Pune Astrologer

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08/06/2020

*तिरुपति बालाजी की कथा! 🙏🏻🌹*

वैंकटेश भगवान को कलियुग में बालाजी नाम से भी जाना गया है। पौराणिक गाथाओं और परम्पराओं से जु़डा संक्षिप्त इतिहास यहां प्रस्तुत है-

प्रसिद्ध पौराणिक सागर-मंथन की गाथा के अनुसार जब सागर मंथन किया गया था तब कालकूट विष के अलावा चौदह रत्‍‌न निकले थे। इन रत्‍‌नों में से एक देवी लक्ष्मी भी थीं। लक्ष्मी के भव्य रूप और आकर्षण के फलस्वरूप सारे देवता, दैत्य और मनुष्य उनसे विवाह करने हेतु लालायित थे, किन्तु देवी लक्ष्मी को उन सबमें कोई न कोई कमी लगी।

अत: उन्होंने समीप निरपेक्ष भाव से खड़े हुए विष्णुजी के गले में वरमाला पहना दी। विष्णु जी ने लक्ष्मी जी को अपने वक्ष पर स्थान दिया।

यह रहस्यपूर्ण है कि विष्णुजी ने लक्ष्मीजी को अपने ह्वदय में स्थान क्यों नहीं दिया? महादेव शिवजी की जिस प्रकार पत्‍‌नी अथवा अर्धाग्नि पार्वती हैं, किन्तु उन्होंने अपने ह्वदयरूपी मानसरोवर में राजहंस राम को बसा रखा था उसी समानांतर आधार पर विष्णु के ह्वदय में संसार के पालन हेतु उत्तरदायित्व छिपा था। उस उत्तरदायित्व में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं हो इसलिए संभवतया लक्ष्मीजी का निवास वक्षस्थल बना।

एक बार धरती पर विश्व कल्याण हेतु यज्ञ का आयोजन किया गया। तब समस्या उठी कि यज्ञ का फल ब्रम्हा, विष्णु, महेश में से किसे अर्पित किया जाए। इनमें से सर्वाधिक उपयुक्त का चयन करने हेतु ऋषि भृगु को नियुक्त किया गया। भृगु ऋषि पहले ब्रम्हाजी और तत्पश्चात महेश के पास पहुंचे किन्तु उन्हें यज्ञ फल हेतु अनुपयुक्त पाया।

अंत में वे विष्णुलोक पहुंचे। विष्णुजी शेष शय्या पर लेटे हुए थे और उनकी दृष्टि भृगु पर नहीं जा पाई। भृगु ऋषि ने आवेश में आकर विष्णु जी के वक्ष पर ठोकर मार दी। अपेक्षा के विपरीत विष्णु जी ने अत्यंत विनम्र होकर उनका पांव पक़ड लिया और नम्र वचन बोले- हे ऋषिवर! आपके कोमल पांव में चोट तो नहीं आई?

विष्णुजी के व्यवहार से प्रसन्न भृगु ऋषि ने यज्ञफल का सर्वाधिक उपयुक्त पात्र विष्णुजी को घोषित किया। उस घटना की साक्षी विष्णुजी की पत्‍‌नी लक्ष्मीजी अत्यंत क्रुद्व हो गई कि विष्णुजी का वक्ष स्थान तो उनका निवास स्थान है और वहां धरतीवासी भृगु को ठोकर लगाने का किसने अधिकार दिया?

उन्हें विष्णुजी पर भी क्रोध आया कि उन्होंने भृगु को दंडित करने की अपेक्षा उनसे उल्टी क्षमा क्यों मांगी? परिणामस्वरूप लक्ष्मीजी विष्णुजी को त्याग कर चली गई। विष्णुजी ने उन्हें बहुत ढूंढा किन्तु वे नहीं मिलीं।

अंतत: विष्णुजी ने लक्ष्मी को ढूंढते हुए धरती पर श्रीनिवास के नाम से जन्म लिया और संयोग से लक्ष्मी ने भी पद्मावती के रूप में जन्म लिया। घटनाचक्र ने उन दोनों का अंतत: परस्पर विवाह करवा दिया। सब देवताओं ने इस विवाह में भाग लिया और भृगु ऋषि ने आकर एक ओर लक्ष्मीजी से क्षमा मांगी तो साथ ही उन दोनों को आशीर्वाद प्रदान किया।

लक्ष्मीजी ने भृगु ऋषि को क्षमा कर दिया किन्तु इस विवाह के अवसर पर एक अनहोनी घटना हुई। विवाह के उपलक्ष्य में लक्ष्मीजी को भेंट करने हेतु विष्णुजी ने कुबेर से धन उधार लिया जिसे वे कलियुग के समापन तक ब्याज सहित चुका देंगे।

