07/10/2015
प्रथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है ये वेदों ने बताया,
वातावरण को शुद्ध करने का एक तरीका यज्ञ है ये
वेदों ने बताया, सुश्रुत संहिता में शल्य चिकित्सा के
तरीके बताये गये हैं, आर्यभट्ट ने 0 की खोज की, पाई
की- बीजगणित के सिद्धांत वाग्भट्ट ने दिये,
बीमारियों के ईलाज के लाखों फार्मूले बहुत से श्रषि
मुनियों ने दिये, पंचांग की सटीक गणित विद्वानों ने
दी, ग्रहों की गति के फार्मूले दिये, कीमियागिरि
से लोहे का सोने में बदलना यानि रसायन शास्त्र की
खोजे की, भवन निर्माण कला मोहनजोदड़ो हड़प्पा
आदि में के तहत सिविल इंजीनियरिंग दी, प्रकर्ति और
आत्मा परमात्मा की खोज की कोशिशें की गई हैं,
इसके अलावा भी हमारे ग्रंथों में विज्ञान के हजारों
सूत्र मौजूद हैं जिनका उपयोग आज भी किया जाता
है... और साथ ही खोजों को लगातार जारी रखने
की अनुमति भी दी गई हैं यानि ये ग्रंथ दिमाग को
बंद करने की सलाह नहीं देते.....
अब सवाल है कि कुरान में, बाईबिल में, सत्यार्थ
प्रकाश में, गुरू ग्रंथ में आदि अन्य ग्रंथों में मानव
कल्याण की ऐसी कोई वैज्ञानिक व्याख्या है जो
सार्वजन हितकारी हो... क्या इन ग्रंथों में कोई
विद्वान पाया जाता है जिसने कोई वैज्ञानिक
विवेचना की हो....
साथ ही बता दूं कि वैज्ञानिकों का कोई धर्म
जाति नहीं होती वो एक खोज है मानव जाति के
कल्याण के लिये सो इन्हें किसी धर्म में नहीं बांधा
जा सकता सो वेद शास्त्र पुराण आदि किसी धर्म के
हिस्से नहीं है... आपको ज्ञान चाहिए तो भौतिक
विज्ञान पढ़ो, रसायन शास्त्र, गणित, वेद, गीता,
आयुर्वेद पढ़ो... ये किसी धर्म की बपौती नहीं है, ये
कोई हिन्दू नाम के किसी धर्म के ग्रंथ नहीं हैं.. ये
मानव धर्म है सबके कल्याण का एक रास्ता है.... साथ
ही बता दूं कि यही हिन्दुत्व है यही हिंदू धर्म है जो
सबके लिये है, इसे कोई सीमा में बांधता है तो वह
अज्ञानी है....
मुझे गर्व इस बात का है कि ये ज्ञान का महासागर
मेरे हिंदुस्तान की धरती से निकला है और आज भी
आवश्यकता है अंगर्ेजीवाद से निकलकर इन ग्रंथों के
दोहन की...