
उत्तर⇒ सोना एक कोमल, सुनहले रंग का कीमती धातु है। इसका मुख्य उपयोग आभूषण बनाने में होता है। सोने की शुद्धता को कैरेट (Carat) में मापते हैं। शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। आभूषण बनाते समय शुद्ध सोने में कम कीमती धात् ताँबा या चाँदी थोडा मिला दिया जाता है, जिससे वह कुछ कठोर बन जाता है। सोने के बने आभूषण 22 कैरेट के होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि इन आभूषणों में 22 भाग सोना 2 भाग ताँबा या चाँदी की मिलावट है। 24 कैरेट सोना को 18 कैरेट सोना में बदलने के लिए 18 भाग सोना में 6 भाग ताँबा या चाँदी मिश्रित कर देते हैं। इस प्रकार चाँदी तथा प्लैटिनम का उपयोग किया जाता है

23. ध्वानिक (सोनोरस) किसे कहते हैं ?
उत्तर⇒ जब धातुएँ किसी कठोर सतह से टकराती है तो उनसे एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। इसे धातुई ध्वनि कहते हैं। इस प्रकार की धातुएँ ध्वानिक कहलाती हैं। स्कूल की घंटी से निकलने वाली ध्वनि इसका उदाहरण है।

24. एक्वारेजिया से क्या समझते हैं? इसके क्या उपयोग हैं ?
उत्तर⇒ एक्वारेजिया 3 : 1 के अनुपात में सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सांद्र नाइट्रिक अम्ल का ताजा मिश्रण होता है। यह गोल्ड को गला सकता है। जबकि दोनों अम्लों में से प्रत्येक की यह क्षमता नहीं है। एक्वारेजिया भभकता द्रव होने के साथ प्रबल संक्षारक है। यह उन अभिकर्मकों में से एक है जो गोल्ड तथा प्लैटिनम को भी आसानी से गला सकता है।

25. थर्मिट अभिक्रिया क्या है?
उत्तर⇒ आयरन (III) ऑवसाइड ( Fe2O3 ) के साथ एल्युमीनियम की अभिक्रिया काफी तीव्र होती है और काफी ऊष्मा निकलता है इसका उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में होता है। इस अभिक्रिया को थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं।

26. अयस्कों के समृद्धीकरण से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर⇒ पृथ्वी से निकलने वाले अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धिया हटाना अयस्कों का समृद्धीकरण कहा जाता है।

27. लोहे को जंग से बचाने के दो उपाय बताइए।
उत्तर⇒ लोहे पर जंग लगने से बचाने के लिए लोहे की वस्तुओं पर पेंट करके, तेल लगाकर, ग्रीज लगाकर, यशद लेपन, क्रोमियम लेपन, एनोडीकरण या मिश्रधातु बनाकर आदि उपाय किए जाते हैं। इससे लोहे का संक्षारण रूक जाता है और लाह की वस्तुएँ बर्बाद होने से बच जाती है।

28. कॉपर को वायु में खुला छोड़ने पर वह हरे रंग का हो जाता है। क्यों ?
उत्तर⇒ कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है। जिससे इसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की चमक चढ़ जाती है। यह हरा पदार्थ कॉपर कार्बोनेट होता है।

29. हवाई जहाजों का ढाँचा ऐलुमिनियम के मिश्र धातुओं से क्यों बनाया जाता है ? वर्णन करें।
उत्तर⇒ हवाई जहाज का ढाँचा ऐलुमिनियम के मिश्र धातुओं डुरेलिमिन और मैग्लिनियम से निम्नलिखित कारणों से बनाया जाता है –

(i) ये अति हल्की मिश्र धातु है जिसका आपेक्षिक घनत्व बहुत कम है।
(ii) सुचालक होने के कारण विद्युत् प्रेषण तारें इनसे बनाई जा सकती हैं।
(iii) इन पर जंग नहीं लगता।
(iv) इन मिश्र धातुओं की कठोरता बहुत अधिक होती है।
(v) ये रसायनों के प्रति बहुत क्रियाशील नहीं है।