ऐसी मानता है कि जब भी कोई भक्त तिरूपति बालाजी के दर्शनार्थ जाकर कुछ चढ़ाता है तो वह न केवल अपनी श्रद्धा भक्ति अथवा आर्त प्रार्थना प्रस्तुत करता है अपितु भगवान विष्णु के ऊपर कुबेर के ऋण को चुकाने में सहायता भी करता है। अत: विष्णुजी अपने ऐसे भक्त को खाली हाथ वापस नहीं जाने देते हैं।

जिस नगर में यह मंदिर बना है उसका नाम तिरूपति है और नगर की जिस पहाड़ी पर मंदिर बना है उसे तिरूमला (श्री+मलय) कहते हैं।

तिरूमला को वैंकट पहाड़ी अथवा शेषांचलम भी कहा जाता है। यह पहड़ी सर्पाकार प्रतीत होती हैं जिसके सात चोटियां हैं जो आदि शेष के फनों की प्रतीक मानी जाती हैं। इन सात चोटियों के नाम क्रमश: शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरू़डाद्रि, अंजनाद्रि, वृषभाद्रि, नारायणाद्रि और वैंकटाद्रि हैं।

तिरुपति बालाजी मंदिर के यह ग्यारह सच आप नहीं जानते हैं!!!!!!

देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में तिरुपति बालाजी मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कई बड़े उद्योगपति, फिल्म सितारे और राजनेता यहां अपनी उपस्थिति देते हैं क्योंकि उनके चमत्कारों की कई कथाएं प्रचलित हैं। आइए जानें उनके ग्यारह आश्चर्यजनक चमत्कार....

1. मुख्यद्वार के दाएं और बालाजी के सिर पर अनंताळवारजी के द्वारा मारे गए निशान हैं। बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हुई।

2. भगवान बालाजी के सिर पर आज भी रेशमी बाल हैं और उनमें उलझने नहीं आती और वह हमेशा ताजा लगते है।

3. मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है, उस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहां पर लोग नियम से रहते हैं। वहां की महिलाएं ब्लाउज

नहीं पहनती। वहीं से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही अन्य वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि।

4. भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं मगर वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता है।

5. बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।

6. गृभगृह में चढ़ाई गई किसी वस्तु को बाहर नहीं लाया जाता, बालाजी के पीछे एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है।

7. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है।

8. बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं। हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है उस

चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छबि उस पर उतर आती है। बाद में उसे बेचा जाता है।

9. बालाजी के जलकुंड में विसर्जित वस्तुए तिरूपति से 20 किलोमीटर दूर वेरपेडु में बाहर आती हैं।

10. गर्भगृह मे जलने वाले चिराग कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है।

11. बताया जाता है सन् 1800 में मंदिर परिसर को 12 साल के लिए बंद किया गया था। किसी एक राजा ने 12 लोगों को मारकर दीवार पर लटकाया था उस समय विमान में वेंकटेश्वर प्रकट हुए थे ऎसा माना जाता है।

जानिये प्रसिद्ध मंदिर तिरुपति बालाजी के लड्डू का रहस्य !!!!!!

तिरुपति में मौजूद बालाजी का मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है, बाबा के दर्शन के लिए आम लोगों से लेकर दुनिया भर के अमीर लोग यहां दर्शक को आते हैं। जितना खास ये मंदिर है उतना ही खास है यहां पर प्रसाद के रूप में मिलने वाला मंदिर। आखिर ये लड्डू क्यों इतना खास है हम आपको बताते हैं उसकी कहानी।

1. प्रसाद में मिलने वाले इस लड्डू का इतिहास 300 सालों से भी पुराना है। कहा जाता है कि पहली बार 2 अगस्त 1715 में इस लड्डू को प्रसाद के तौर पर दिया गया था, उसके बाद ये लड़्डू इस मंदिर का खास प्रसाद बन गया। 2. इस लड्डू को बनाने में आटा, चीनी, घृत, इलायची और मेवे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद इन्हें वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा के दौरान भगवान को अर्पित किया जाता है। 3. इस लड्डू की कीमत की कुछ खास ज्यादा नहीं है। साथ ही ये कई दिनों तक चलता है, इसलिए यहां आने वाला हर शख्स इस लड्डू को यहां से खरीदकर जरूर ले जाता है। 4. इस लड्डू को बनाने के लिए भी एक खास जगह है, जहां हर शख्स के जाने की इजाजत नहीं हैं। इस लड्डू को बनाने के लिए रसोईया भी खास है। एक दिन में करीब 3 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं और भगवान को प्रसाद में रोज ताजे लड्डू ही चढ़ाए जाते हैं।

