29/04/2024
"हैदराबाद में मेरा कोचिंग सेंटर घर से बहुत दूर था और मुझे सुबह छह बजे से पहले बस पकड़नी होती थी। आज मैं उन सभी हाथों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जो मेरे सहारे के लिए आगे बढ़े, जिन्होंने मुझे सड़क पार करने में मदद की। मेरी सफलता में उन सबका हाथ है।"
- CA राजशेखर रेड्डी
आंध्र प्रदेश के रहने वाले जे. राजशेखर रेड्डी भारत के ऐसे पहले CA हैं, जो बिलकुल भी देख नहीं सकते।
राजशेखर जन्म से दृष्टिहीन नहीं थे; सिर में हुए एक ट्यूमर से ऑप्टिकल नर्व डैमेज के कारण 11 वर्ष की आयु में उनकी आंखों की रौशनी चली गई थी।
गुंटूर में रहने वाले राजशेखर उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, "जब मैं कुछ भी देखने के काबिल नहीं रहा तो मुझे लगा कि अब मेरे जीवन का अंत हो गया है। मैंने कभी आत्महत्या की बात तो नहीं सोची लेकिन मेरा जीवन निराशा में डूब गया था।
मैं एक साल तक घर में किसी पत्थर की तरह पड़ा रहा। मेरे माता-पिता मुझे देख कर रोते थे और कहते थे कि काश वे मेरे लिए कुछ कर सकते।"
यही आंसू राजशेखर के लिए प्रेरणास्रोत बन गए।
इसके बाद हैदराबाद का देवनार फाउंडेशन, जो देश में दृष्टिहीन बच्चों का पहला इंग्लिश मीडियम स्कूल था, राजशेखर का नया घर बन गया।
देवनार फाउंडेशन के संस्थापक और आँखों के मशहूर डॉक्टर पद्मश्री साईं बाबा गौड़ कहते हैं. "जब राजशेखर रेड्डी हमारे पास आया था तो 11 साल का बच्चा था। लेकिन उसकी योग्यता, कड़ी मेहनत और संकल्प को देखकर हर कोई प्रभावित था।"
दसवीं कक्षा के बाद जब राजशेखर ने एक चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने की इच्छा जताई तो सभी को यह असंभव लगा लेकिन परिवार और करीबियों ने उनका समर्थन किया। उन्होंने ऑडियो बुक्स की मदद से अपनी तैयारी की।
राजशेखर का कहना है, "मैं दुनिया को बताना चाहता हूँ कि दृष्टिहीन लोग न केवल शिक्षा में सफल हो सकते हैं, बल्कि काम के मैदान में भी वह दूसरों से ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।"
[J Rajasekhar Reddy, Andhra Pradesh, India's First Visually Challenged CA, Chartered Accountant, Inspiration]