30. सल्फाइड अयस्क के सांद्रण के लिए फेन-उत्प्लावन विधि का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर⇒ सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण करने के लिए उन्हें खूब महीन पीसकर पाइन के तेल मिले जल के साथ मिलाकर हवा के झोके के द्वारा झाग पैदा किया जाता है। शुद्ध अयस्क झाग के साथ ऊपर आ जाता है तथा अशुद्धियाँ नीचे बैट जाती हैं। यह विधि फेन उत्प्लावन विधि कहलाती है।

31. सोडियम को केरोसीन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर⇒ सोडियम सक्रिय धातु है जो वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके सोडियम ऑक्साइड बनाती है। यह पानी से क्रिया कर सोडियम हाइड्रोक्साइड तथा हाइड्रोजन उत्पन्न करती है। वायु में खुला छोड़ देने पर यह आग पकड़ लेती है। इसलिए इसे मिट्टी के तेल में डुबोकर सुरक्षित रखते हैं।

32. वल्कनीकरण किसे कहते हैं ? इस प्रक्रिया में रबड़ में क्या परिवर्तन आते हैं ?
उत्तर⇒ सल्फर को प्राकृतिक रबड़ के साथ मिश्रित करने की प्रक्रिया को वल्कनीकरण कहते हैं। जब प्राकृतिक रबड़ को सल्फर से मिलाकर गर्म करते हैं तो रबड़ अधिक कठोर तथा कम लचकदार हो जाता है। रबड़ एक बहुलक है जिसमें एक ही तल में अणुओं की एक लंबी श्रृंखला होती है जिसके कारण रबड़ को खींचा जा सकता है परंतु सल्फर मिलाने से उसका लचीलापन समाप्त हो जाता है क्योंकि सल्फर रबड़ की श्रृंखला के समान अणुओं के मध्य आड़े बंध बनाता है। सल्फर कार्बन परमाणुओं के घूर्णन में भी बाधा डालती है।

33. खनिज और अयस्क क्या हैं ? लोहे के दो अयस्कों के नाम उनके आणविक सूत्र के साथ लिखें ।
उत्तर⇒ खनिज : ऐसे प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में होती हैं, खनिज कहलाते हैं। जैसे-फैल्सपार, अभ्रक आदि।
अयस्क : इन खनिजों को जिनसे लाभप्रद ढंग से धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं। जैसे-हेमेटाइट, बॉक्साइट आदि।
लोहे के दो मुख्य अयस्क के नाम एक आण्विक सूत्र निम्नलिखित है-

(i) हेमाटाइट Fe2O3 एवं

(ii) आयरन पाइराइट FeS2

34. विद्यत अपघटनी शोधन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर⇒ कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, चाँदी, सोना आदि जैसे अनेक धातुओं का शोधन विद्युत् अपघटन द्वारा किया जाता है । इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है । धातु के लवण विलयन का उपयोग विद्युत्-अपघट्य के रूप में होता है। विद्युत-अपघट्य में जब धारा प्रवाहित होती है तब एनोड पर स्थित शुद्ध धातु विद्युत्-अपघट्य में घुल जाता है । इतनी ही मात्रा में शद्ध धात विद्यत-अपघटय से कैथोड पर निक्षेपित हो जाता है। विलयशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलयशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे निक्षेपित हो जाती हैं जिसे ऐनोड अवपंक कहते हैं।

35. Alloys स्टील क्या है ? किन्हीं तीन Alloy स्टील के नाम और उनकी संरचना लिखें।
उत्तर⇒ लोहे के साथ अन्य धातुओं और अधातुओं को मिलाकर प्राप्त की जाने वाली मिश्रधात स्टील कहलाती है।