5. यहां मिलने वाले लड्डू का जो स्वाद है हो आपको दुनिया में कही भी नहीं मिलेगा।

🙏🏻🙏🏻🙏🏻

31/03/2020

इतनी मेहरबानी मेरे ईश्‍वर बनाये रखना, जो रास्ता सही हो उसी पर चलाये रखना।
ना दुखे दिल किसी का मेरे शब्दो से, इतना रहम तू मेरे भगवान मुझपे बनाये रखना!!

🙏सुप्रभात Good Morning 🌸आपका दिन शुभ हो🌸

18/03/2020

*बदला लेने की नहीं,*
*बदलाव लाने की,सोच रखिये!*

*दो पल के गुस्से से*
*प्यार भरा रिश्ता बिखर जाता हैं!*

*होश जब तक आता हैं*
*तब तक वक्त निकल जाता है*

🌻🌸 *ll सुप्रभात ll 🌸🌻*.

Best Astrologer in Pune | Best Astrologer in Mumbai | Astrologer in Delhi 19/06/2019

🌺 *GM have a blessed day* *ahead ,God Blessed You :)* *Tkcr Be Happy Always :)*

"परिवार"का हाथ पकड़ कर चलिये; लोगों के "पैर" पकड़ने की नौबत नहीं आएगी;

परिवार के प्रति जब तक मन में"खोंट" और दिल में "पाप" है; तब तक सारे"मंत्र" और "जाप" बेकार है;।

जीवन एक यात्रा है; रो कर जीने से बहुत लम्बी लगेगी; और हंस कर जीने पर कब पूरी हो जाएगी; पता भी नहीं चलेगा;।

"ईश्वर" से शिकायत क्यों है; ईश्वर ने पेट भरने की जिम्मेदारी ली है; पेटियां भरने की नहीं;

ह्रदय कैसे चल रहा है;, यह डाक्टर बता देंगे; परन्तु ह्रदय में क्या चल रहा है; यह तो स्वयं को ही देखना है;...!!

*😊 स्वस्थ, खुश एवं व्यस्त रहो ।।😊*

🙏🏻शुभ प्रभात🙏🏻
*आपका दिन शुभ हो...*
*ऐसी मंगलभावनाओं सहित सादर
🌞 *सुप्रभात* 🌞
🌹G⭕⭕D🌹
🌹〽⭕➰N❗NG🌹
🙏 *Astro Saaraansh* 🙏

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13/09/2018

*🎪🚩गुरुकृपाहि केवलम🚩🎪*
*🎪🚩ॐ गं गणपतये नमः🚩🎪*
*🎪🚩हिन्दू पंचांग🚩🎪*

⛅ *दिनांक 13 सितम्बर 2018*
⛅ *दिन - गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2075 (गुजरात. 2074)*
⛅ *शक संवत -1940*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - शरद*
⛅ *मास - भाद्रपद*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - चतुर्थी दोपहर 02:51 तक तत्पश्चात पंचमी*
⛅ *नक्षत्र - स्वाति रात्रि 12:54 तक तत्पश्चात विशाखा*
⛅ *योग - इन्द्र रात्रि 12:38 तक तत्पश्चात वैधृति*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 01:54 से शाम 03:25 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:26*
⛅ *सूर्यास्त - 18:42*
⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - विनायक-गणेश-कलंक-चतुर्थी, चन्द्रदर्शन निषिद्व (चन्द्रास्त रात्रि 09:42), गणेश महोत्सव प्रारंभ, संवत्सरी महापर्व - चतुर्थी पक्ष (जैन)*
💥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🎪🚩हिन्दू पंचांग🚩🎪*

