Sachish Academy

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Sachish Academy is an education and skill development venture headquartered in New Delhi.

It aims to revolutionise indian education sector by providing cutting edge smart learning solutions.

Photos from Agyat's post 28/01/2026

Padma Award 2026...

10/01/2026

Bramhgupt ki kahani ke bare me to hme pata hi nahi tha....

16/02/2021

"धियो विश्व विराजती।"
"She is shining as the embodiment of Universal Wisdom"

Happy Vasant Panchami....

19/10/2020

#जमुई मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर #सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव के समीप श्मशान भूमि स्थित है मां नेतुला मंदिर | नेतुला मां को चन्द्रघंटा का भी रुप बताया गया है।

वैसे तो मां नेतुला मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। इस मंदिर का 26 सौ साल पुराना इतिहास का रिकार्ड है। 6 सौ ई.पू. में भगवान महावीर गृह त्याग कर जब ज्ञान प्राप्त करने निकले थे, तब उन्होंने प्रथम दिन कुमार गांव में ही नेतुला मां की मंदिर परिसर स्थित वटवृक्ष के नीचे रात्रि विश्राम किया था और इसी स्थान पर अपना वस्त्र त्याग कर दिया था।

29/09/2020

Introducing

Basmati rice is believed to have been cultivated in the Indian subcontinent for centuries. We even fought a patent battle for basmati with an American company RiceTec. We, Indians love basmati, without a doubt.

We at are committed to provide you with the centuries old, true flavoured foods.

Because
hai

28/09/2020
15/05/2020

पानी पूरी को कई जगहों पर अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है. जैसे कि गोलगप्पा, पानी-बतासे, फुचका, गुचचुप, पानी टिक्की या फुल्की. पानी पूरी का जिक्र मेगस्थनीज़ और साथ ही चीनी बौद्ध यात्री Faxian और Xuanzang की किताबों में पाया गया है. जी हाँ.. और ऐसा कहाँ जाता है कि पानी पूरी को सबसे पहले गंगा के किनारे बसे मगध साम्राज्य में बनाया गया था.

उस दौरान पानी पूरी में बहुत से खाद्य पदार्थ मिलाए गये थे जैसे मसलन- पिट्ठो, तिलवा, चिवड़ा आदि. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मगध साम्राज्य बिहार के नाम से जाना जाता है यानी पानी पूरी का आविष्कार बिहार में हुआ था. पानी पूरी को लेकर एक और कहानी प्रचलित है कि- जब द्रोपदी पहली बार अपने पांच पतियों के साथ ससुराल आई थी तब कुंती ने द्रोपदी को कुछ ऐसा बनाने के लिए कहा था जिससे उनके पांचो बेटों का पेट भर जाए और उसके लिए द्रोपदी ने अपनी कला और ज्ञान का इस्तेमाल कर पानी पूरी बनाई थी जिससे कुंती बहुत खुश हुईं और उन्होंने द्रोपदी को अमरता का वरदान दिया था.

14/05/2020

कमेंट सेक्शन में जवाब दीजिये! इतना भी मुश्किल नहीं...😉

13/05/2020

मर्शिअल आर्ट्स की उत्पत्ति भारत में हुई थी। दक्षिण भारत के पल्लव राज्य के कांचीपुरम के राज परिवार में जन्मे बौद्ध भिक्षुक बोधिधर्मन के माध्यम से ही चीन, जापान और कोरिया में बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ तथा उन्होंने ही मर्शिअल आर्ट्स का भारत से बहार चीन- जापान में प्रसार किया। 520-526 ईस्वीं में चीन जाकर उन्होंने चीन में ध्यान संप्रदाय की नींव रखी थी जिसे च्यान या झेन कहते हैं।

12/05/2020

लिट्टी चोखा को बिहार का व्यंजन माना जाता है. बिहार के लोगों ने इसे दूसरे राज्यों में भी फैलाया है. आज लिट्टी चोखा के स्टॉल हर शहर में दिख जाते हैं. लिट्टी चोखा खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है, ये सेहत के लिए भी फायेदमंद है.

लिट्टी-चोखा का इतिहास दिलचस्प है. इसका इतिहास मगध काल से जुड़ा है. कहा जाता है कि मगध साम्राज्य के दौरान लिट्टी चोखा प्रचलन में आया. बाद में ये मगध साम्राज्य से देश के दूसरे हिस्सों में भी फैला

लिट्टी चोखा को युद्ध का खाना भी कहा जाता है. प्राचीन काल से युद्ध के दौरान सैनिक खाने के सामान के तौर पर लिट्टी लेकर चलते थे. लिट्टी की खासियत है कि ये जल्दी खराब नहीं होता. इसे बनाना भी आसान है और ये काफी पौष्टिक भी होता है.

1857 के विद्रोह में सैनिकों के लिट्टी चोखा खाने का जिक्र मिलता है. तात्या टोपे और रानी लक्ष्मी बाई ने इसे अपने सैनिकों के खाने के तौर पर चुना था. इसे फूड फॉर सरवाइवल कहा गया. उस दौर में ये अपनी खासियत की वजह से युद्धभूमि प्रचलन में आया. इसे बनाने के लिए किसी बर्तन की जरूरत नहीं है, इसमें पानी भी कम लगता है और ये सुपाच्य और पौष्टिक भी है. सैनिकों को इससे लड़ने की ताकत मिलती. ये जल्दी खराब भी नहीं होता. एक बार बना लेने के बाद इसे दो-तीन दिन तक खाया जा सकता है.

09/05/2020

Man seeking his true nature becomes desire-less and attains bliss even when alone...

STAY HOME, PRACTICE MEDITATION

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