Amardeep Jha Gautam

Amardeep Jha Gautam

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Physics-Teacher, Lecturer, Philosopher, Poet, Drama-writer, Social-worker, Political-analyst, Spirit

Photos from Amardeep Jha Gautam's post 09/12/2025

आर्थिक-बदहाली के कारण बंद होने के कगार पर एलिट संस्थान.

कोरोना-काल के बाद विगत कुछ वर्षों से कोचिंग-संस्थानों को बहुत तरह के संघर्षों से गुजरना पड़ रहा है और सरकार द्वारा प्रतियोगी-परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाले कोचिंग को सुविधा मुहैया का आश्वासन दिया जाता रहा, पर अभी तक किसी भी प्रकार की सहायता नहीं दी जा सकी। इसका परिणाम यह है कि बहुत-सारे कोचिंग-संस्थान बंद होने की स्थिति में आ गये हैं।

कोचिंग एसोसिएशन ऑफ बिहार के सदस्यों द्वारा लिखित आवेदन द्वारा बहुत बार प्रतियोगी-परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाले संस्थानों को व्यापार-ऋण, सुरक्षा और विकास के लिये आधारभूत-संरचनाओं के लिये आग्रह किया जाता रहा है, लेकिन इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाये गये हैं।

पटना के बहुत सारे शिक्षक और संस्थानों के संचालकों के लिये 2023 के बाद स्थिति और भी भयावह हुई, जब सरकार ने सरकारी कोचिंग संस्थानों को खोल दिया, जिसका सीधा असर बच्चों और अभिभावकों के मनोवैज्ञानिक सोच पर पड़ा।
समाज के शिक्षक खुद को अकेला, असहाय और गुंडे-मवालियों से अपनी इज्जत बचाकर संस्थान को चला रहे हैं। कुछ डरकर भाग रहे हैं और कुछ आत्महत्या भी कर रहे हैं, पर इसकी चर्चा सरकार या समाज के धरातल पर मुखर नहीं हो रही है।

04/11/2025

ELITE Crash-course and Test-Series.

~ Revision-session.
~ Doubt-clearing Sessions.
~ Enhancement of problem-solving skills.
~ Updated Test-Series.

Started from 18th November 2025.

Now, Registration Open...
Help-Line : 9123225217.


20/10/2025

अरे, इस छोटे-से दीपक को लेकर कहाँ चल दिये ?
यह मीलों पसरा घटाटोप-अँधेरा और तुम्हारा यह छोटा दीपक...
इसकी रौशनी तो दो कदम में ही खत्म हो जायेगी,तुम इतनी दूरी कैसे जा पाओगे ?

मेरे सफर के लिये इतनी रौशनी काफी है।
अपने हरेक कदम के लिये इतनी रौशनी मिलती रही तो मैं इस मीलों अन्धेरों को भी तय कर लूँगा।
मेरा एक-एक कदम मेरी मंजिल को मेरे नजदीक लाता रहेगा और मैं इसी दीपक से उस तक पहुँच जाऊँगा।

अँधेरा बहुत घना हो तो भी छोटी-सी किरण पर ही ध्यान लगाकर रौशनी पर किया विश्वास उजाले तक पहुँचा सकता है, भले ही अँधेरा कितना भी पुराना, गहरा या दूर-दूर तक फैला हो।

हम जितनी तत्परता से श्रेष्ठ की कल्पना करते हैं, हमारे अंदर बैठा श्रेष्ठता का बीज टूटने लगता है,अपने विशाल वृक्ष को जन्म देने को उद्द्यत!

तमसो मा ज्योतिर्गमय की असंख्य प्रार्थनाओं संग, आपको और आपके पूरे-परिवार को दीपावली की अशेष-शुभकामनायें।

।। बधाई और मंगल-कामनायें।।
अमरदीप झा गौतम

09/10/2025

पूरी ताकत से कोशिश करो कि...जीत जाओ।
और अगर... हार लगने लगे... तो... रुको!

हल सोचो...फिर से लगो, थोड़ा और भिड़ो।
लड़ते रहो... अवरोधों से आगे का साहस रखो।

विश्वास रखो... जीतोगे।
और हाँ...थोड़े बहरे हो जाओ।

बैठो किसी कोने में, मन करे तो अकेले रो लो।

पर, खुद को बचा लेना मार लेने से।
तुम्हारे वजूद की परवाह तुमको देखनी होगी।

मरना नहीं...
तुमको जीतना भी है और जीत का जश्न भी मनाना है।

~ अमरदीप झा गौतम.