🌷 *गणेश चतुर्थी* 🌷
🙏🏻 *(13 सितम्बर गुरुवार) भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीगणेश का प्राकट्य माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत व पूजन किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो भगवान श्रीगणेश अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। अगर आप भी इस विशेष अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं तो ये उपाय विधि-विधान पूर्वक करें-*
➡ *जो चाहिए वो मिलेगा गणेशजी के इन उपायों में से , कोई भी 1 करें*
🙏🏻 *1. शास्त्रों में भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करने का विधान बताया गया है। गणेश चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करने से विशेष लाभ होता है। इस दिन आप शुद्ध पानी से श्रीगणेश का अभिषेक करें। साथ में गणपति अथर्व शीर्ष का पाठ भी करें। बाद में मावे के लड्डुओं का भोग लगाकर भक्तों में बांट दें।*
🙏🏻 *2. ज्योति शास्त्र के अनुसार, गणेश यंत्र बहुत ही चमत्कारी यंत्र है। गणेश चतुर्थी पर घर में इसकी स्थापना करें। इस यंत्र की स्थापना व पूजन से बहुत लाभ होता है। इस यंत्र के घर में रहने से किसी भी प्रकार की बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं करती।*
🙏🏻 *3. अगर आपके जीवन में बहुत परेशानियां हैं, तो आप गणेश चतुर्थी को हाथी को हरा चारा खिलाएं और गणेश मंदिर जाकर अपनी परेशानियों का निदान करने के लिए प्रार्थना करें। इससे आपके जीवन की परेशानियां कुछ ही दिनों में दूर हो सकती हैं।*
🙏🏻 *4. अगर आपको धन की इच्छा है, तो इसके लिए आप गणेश चतुर्थी को सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान श्रीगणेश को शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो सकता है।*
🙏🏻 *5. गणेश चतुर्थी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद समीप स्थित किसी गणेश मंदिर जाएं और भगवान श्रीगणेश को 21 गुड़ की गोलियां बनाकर दूर्वा के साथ चढ़ाएं। इस उपाय से भगवान आपकी हर मनोकामना पूरी कर सकते है।*
🙏🏻 *6. गणेश चतुर्थी पर पीले रंग की गणेश प्रतिमा अपने घर में स्थापित कर पूजा करें। पूजन में श्रीगणेश को हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं। इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जाप करके चढ़ाएं। यह उपाय लगातार 10 दिन तक करने से प्रमोशन होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।*
🙏🏻 *7. गणेश चतुर्थी पर किसी गणेश मंदिर जाएं और दर्शन करने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार गरीबों को दान करें। कपड़े, भोजन, फल, अनाज आदि दान कर सकते हैं। दान के बाद दक्षिणा यानी कुछ रुपए भी दें। दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान श्रीगणेश भी अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।*
🙏🏻 *8. यदि बिटिया का विवाह नहीं हो पा रहा है, तो गणेश चतुर्थी पर विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाएं व व्रत रखें। शीघ्र ही उसके विवाह के योग बन सकते हैं।*
🙏🏻 *9. गणेश चतुर्थी को दूर्वा (एक प्रकार की घास) के गणेश बनाकर उनकी पूजा करें। मोदक, गुड़, फल, मावा-मिष्ठान आदि अर्पण करें। ऐसा करने से भगवान गणेश सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।*
🙏🏻 *10. यदि लड़के के विवाह में परेशानियां आ रही हैं, तो वह गणेश चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। इससे उसके विवाह के योग बन सकते हैं।*
🙏🏻 *11. गणेश चतुर्थी पर व्रत रखें। शाम के समय घर में ही गणपति अर्थवशीर्ष का पाठ करें। इसके बाद भगवान श्रीगणेश को तिल से बने लड्डुओं का भोग लगाएं। इसी प्रसाद से अपना व्रत खोलें और भगवान श्रीगणेश से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।*