इसके तीन प्रकार हैं-

(i) कार्बन स्टील- लोहे और कार्बन का मिश्र धातु कार्बन स्टील कहलाता है जिसमें कार्बन की मात्रा 0.5% से 1.5% तक होती है। कार्बन के अतिरिक्त सिलिकॉन, गन्धक, फॉस्फोरस तथा मैंगनीज भी होती है। कार्बन स्टील पेच, कील, गाड़ी की पटरियाँ, गार्डर तथा मशीनें बनाने में काम आता है । समुद्री जहाज, इमारतें तथा वाहन भी इसी से बनते हैं।

(ii) स्टेनलेस स्टील- जिसमें क्रोमियम, निकल, ताँबा, टंगस्टन या वेनडेनियम को मिलाया जाता है उसे स्टेनलेस स्टील कहते हैं। इसमें क्रोमियम 18% तथा निकल 8% होता है । यह डेयरी उद्योग अस्पतालों तथा बर्तन तैयार करने में काम आता है।

36. धातुकर्म क्या है ? इसके विभिन्न चरणों को लिखें।
उत्तर⇒ धातुकर्म वह विधि है जिसके द्वारा अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण होता है।
अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण कई चरणों में होता है –

(a) अयस्कों का समद्धीकरण- अयस्कों से गैंग को हटाने की प्रक्रिया को समृद्धीकरण कहते हैं।
(b) धातुओं का निष्कर्षण- इसके लिए निस्तापन, भर्जन, अपघटन आदि विधि का प्रयोग होता है।
(c) धातुओं का परिष्करण- अशुद्ध धातुओं को विभिन्न विधियों, जैसे विद्युत अपघटनी परिष्करण द्वारा शुद्ध किया जाता है।

37. एक मिश्रधातु क्या है ? मैग्नेलियम नामक मिश्रधातु के अवयवों के नाम लिखिए। इसके कोई दो उपयोग दीजिए।
उत्तर⇒ यह दो या दो से अधिक धातुओं अथवा तथा अधातु का संभागी मिश्रण है। उदाहरण—पीतल, तांबा तथा जिंक की मिश्रधातु है, कांसा, ताँबा तथा टिन की मिश्रधातु है।

मैग्नेलियम का संघटन-
ऐलुमिनियम (AI)-95%
मैग्नीशियम (Mg)-5%

मैग्नेलियम के उपयोग-
(i) हल्की तथा कठोर होने के कारण यह हवाई जहाज के भाग बनाने में प्रयोग की जाती है।
(ii) यह वाहनों तथा तुलाओं के भाग बनाने में काम आती है।

38. ऐलुमिनियम के उपयोग बताएँ।
उत्तर⇒ ऐलुमिनियम के उपयोग-

(i) ऐलुमिनियम हल्की धातु होने के कारण, हवाई जहाजों की बॉडी और मोटर इंजन बनाने के काम आती है।
(ii) यह बर्तन, फोटोफ्रेम तथा घरेलू उपयोग की ओर अनेक वस्तुएँ बनाने में काम आती है।
(iii) यह बिजली का सुचालक है, इसलिए आजकल बिजली के स्थानांतरण के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
(iv) ऐलमिनियम की बारीक परतों को खाने का सामान, दवाइयाँ दूध की बोतलें आदि पैक करने में प्रयुक्त की जाती हैं।
(v) ऐलुमिनियम पाउडर सिल्वर पेंट बनाने के काम आता है।
(vi) ऐलुमिनियम पाउडर एलूमिनोथिरैपी में प्रयुक्त होता है। यह प्रक्रम लोहे की पटरियों तथा मशीनों के टूटे भागों को जोड़ने के काम आता है।

39. अयस्क और खनिज में अंतर लिखिए।
उत्तर⇒ खनिज-धातुओं के प्राकृत यौगिक रूप को खनिज कहते हैं । अधिकांश धातुएँ हमें यौगिकों के रूप में ही प्राप्त होती हैं, जैसे-ताँबा हमें पाइराइट या क्यूपराइट से प्राप्त होता है। अयस्क-जिन पदार्थों (खनिजों) से धातु का निष्कर्षण सरल हो उन्हें अयस्क कहते हैं, जैसे- ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट है तो लोहे का हैमेटाइट।

