Shivam - Ek Dhara

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और इनमे से एक तिहाई लोग जिनकी संख्या ज्यादा है,जिनके पास गाड़ी से लेकर अनेक बेनामी संपत्ति होते है,सरकारी नौकरी से लेकर ...
24/12/2022

और इनमे से एक तिहाई लोग जिनकी संख्या ज्यादा है,जिनके पास गाड़ी से लेकर अनेक बेनामी संपत्ति होते है,सरकारी नौकरी से लेकर एक शानदार जीवन जीने के आदी होते है, उन लोगों को ऐ राशन क्यों,क्या गरीबी की परिभाषा बदली जा रही है,या सब को फिजूल का खिला ,खिला के फर्जी मुकदमा लड़वाना है, गरीबों को तो पूरा यूनिट तक राशन नही मिलता,जनाब,यकीन ना आए तो जांच कर ले ,

05/10/2022

ये आस्था कि क्रांति है, जब इंद्र जी दुर्गा जी विदाई में आज आ गए ,तो ये शाम ये रात,ये दिन तो अपनी है यारो

25/09/2021

वो जो इश्क करते हैं
किसी को प्यार करते है
प्यार पाते है,साथ पाते है
वही,जीते है,साहब
बाकी तो पारी खेलते है,
कभी जीने की,कभी मरने की
वरना इस्क में क्या है,
ये तो वही जाने ,जो जीते है
मरते है,किसी एक के लिए
वो जिंदगी बना लेते है,
जीत के भी,हार के भी
वो कहते है,यारो,ये दुनिया
इन आंखों में समाती है
पर वो नहीं,क्या यही प्यार है
जो जीना सीखा दे,
जीने का परिचय करा दे
इंसान को भगवान बना दे
मंदिर की एक मूर्ति बना दे
जिसे दिल जगह दे
हर पल पूजे,
जीवन को स्वर्ग बना दे,
जीने की वजह दे, दे
क्या यही प्यार है,
जो दिल को तसल्ली दे,
सकून दे,आराम दे,
जीवन को एक आयाम दे,
जो दर्पण दे,दिल को देखे
उसे पूजे,हर पल,
क्या यही प्यार है,,,,,.

24/09/2021

हम लाडले कहा थे,
हम तो बेगाने थे,
हम एक हिस्सा थे,
परिवार का नही
अपनो का नही
किसी दिल का नही
हिस्सा थे बाजार के चीजो का
जिसका भाव ना था,
बेकार था,बेदाम था,
सभी ने इनकरा , कोसा
गलती मेरी ना थी,
ईश्वर की थी, उसी की है,
मुझे भेजा , जहां, तंगी थी
जहा मंदी थीं, मजबूरी थी
तो गलती मेरी कहा थी,
यारो,ना प्यार मिला, ना,भाव
अब रिश्तों में भी पैसा लगता है,
समय को सायद पता ना था,
बचपन बीता,जान ना सका
जवानी बीत जायेगी,
अहसास भी न होगा,
मौत का पता नही
पर जैसे भी होगा,अच्छा होगा
कीमत मिट्टी में मिल जायेगी ,
मेरे साथ ,उसकी भी ,जिसने बनाया
मुझे,मैं था ही कहा,ना तब,ना अब
ना पल,ना दो पल
सब किस्सा है,
ना प्यार ना परवाह,
सब जीने के नखड़े थे,
मौत तो मीठा है,
सहद सा है,यकीन करे,
मुझे क्या पता जीवन एक
कूड़ा है,दर्द का एक दरिया है,
एक जंग है,
जिसमे, हार है,मेरी
हम लाडले कहा थे,
हम तो सब के लिए,
दर्द का सिर्फ़ एक हिस्सा थे,
जिसमे,,था,हर तरफ,
से, घाव, वा हार,और सिर्फ हार,,,