*🎪🚩हिन्दू पंचांग🚩🎪*

🌷 *गणेश चतुर्थी* 🌷
🙏🏻 *गणेशजी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न में हुआ था। उस समय सोमवार का दिन, स्वाति नक्षत्र, सिंह लग्न और अभिजीत मुहूर्त था। गणेशजी के जन्म के समय सभी शुभग्रह कुंडली में पंचग्रही योग बनाए हुए थे।*
👉🏻 *इस वर्ष यह त्यौहार 13 सितम्बर 2018, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। पूरे दिन स्वाति नक्षत्र रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से 12:41 तक रहेगा।*
👉🏻 *मध्याह्न गणेश पूजा का समय = 11:02 से 13:29*
➡ *वैसे तो भविष्य पुराण में सुमन्तु मुनि का कथन है*
*“न तिथिर्न च नक्षत्रं नोपवासो विधीयते । यथेष्टं चेष्टतः सिद्धिः सदा भवति कामिका।।”*
🙏🏻 *“भगवान गणेशजी की आराधना में किसी तिथि, नक्षत्र या उपवासादि की अपेक्षा नहीं होती। जिस किसी भी दिन श्रद्धा-भक्तिपूर्वक भगवान गणेशजी की पूजा की जाय तो वह अभीष्ट फलों को देनेवाली होती है।” फिर भी गणेशजी के जन्मदिन पर की जानेवाली उनकी पूजा का विशेष महत्व है। तभी तो भविष्यपुराण में ही सुमन्तु मुनि फिर से कहते हैं की*
*“शुक्लपक्षे चतुर्थ्यां तु विधिनानेन पूजयेत्। तस्य सिध्यति निर्विघ्नं सर्वकर्म न संशयः ।।*
*एकदन्ते जगन्नाथे गणेशे तुष्टिमागते। पितृदेवमनुष्याद्याः सर्वे तुष्यन्ति भारत ।।”*
🙏🏻 *“शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को उपवास कर जो भगवान गणेशजी का पूजन करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं और सभी अनिष्ट दूर हो जाते हैं। श्रीगणेशजी के अनुकूल होने से सभी जगत अनुकूल हो जाता है। जिस पर एकदन्त भगवान गणपति संतुष्ट होते हैं, उसपर देवता, पितर, मनुष्य आदि सभी प्रसन्न रहते हैं।”*
➡ *अग्निपुराण के अनुसार भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को व्रत करनेवाला शिवलोक को प्राप्त करता है |*
➡ *भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व के अनुसार*
*मासि भाद्रपदे शुक्ला शिवा लोकेषु पूजिता । ।*
*तस्यां स्नानं तथा दानमुपवासो जपस्तथा । क्रियमाणं शतगुणं प्रसादाद्दन्तिनो नृप । ।*
*गुडलवणघृतानां तु दानं शुभकरं स्मृतम् । गुडापूपैस्तथा वीर पुण्यं ब्राह्मणभोजनम् । ।*
*यास्तस्यां नरशार्दूल पूजयन्ति सदा स्त्रियः । गुडलवणपूपैश्च श्वश्रूं श्वसुरमेव च । ।*
*ताः सर्वाः सुभगाः स्युर्वे१ विघ्रेशस्यानुमोदनात् । कन्यका तु विशेषेण विधिनानेन पूजयेत् । ।*
🙏🏻 *भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है, इस दिन जो स्नान, दान उपवास, जप आदि सत्कर्म किया जाता है, वह गणपति के प्रसाद से सौ गुना हो जाता है | इस चतुर्थी को गुड़, लवण और घृत का दान करना चाहिये, यह शुभ माना गया है और गुड़ के अपूपों (मालपुआ) से ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये तथा उनकी पूजा करनी चाहिये | इस दिन जो स्त्री अपने सास और ससुर को गुड़ के पुए तथा नमकीन पुए खिलाती है वह गणपति के अनुग्रह से सौभाग्यवती होती है | पति की कामना करनेवाली कन्या विशेषरूप से इस चतुर्थी का व्रत करे और गणेशजी की पूजा करें |*
➡ *गरुड़पुराण के अनुसार “सोमवारे चतुर्थ्यां च समुपोष्यार्चयेद्गणम्। जपञ्जुह्वत्स्मरन्विद्या स्वर्गं निर्वाणतां व्रजेत् ॥” सोमवार, चतुर्थी तिथिको उपवास रखकर व्रती को विधि – विधान से गणपतिदेव की पूजा कर उनका जप, हवन और स्मरण करना चाहिये | इस व्रत को करने से उसे विद्या, स्वर्ग तथा मोक्ष प्राप्त होता है |*
➡ *शिवपुराण के अनुसार “वर्षभोगप्रदा ज्ञेया कृता वै सिंहभाद्रके” जब सूर्य सिंह राशिपर स्थित हो, उस समय भाद्रपदमास की चतुर्थी को की हुई गणेशजी की पूजा एक वर्ष तक मनोवांछित भोग प्रदान करती है*
➡ *अग्निपुराण अध्याय 301 के अनुसार*
*पूजयेत्तं चतुर्थ्याञ्च विशेषेनाथ नित्यशः ।।*
*श्वेतार्कमूलेन कृतं सर्व्वाप्तिः स्यात्तिलैर्घृतैः ।*
*तण्डुलैर्दधिमध्वाज्यैः सौभाग्यं वश्यता भवेत् ।।*
🙏🏻 *गणेशजी की नित्य पूजा करें, किंतु चतुर्थी को विशेष रूप से पूजा का आयोजन करें। सफ़ेद आक की जड़ से उनकी प्रतिमा बनाकर पूजा करें। उनके लिए तिल की आहुति देने पर सम्पूर्ण मनोरथों की प्राप्ति होती है। यदि दही, मधु और घी से मिले हुए चावल से आहुति दी जाय तो सौभाग्य की सिद्धि एवंय शिवत्व की प्राप्ति होती है।*
🙏🏻 *गणेश जी को मोदक (लड्डू), दूर्वा घास तथा लाल रंग के पुष्प अति प्रिय हैं । गणेशजी अथर्वशीर्ष में कहा गया है "यो दूर्वांकुरैंर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति" अर्थात जो दूर्वांकुर के द्वारा भगवान गणपति का पूजन करता है वह कुबेर के समान हो जाता है। "यो मोदकसहस्रेण यजति स वाञ्छित फलमवाप्रोति" अर्थात जो सहस्र (हजार) लड्डुओं (मोदकों) द्वारा पूजन करता है, वह वांछित फल को प्राप्त करता है।*
🙏🏻 *गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को 21 लड्डू, 21 दूर्वा तथा 21 लाल पुष्प (अगर संभव हो तो गुड़हल) अर्पित करें।*
*🎪🚩हिन्दू पंचांग🚩🎪*
*श्री गुर पद नख मनि गन जोती*।
*सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती*॥
*दलन मोह तम सो सप्रकासू*।
*बड़े भाग उर आवइ जासू*॥
🎪🚩🌹🌾💔💗💖❣💕🌷🌻🍀🌺🌸🍁💐❣💖💗💔🌾🌹🚩🎪