24/03/2022

2).(che)अम्ल क्षारक एवं लवण ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) Aml Char Awam Lawan
1.अम्ल किसे कहते हैं ?
उत्तर⇒ अम्ल वह पदार्थ है जिसका स्वाद खट्टा होता है जो नीले लिटमस के घोल को लाल बनाता है, जलीय विलयन में (H+) आयन मुक्त करता है तथा धातु पर इसकी अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस मुक्त होते हैं।

जैसे—HCl, HNO3, H2SO4आदि।


2. क्षारक क्या है ?
उत्तर⇒ क्षारक वह पदार्थ है जिसका स्वाद कड़वा होता है; लाल लिटमस पत्र को नीला बनाता है। इसका जलीय विलयन (OH– ) आयन मुक्त करता है तथा अम्ल से अभिक्रिया कर लवण बनाता है।

जैसे- NaOH, CuO, Ca0 तथा Ca(OH)2 आदि।

3. लवण किसे कहते हैं ?
उत्तर⇒ वे पदार्थ लवण कहलाते हैं जो लिटमस पत्रों के प्रति उदासीन होते हैं। धातु और अम्ल के बीच अभिक्रिया के फलस्वरूप लवण बनते हैं।

Zn + 2HCl → ZnCl, + H2
2K + H,SO →H2SO4 + H2

4. अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
उत्तर⇒ शुष्क अम्ल (HCL) विद्युत का चालन नहीं करता है। शुष्क अवस्था में HCl, H+ आयन विमुक्त नहीं करता है। ज्योंहि अम्ल में जल की कुछ मात्रा मिला दी जाती है तो यह H+ आयन विमुक्त करने लगता है। अम्ल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विद्युत धारा आसानी से बहने लगता है।H+ आयन के चलते जल से विद्युत धारा बहती है। जल विद्युत का चालन करने लगता है।

5. अम्लीय और भस्मीय मूलक क्या है? उदाहरण के साथ समझावें।
उत्तर⇒ लवण दो आयनों से मिलकर बनते हैं। उनमें से एक धनायन और दूसरा ऋणायन है। धनायन भस्म से प्राप्त होता है जबकि ऋणायन अम्ल से प्राप्त होता है। भस्म से प्राप्त आयन को भस्मीय मूलक और अम्ल से प्राप्त आयन को अम्लीय मूलक कहते हैं। जैसे सोडियम क्लोराइड के बनने में Na+ (भस्मीय मूलक) और Cl (अम्लीय मूलक) आपस में संयोग कर NaCl लवण बनाता है।

6. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) का दो उपयोग लिखें।
उत्तर⇒ सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के दो उपयोग

(i) सोडा अम्ल अग्निशामक में किया जाता है।
(ii) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ऐन्टैसिड का एक संघटक है। क्षारीय होने के कारण यह पेट में अम्ल की अधिकता को उदासीन करके राहत पहुंचाता है।

7. लिटमस विलयन के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर⇒ लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक होता है जो थैलो फाइटा समूह के लाइकेन पौधे से निकाला जाता है। प्रायः इसे सूचक की तरह उपयोग किया जाता है। लिटमस विलयन उदासीन होता है और यह बैंगनी रंग का होता है। बहुत से प्राकृतिक पदार्थ जैसे- लाल पत्ता गोभी, हल्दी, हायड्रोजिया, पेट्रोनिया एवं जेरानियम जैसे कई फूलों की रंगीन पंखुड़ियों किसी विलयन में अम्ल एवं क्षारक की उपस्थिति को सूचित करता है। इसे अम्ल-क्षार सूचक अथवा सूचक कहा जाता है।

