18/06/2020
Lines written by Worth reading.
आज सुबह से ही वो बहुत बेचैन थी, ना जाने कैसा अजीब सा महसूस हो रहा था उसे, जैसे कि कुछ ग़लत होने वाला हो। रह रह के अपने एकलौते बेटे की याद सता रही थी, ना जाने क्यों लग रहा था कि उसके साथ कुछ बुरा होने वाला है। माँ का मन ऐसा ही होता है शायद, बच्चे का कहा, अनकहा सब समझती है। इसी उधेड़बुन में यूँही बैठी थी तभी किसी ने आकर चुपके से उसकी आंखें बंद कर दीं। हाथों को छुआ तो उसकी बांछें खिल गयीं। बेटा! तू ही है ना। क्या माँ, तू हमेशा पहचान जाती है। कैसे? अरे कैसे ना पहचानूँ, जन्म दिया है तुझको, जब तू मेरे अंदर था, तब से तेरा एक एक एहसास पता है मुझे। अच्छा हुआ तू आ गया बेटा, मुझे तेरी बहुत फ़िक्र हो रही थी। और मुझको तेरी बहुत याद आ रही थी माँ, इसीलिए मैं दौड़ा चला आया।
ख़ुश होकर उसने बेटे को गले से लगा लिया, इससे पहले की कुछ और पूछती, उसके गले पे पड़े उस दाग को देख कर उसका दिल दहल गया। ये क्या हुआ तुझको? कैसे पड़ा ये दाग, क्या इसमें दर्द है? दर्द था माँ, मगर अब बिल्कुल नहीं, मैं अब ठीक हूं। मगर ये किसने किया? उसे मैं छोडूंगी नहीं। नहीं माँ ग़ुस्सा नहीं करते , मुस्कुराते हुए उसने कहा। ये मैंने ख़ुद को पहुंचाई है, तेरे पास जो आना था, तुझसे दूर हो कर जीवन नीरस था, तो मैंने मौत चुन ली। और वो लोग जो मुझे जीने नहीं देना चाहते थे, देखो आज मेरे लिए कितनी अच्छी बातें कह रहे हैं कि काश उन्होंने मेरा साथ दिया होता।
और फ़िर जैसे वो नींद से जागी, इसीलिये वो इतनी व्याकुल थी। नहीं बेटा, ये तूने क्या कर लिया, क्यों हार गए चंद बेग़ैरत और निर्दयी लोगों से, देख कितने लोग तुझे प्यार करते हैं। कितने दुःखी हैं सब। मैं तो यहीं से तुझे आशीर्वाद दे रही थी, तू क्यों चला आया इतनी जल्दी। नींद नहीं आती थी माँ, अब सोऊंगा चैन से तेरे आँचल में। बस एक बात का डर है, पापा मुझे ठीक से भेज तो पाएंगे ना। हां! भेज ही देंगे, उन्हें तो बचपन से पता है कि तुम्हारा सुश तुमसे ज़्यादा प्यार करता है।
नहीं बेटा ये कोई राह नहीं थी। मुझे पता है माँ, पर अब सचमुच मेरी कोई और चाह नहीं थी। देखो ना वो चाहते थे मेरी हस्ती मिटाना, अब अपनी हस्ती बचाने को परेशान हैं। मुझे सोने दे माँ, इस गोद के लिए बहुत तरसा हूं। मुझे सुला दे माँ!
गोद में वापिस आये अपने उस बच्चे को देख कर वो समझ नहीं पा रही थी कि हंसे या रोये, वो तो उसी शांति से सोया था जैसे तब सोया था जब वो उस दुनिया में पहली बार उसकी जान बनकर आया था। मगर माँ का दिल तो यही पूछ रहा था आखिर क्या ग़लत किया था उसने जो ज़रा सा जीवन उसे कोई ना दे सका। अब आगे वो ये ग़लती नहीं होने देगी। लड़ पड़ेगी ईश्वर से मगर वापिस इस निर्दयी जहां में उसे ना जाने देगी। कहीं जाने ना देगी।
वहां धरती पर कांपते हाथों से अपने बेटे को मुखाग्नि दी कर वो बेचारा पिता सर पकड़ कर बैठा था और दूर कहीं उसके असमय स्वर्गवासी हुए बेटे का पसंदीदा गाना चल रहा था…
“कोई ढूंढने भी आये, तो हमें ना ढूंढ पाए।
तू मुझे कहीं छुपा दे, मैं तुझे कहीं छुपा दूँ!”
-विघा
आज सुबह से ही वो बहुत बेचैन थी, ना जाने कैसा अजीब सा महसूस हो रहा था उसे, जैसे कि कुछ ग़लत होने वाला हो। रह रह के अपने एक.....