BATCH 94 ,PTPS

BATCH 94 ,PTPS Connecting Batchmates...94 batch, PTPS High School

18/11/2025
08/11/2025

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04/11/2025

बहुत ही दुःख की बात है कि शंभू सर अब हमारे बीच नहीं रहे। ईश्वर उनको अपने श्रीचरणों में स्थान दें 🙏🙏
13/12/2023

बहुत ही दुःख की बात है कि शंभू सर अब हमारे बीच नहीं रहे। ईश्वर उनको अपने श्रीचरणों में स्थान दें 🙏🙏

19/10/2023

यदि आपके पास ptps high school, middle school. Market middle school Hesla ya Arvind school ke किसी भी batch की class photo है तो share करें... we will upload here......
Thank you

Teaching is the art of changing lives.”“Teachers inspire minds and touch hearts.”Wishing everyone a Happy Teachers' day!...
05/09/2023

Teaching is the art of changing lives.”

“Teachers inspire minds and touch hearts.”

Wishing everyone a Happy Teachers' day!!

एक आदमी को एक नाव पेंट करने के लिए कहा गया। वह अपना पेंट और ब्रश लाया और नाव को चमकीले लाल रंग से रंगना शुरू किया, जैसा ...
11/12/2022

एक आदमी को एक नाव पेंट करने के लिए कहा गया। वह अपना पेंट और ब्रश लाया और नाव को चमकीले लाल रंग से रंगना शुरू किया, जैसा कि मालिक ने उससे कहा था।

पेंटिंग करते समय, उसने एक छोटा सा छेद देखा और चुपचाप उसकी मरम्मत की।

जब उसने पेंटिंग पूरी की, तो उसने अपना पैसा लिया और चला गया।

अगले दिन, नाव का मालिक पेंटर के पास आया और उसे एक अच्छा चेक भेंट किया, जो पेंटिंग के भुगतान से कहीं अधिक था।

पेंटर को आश्चर्य हुआ और उसने कहा, "आपने मुझे नाव को पेंट करने के लिए पहले ही भुगतान कर दिया है सर!"

"लेकिन यह पेंट जॉब के लिए नहीं है। यह नाव में छेद की मरम्मत के लिए है।”

"आह! लेकिन यह इतनी छोटी सी सेवा थी... निश्चित रूप से यह मुझे इतनी छोटी सी चीज के लिए इतनी अधिक राशि देने के लायक नहीं है।"

“मेरे प्यारे दोस्त, तुम नहीं समझे। आपको बताते हैं क्या हुआ था:

“जब मैंने तुमसे नाव को पेंट करने के लिए कहा, तो मैं छेद का उल्लेख करना भूल गया।

“जब नाव सूख गई, तो मेरे बच्चे नाव ले गए और मछली पकड़ने की यात्रा पर निकल गए।

"वे नहीं जानते थे कि एक छेद था। मैं उस समय घर पर नहीं था।

"जब मैं वापस लौटा और देखा कि वे नाव ले गए हैं, तो मैं हताश हो गया क्योंकि मुझे याद आया कि नाव में छेद था।

“मेरी राहत और खुशी की कल्पना कीजिए जब मैंने उन्हें मछली पकड़ने से लौटते देखा।

“फिर, मैंने नाव की जांच की और पाया कि आपने छेद की मरम्मत की थी!

"आप देखते हैं, अब, आपने क्या किया? आपने मेरे बच्चों की जान बचाई! मेरे पास आपके 'छोटे' अच्छे काम का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है।

तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन, कब या कैसे, मदद करना जारी रखें, बनाए रखें, आँसू पोंछें, ध्यान से सुनें, और ध्यान से सभी 'लीक' की मरम्मत करें। आप कभी नहीं जानते कि कब किसी को हमारी आवश्यकता होती है, या कब परमेश्वर किसी के लिए सहायक और महत्वपूर्ण होने के लिए हमारे लिए एक सुखद आश्चर्य रखता है।

आपने कई लोगों के लिए कई 'नाव छेद' की मरम्मत की हो सकती है बिना यह जाने कि आपने कितने लोगों की जान बचाई है। ❤️

कुछ अलग करें... आप सबसे अच्छे बनें...

आपका दिन मंगलमय हो🌿

10/12/2022
09/12/2022

एनादर रिजेक्शन....

"इससे पहले की रिश्ते की बात आगे बढे, मैं आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ।" लड़के ने कहा।

"जी पूछिये।" लड़की ने कहा।

"आप फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम या स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं क्या?" लड़के का सवाल।

"नहीं, मैं इनमें से कहीं पर भी नहीं हूँ, इवन मैं तो मोबाईल भी की पैड वाला ही यूज करती हूँ।" जवाब मिला।

लड़का थोड़ा संतुष्ट नजर आया।"आपकी जॉब और एजुकेशन के बारे में तो पहले ही पता चल चुका है मुझे, आप भी कुछ पूछना चाहें तो पूछ लीजिये।"

"जी मैं तो ये जानना चाहती हूँ कि मेरी हॉबी, इंटरेस्ट आदि के बारे में न पूछकर , ये सोशल मीडिया का पूछा ये अजीब लगा, कोई खास बात है क्या इनके पीछे?" लड़की का पहला सवाल।

