04/06/2026
आज गाड़ियों के इस दौर में स्कूल के वो दिन बहुत याद आते हैं। हमारे लिए स्कूल सिर्फ स्कूल भवन तक सीमित नहीं था, बल्कि घर से निकलते ही उस पगडंडी से शुरू हो जाता था जो घर की पहली सीढ़ी से स्कूल के गेट तक जाती थी।
कंधों पर बस्ता, दोस्तों की टोली, रास्ते भर की बेफिक्र गपशप! और घर लौटते वक्त गर्मियों में चुपके से गदेरे (गधेरे) में नहाना... वो सुकून आज दुनिया की किसी भी ऐश-ओ-आराम में नहीं मिलता।
सचमुच, हम जिंदगी की दौड़ में चाहे जितने आगे निकल गए हों, लेकिन दिल आज भी स्कूल की उन्हीं पगडंडियों पर घूम रहा है।
#पहाड़ी_बचपन #यादों_का_संगम