27/09/2026
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार, माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) भगवती प्रसाद भट्ट के दिशा-निर्देशन एवं मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड में एग्री-इकोटूरिज्म के विकास एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य एग्री-इकोटूरिज्म आधारित कृषि व्यवसाय को प्राकृतिक एवं कृषि संसाधनों के सतत उपयोग, किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण आजीविका के सुदृढ़ीकरण तथा स्थानीय उद्यमिता एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करना है।
इसी दिशा में विश्वविद्यालय के वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी में अधिष्ठाता डॉ. तारा सिंह मेहरा के मार्गदर्शन में बी.एस.सी. (ऑनर्स) वानिकी के विद्यार्थियों के लिए कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) आधारित अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह कौशल-आधारित कार्यक्रम “Learning by Doing” की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें विद्यार्थी कक्षा में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में प्रयोग करते हुए व्यावहारिक कौशल, उद्यमिता एवं प्रबंधन दक्षताओं का विकास कर रहे हैं।
वन संसाधन प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जे. सी. कुनियाल के नेतृत्व में डॉ. पंकज ठाकुर, सहायक प्राध्यापक द्वारा इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को उद्यमिता, उत्पाद विकास, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, विपणन, ग्राहक संवाद एवं बिक्री के साथ-साथ बिज़नेस प्लान तैयार करने तथा प्रभावी विपणन रणनीति विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग के महत्त्व से भी अवगत कराया जा रहा है, ताकि स्थानीय जैव-संसाधनों का उपयोग पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए जिम्मेदार एवं दीर्घकालिक आजीविका के अवसरों में किया जा सके।
इस पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा उत्तराखण्ड के स्थानीय प्राकृतिक एवं जैव-संसाधनों पर आधारित विभिन्न नवाचारी उत्पाद विकसित किए गए हैं, जिनमें रोडोशिप (बुरांश स्क्वैश, और हर्बल पेय), नेटोशिप (बिच्छूघास आधारित हर्बल पेय), जखिया (जंगली सरसों), तथा गुलामृत (गुलाब आधारित पेय) प्रमुख हैं। इसके साथ ही विद्यार्थी चीड़ की गिरी हुई पत्तियों (Pine Needles) से विभिन्न हस्तशिल्प एवं उपयोगी उत्पाद तैयार करने का कौशल भी सीख रहे हैं।
विद्यार्थी इन उत्पादों का पर्यटकों के बीच सीधे प्रचार एवं विपणन कर रहे हैं तथा जिम्मेदार पर्यटन के लिए जागरूक कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में ग्राहक संवाद, उत्पाद प्रस्तुतीकरण एवं बिक्री कौशल का वास्तविक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। विद्यार्थी जिम्मेदार पर्यटन, स्थानीय खान-पान, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय संस्कृति एवं उत्तराखण्ड की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के महत्व को भी समझ रहे हैं। स्थानीय संसाधनों को बाजारोन्मुख उत्पादों एवं सेवाओं में परिवर्तित करने की यह प्रक्रिया भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उद्यम, रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएँ प्रस्तुत करती है।
विद्यार्थियों ने अपने उद्यमिता संबंधी पहल की प्रस्तुति माननीय कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद भट्ट के समक्ष भी प्रस्तुत की। माननीय कुलपति ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवाचार एवं सतत कृषि–उद्यानिकी–वानिकी आधारित इकोटूरिज्म उद्यमों को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की तथा उत्तराखण्ड के प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित बाजारोन्मुख उत्पाद एवं उद्यम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
Learning by Doing के माध्यम से विद्यार्थी तकनीकी, प्रबंधकीय, विपणन एवं उद्यमिता संबंधी दक्षताओं के साथ-साथ वास्तविक व्यावसायिक परिस्थितियों में कार्य करने का आत्मविश्वास भी विकसित कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की यह पहल सतत एग्री-इकोटूरिज्म, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण आजीविका के सुदृढ़ीकरण की दिशा में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
Indian Council of Agricultural Research Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India Agriculture Department, Government Of Uttarakhand Bhagwati Bhatt Sarswati P Sati Ganesh Joshi Subodh Uniyal Shivraj Singh Chouhan Pushkar Singh Dhami Lt Gen Gurmit Singh Lok Bhawan - Raj Bhawan, Uttarakhand PMO India