"एक्चुली, वो क्या है ना कि आजकल फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टा आदि पर बातें करते करते लोग अफेयर्स में पड़ जाते हैं….यू नो… वहाँ वॉइस कॉलिंग एंड वीडीओ कॉलिंग भी होती है, तो मुझे लगता है जो इन चीजों से दूर हैं, वो अफेयर्स से भी दूर होंगे, इसलिए मैं चाहता हूँ कि जिससे शादी करूँ वो इन सब से दूर ही रही हो।"लड़के ने अपनी ओर से साफ बात कही।

"अच्छा???....पर आपको ये सब कैसे पता, अच्छा आप भी इन सोशल मिडियाज पर होंगे?" लड़की का सवाल।

"बस पता है, लोगों को देखा है, और दोस्त वगैरह भी बताते रहते हैं , आजकल तो अखबार में भी ये बातें आती रहती हैं, और हाँ मैं सोशल मीडिया पर हूँ पर मैं इन चक्करों में नहीं पड़ता।" लड़के की सफाई।

"वैसे मुझे एक बात पूछनी है, क्या कोई सोशल मीडिया पर हो तभी किसी से अफेयर हो सकता है क्या ?? स्कूल कॉलेज में पढ़ते , या नौकरी करते भी तो किसी से अफेयर हो सकता है । कई बार तो घर रहते हुए भी पड़ोसी से अफेयर हो जाता है , मैंने अखबार में कई बार पढा है। वैसे भी ये सोशल मीडिया नहीं था तब भी लोगों के अफेयर्स हो जाते थे । हमारे मुहल्ले में तीस साल पहले एक लव मैरिज हुई थी।" लड़की ने वाजिब सवाल पूछा।

"जी आपकी बात सही है, पर उस वक़्त ये संभावना दस प्रतिशत थी अब नब्बे प्रतिशत है।" लड़के का तर्क।

"मैं सोशल मीडिया पर नहीं हूँ, क्या आप शादी के लिए हाँ कहेंगे?" लड़की का सवाल।

"ऑफकोर्स , मैं कब से ऐसी लड़की ढूंढ रहा हूँ , जो आज के जमाने में भी इस सोशल मीडिया के जंजाल में नहीं फँसी हुई , इसलिए मेरी तरफ से हाँ है।" लड़के ने गर्व से स्वीकृति दी।

" सुनिए , आपकी हाँ है , पर मेरी तरफ से ना है ... मैं सोच रही थी कि शादी के बाद मैं भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाऊंगी, पर आपको तो सोशल मीडिया का मतलब केवल अफेयर्स ही पता है । वैसे मैं नौकरी भी करती हूँ आपको लगेगा मेरा मेरे कलीग या बॉस से अफेयर है । कोई कॉलेज का दोस्त मिल गया तो भी लगेगा अफेयर है । आप सोशल मीडिया चला रहे हैं और सिद्ध कर रहे हैं कि आपका कोई अफेयर नहीं । माफ कीजिये आपकी सोच 'अन- फेयर' है और मैं जिंदगी ऐसे आदमी के साथ नहीं गुजारना चाहती जो हर जगह केवल 'अन - फेयर' बात करे । बाकी सोशल मीडिया केवल अफेयर करने के लिए नहीं बना है , वहाँ विचार होते हैं तर्क होते हैं, सीखने और मनोरंजन के लिए बहुत कुछ उपलब्ध है । माफ कीजिये , आपको अभी अपनी तलाश जारी रखनी होगी,मैं जा रही हूँ।" लड़की वहाँ से उठकर चली गई।

लड़के ने व्हाट्सएप पर स्टेटस अपडेट किया, "another rejection 😊" और अपना कोट झड़काते हुए रिसेप्शन की तरफ बिल पे करने के लिए बढ़ गया।

संजय नायक"शिल्प"

28/11/2022

महाभारत में एक प्रसंग आता है जब धर्मराज युधिष्ठिर ने विराट के दरबार में पहुँचकर कहा-
“हे राजन! मैं व्याघ्रपाद गोत्र में उत्पन्न हुआ हूँ तथा मेरा नाम 'कंक' है। मैं द्यूत विद्या में निपुण हूँ। आपके पास आपकी सेवा करने की कामना लेकर उपस्थित हुआ हूँ।”

द्यूत ......जुआ ......यानि वह खेल जिसमें धर्मराज अपना सर्वस्व हार बैठे थे। कंक बन कर वही खेल वह राजा विराट को सिखाने लगे।

जिस बाहुबली के लिये रसोइये दिन रात भोजन परोसते रहते थे वह भीम बल्लभ का भेष धारण कर स्वयं रसोइया बन गया।

नकुल और सहदेव पशुओं की देखरेख करने लगे।

दासियों सी घिरी रहने वाली महारानी द्रौपदी .......स्वयं एक दासी सैरंध्री बन गयी।
.....और वह धनुर्धर। उस युग का सबसे आकर्षक युवक, वह महाबली योद्धा। वह द्रोण का सबसे प्रिय शिष्य। वह पुरूष जिसके धनुष की प्रत्यंचा पर बाण चढ़ते ही युद्ध का निर्णय हो जाता था।वह अर्जुन पौरुष का प्रतीक अर्जुन। नायकों का महानायक अर्जुन।एक नपुंसक बन गया।

एक नपुंसक ?

