24/09/2021
हम लाडले कहा थे,
हम तो बेगाने थे,
हम एक हिस्सा थे,
परिवार का नही
अपनो का नही
किसी दिल का नही
हिस्सा थे बाजार के चीजो का
जिसका भाव ना था,
बेकार था,बेदाम था,
सभी ने इनकरा , कोसा
गलती मेरी ना थी,
ईश्वर की थी, उसी की है,
मुझे भेजा , जहां, तंगी थी
जहा मंदी थीं, मजबूरी थी
तो गलती मेरी कहा थी,
यारो,ना प्यार मिला, ना,भाव
अब रिश्तों में भी पैसा लगता है,
समय को सायद पता ना था,
बचपन बीता,जान ना सका
जवानी बीत जायेगी,
अहसास भी न होगा,
मौत का पता नही
पर जैसे भी होगा,अच्छा होगा
कीमत मिट्टी में मिल जायेगी ,
मेरे साथ ,उसकी भी ,जिसने बनाया
मुझे,मैं था ही कहा,ना तब,ना अब
ना पल,ना दो पल
सब किस्सा है,
ना प्यार ना परवाह,
सब जीने के नखड़े थे,
मौत तो मीठा है,
सहद सा है,यकीन करे,
मुझे क्या पता जीवन एक
कूड़ा है,दर्द का एक दरिया है,
एक जंग है,
जिसमे, हार है,मेरी
हम लाडले कहा थे,
हम तो सब के लिए,
दर्द का सिर्फ़ एक हिस्सा थे,
जिसमे,,था,हर तरफ,
से, घाव, वा हार,और सिर्फ हार,,,