VCSG UUHF Bharsar

VCSG UUHF Bharsar of Uttarakhand, India)

Veer Chandra Singh Garhwali Uttarakhand University of Horticulture and Forestry (VCSG UUHF), Bharsar, Pauri Garhwal-246123, Uttarakhand, India (A State Agricultural University, Govt.

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के रानीचौरी परिसर में "नशा मुक्त युवा – विक...
26/08/2026

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के रानीचौरी परिसर में "नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान" के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई तथा उन्हें नशा मुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई गई।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों के प्रति जागरूक बनाना तथा एक स्वस्थ, नशा मुक्त जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था।
इस अवसर पर नशा विरोधी अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. तौफीक अहमद ने अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने समुदाय में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। डॉ. लक्ष्मी रावत ने भी विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी। कार्यक्रम में नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भागीदारी के महत्व पर बल दिया गया। इस दौरान विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों के साथ संवादात्मक चर्चा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए नशीले पदार्थों के सेवन, उसके कारणों और उपलब्ध सहायता प्रणालियों से संबंधित प्रश्न और चिंताएं उठाईं। इस कार्यक्रम में संकाय सदस्य डॉ. सी.एस. धनाई, डॉ. श्वेता कुकरेती, डॉ. बिजेंद्र लाल, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अजय पालीवाल, डॉ. संजीव रवि तथा डॉ. कीर्ति कुमारी उपस्थित रहे।
Indian Council of Agricultural Research Agriculture Department, Government Of Uttarakhand Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Bhagwati Bhatt Sarswati P Sati Ganesh Joshi Subodh Uniyal Shivraj Singh Chouhan Pushkar Singh Dhami Lt Gen Gurmit Singh Lok Bhawan - Raj Bhawan, Uttarakhand PMO India

रानीचौरी परिसर से किसानों तक उपलब्ध कराया जा रहा जैवनियंत्रण का वैज्ञानिक समाधान -पर्वतीय कृषि में फसल रोगों के सुरक्षित...
25/08/2026

रानीचौरी परिसर से किसानों तक उपलब्ध कराया जा रहा जैवनियंत्रण का वैज्ञानिक समाधान -
पर्वतीय कृषि में फसल रोगों के सुरक्षित, प्रभावी एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के पर्वतीय कृषि महाविद्यालय, रानीचौरी परिसर के पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से जैव-नियंत्रण के क्षेत्र में निरंतर वैज्ञानिक कार्य किया जा रहा है। विभाग की बायोकण्ट्रोल प्रयोगशाला में विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी रावत द्वारा लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर आधारित बायोएजेंट फॉर्मूलेशन्स तैयार कर किसानों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रयोगशाला में मुख्य रूप से ट्राईकोडर्मा, स्युडोमोनास, बैसीलस के टैल्क बेस्ड एवं आयल बेस्ड बायो फॉर्मूलेशन्स तैयार किए जा रहे हैं। ये लाभकारी सूक्ष्मजीव रोगजनक सूक्ष्मजीवों के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा, प्रतिजैविक पदार्थों का उत्पादन, परजीवीकरण तथा पौधों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने जैसे विभिन्न जैव-नियंत्रण तंत्रों के माध्यम से कार्य करते हैं। इनके उचित उपयोग से मृदा एवं बीजजनित रोगों के प्रबंधन के साथ-साथ पौधों के स्वास्थ्य एवं वृद्धि में भी लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
इस कार्य की विशेष उपलब्धि यह है कि प्रयोगशाला में तैयार जैवएजेंटों को “लेबोरेटरी टू लैंड की अवधारणा के तहत सीधे किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। अब तक उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, चमोली एवं पौड़ी गढ़वाल सहित उत्तराखंड के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों के अनेक किसान इन बायोएजेंट्स का उपयोग कर लाभान्वित हो चुके हैं। किसानों को उनकी फसल एवं रोग की समस्या के अनुरूप उपयुक्त बायोएजेंट के चयन तथा उसके वैज्ञानिक उपयोग के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है।
जैव-नियंत्रण तकनीक रासायनिक कृषि निविष्टियों पर निर्भरता कम करने, मृदा स्वास्थ्य एवं लाभकारी सूक्ष्मजीवों के संरक्षण तथा टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट कृषि परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक रूप से तैयार जैव-नियंत्रण समाधान किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन रहे हैं।
पादप रोग विज्ञान विभाग, पर्वतीय कृषि महाविद्यालय, रानीचौरी द्वारा अनुसंधान को किसानों की वास्तविक समस्याओं से जोड़ते हुए जैव-नियंत्रण तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। किसान एवं बागवान बायोएजेंट फॉर्मूलेशन एवं फसल रोग प्रबंधन संबंधी वैज्ञानिक मार्गदर्शन के लिए विभाग की बायोकण्ट्रोल प्रयोगशाला में संपर्क कर सकते हैं।
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24/08/2026

