18/12/2025
Remembering Joseph Stalin, the Great Teacher of the Proletarian Class, on his 147th birth anniversary.....
We are a collective of people with a resolve to study Marxism not only for academic purposes. guide to practice.
Hundred flowers Marxist Study Group-Patna Chapter is a forum of conscientious individuals who believe that marxism-leninism is not only a scientific ideology to study but to drive and propel things into action i.e. We are a collective of people with a resolve to study marxism not for academic purposes but to understand the workings of the material world so that we can change them.
18/12/2025
Remembering Joseph Stalin, the Great Teacher of the Proletarian Class, on his 147th birth anniversary.....
29/11/2025
Remembering Friedrich Engels, the great teacher of the proletariat, on his 205th birth anniversary (28 November)
Nature is the proof of dialectics, and it must be said for modern science that it has furnished this proof with very rich materials increasingly daily, and thus has shown that, in the last resort, Nature works dialectically and not metaphysically; that she does not move in the eternal oneness of a perpetually recurring circle, but goes through a real historical evolution. In this connection, Darwin must be named before all others. He dealt the metaphysical conception of Nature the heaviest blow by his proof that all organic beings, plants, animals, and man himself, are the products of a process of evolution going on through millions of years. But, the naturalists, who have learned to think dialectically, are few and far between, and this conflict of the results of discovery with preconceived modes of thinking, explains the endless confusion now reigning in theoretical natural science, the despair of teachers as well as learners, of authors and readers alike.
- Friedrich Engels (Socialism: Utopian and Scientific)
08/11/2025
हण्ड्रेड फ़्लावर्स मार्क्सिस्ट ग्रुप द्वारा महान अक्टूबर क्रान्ति की 108वीं वर्षगांठ पर 'अक्टूबर' फिल्म का प्रदर्शन एवं अक्टूबर क्रान्ति की प्रासंगिकता पर परिचर्चा का आयोजन
समय : 4 बजे संध्या,
9 नवम्बर, रविवार, 2025
स्थान : शहीद भगतसिंह पुस्तकालय, गोसाईं टोला, पटना
30/08/2025
हण्ड्रेड फ़्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप द्वारा पटना में जाति प्रश्न पर दो दिवसीय अध्ययन शिविर का आयोजन किया गया था। आज शिविर का पहला दिन था। कई नौजवान इसमें शामिल रहे। आज जाति व्यवस्था के उद्गम और विकास पर बातचीत की गयी। प्राचीन और मध्यकालीन भारत में जाति व्यवस्था कैसे विकसित हुई, इसपर विस्तार से चर्चा की गयी। अन्त में परिचर्चा का सत्र भी रखा गया।
25/08/2025
On the occasion of the birth anniversary of the great anti-caste warrior Ayyankali, Hundred Flowers Marxist Study Group invites you to a two-day study camp (30th–31st August) on “The Caste Question”.
*Scan the QR code on the poster or register via the link: https://forms.gle/rJ2YEZvzx6tV2jsG7
*The camp will be held in Patna. Details regarding the venue and session schedule will be announced shortly.
*Lunch and tea will be provided during the camp.
*Participants are required to pay a delegation fee.
24/08/2025
महान जाति-विरोधी योद्धा अय्यंकालि के जन्मदिवस के अवसर पर हण्ड्रेड फ़्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप आपको _'जाति प्रश्न'_ पर दो दिवसीय अध्ययन शिविर (30 अगस्त से 31 अगस्त) के लिए आमंत्रित करता है
*अध्ययन शिविर में रजिस्ट्रेशन के लिए पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करें या https://forms.gle/rJ2YEZvzx6tV2jsG7 पर क्लिक करें।
*शिविर का आयोजन पटना में किया जायेगा। आयोजन स्थल और सत्र के बारे में विस्तृत जानकारी शीघ्र साझा की जायेगी। कार्यक्रम में दोपहर का भोजन और चाय ब्रेक शामिल हैं।
*शिविर के लिए प्रतिभागियों द्वारा सहभागिता शुल्क देय होगा।
*अधिक जानकारी के लिए हम से सम्पर्क करें 7070571498 या पोस्टर में दिये गये क्यूआर कोड को स्कैन करें।
06/08/2025
फ्रेडरिक एंगेल्स के 130वें स्मृतिदिवस (5 अगस्त) के अवसर पर 'हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप' आपको ऑनलाइन परिचर्चा सत्र के लिए आमंत्रित करता है:
"समाजवाद: काल्पनिक तथा वैज्ञानिक"
दिनांक: 6 अगस्त, 2025
समय: शाम 7:30 बजे से
गूगल मीट लिंक के लिए संपर्क करें: 7070571498
05/08/2025
Commemorating the 130th Death Anniversary of Friedrich Engels
'Hundred Flowers Marxist Study Group' invites you to an online discussion on:
"Socialism: Utopian and Scientific"
Date: 06 August, 2025
Time: 7:30 P.M Onwards
For Google Meet Link, Contact us on: 7070571498
27/06/2025
Hundred Flowers Marxist Study Group invites you to an online discussion on
IMPERIALISM & CONFLICT IN THE MIDDLE-EAST
On 28th June 2025 Saturday,
7:30 pm onwards
To join, Contact us - 7070571498
14/06/2025
Remembering Che Guvera on his 97th birth anniversary.......