dhyan kaise lagaye 01/03/2017

जानिए क्यों और कैसे केवल 20 मिनट का ध्यान या Meditation हमारी जिंदगी बदल सकता है|

जीवन (Life) के उद्देश्य को प्राप्त करने और तनावमुक्त रहने का सबसे सरल एंव उपयोगी तरीका ध्यान या Meditation ही है|

https://youtu.be/CqPc_mwtl4M

dhyan kaise lagaye ध्यान कैसे लगाये , Meditation in Hindi-मेडिटेशन: ध्यान कैसे करें या ध्या‍न से कैसे स्वयं को तनावमुक्त कैसे करें । मेडिटेशन से दर्द, बांझपान, सांसों की समस्या...

Photos 14/02/2017

VALANTINE -DAY -SPL-
अधिकांश यह देखने में आता है कि वृषभ लग्न, कर्क लग्न, तुला लग्न, मेष लग्न, वृश्चिक लग्न तथा कुंभ लग्न की पत्रिका में प्रेम विवाह का ‍योग बनता है। । विवाह और दाम्पत्य का संबंध सीधा सप्तम भाव से होता है परंतु इन लग्नों में प्रेम विवाह के लिए पंचम भाव और सप्तम भाव का संबंध होता है।
अर्थात पंचम भाव का स्वामी और सप्तम भाव का स्वामी एक साथ बैठा हो या दृष्टि संबंध हो रहा हो तो प्रेम विवाह निश्चित होता है। पंचम भाव प्रेम भावना का स्थान है तथा सप्तम भाव विवाह का स्थान होता है। प्रेम विवाह के लिए मंगल-शनि, मंगल-शुक्र, चंद्र-शुक्र की युक्ति भी इस योग को बढ़ावा देती है और योग बनाती है।
यदि प्रेम विवाह हो जाता है तो उसकी सफलता पंचमेश, सप्तमेश और लग्नेश, द्वादेश गृह के संबंधों पर निर्भर करती है। प्रेम विवाह के लिए तीसरे भाव का स्वामी का उच्च या बलवान होना बहुत ही आवश्यक है। यही जातक को हिम्मत प्रदान करता है/

Photos 30/11/2016

🌺Good Morning🌺

🙏�जानें, दुर्भाग्य दूर करने के आसान उपाय जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे🙏�

रात के समय शिवलिंग के सामने दीपक जलने से कभी धन की कमी नहीं होती और उनके घर में लक्ष्‍मी का वास भी बना रहता है

घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो सकारात्मक फल प्राप्त किए जा सकते हैं। यहां जानिए रोज कौन से काम करने घर में देवी लक्ष्मी के साथ ही सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

जब आपका भाग्य आपका साथ नहीं देता तो आप अपनी किस्मत को दोष देना शुरू कर देते है या ये सोचते है कुंडली में कोई दोष है या अापका भाग्य हीं ऐसा है। ये उपाय आपको बताने वाले हैं दुर्भाग्य को दूर करने के आसान उपाय जिससे धन के कार्यों में सफलता मिल सकती है। आपको जानिए ये उपाय कौन-कौन से हैं…

शनिवार की रात हनुमान जी या शिवलिंग के सामने तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय बहुत असान और बहुत लाभदायक भी होता है। रात के समय शिवलिंग के सामने दीपक जलने से कभी धन की कमी नहीं होती और उनके घर में लक्ष्मी का वास भी बना रहता है।