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) एवं Ph.D. पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु द्वितीय काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल 24 अगस्त 2026 से 29 अगस्त 2026 तक खुला है।
इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रवेश संबंधी सूचना एवं निर्देशों के अनुसार निर्धारित अवधि में द्वितीय काउंसलिंग में प्रतिभाग कर सकते हैं।
https://vcsguuhf.org

काउंसलिंग अवधि: 24–29 अगस्त 2026

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वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) भगवती प्रसाद भ...
24/08/2026

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) भगवती प्रसाद भट्ट के दिशा-निर्देशन में, विश्वविद्यालय के पर्वतीय कृषि महाविद्यालय, वानिकी महाविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, रानीचौरी द्वारा पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत किसानों, विद्यार्थियों एवं स्थानीय समुदाय को पार्थेनियम (गाजर घास) के दुष्प्रभावों एवं प्रबंधन के प्रति जागरूक करने हेतु विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
अभियान के अंतर्गत रानीचौरी परिसर, ग्राम जगधार एवं रानीचौरी बाजार में, किसान गोष्ठियों का आयोजन किया गया। गोष्ठियों में किसानों एवं स्थानीय समुदाय को पार्थेनियम की पहचान, मानव स्वास्थ्य, पशुधन, जैव विविधता, फसलों एवं पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव तथा इसके सुरक्षित प्रबंधन की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही रानीचौरी मुख्य बाजार में नुक्कड़ नाटक एवं जागरूकता रैली आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से पार्थेनियम के दुष्प्रभावों, समय पर पहचान, सुरक्षित निष्कासन एवं इसके प्रसार को रोकने के उपायों का संदेश दिया। कार्यक्रम को स्थानीय निवासियों एवं दुकानदारों की उत्साहपूर्ण सहभागिता मिली।
कार्यक्रम के आयोजन में संकाय सदस्यों डॉ. सुमित चौधरी, डॉ. आलोक येवाले, डॉ. अरुणिमा पालीवाल, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. आर. एस. बाली, डॉ. मृदुला, सुश्री मोहिनी तथा विद्यार्थियों का योगदान रहा।
इन गतिविधियों के माध्यम से विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक कृषि ज्ञान को समुदाय तक पहुँचाने, किसानों की सहभागिता बढ़ाने तथा पार्थेनियम के प्रसार को रोकने की दिशा में जागरूकता का संदेश दिया।
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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी ने कृषि-वानिकी ...
24/08/2026

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी ने कृषि-वानिकी के क्षेत्र में एक बड़ा कार्य किया है। जिसमें "Himalayan Agroforestry Systems: Challenges and Opportunity to Sustainable Development" नाम से एक विस्तृत एवं महत्वपूर्ण पुस्तक तैयार की है, जिसे दुनिया के प्रसिद्ध Springer नेचर प्रकाशन द्वारा वर्ष 2026 में प्रकाशित किया गया है। 50 विशेषज्ञ लेखकों के गहन मंथन और 14 विशेष अध्यायों की यह किताब हिमालयी क्षेत्र में खेती-किसानी के भविष्य को एक नया आयाम देने का काम करेगी।