12/05/2025
कल हण्ड्रेड फ़्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप द्वारा 'मार्क्स एक राजनीतिज्ञ के रूप में' विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस ऑनलाइन सत्र में साथी सनी ने मार्क्स के जीवन के उन पहलुओं पर रोशनी डाली जिनसे ज़्यादातर लोग परिचित नहीं हो पाते। अकादमिक हलकों में तो मार्क्स को एक दार्शनिक व सिद्धांतकार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है लेकिन मार्क्स के लिए उनका दर्शन और उनके सिद्धान्त भी राजनीति से निकलते थे। उनकी पक्षधरता सीधे तौर पर उस मजदूर वर्ग के लिए थी जोकि आने वाले समाज का सबसे क्रान्तिकारी वर्ग था, जिसके पास खोने के लिए अपनी बेड़ियों के सिवा कुछ भी नहीं था। मार्क्स के जीवन परिचय पर बात रखते हुए साथी सनी ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने दौर में चल रही उथल पुथल में भागीदारी कर रहे थे, वे अपने समय के मज़दूर आन्दोलनों में शामिल होते हुए बैरिकैड पर अपने दौर के वर्ग संघर्ष में शामिल थे। मार्क्स के लिए वैज्ञानिक दर्शन की खोज करना या समाज की गति के विज्ञान को समझना कोई अकादमिक कवायद नहीं थी बल्कि वो इस शोषण की व्यवस्था के खात्मे के लिए संघर्षरत थे और इसलिए उन्होंने एक क्रान्तिकारी राजनीतिज्ञ का जीवन चुना।
एक बेहतर समाज और एक बेहतर मनुष्य के निर्माण के लिए ज़रूरी था कि वे इस समाज की गति के नियमों को समझते। उन्होंने सबसे पहले दर्शन के क्षेत्र में काम किया और द्वन्द्वात्मक भौतिकवादी दर्शन की अवधारणा सामने रखी।
समाज विज्ञान के नियमों को समझते हुए उन्होंने ऐतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांत का प्रतिपादन किया और इसी समाज विज्ञान के ज़रिए उन्होंने पूँजीवादी व्यवस्था में शोषण के तरीकों की पड़ताल की। इसके बाद साथी सनी ने मार्क्स के विचारों में आ रही तब्दीली पर बात की, किस प्रकार वे पूॅंजीवादी शोषणकारी व्यवस्था की अपनी समझ को और गहरा करते गये, यह उनकी रचना पूॅंजी में देखने को मिलती है।
इस पूरे दौरान मार्क्स जब यह सब लिख रहे थे तब भी वे न सिर्फ़ मज़दूर आन्दोलनों में शिरकत कर रहें थे, बल्कि उनका नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान उनपर मुकदमे हुए और उन्हें निर्वासन भी झेलना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद मज़दूर वर्ग के क्रान्तिकारी नेता होने के तौर पर वे मज़दूरों को संगठित करने में लगे रहे।
आज बुर्जुआ अकादमिक भी मार्क्स के राजनीतिक अर्थशास्र, दर्शन और समाज विज्ञान के क्षेत्र में किये गये कार्य को एक हद तक स्वीकार करते हैं। परन्तु, बड़े ही शातिराना तरीके से मार्क्स के अवदानों से उसकी क्रान्तिकारी अंतर्वस्तु को हटा देते हैं। तथा मार्क्स को केवल एक दार्शनिक व अर्थशास्त्री तक की पहचान पर अपचयित करने का प्रयास करते हैं। लेकिन, मार्क्स का जीवन ख़ुद इस बात का गवाह है कि मार्क्स के लिए यह सिद्धान्त कोई अमूर्तन चीज़ नहीं थी। मार्क्सवाद कर्मो का मार्गदर्शक सिद्धान्त है। यह मौजूदा यथार्थ को बदलकर नये समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है। मार्क्स की यह प्रसिद्ध उक्ति उन्होंने यूं ही नहीं कही थी कि "दार्शनिकों ने दुनिया की तरह तरह से व्याख्या की है परन्तु सवाल उसे बदलने का है।"
वे इसे मानते थे और उन्होंने अपने विचारों को अपने जीवन पर लागू किया और ताउम्र उसपर चलते रहे। इस सत्र के उपरान्त प्रश्न उत्तर सत्र भी हुआ ।
07/05/2025
मार्क्स की जयंती पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन.....
'मार्क्स एक राजनीतिज्ञ के रूप में'
8 मई, शाम 7:00 बजे से
गूगल मीट लिंक के लिए सम्पर्क करें:
7070571498