दुर्भाग्य दूर भागने का ये भी सरल व अदभुत उपाय माना गया है , एक बर्तन में थोड़ा सा तेल ले और उसमे अपना चेहरा देखें , ये काम करने के बाद उस तेल को शनिदेव को चढ़ा देना या किसी मंदिर में दान करें। ये काम केवल शनिवार के दिन करे।

अगर करना चाहते है दुर्भाग्य दूर तो करे हनुमान जी को प्रसन्न और अपनाये ये उपाय। बजरंगबली को सिन्दूर व चमेली का तेल के साथ पान के पत्ते चढ़ाये। या या हनुमान चालीस का पाठ करें।

दुर्भाग्य को दूर भगाने के लिए करना होता है शनि देव को खुश इस प्रकार शनिवार के दिन शिवलिंग पर काले तिल तथा जल चढ़ाये। यह उपाय करने से बीमारियों में भी रहत मिलती है।

सुबह जल्दी उठकर इस मंत्र का जाप करें। मंत्र : कराग्रे वास्ते लक्ष्मि, करमध्ये सरस्वती, करमूले तू गोविन्द। प्रभाते कर दर्शनम। और इसके साथ साथ अपनी हथेलियों को देखे और उसके बाद अपनी हथेलियों को अपने चेहरे पर फेरे ये उपाय प्रतिदिन करे।

अगर आप भी है कुंडली के दोषों से परेशन तो करें ये एक सरल उपाय;

हर शनिवार और अमावस्या पर पीपल की सात परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय अपने इष्टदेवी-देवताओं के नामों का या मन्त्रों का जप करें। और कुंडली के दोषों से मुक्ति पाए।

अगर नहीं हो रहा कुंडली के दोषों का निवारण तो शनि दोष और काल सर्प दोष के लिए यह उपाय रामबाण साबित हो सकता है पीपल के पेड़ पर तांबे के बर्तन से जल चढ़ाये। हर शनिवार को यह उपाय करना चाहिए इस उपाय से कुंडली के कई दोषों का निवारण हो जाता है।

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Photos 29/11/2016

🙏�🌺आज करें अमावस्या के ये खास उपाय, होगी हर मनोकामना पूरी🙏�🌺

अमावस्या पर स्नान, दान, श्राद्ध व व्रत का विशेष महत्व हमारे धर्म ग्रंथों में लिखा है।

1 अमावस्या पर भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं।
मछलियों को खिला दें।

2 अमावस्या पर चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का प्रायश्चित होगा और अच्छे कामों के फल मिलना शुरू होंगे

3 किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाएं। इसके बाद मंदिर में ही बैठकर रुद्राक्ष की माला से ऊं नमः शिवायः मंत्र का पाठ करें। ये उपाय करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

4 अमावस्या पर शाम को पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा पीपल के नीचे दीपक जलाएं।

5 अमावस्या पर सफेद फूल, बताशे, कच्चा दूध, सफेद कपड़ा, चावल व सफेद मिठाई बहते हुए जल में प्रवाहित करें और कालसर्प दोष की शांति के लिए शेषनाग से प्रार्थना करें।

🌺पंडित सारांश बाबा 🌺
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Photos 28/11/2016

🌺good Morning 🌹

💕जेब में ना रखें ये वस्तुएं इसका बुरा प्रभाव वास्तु व आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालती है💕

हम अपनी पैंट या जीन्स की पाकेट में कई चीजें रखते हैं.... छुट्टे पैसे, पेन, रुमाल, एटीएम की पर्चियां, घर की चाबी, इत्यादि। वास्तु शास्त्र के हिसाब से ऐसी कई बेकार की चीजों से हमारी आर्थिक स्थिति पर इसका प्रभाव पडता है। कई बार जेब में जरूरी सामान रखकर हम भूल भी जाते हैं, जो कपड़े धोते समय मशीन में साथ ही धुल जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र, जिसे ज्योतिष शास्त्र की बेहद खास विधा माना गया है, जो हमारे जीवन को सुख से भरने के काफी काम आती है, उसके अनुसार ऐसी कई वस्तुएं हैं जिन्हें हमें अपनी जेब में भूल से भी नहीं रखना चाहिए।
वास्तु शास्त्र सकारात्मक एवं नकारात्मक ऊर्जा के बारे में बताता है। तो जाहिर है जेब में रखने वाली ये वस्तुएं भी इन्हीं दो सिद्धातों से जुड़ी हुई हैं। तो चलिए जानते हैं, ऐसी कौन सी वस्तुएं हैं जिन्हें हमें पाकेट में रखने से बचना चाहिए।
पुराने बिल
किसी भी चीज का बिल... फिर चाहे वो खाने-पीने पर खर्च किया हुआ हो या फिर आपके घर-ऑफिस के बिजली का बिल हो। इसे अपनी जेब में रखकर ना घूमें। ये बिल निगेटिव एनर्जी को न्यौता देता है और आपके आर्थिक जीवन के ऊपर संकट पैदा करता है।