उस युग में पौरुष को परिभाषित करने वाला अपना पौरुष त्याग कर होठों पर लाली लगा कर ,आंखों में काजल लगा कर एक नपुंसक "बृह्नला" बन गया।

युधिष्ठिर राजा विराट का अपमान सहते रहे। पौरुष के प्रतीक अर्जुन एक नपुंसक सा व्यवहार करते रहे। नकुल और सहदेव पशुओं की देख रेख करते रहे......भीम रसोई में पकवान पकाते रहे और द्रौपदी.....एक दासी की तरह महारानी की सेवा करती रही।

परिवार पर एक विपदा आयी तो धर्मराज अपने परिवार को बचाने हेतु कंक बन गया। पौरुष का प्रतीक एक नपुंसक बन गया।एक महाबली साधारण रसोईया बन गया।

पांडवों के लिये वह अज्ञातवास नहीं था। अज्ञातवास का वह काल उनके लिये अपने परिवार के प्रति अपने समर्पण की पराकाष्ठा थी।

वह जिस रूप में रहे।जो अपमान सहते रहे .......जिस कठिन दौर से गुज़रे .....उसके पीछे उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं था। अज्ञातवास का वह काल परिस्थितियों को देखते हुये परिस्थितियों के अनुरूप ढल जाने का काल था !!

आज भी इस धरती में अज्ञातवास जी रहे ना जाने कितने महायोद्धा दिखाई देते हैं। कोई धन्ना सेठ की नौकरी करते हुये उससे बेवजह गाली खा रहा है क्योंकि उसे अपनी बिटिया की स्कूल की फीस भरनी है।
बेटी के ब्याह के लिये पैसे इक्कठे करता बाप एक सेल्समैन बन कर दर दर धक्के खा कर सामान बेचता दिखाई देता है।
ऐसे असँख्य पुरुष निरंतर संघर्ष से हर दिन अपना सुख दुःख छोड़ कर अपने परिवार के अस्तिव की लड़ाई लड़ रहे हैं।

रोज़मर्रा के जीवन में किसी संघर्षशील व्यक्ति से रूबरू हों तो उसका आदर कीजिये।
उसका सम्मान कीजिये।
फैक्ट्री के बाहर खड़ा गार्ड......होटल में रोटी परोसता वेटर.....सेठ की गालियां खाता मुनीम....... वास्तव में कंक .......बल्लभ और बृह्नला हैं।

क्योंकि कोई भी अपनी मर्ज़ी से संघर्ष या पीड़ा नही चुनता। वे सब यहाँ कर्म करते हैं
।वे अज्ञातवास जी रहे हैं......!

परंतु वह अपमान के भागी नहीं हैं। वह प्रशंसा के पात्र हैं। यह उनकी हिम्मत है.....उनकी ताकत है ......उनका समर्पण है के विपरीत परिस्थितियों में भी वह डटे हुये हैं।

वह कमजोर नहीं हैं ......उनके हालात कमज़ोर हैं.....उनका वक्त कमज़ोर है।

याद रहे......

अज्ञातवास के बाद बृह्नला जब पुनः अर्जुन के रूप में आये तो कौरवों के नाश कर दिया। पुनः अपना यश, अपनी कीर्ति सारे विश्व में फैला दी।वक्त बदलते वक्त नहीं लगता इसलिये जिसका वक्त खराब चल रहा हो,उसका उपहास और अनादर ना करें।

उसका सम्मान करें, उसका साथ दें।

क्योंकि एक दिन #संघर्षशील #कर्मठ #ईमानदारी से प्रयास करने वालो का अज्ञातवास अवश्य समाप्त होगा।
समय का चक्र घूमेगा और बृह्नला का छद्म रूप त्याग कर धनुर्धर अर्जुन इतिहास में ऐसे अमर हो जायेंगे.. कि पीढ़ियों तक बच्चों के नाम उनके नाम पर रखे जायेंगे। इतिहास बृह्नला को भूल जायेगा। इतिहास अर्जुन को याद रखेगा।

हर सँघर्षशील लग्नशील कर्मठ व्यक्ति में बृह्नला को मत देखिये। कंक को मत देखिये। बल्लभ को मत देखिये। हर सँघर्षशील व्यक्ति में धनुर्धर अर्जुन को देखिये। धर्मराज युधिष्ठिर और महाबली भीम को देखिये।
उसका भरपूर सहयोग करिए उसके ईमानदार प्रयासों को सराहे ! क्योंकि याद रखना एक दिन हर संघर्षशील व्यक्ति का अज्ञातवास खत्म होगा।

यही नियति है।
यही समय का चक्र है।
यही महाभारत की भी सीख है!
जय श्री राधेकृष्णा जय श्री राम, हर हर महादेव 🙏 🙏

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