16/09/2025

भले ही आप किसी भी कार्यधर्मिता या प्रोफ़ेसन में हों... समय आयेगा और आपका झुकाव भगवत् के साथ होने लगता है, ब्राह्मण कुल में जन्म लेना कोई मज़ाक का विषय थोड़े ही है...

यह कोई मौका या चमत्कार नहीं है, पर जीव की आध्यात्मिक-यात्रा का सतत् प्रवाह है।

जीवन के अनेकानेक-संघर्ष, यात्रा से जुड़े-अनुभव, यश-अपयश की वायवीय-कल्पनायें और सांसारिक-उपादानों से अवलंबित हर्ष और शोक... इसको निहारता साक्षी-भाव !

आवश्यकता है, इस बात को ठीक-ठीक से समझ लेना और चिंतनशीलता के साथ जीना।

सिरमौर हैं आप,
पर इसकी घोषणा... प्रकृति आपके प्रभाव से दे।
प्रार्थना है कि आपके संसर्ग के जनमानस आपसे शक्ति और धर्म का आशीष लें तो आप स्तुत्य हो जायेंगे, क्योंकि अलग-अलग वर्ण/जाति के मनुष्य भी ईश्वर-प्राप्ति के लिये ही बार-बार यहाँ आ रहे हैं और आत्म-अनुभूति और प्रकाश से ब्राहमणत्व को प्राप्त हो रहे हैं।

।। आत्मनो मोक्षार्थ जगद्विताय च ।।
अमरदीप झा गौतम

(छायाचित्र प्रिय भाई डॉ. कुँवर अरुणोदय जी के संग विद्यालय कृष्णा-निकेतन के प्रांगण का)

18/08/2025

मैं अब चुप हूँ...
कुछ ऐसे कि मैं सिर्फ देखना चाहता हूँ !

समय के साथ बदलते लोगों को,
जज्बातों को रौंदते मंसूबों को।
आँखों को नहीं सूझते दर्द को...बिछड़न को।
अकेले लड़ते जिंदगी को !

खोते अधिकार को, खत्म होते विश्वास को।
समर्पण के उड़ते मज़ाक को।
मरती साँसों को...झुकते मनोबल को।
हारते दुनियाँ की लड़ाई को !

चलो...तेरे ही सहारे जाना, यात्रा के अनोखे-रफ्तार को !
अब ना कोई गम बचा है और ना कोई उम्मीद।
समझ लिया, सब जान लिया...बदलते रवायतों को।
आशा की डोर टूटे कभी, कोई शिकायत नहीं अब !

मैं अब चुप हूँ...
~अमरदीप झा गौतम

Photos from Amardeep Jha Gautam's post 07/08/2025

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20/07/2025

श्राद्ध खाने नहीं आऊंगा...

"अरे ! भाई बुढापे का कोई इलाज नहीं होता । अस्सी पार चुके हैं । अब बस सेवा कीजिये ।" डाक्टर पिताजी को देखते हुए बोले ।
"डाक्टर साहब ! कोई तो तरीका होगा ? साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है ।"
"शंकर बाबू ! मैं अपनी तरफ से दुआ ही कर सकता हूँ । बस आप इन्हें खुश रखिये । इससे बेहतर और कोई दवा नहीं है और इन्हें लिक्विड पिलाते रहिये जो इन्हें पसंद है ।"
डाक्टर अपना बैग सम्हालते हुए मुस्कुराया और बाहर निकल गया।

शंकर पिताजी को लेकर बहुत चिंतित था । उसे लगता ही नहीं था कि पिता के बिना भी कोई जीवन हो सकता है । उसे अपने बचपन और जवानी के सारे दिन याद आ रहे थे । कैसे पिता हर रोज कुछ न कुछ लेकर ही घर घुसते थे!

बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। ऐसा लगता था जैसे आसमान भी रो रहा हो । शंकर ने खुद को किसी तरह समेटा और पत्नी से बोला -
"सुशीला ! आज सबके लिए मूंग दाल के पकौड़े , हरी चटनी बनाओ । मैं बाहर से जलेबी लेकर आता हूँ ।"
पत्नी ने दाल पहले ही भिगो रखी थी। वह भी अपने काम में लग गई । कुछ ही देर में रसोई से खुशबू आने लगी पकौड़ों की। शंकर भी जलेबियाँ ले आया था । वह जलेबी रसोई में रख पिता के पास बैठ गया ।‌उनका हाथ अपने हाथ में लिया और उन्हें निहारते हुए बोला -
"बाबा ! आज आपकी पसंद की चीज लाया हूँ . थोड़ी जलेबी खायेंगे ।"
पिता ने आँखे झपकाईं और हल्का सा मुस्कुरा दिए । वह अस्फुट आवाज में बोले -
"पकौड़े बन रहे हैं क्या ?"
"हाँ, बाबा ! आपकी पसंद की हर चीज अब मेरी भी पसंद है . अरे! सुषमा जरा पकौड़े और जलेबी तो लाओ ।" शंकर ने आवाज लगाईं ।
"लीजिये बाबू जी एक और । " उसने पकौड़ा हाथ में देते हुए कहा।
"बस ....अब पूरा हो गया । पेट भर गया । जरा सी जलेबी दे ।" पिता बोले...

शंकर ने जलेबी का एक टुकड़ा हाथ में लेकर मुँह में डाल दिया। पिता उसे प्यार से देखते रहे।
"शंकर ! सदा खुश रहो बेटा। मेरा दाना पानी अब पूरा हुआ ।" पिता बोले।

"बाबा ! आपको तो सेंचुरी लगानी है । आप मेरे तेंदुलकर हो ।" आँखों में आंसू बहने लगे थे।
वह मुस्कुराए और बोले - "अगला मैच खेलना है । तेरा पोता बनकर आऊंगा , तब खूब खाऊंगा बेटा ।"

पिता उसे देखते रहे । शंकर ने प्लेट उठाकर एक तरफ रख दी । मगर पिता उसे लगातार देखे जा रहे थे ।आँख भी नहीं झपक रही थी ।
शंकर समझ गया कि यात्रा पूर्ण हुई !

तभी उसे ख्याल आया , पिता कहा करते थे -
"श्राद्ध खाने नहीं आऊंगा कौआ बनकर , जो खिलाना है अभी खिला दे ।"

।। प्रणाम ।।
अमरदीप झा गौतम.

11/07/2025

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर एलिट संस्थान ने special scholarship की घोषणा की।
ज्ञानोदय-योजना के अंतर्गत 50 students को विशेष scholarship दी जायेगी, जो उनके बोर्ड-रिजल्ट पर आधारित होगा।
इसके लिये नामांकन 14 जुलाई से प्रारंभ होगा।

अगर पढ़ने की चाह है,
खुद को प्रमाणित करने की अगर जिद है तो हम आपके साथ हैं।
बिना किसी हिचक के खुलकर हमसे बात कीजिये, हमें आपके चेहरे पर कामयाबी की मुस्कान चाहिये।


ELITE Institute
ELITE Institute, Patna

09/07/2025

डर मत, आगे बढ़ !
कोशिश कर... हल निकलेगा।
आज नहीं तो कल निकलेगा।

क्यों कपकपाता खुद को !
गर अंधेरा है सामने, खोज रौशनी को अंदर।
चलने से ही चीजें बदलती,
तुम्हारा खुद का होना होता है।
ऐसे ही तुम ढलते... तुम चमकते हो।

कौन है यहां, जिसने ठोकरें नहीं खाई !
मान_अपमान, यश_अपयश...सब बात है हवाई ।
छोड़ो खुद को सकुचाने, लजाने या छिपाने से।
मान लो सब... और जी लो सब।

आगे बढ़, डर मत गिरने से !
गिरना हार नहीं, कोशिश की गवाही है।
उठकर तनकर खड़े हो जाओ सामने हर संकट के,
जोर का धक्का मारो... जो जागेगा, वही तुम हो।

Wisdom@amardeep_jha_gautam

Photos from Amardeep Jha Gautam's post 04/07/2025

हमें इतना मान-सम्मान और प्यार देने के लिये आप सभी लोगों का धन्यवाद।
कार्यक्रम के सफल-आयोजन के लिये अविनाश बंधु जी को बधाई और शुभकामनायें...

।। आभार ।।
अमरदीप झा गौतम.

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