इस पुस्तक में केवल सैद्धांतिक बातें ही नहीं हैं, बल्कि यह हमारे पहाड़ों में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं को गहराई से समझाती है। इसमें कृषि-जैविक विविधता, बहुउद्देशीय वृक्षों और कृषि-उद्यानिकी प्रणालियों का सूक्ष्म विश्लेषण सम्मिलित किया गया है। इसके अलावा, यह किताब पर्यावरण और जलवायु संतुलन के मुख्य बिंदुओं पर भी प्रकाश डालती है—जैसे पेड़ों का बायोमास, कार्बन अवशोषण, मिट्टी में कार्बन का भंडारण, पशुओं के चारे की पोषण क्षमता और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के वैज्ञानिक उपाय।
सबसे खास बात यह है कि यह पुस्तक हमारे पहाड़ी समुदायों की आजीविका सुधारने और उनकी आय के साधनों में विविधता लाने पर केंद्रित है। इसमें औषधीय व संगंध पौधों की खेती, जंगली खाद्य वनस्पतियों के उपयोग, बांस आधारित उद्योग और आधुनिक कृषि-वानिकी तकनीकों को अपनाने पर खास जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, यह किताब हमारे उत्तराखंड और पूरे हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए किसानों और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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23/08/2026

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के बी.एस.सी. (ऑनर्स) हॉर्टिकल्चर के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए ड्रोन संचालन एवं रख-रखाव विषय पर प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को DGCA के नियमों एवं विनियमों, ड्रोन की विभिन्न श्रेणियों, मूलभूत संचालन नियमों तथा कृषि एवं बागवानी में ड्रोन के अनुप्रयोगों के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने ड्रोन संचालन का व्यावहारिक एवं हैंड्स-ऑन अभ्यास भी किया।
विद्यार्थियों को उन्नत ड्रोन तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन (Demonstration) भी कराया गया, जिससे उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग एवं प्रिसिजन एग्रीकल्चर में ड्रोन की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।इस प्रकार के प्रायोगिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता एवं भविष्य की कृषि-आधारित तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
Indian Council of Agricultural Research Bhagwati Bhatt Sarswati P Sati Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Agriculture Department, Government Of Uttarakhand Subodh Uniyal Shivraj Singh Chouhan Ganesh Joshi Lt Gen Gurmit Singh Pushkar Singh Dhami Lok Bhawan - Raj Bhawan, Uttarakhand PMO India

आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर हम भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक उपलब्धियों और नवाचार की उस अदम्य भावना को नम...
23/08/2026

आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर हम भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक उपलब्धियों और नवाचार की उस अदम्य भावना को नमन करते हैं, जिसने देश को वैश्विक अंतरिक्ष मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई है।
🌏 अंतरिक्ष विज्ञान केवल आकाश की खोज नहीं, बल्कि धरती पर बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन है।
कृषि से लेकर वानिकी, जल संसाधन, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सतत विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है।
🌱कृषि एवं औद्यानिकी में फसल एवं भूमि निगरानी
🌲 वानिकी में वन क्षेत्र एवं जैव विविधता की निगरानी
🛰️ रिमोट सेंसिंग एवं GIS के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन
🌦️ मौसम एवं जलवायु संबंधी जानकारी से बेहतर योजना और निर्णय
आइए, इस राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर वैज्ञानिक सोच, नवाचार और तकनीकी ज्ञान को अपनाने का संकल्प लें और भारत की नई पीढ़ी को “धरती से अंतरिक्ष तक—ज्ञान और नवाचार की नई उड़ान” के लिए प्रेरित करें।
Indian Council of Agricultural Research ISRO - Indian Space Research Organisation Agriculture Department, Government Of Uttarakhand Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Bhagwati Bhatt Sarswati P Sati Ganesh Joshi Shivraj Singh Chouhan Pushkar Singh Dhami
Lt Gen Gurmit Singh Lok Bhawan - Raj Bhawan, Uttarakhand PMO India
#राष्ट्रीयअंतरिक्षदिवस

23/08/2026

विद्यार्थियों को बड़ी राहत, ₹43.39 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत
विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं एवं आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के माननीय कुलपति प्रो. बी. पी. भट्ट द्वारा कुल ₹43,39,864 की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। स्वीकृत राशि में READY कंपोनेंट तथा NTS UG एवं PG शामिल हैं।

