18/01/2021
निरंतर ध्यान करने से मनुष्य में सात्विक तत्वों की वृद्धि होने लगती है । परिणामस्वरूप काम, क्रोध, लोभ, घृणा, हिंसा, द्वेष, ईर्ष्या आदि के कुविचार निरंतर दूर होते रहते है । इससे आपका मन शांत और प्रसन्नचित बना रहता है ।ध्यान से संकल्प शक्ति मजबूत होती है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है ध्यान, मस्तिष्क की तरंगों के स्वरुप को अल्फा स्तर पर ले आता है जिससे चिकित्सा की गति बढ़ जाती है। मस्तिष्क पहले से अधिक सुन्दर, नवीन और कोमल हो जाता है। ध्यान मस्तिष्क के आतंरिक रूप को स्वच्छ व पोषण प्रदान करता है। जब भी आप व्यग्र, अस्थिर और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान आपको शांत करता है। ध्यान के सतत अभ्यास से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं
व्यग्रता का कम होना
भावनात्मक स्थिरता में सुधा
र रचनात्मकता में वृद्धि
प्रसन्नता में संवृद्धि
सहज बोध का विकसित होना
मानसिक शांति एवं स्पष्टता
परेशानियों का छोटा होना
ध्यान मस्तिष्क को केन्द्रित करते हुए कुशाग्र बनाता है तथा विश्राम प्रदान करते हुए विस्तारित करता है। बिना विस्तारित हुए एक कुशाग्र बुद्धि क्रोध, तनाव व निराशा का कारण बनती है। एक विस्तारित चेतना बिना कुशाग्रता के अकर्मण्य/ अविकसित अवस्था की ओर बढ़ती है। कुशाग्र बुद्धि व विस्तारित चेतना का समन्वय पूर्णता लाता है। ध्यान आपको जागृत करता है कि आपकी आतंरिक मनोवृत्ति ही प्रसन्नता का निर्धारण करती है।
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Paramahansa Narendra - Human body is a temple in which resides the Supreme Divine Light. God can be known by the medium of human body only.