8. पीतल या ताँबे के बरतनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए ?
उत्तर⇒ ताँबे या पीतल के बरतन में दही नहीं रखना चाहिए। दही में अम्लीय गुण होता है, क्योंकि दही खट्टा होता है। ताँबे के साथ दही की अभिक्रिया (दही में लेक्टिक अम्ल है) के फलस्वरूप धातु के लवण बनते हैं और दही का स्वाद बदल जाता है।
दही + कॉपर → कॉपर लवण + हाइड्रोजन

9. केक या पावरोटी बनाने में बेकिंग पाउडर का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर⇒ बेकिंग पाउडर बेकिंग सोडा और टार्टरिक अम्ल का मिश्रण होता है। जब इसे जल में मिलाया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होता है।
NaHCO3 + H+ → CO2 + अम्ल का सोडियम लवण
इस अभिक्रिया से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड के कारण पावरोटी या केक फूल जाता है तथा इससे यह मुलायम और स्पंजी हो जाता है।

10. ब्लीचींग पाउडर बनाने की विधि एवं उपयोगिता लिखें।
उत्तर⇒ शुष्क बुझा हुआ चूना पर क्लोरीन गैस की क्रिया से विरंजक चूर्ण बनता है।

Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O

इसके उपयोग –

(i) लांड्री में साफ कपड़ों के विरंजन के लिए।
(ii) पीने वाले जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए रोगाणुनाशक के रूप में।

11. धोबिया सोडा एवं बेकिंग सोडा में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर⇒

धोबिया सोडा एवं बेकिंग सोडा में अंतर (1)

12. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के कुछ उपयोगों को लिखिए।
उत्तर⇒ हाइड्रोजन क्लोराइड के निम्नांकित उपयोग हैं

(i) इस्पात की सफाई करने में
(ii) अमोनियम क्लोराइड बनाने में
(iii) औषधियों के निर्माण में एवं
(iv) सौंदर्य प्रसाधन में।

13. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के कुछ उपयोगों को लिखिए।
उत्तर⇒ सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निम्नांकित उपयोग हैं-

(i) धातुओं से ग्रीज हटाने में प्रयुक्त होता है,
(ii) साबुन बनाने में इसका उपयोग किया जाता है,
(iii) अपमार्जक के निर्माण में,
(iv) कागज बनाने में तथा
(v) कृत्रिम फाइबर बनाने में उपयोगी है।

14. आयोडिनयुक्त नमक के उपयोग की क्यों सलाह दी जाती है?
उत्तर⇒ आजकल आयोडिनयुक्त नमक के उपयोग पर काफी जोर दिया जाता है। आयोडिन हमारे शरीर के लिए आवश्यक तत्त्व है। इसकी कमी से थॉयराइड से संबंधित रोग होते हैं। आयोडिन की कमी से आमतौर पर घेघा रोग होता है। साधारण नमक में थोड़ा पोटैशियम आयोडेट या पोटैशियम आयोडाइड मिला देने पर आयोडाइज्ड नमक बन जाता है। इसके सेवन से शरीर में आयोडिन की कमी नहीं हेती है।

15. कॉपर सल्फेट के शुष्क क्रिस्टल को गर्म करने पर उसपर होने वाले प्रभावों को लिखें।
उत्तर⇒ एक शुष्क परखनली में कॉपर सल्फेट के कुछ क्रिस्टल लेकर स्पिरीट लेम्प पर गर्म कीजिए। गर्म करने पर इसका नीला रंग समाप्त हो जाता है और यह श्वत हो जाता है। परखनली की दीवार पर जल की बूंदें दिखाई पड़ती हैं। क्रिस्टल में 5 अणु जल हाते हैं। जल के हटने पर क्रिस्टल रंगहीन (श्वेत) हो जाता है। अगर इस श्वत पदार्थ पर पुन: जल की बूंदें डाली जाएँ तो इसका रंग पुनः नीला हो जाता है। कॉपर सल्फट क्रिस्टल में जल के अणु वर्तमान रहते हैं। अंत: इसका रंग नीला
होता है।