इस पहल से कुल 130 विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। इनमें READY स्टाइपेंड के अंतर्गत 88 विद्यार्थी तथा NTS UG एवं PG के अंतर्गत 42 विद्यार्थी शामिल हैं। READY स्टाइपेंड के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 तथा NTS UG एवं PG के अंतर्गत वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 की राशि का भुगतान किया जाएगा।

पात्र विद्यार्थियों को लंबित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राशि वितरण की प्रक्रिया अगले सप्ताह से प्रारंभ की जाएगी।

विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, कल्याण एवं आवश्यकताओं के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के क्रम में यह महत्वपूर्ण पहल की गई है। आर्थिक सहायता से विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने तथा अपनी पढ़ाई को सुचारु रूप से जारी रखने में सहयोग मिलेगा।
— नोडल अधिकारी,
ICAR, VCSG UUHF Bharsar

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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के माननीय कुलपति प्रो. ( डॉ.) भगवती प्रसाद भट्...
22/08/2026

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के माननीय कुलपति प्रो. ( डॉ.) भगवती प्रसाद भट्ट के दिशा निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र भरसार द्वारा थलीसैंण ब्लॉक में पार्थेनियम (गाजर घास) जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 कृषकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र से वैज्ञानिक, डॉ अंशुमान सिंह ने किसानों को गाजर घास के इतिहास के बारे में बताया तथा इसके दुष्परिणाम का प्रभाव मानव स्वास्थ्य, वातावरण, पशुओं और फसलों पर किस प्रकार से पड़ता है इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया की यह खरपतवार किस प्रकार से पूरे देश में फैल रहा है, इससे मनुष्य में त्वचा, सांस, एक्जिमा, एलर्जी, डर्मेटाइटिस, अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियां होती है, साथ ही साथ पशुओं एवं फसलों के लिये भी यह खरपतवार बहुत हानिकारक है। डॉ अंशुमान ने इसके जैविक नियंत्रण एवं यांत्रिक नियंत्रण की विधियां भी बताई।
उपरोक्त कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ दीपिका चौहान ने खरपतवार की रोकथाम के जैविक नियंत्रण में मैक्सिकन बीटल के बारे में विस्तार पूर्वक किसानों को बताया, उन्होंने बताया कि किस प्रकार से आप मैक्सिकन बीटल से खरपतवार का नियंत्रण कर सकते हैं साथ ही रासायनिक नियंत्रण के बारे में भी विस्तार पूर्वक किसानों को जानकारी दी। उपरोक्त कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी श्री टीकाराम कोठियाल एवं रीप परियोजना के विभिन्न अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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Veer Chandra Singh Garhwali Uttarakhand University of Horticulture and Forestry, Bharsar continues to strengthen experie...
21/08/2026

Veer Chandra Singh Garhwali Uttarakhand University of Horticulture and Forestry, Bharsar continues to strengthen experiential and skill-based learning through its B.Sc. (Hons.) Forestry Experiential Learning Programme at the Department of Forest Products & Utilization, College of Forestry, Ranichauri.
The programme provides students with hands-on exposure to product development, value addition, packaging and marketing, enabling them to transform forest-based resources and locally available materials into innovative, useful and market-oriented products.
As part of the activity, students developed a range of innovative products, including: Ringal-based lamps, Tulsi & ginger dipping bags, Aloe vera-based paper soap, Rosemary-based hair toner and Innovative products from waste wood. Such experiential learning skill initiatives bridge the gap between classroom knowledge and real-world applications, empowering future forestry professionals with the skills required for sustainable resource utilization.
Indian Council of Agricultural Research Agriculture Department, Government Of Uttarakhand Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Bhagwati Bhatt Sarswati P Sati Ganesh Joshi Subodh Uniyal Shivraj Singh Chouhan Pushkar Singh Dhami Lok Bhawan - Raj Bhawan, Uttarakhand Lt Gen Gurmit Singh PMO India

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