आपत्तिजनक तस्वीरें
ऐसी तस्वीरें जिनमें गुस्सा, ईर्ष्या, विरोध की भावना हो... इन्हें जेब में ना रखें। इन्हें घर के भीतर भी ना लाएं। ये हमारे आसपास बुरी ऊर्जा को विकसित करती हैं।

पर्स
आप अपनी जेब में पर्स तो जरूर रखें, लेकिन यह पर्स बिल्कुल सही होना चाहिए। पर्स कहीं से फटा हुआ या फिर खराब हालात में ना हो। क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार फटा हुआ पर्स आपकी आर्थिक स्थिति पर अटैक करता है।

नोट
जेब में यदि नोट रख रहे हैं, तो उसे सही तरीके से रखें। नोट को बुरे तरीके से मोड़कर रखना वास्तु शास्त्र के अनुसार सही नहीं है।

खाने-पीने का सामान
हमारी जेब में अक्सर टॉफी या चिप्स के पैकेट होते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार खाने-पीने का सामान जेब में नहीं रखना चाहिए। यह बुरा प्रभाव डालता है।

दवाईयां
दवाओं से निकलने वाली ऊर्जा व्यक्ति के ऊपर निगेटिव प्रभाव करती है, इसलिए जेब में इन्हें रखने से बचें।

नुकीली वस्तुएं
पिन, चाकू, सुई... ऐसी कोई भी वस्तु जेब में ना रखें। वास्तु शास्त्र के अनुसार नुकीली वस्तुओं को घर में भी रखना अशुभ होता है। लेकिन रसोई में इन्हें रखने से बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। क्योंकि घर का वह कोना ‘अग्नि’ तत्व वाला होता है।

धार्मिक वस्तुएं
ऐसी चीजें जिनका धार्मिक महत्व हो, जैसे कि मौलि, कलावा, सिंदूर, इत्यादि को जेब में रखकर ना घूमें। यदि ये इस्तेमाल करने के लिए ना हों, तो इन्हें घर के मंदिर में या फिर किसी भी मंदिर में जाकर रख दें।

अब जानिए क्या रख सकते हैं.....
उपरोक्त हमने आपको कुछ ऐसी वस्तुओं के बारे में बताया जिन्हें जेब में रखना अशुभ है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसी कौन सी वस्तुएं हैं जिन्हें जेब में

रखना लाभदायक सिद्ध हो सकता है
उपरोक्त हमने आपको कुछ ऐसी वस्तुओं के बारे में बताया जिन्हें जेब में रखना अशुभ है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसी कौन सी वस्तुएं हैं जिन्हें जेब में रखना लाभदायक सिद्ध हो सकता है

तांबे-चांदी की चीजें
तांबे-चांदी से बने सिक्के या फिर देवी-देवता के प्रतीकात्मक स्वरूप को जेब में रखना शुभ माना गया है।

पीपल के पत्ते
वास्तु शास्त्र के अनुसार पीपल के पत्ते कई प्रकार के बाधाओं को नष्ट कर देते हैं।

सीप
यदि आपको समुद्र के भूभाग पर मिलने वाला असली सीप कहीं से मिल जाए, तो उसे अपनी जेब में अवश्य रखें। जब भी कोई शुभ कार्य करने निकलें, तो यह सीप आपको सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगी।

गोमती चक्र
गोमती चक्र की मदद से कई शास्त्रीय उपाय किए जाते हैं, जो धन का आगमन कराते हैं। किसी शुभ दिन पर गोमती चक्र अपनी जेब में रखेंगे, तो यह आय में वृद्धि का कारक बनेगा।

चावल
चावल को भी वास्तु शास्त्र की दृष्टि से शुभ माना गया है। इसलिए अगर आप किसी आवश्यक कार्य से घर से निकले हों और चाहते हैं कि आप सफल होकर ही लौटें, तो जाने से पहले जेब में कुछ चावल रख लीजिए।

श्रीयंत्र
गुरु यंत्र, शुक्र यंत्र.... इनके बारे में तो सुना ही होगा आपने। वास्तु शास्त्र के अनुसार जेब में श्रीयंत्र को रखने से हर मनोकामना की पूर्ति होती है।
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