29/07/2017
बिहार राज्य हमेशा से ही परिवर्तन और आंदोलन की धरती रही है । 90 के दशक से लगातार बिहार की सत्ता पर पिछड़े वर्ग के नेताओं का कब्जा रहा है , और अनुसूचित जाति (दलित ) वोट थोक के भाव में पिछड़े वर्ग के नेताओं को मिले हैं, बिहार में दलित पिछड़े वर्ग के कई स्थापित नेता हैं जिनका सामाजिक न्याय , धर्मनिरपेक्षता , साम्प्रदायिकता और विकास का अपना अपना एजेंडा रहा है । कैसे बनती है बिहार में सरकार और दलित पिछड़े अल्पशंख्यक वर्ग के लोग क्या सोचते है , सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता (महागठबंधन )की सरकार से अचानक बिहार में जय श्री राम की सरकार बनती है । लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर के बावजूद बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के एकमात्र कारण , आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत का बयान आरक्षण और संविधान संसोधन का बयान था , बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने में बिहार के 16 % दलितों की आबादी वर्तमान में 20-22% का योगदान है, बिहार में मोहन भागवत का बयान तेजी से फैल गया और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद यादव , श्री नितीश कुमार जी ने हल्ला मचाया की भाजपा की सरकार बनेगी तो संविधान में संसोधन कर के आरक्षण को ख़त्म कर दिया जायेगा, दलितों के दिल और दिमाग में ये बातें बैठ गई और दलितों ने थोक भाव में महागठबंधन को वोट दिया और बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी। बिहार के पिछड़े और दलित नेता अपने आप को बड़े गर्व के साथ कहते है कि बिहार जयप्रकाश नारायण, लोहिया , कर्पूरी ठाकुर और बिहार लेलिन जगदेव प्रसाद की धरती है और हम उनकी विचारधारा से लैश हैं , लालू प्रसाद यादव को छोड़ दे तो बिहार के सभी स्थापीत दलित पिछड़े नेता आज उन धाराओं के साथ मिल गए हैं जिनका दूर दूर तक सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता से नाता नही रहा है, श्री लालू प्रसाद जी को भी सामाजिक न्याय के एजेंडे पर अपने परिवार से ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है , क्योकि वो सुरु स3 ही गरीबो दलित पिछडो की आवाज रहे हैं। बिहार सरकार के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार जी के सरकार को कई नाम दिए गए , सामाजिक न्याय की सरकार , सुशासन की सरकार , साम्प्रदायिकता को रोकने वाली सरकार , और अब नितीश कुमार जी को कुर्शी कुमार कहा जाने लगा है । नितीश कुमार कहते थे की मिट्टी में मिल जायेंगे मगर भाजपा में नही जायेंगे , नितीश कुमार जी कुर्शी बचाने के लिए अपने तीर से सामाजिक न्याय , धर्मनिरपेक्षता , और देश के मजबूत विपक्ष, बिहार के जनता का जनादेश का खून कर के सत्ता की कुर्शी पर बैठ गए है । बिहार की जनता , दलित पिछड़े छात्र ,युवा , बुद्धिजीवी लोग तो सवाल करेंगें ही । वर्तमान बिहार की NDA सरकार के सामने दलितों से सम्बंधित , sc st छात्रों की छात्रवृति में कटौती , अनुसूचित जाति जन जाती कर्मचारियों का प्रमोशन में आरक्षण को रोकना , दलितों में दलित - महादलित का वर्गीकरण, दलितों को 5 डिसमिल जमीन का आवंटन आदि कई प्रमुख सवालों का जवाब देना होगा ,क्योंकि NDA सरकार में बिहार के कई कद्दावर दलित नेता शामिल हैं , और नितीश कुमार जी से ज्यादा दलित नेताओं की जवाबदेही होगी क्योकि केंद्र और बिहार की सरकार NDA की है । बिहार के वर्तमान NDA सरकार को मजबूत विपक्ष मिला है , बिहार के सभी दलित पिछड़े मुस्लिम समुदाय के छात्र ,युवा ,बुद्धिजीवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता तैयारी में जुट गए है और जो नही जुटे है उनको तैयारी करनी चाहिए , आंदोलन के साथ साथ , 2019 की लोकसभा और 2020 की बिहार विधानसभा , सामाजिक न्याय के साथ विकाश , शिक्षा , निजी क्षेत्रों में आरक्षण, साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने का एजेंडा भी तय हो जाना चाहिए , सफलता तय मानी जायेगी अगर ईमानदारी से काम किया जाए तब ।
अमर आजाद ,
अध्यक्ष ,इंडियन स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (ISWA)
दलित छात्र ,पटना लॉ कॉलेज , पटना यूनिवर्सिटी ,पटना
उम्र 26 वर्ष