16/09/2021

राम,श्याम ,घनश्याम आओ,
रामू, सामू,मीना,आओ,
सब आओ,सब को लेकर आओ
आओ मौसम आया है
रिमझिम बारिश लाया है
आओ सब चलते है,
बारिश में भीगते है,
खूब उछल कूद करते है
पानी में खूब ही कूदते है
झूम झूम के हम सब,
,बारिश में भीगते हैं,
रिमझिम दीदी आई है,
पानी खूब लाई है,
चल छूते है,पानी को
मछली जल की रानी को
पकड़म ,पकड़ी खेलते है
पानी में खूब दौड़ते है
इस पानी के मौसम में
रिमझिम दीदी आई है
दादी ,नानी,मामी,
सब को लेकर आई है
चल चलते है,खेलते है
पानी में खूब दौड़ते है

15/09/2021

आओ बाते करे,सब
हिंदी अपनी ,हिंदी की
हम सब मिल बोले
अपनी ,देश की हिंदी की
यह मिट्टी है ,हिंदी की
सारे ,काव्य हिदी की
रचना हैं,हिंदी की
हम लोग,यह देश है ,हिंदी की
बच्चा,बच्चा हिंदी का
अपने देश की मिट्टी का
ये तिरंगा अपनी मिट्टी का
हम सब की हिंदी का
राजा , राजपुतानो का,
हिंदी के पुराणों का
सत्य, अहिंसा, कर्मों का
यह हिंदी है,अपने देश के वीरो का
अपने सभी अधिकारों का,
यह हिंदी है त्रिशूलो का
तलवारों का, भालो का
तीर कमानो का,
प्यार के बर्शतो का
हिंदी ,अपनी सब की हिंदी है
हिंदी ,ही हम सब को प्यारी
आओ बाते करे,हम सब
अपनी प्यारी भाषा हिंदी की

15/09/2021

अम्मा , अम्मा आओ ना,
आओ देखो,देखो ना
ये बादल की गरज
ये फूलो की महक
ये मौसम की धमक
अम्मा, अम्मा, आओ ना
चल चलते है, घूमते है,
मौसम को पकड़ते हैं
उसके कान ऐंठते है
मजे,ही मजे करते है
अम्मा अम्मा,आओ ना
मन करता है, उड़ जाऊ
पवन को पकड़ लाऊ
खुशबू को चुरा लाऊ
बादल को अपनी अकड़ बताऊं
तू कहे तो सब को पकड़ लाऊ
अम्मा , अम्मा आओ ना

22/08/2021

पता भी न चलता है,
कि कब ये जीवन
बदल जाता हैं
जब चलते है
कि मिट्टी में खेलते
कि,पैसे में घूमते
कि कोई आ जाता ,
इस दिल में बस जाता है
फिर ये मौसम
बदल जाता है
सब कुछ सवर जाता हैं
बदल सा ही जाता है
एक उम्मीद
एक साथ
होना,खाना,रहना
अब तो जीवन
महक जाता है
पर ये दुनिया तो इन आंखों में आती है
पर वो साथी,न समाता है
क्या यही प्यार है
पता नही ,पर मजा आता है
सब बदल जाता है
ये दुनिया,ये महफिल
अब,अच्छा सा लगता है
कुछ और जीना चाहता हूं
ये दुनिया इस मुट्ठी में हो या न हो
पर वह इस दिल में ,इन आंखों में हो
उस से दो पल ,लेना चाहता हु
बदले में ये जीवनउसे देना चाहता हूं
पर थोड़ा ही सही ,
उसका प्यार ,पाना चाहता हू,
कब ये जीवन बदल जाता है
यार,ये जीवन तो ,प्यार चाहता हैं,