16. अम्ल एवं क्षारक के बीच की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं, क्यों? एक उदाहरण दें।
उत्तर⇒ अम्ल एवं क्षारक के बीच की अभिक्रिया से लवण तथा जल बनता है अर्थात दोनों एक-दूसरे को उदासीन कर देते हैं। इसलिए अम्ल एवं क्षारक के बीच की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण- अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है

NaOH+ HCl → NaCl+H 2O

17.हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है ?
उत्तर⇒ हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका –

(i) हमारे आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जठर ग्रन्थियों से स्रावित होता है और भोजन में अम्लीय माध्यम प्रस्तुत करता है जिससे जठर रस का पेप्सिन नामक एन्जाइम अम्लीय माध्यम में कार्य कर सके।
(ii) यह भोजन में उपस्थित रोगाणुओं को अक्रियाशील एवं नष्ट करता है।
(iii) यह भोजन को शीघ्रता से नहीं पचने देता।

18. अस्पतालों में टूटी हुई अस्थियों को जोड़कर बैठाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले यौगिक का नामोल्लेख कीजिए। इसको कैसे निर्मित करते हैं?
उत्तर⇒ अस्पतालों में टूटी हुई हड्डियों को जोडने के लिए जिस यौगिक का प्रयोग किया जाता है उसे प्लास्टर ऑफ पेरिस कहते हैं। इसे रासायनिक दष्टि से कैल्सियम सल्फेट हेमी हाइड्रेट (CaSO4. 1/2 H2O) कहते हैं । इसे भट्ठी में जिप्सम को 373 K ताप पर गर्म करके बनाया जाता है ।

प्लास्टर ऑफ पेरिस

19. विरंजक चूर्ण के क्या-क्या महत्त्वपूर्ण उपयोग हैं ?
उत्तर⇒ विरंजक चूर्ण के निम्न महत्त्वपूर्ण उपयोग हैं-

(i) इसे सूती कपड़े, लिनन और लकड़ी के गुद्दे में उड़ाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
(ii) पीने योग्य पानी से हानिकारक जीवाणुओं के नाश के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
(iii) क्लोरोफॉर्म बनाने में प्रयुक्त होता है।
(iv) न सिकुड़ने वाली ऊन का इसकी सहायता से निर्माण किया जाता है ।
(v) प्रयोगशाला और उद्योगों में ऑक्सीकारक का कार्य करता है ।

20. अम्लों के सामान्य गुण बताएँ।
उत्तर⇒ अम्लों के सामान्य गुण-

(i) इनका स्वाद खट्टा होता है ।
(ii) ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।
(iii) इनका घोल साबन के घोल की तरह चिकना नहीं होता।
(iv) ये धातुओं के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
(v) ये कार्बोनेट के साथ क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करते हैं।
(vi) अम्ल, क्षारकों से क्रिया करके लवण और पानी बनाते हैं ।

21. अम्लों की हमारे जीवन में हानियाँ लिखिए।
उत्तर⇒ अम्लों की हमारे जीवन में हानियाँ –

(i) ये सजीव कोशिकाओं को नष्ट करते हैं।
(ii) सांद्र अम्ल त्वचा और कोमल अंगों को गंभीर क्षति पहुँचाते हैं।
(iii) कुछ खाद्य पदार्थों को खराब कर देते हैं।

22. क्षारकों के सामान्य गुण लिखें।
उत्तर⇒ क्षारकों के सामान्य गुण निम्न हैं-

(i) इनका स्वाद कड़वा होता है।
(ii) ये साबुन जैसे चिकने होते हैं तथा त्वचा को क्षति पहुँचाते हैं।
(iii) ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
(iv) ये हल्दी के रंग को भूरा लाल कर देते हैं।
(v) ये अम्लों के साथ क्रिया करके लवण तथा पानी बनाते हैं।
(vi) ये फिनालफ्थेलिन के घोल को गुलाबी कर देते हैं।

23. साधारण नमक (NaCl) की प्राप्ति कहाँ-कहाँ से होती है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर⇒ साधारण नमक निम्नलिखित सोतों से प्राप्त होता है-

(i) समुद्री-जल- समुद्री जल में साधारण नमक की बहुत बड़ी मात्रा घुली हुई है। समुद्री जल से नमक की प्राप्ति ‘लवण क्यारियों’ के माध्यम से होती है । सूर्य के ताप और वायु की सहायता से समुद्री जल का वाष्पीकरण होता है । इससे नमक की प्राप्ति होती है । इस नमक में MgCl2. MgSO4, जैसी अनेक अशुद्धियाँ मिली होता है। इन अशुद्धियों को दूर कर शद्ध नमक प्राप्त कर लिया जाता है। .

(ii) खनिज नमक- संसार के अनेक भागों में ठोस लवण का निक्षेप होता है। यह खनिज लवण तब बना था जब युगों पहले समुद्र का कोई हिस्सा सूख गया था। इस नमक का खनन उसी प्रकार होता है जैसे कोयले का किया जाता है। मंडी (हिमाचल प्रदेश), खेवड़ा (पाकिस्तान) आदि में ऐसा नमक उपलब्ध है। अशुद्धियों के कारण यह नमक प्रायः भूरे रंग का होता है। कभी-कभी भूमि तल की गहराई से जल में घोलकर पंपों की सहायता से बाहर निकाला जाता है।

(iii) झीलों से- राजस्थान की सांभर झील, अमेरिका की ग्रेट साल्ट लेक, रूस की लेक एल्टन आदि से भी नमक प्राप्त किया जाता है। इसे जल के वाष्पीकरण से प्राप्त किया जाता है।

24. धोने का सोडा तथा बेकिंग सोडे के दो-दो प्रमख उपयोग बताइए।
उत्तर⇒ धोवन सोडे के उपयोग-

(i) जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए
(ii) काँच, साबुन, पेपर तथा बोरॉक्स, कॉस्टिक सोडा इत्यादि अनेक महत्त्वपूर्ण यौगिकों के उत्पादन के लिए

बेकिंग सोडे के उपयोग-
(i) एन्टैसिड का एक संघटक क्षारीय होने के कारण अम्ल के आधिक्य को उदासीन करता है।
(ii) यह खाद्य एवं पेय पदार्थों के योज्य पदार्थ के रूप में प्रयुक्त होता है। बेकिंग चूर्ण में सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट एवं टार्टरिक अम्ल या इस जैसा एक अम्ल होता है। जब बेकिंग चूर्ण को गर्म करते हैं तो इसमें विद्यमान सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट विखंडित होकर, कार्बन डाइऑक्साइड एवं सोडियम कार्बोनेट प्रदान करता है। कार्बन डाइऑक्साइड बाध्य
करके ब्रेड एवं केक फूल जाते हैं।

25. प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग क्या है ?
उत्तर⇒ प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग –

(i) इसे साँचे, खिलौने, सिरेमिक बर्तन आदि बनाने में प्रयुक्त किया जाता है ।
(ii) सजावटी सामान, मूर्तियाँ आदि इससे बनाए जाते हैं।
(iii)अस्पतालों में अस्थि विभाग और दंत विभाग के द्वारा इसका पयाप्त किया जाता है। यह टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्रयुक्त किया जाता है और टूटे हुए दाँतों के स्थान पर नकली दाँत लगाने के सांचेबनाए जाते हैं।
(iv) भवनों की दीवारों और छतों को समतल करने और उन पर डिजयान के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
(v) अग्निशमन संबंधी सामग्री इससे तैयार की जाती है।
(vi) प्रयोगशालाओं में गैसों का रिसाव इससे रोका जाता है।

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