22/08/2021

बताओ यार जिंदगी क्या है,
मिल तो गई,
जायेगी कैसे
परेशान हू
हैरान हूं
सच में ,तंग आ गया हूं
क्या मिला ,गरीबी
क्या मिला सिर्फ काम
सिर्फ काम ,सिर्फ काम
मेहनत तो और भी जीव करते है
पर वो भी आराम करते है
अपना तो,सिर्फ काम
मन करता है,ईश्वर आए
जिसने रचना की,मेरी
मैं लड़ना चाहता हु,
भिड़ जाना कहता हूं
खूब लड़ाई करना कहता हू
सीधी सी बात,मैं मरना चाहता हूं
तंग आ गया हू,मैं उधार की जिंदगी से
जिसे उसने दो,मैने देखा भी नहीं,
उसे समझा भी नही
इस जोर का इस जबरदस्ती का
मैं बदला चाहता हू,
मैं मरना चाहता हू
अपना जीवन खोना चाहता हू
मैं तंग आ गया हू
इस जीवन से
न बचपन देखा
पर क्या ,क्या न देखा
इसमें उसमे,सब में देखा
सब में जीवन को देखा चलते देखा
घिस कर ,रगड़ कर मर,मर के जीते देखा
अफसोस भी मलाल भी,रंजिश भी
की क्या जुर्म थे,कैसा अपराध
क्या गलत किया की,तंग हू इस जीवन से
अब दिल करता है,पूजा का वह मंदिर
जहा ,जल फूल,माला अर्पित करता था
कि काश ऐसा हो एक पत्थर इन हाथो में
हो ,ऐसा दे मारू, उस शिवालिक पर
की दिल को आराम मिले ,मेरे जीवन की तरह
वो भी लड़ते नजर आए,
अब तो बताओ जिंदगी क्या है

13/08/2021

एक एनसीआर किसी गरीब के परिवार को उथल पुथल कर देता है,पर कानून मानने को तैयार नहीं,बड़े शहरों में न सही पर हर बड़े शहरों से जो हठ के है,उनकी यही स्थिति है मैं दावा के साथ कह सकता हूं वरना आज इतनी मुकदमों की फाइल न होती ,मैं कहता हु की मुकदमा होने से पहले हर एक एनसीआर की जांच होनी चाहिए,कारण पुलिस पैसे लेकर छोटी छोटी, बातों को वह पैसे के बल पर या फिर पैसे के लिए उसे एनसीआर में दर्ज कर देती हैं,और पैसे खर्च करने पर मुकदमा में कनवर्ट कर देती है

11/08/2021

कौन कहता है, कि नशा सीसी,बोतल, शराब में,
ये तो जीवन को पीछे,जी जान को आगे,करती हैं,
जो बदल दे,रंग दे,सवार दे,
जीने की वजह दे,
इन आंखों को सकून , प्रकाश
शरीर को तेज दे
जब जीवन रेत से ,कीचड़ से
हो कर गुजरे रंग दे उसे खुशबू दे
हर पल ,हर लम्हा प्यार दे,
जीवन को हर पल अहसास दे
और हर पल साथ दे,
दो कदम साथ दे,फिर क्या जीना
फिर क्या मरना,क्या अपना
सब, अब तो क्या कहना
उसी का जीना उसी का मरना
दिन हो या रात ,
अब तो हर पल
हर लम्हा
किसी का साथ ,किसी का साया
अब कहा ,किसी में बात ,
अब तो नशा था
और अब जरूरत
अब वजह
अब और प्यार
अब कहा किसी में वो बात
अब तो ईश्वर में भी दाग
फिर क्या सीसी ,फिर क्या बोतल

11/08/2021

हम,तुम
तुम और हम
कुछ तेरी,कुछ मेरी
बड़ा अजीब है,
बड़ा ही अजीब है,
समझ से परे है
या समझ नही है
सवाल है,पर देखा हैं,
समझा भी है,
पर अफसोस भी
कि,जीवन कभी प्यारा
तो कभी, गहरी नीद है,
किसी को दुनिया दिया गया
और किसी को दुनिया में,
मुझे तो लगा ,जी भर गया
अब और तब, यू ही,बस यू ही
अब तो हम तुम
तुम और हम
जाने भी दो,
ये जीवन तो
मुस्किल में है की
मुस्किल में जीवन है
पर जैसा भी है,कोई जीता है
कोई जिलाता है
कुछ मेरी ,न तेरी
न तेरी न मेरी ,सब
उसकी ,, सब उसकी,सब उसकी
फिर क्या ,हम तुम
तुम और हम /////

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